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जानिए क्यों हिमा दास भारतीयों की सबसे चहेती एथलीटों में से एक हैं !

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण करने के दो साल के अंदर ही हिमा दास ने कई पदक जीते और कुछ ऐतिहासिक पलों को भी देखा, जिससे उन्होंने भारतीय फैंस के दिलों में जगह बना ली।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

हिमा दास (Hima Das) के बारे में तब किसी को भी नहीं पता था, जब 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय एथलेटिक्स दल में इस खिलाड़ी को अप्रत्याशित रूप से चुना गया था।

तत्कालीन 18 वर्षीय भारतीय स्प्रिंटर हमेशा से फुटबॉल खेलना चाहती थीं, लेकिन असम के चावल के खेतों में दौड़ते समय उनकी गति ने एक स्कूल कोच को आश्वस्त किया कि उन्हें एथलेटिक्स में कोशिश करनी चाहिए।

और यही एक करियर बनाने वाला निर्णय साबित हुआ। हिमा दास ने अपने बेल्ट के तहत बमुश्किल ही किसी से ट्रेनिंग ली और, स्टेट मीट में 100 मीटर का कांस्य जीता और बाद में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाई।

U-18 नेशनल्स में शानदार प्रदर्शन करने के बाद, 2017 में एशियाई और विश्व युवा चैंपियनशिप में  वो कांस्य से चूक गईं। लेकिन एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (Athletics Federation of India) को सीनियर नेशनल कैंप के लिए खुद का साबित करने में सफल रहीं।

100 और 200 मीटर स्प्रिंट में सभी सफलता हासिल करने के बावजूद, कोचों ने अंतरराष्ट्रीय सफलता में बेहतर प्रदर्शन के लिए हिमा को 400 मीटर की रेस में दौड़ाने का फैसला किया। ये एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ।

मार्च 2018 में पटियाला में फेडरेशन कप में हिमा दास ने आराम से 51.97 सेकंड में 400 मीटर का स्वर्ण पदक जीता, जिसने उस वर्ष के बाद होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए 52 सेकंड के क्वालिफाइंग मार्क को तोड़ चुका था।

असम के सुदूर गांव की लड़की को मूल रूप से 2018 के मध्य में एशियाई खेलों के लिए नेशनल कैंप में चुना गया था, लेकिन उन्होंने अप्रैल में ही राष्ट्रमंडल खेलों के लिए नेशनल टीम में तेजी से कदम बढ़ा दिया।

हिमा दास ने भारत के लिए अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में किया था।

हालांकि वो अपने अंतरराष्ट्रीय पदार्पण पर पदक नहीं जीत सकीं, लेकिन हिमा दास ने गोल्ड कोस्ट में आओजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों में अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय में सुधार की और 400 मीटर के फाइनल में जगह बनाई।

राष्ट्रमंडल खेलों में 400 मीटर में छठे स्थान पर रहने के बाद हिमा दास की उपलब्धियों में एक आकर्षक बदलाव देखने को मिला।

IAAF वर्ल्ड U20 चैंपियनशिप में गोल्ड

2018 में 12 जुलाई का वो दिन है जब पूरी दुनिया ने पहली बार भारत के इस स्प्रिंटर की क्षमता देखी। भारतीय फैंस को एक विश्वस्तरीय ट्रैक-एंड-फील्ड स्टार मिल गई।

फ़िनलैंड के ताम्पेरे में इतिहास रचा जा चुका था, जब आईएएएफ विश्व U20 चैंपियनशिप में 400 मीटर में हेमा दास ने 51.46 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता था।

लेन फोर में दौड़ते हुए भारतीय धावक रोमानियाई एंड्रिया मिकोलस (Andrea Miklos) से पीछे चल रही थीं, लेकिन अपने प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ने के लिए दिमा दास ने अपनी गति को बढ़ाई और सबसे आगे हो गईं।

