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साक्षी मलिक का रोहतक से रियो तक का सफ़र जिसने बदल दी उनकी ज़िंदगी

भारतीय महिला पहलवान की मैनेजर ने बताया कि कैसे साक्षी को रियो 2016 में ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद मिली सफलता, भविष्य की उम्मीदों और टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफ़ाई से जूझने का भी किया ज़िक्र।

लेखक सुहासिनी मित्रा ·

रियो ओलंपिक 2016 में साक्षी मलिक भारत की पहली महिला पहलवान बनीं थीं जिन्होंने ओलंपिक में देश के लिए पदक हासिल किया। इस आर्टिकल की लेखक हैं सुहासिनी मित्रा जो उस समय साक्षी की मैनेजर रहीं, और उसके बाद भी साक्षी के साथ काफ़ी वक़्त बिताया। वह सफलताओं से लेकर साक्षी की शादी की भी साक्षी बनीं। सुहासिनी ने अपने अल्फ़ाज़ों में साक्षी मलिक की ज़िंदगी के बारे में कुछ इस तरह लिखा है।

17 अगस्त 2016 की देर रात को शांत शहरों में शुमार रोहतक, जो देश की राजधानी दिल्ली से 66 किमी दूर है, अचानक सुदेश मलिक की जश्न भरी आवाज़ों से गूंज गया था। क्योंकि सरकारी नौकरी करने वाले एक पिता की बेटी ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया था और वह भी उस प्रतियोगिता में जिसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ और सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा माना जाता है। ये एक ऐसा सपना था जो साक्षी मलिक की ज़िंदगी का सबसे बड़ा था, और वह पूरा हो चुका था। साक्षी भारतीय इतिहास की पहली महिला बन गईं थीं जिसने कुश्ती में देश के लिए ओलंपिक पदक हासिल किया था।

2016 रियो ओलंपिक में साक्षी ने किर्गिस्तान की ऐसुलू तिनीबेकोवा को रेपेचेज राउंड में 58 किग्रा वर्ग में शिकस्त देकर कांस्य पदक जीत लिया था। उस रात की अगली सुबह देश के दूसरे शहरों की तरह बेंगलुरु भी देशभक्ति से सराबोर था, और हर तरफ़ साक्षी की जीत की ख़बरें सुर्ख़ियां बटोर रहीं थीं। दूसरी तरफ़ मैं जब सो कर उठी तो मेरे मोबाइल पर 21 मिस्ड कॉल्स थीं- मेरे बॉस की, पत्रकारों की, और कई अनजान नंबर, आख़िरकार हमारी एक एथलीट ने 2016 ओलंपिक में पदक का सूखा जो ख़त्म कर दिया था।

रातों रात साक्षी की सनसनी

रातों रात अब सभी को साक्षी मलिक के ऊपर लेख चाहिए था, हर पत्रकार, टीवी शो, इवेंट एजेंसी। रातों रात हर मर्द साक्षी में अपनी बहन ढूंढ रहे थे, तो कोई साक्षी में अपनी बेटी को तलाश रहा था, आख़िरकार एक बेटी ने पदक पर निशाना जो लगा दिया था।

एक हफ़्ते बाद जब साक्षी रियो के कैरियोका एरेना में भारतीय तिरंगे में नज़र आ रहीं थीं, उस समय मैं दिल्ली से रोहतक के लिए राष्ट्रीय सड़कमार्ग से निकल रही थी। हमारी गाड़ी अब साक्षी के घर पहुंचने ही वाली थी कि मेरी नज़र एक बड़े विज्ञापण बोर्ड पर पड़ी जहां साक्षी मलिक दातों तले पदक दबाए हुईं थीं, और उस पोस्टर के बग़ल में ही था साक्षी का ख़ूबसूरत बंगला। जब दरवाज़ा खुला तो मैंने देखा कि कई कुर्सियां लगी हुईं हैं, और मलिक के घर के अंदर लोगों का हुजूम लगा हुआ था।

यहां साक्षी मलिक का मशहूर टीवी शो के लिए बड़ा शूट होने वाला था, जो भारतीय पत्रकारिता के दिग्गज नामों में शुमार शेखर गुप्ता का कार्यक्रम था। हमने इस शूट के लिए मेकअप आर्टिस्ट और स्टाइलिस्ट को भी बुलाया था, क्योंकि हम चाहते थे कि साक्षी एक ऐसी एथलीट दिखें जिन्हें देखकर यही लगे कि वह भी दूसरी लड़कियों की ही तरह हैं। हम जब उन्हें तैयार कर रहे थे, तो मैं कुछ कर नहीं सकी लेकिन ये देखा कि कई सॉफ़्ट खिलौनों से ओलंपिक का लोगो झलकता जा रहा था, मेडल के बीच से भी, उनकी पारिवारिक तस्वीरों में भी झलक रहा था।

“ओलंपिक पदक जीतना मेरी चाहत में शुमार हो चुका था, मैं चाहती थी कि मेरा लक्ष्य हर वक़्त मेरे सामने हो, ताकि मुझे ये अहसास रहे कि हर हाल में मुझे ये हासिल करना ही है। और अब भी मैं इसे नहीं हटाउंगी, क्योंकि मेरा लक्ष्य है कि मैं स्वर्ण पदक जीतूं।” :साक्षी मलिक

एक ऐसी लड़की जिसने कुश्ती इसलिए चुनी ताकि वह भी हवाई जहाज़ पर उड़ सके, अब वह उस ख्वाब से कहीं आगे आ चुकी हैं।

“मैं हमेशा हवाई जहाज़ में बैठना चाहती थी और घूमना चाहती थी इसलिए मैंने कुश्ती में करियर बनाया था। लेकिन जब मैंने पहली बार पदक जीता, तभी मैंने ये संकल्प ले लिया था कि ये खेल मेरे लिए सबकुछ है।”

12 सालों की तपस्या ने दिलाया पदक

साक्षी मलिक ने पदक पाने के लिए क़रीब 12 सालों का इंतज़ार किया जिसे हम तपस्या भी कह सकते हैं। साक्षी के स्कूल और कॉलेजों का ज़्यादातर समय तो बस अखाड़े से स्कूल या कॉलेज और फिर स्कूल से अखाड़े तक ही सीमित रहता था। मुझे ताज्जुब होता है और मैं सोचती हूं कि कहीं साक्षी ने अपनी जवानी खो तो नहीं दी। ‘’मुझे बिल्कुल भी पछतावा नहीं है, इसे (कुश्ती) मैंने ही पसंद किया और चुना और यही है जो मुझे ख़ुश रखती है। मैंने इसकी वजह से कुछ ऐसा नहीं है जो खोया हो, बल्कि सिर्फ़ पाया ही पाया है। देखिए आज मेरे पास ओलंपिक पदक भी है।‘’ साक्षी ने ये बातें कहीं

फ़रवरी 2017 में साक्षी ने अपने साथी पहलवान सत्यव्रत कादियान से शादी रचाई, अर्जुना अवॉर्डी के पुत्र सत्यव्रत और साक्षी ने कई सालों तक एक दूसरे के साथ समय भी बिताया था। ‘’साक्षी एक बेहतरीन इंसान हैं, और वह पहलवान भी हैं लिहाज़ा हमारा रिश्ता और भी ख़ास है।‘’ : सत्यव्रत ने कहा

साक्षी और सत्यव्रत की शादी रोहतक में ही हुई थी जहां 1000 से ज़्यादा मेहमान आए थे और 40 से ज़्यादा तरीकों का शाकाहारी व्यंजन था, लेकिन सबसे ख़ास ये था कि मीडिया के लिए एक ख़ास जगह बनाई गई थी और सभी रीति रिवाज़ों को कैमरे में क़ैद किया जा रहा था। शादी के बाद साक्षी ने कुश्ती पर और भी ध्यान दिया है और वह लगातार मेहनत करती हैं।

वापसी की राह पर

सारी मेहनत और कोशिशों के बावजूद अब 62 किग्रा वर्ग में साक्षी मलिक को ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई करना काफ़ी मुश्किल साबित हो रहा है। वर्ल्ड चैंपियनशिप 2019 के बाद तो साक्षी पर दबाव और भी बढ़ गया है। ‘’लगातार एक ही तरह का स्तर बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन मैं अपनी कमज़ोरियों पर मेहनत कर रही हूं ताकि फिर तैयार हो सकूं और ओलंपिक का हिस्सा बन सकूं। दो क्वालिफ़ायर्स (मार्च और अप्रैल) अभी होने बाक़ी हैं, और मुझे विश्वास है कि मैं एक बार फिर ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई कर जाउंगी।‘’ साक्षी ने एक प्रतिष्ठित दैनिक अख़बार के साथ ये बातें साझा की।

हार न मानने का जज़्बा रखने वाली साक्षी ने साउथ एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा जमाया है और एक बार फिर ओलंपिक की वापसी की राह पर मौजूद हैं।

इतिहास रचने से लेकर अब कोशिशों के सफ़र की कहानी हैं साक्षी मलिक, साक्षी की कहानी परियों की कहानी की तरह नहीं है। लेकिन उनके पदक जीतने की कहानी साबित करती है कि हरियाणा की इस बेटी में जज़्बे की कमी नहीं है और फ़र्श से भी वह अर्श तक पहुंचने का रास्ता उन्हें मालूम है।