जिसके बाद वो विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप, जूनियर या सीनियर में किसी भी ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहले भारतीय एथलीट बन गईं और जेवेलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) के बाद स्वर्ण जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय बनीं, जिन्होंने 2016 में ऐसा कारनामा किया था।

इस उपलब्धि की वजह से उन्हें कफी प्रशंसा मिली, अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) जैसे बॉलीवुड फिल्म स्टार ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए सोशल मीडिया पर आए। हिमा दास को 'ढींग एक्सप्रेस' निकनेम मिला।

भारतीय ट्रैक एंड फील्ड की महानिदेशक पीटी उषा ने कहा, "हिमा ने फिनलैंड में दौड़ के दौरान उड़ान भरी और फिनलैंड में गोल्ड जीतना मेरे जीवन के सबसे अविश्वसनीय क्षणों में से एक था।"

पूर्व धावक और ओलंपियन ने कहा कि, “इस उम्र में उन्होंने बहुत साहस और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया है। मैंने इस इवेंट के दौरान घबराहट का कोई संकेत नहीं देखा।"

असम राज्य कीं स्प्रिंटर को जल्द ही उनकी नौकरशाही की प्रतिष्ठा से जोड़ा जाएगा।

ट्रिपल एशियन गेम्स की पदक विजेता और हिमा दास के रिकॉर्ड

जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में हिमा दास से उम्मीदें अधिक थीं और भारतीय धावक ने निराश नहीं होने दिया।

400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में फाइनल में पहुंचने के लिए हीट में 51 सेकंड का एक नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया, जहां उन्होंने फिर से तूफान की तरह रेस दौड़ी।

हिमा दास ने अपना 400 मीटर का नेशलन रिकॉर्ड तोड़ दिया और 50.79 सेकंड के रजत पदक अपने नाम कर लिया।

एशियाई खेलों में उन्हें सबसे बड़ी खुशी मिली, जब हिमा दास ने 4x100 मीटर महिला रिले में एमआर पूवम्मा (MR Poovamma), सरिता गायकवाड़ (Sarita Gaikwad) और वीके विस्मया (VK Vismaya) के साथ स्वर्ण जीता। आगे चलकर उन्होंने इतिहास रच दिया, जब उन्होंने 4x100 मीटर मिश्रित रिले का में मोहम्मद अनस (Muhammed Anas), अरोकिया राजीव (Arokia Rajiv) और एमआर पूवम्मा के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली एथलीट बनीं।

"मैं तनाव और घबराहट को जाहिर नहीं होने देती लेकिन मुझे पता है कि दौड़ से पहले मेरे दिल की धड़कन कितनी तेज़ होती है।"

उस समय के कारनामों ने हिमा दास को देश का फवरेट एथलीट बना दिया और भारत सरकार ने उन्हें उस साल अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।

2019 में सुनहरा महीना

इस तरह के एक शानदार अंतरराष्ट्रीय पदार्पण वर्ष के बाद, हिमा दास को टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना था।

उस लक्ष्य का पीछा करते हुए हिमा की 2019 में अच्छी शुरूआत नहीं हुई थी। पिछले साल अप्रैल में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिमा दास को 400 मीटर के हीट के दौरान पीठ की चोट बाहर होना पड़ा।

इसकी वजह से वो करीब चार महीने तक फील्ड से बाहर रहीं। लेकिन ढींग एक्सप्रेस कभी भी ज्यादा समय तक सुर्खियों से दूर रहने वाली एथलीट नहीं हैं।

जुलाई 2019 में हिमा दास ने एक महीने से भी कम समय में पांच 200 मीटर के स्वर्ण पदक के साथ वापसी की।

पांच दिन बाद ही वो पहली बार पोलैंड में पॉज़्नान एथलेटिक्स ग्रां प्री में पहुंची और कुट्नो एथलेटिक्स मीट में एक और स्वर्ण जीतकर अपना फॉर्म जारी रखा।

उसके ठीक एक हफ्ते बाद हिमा दास ने चेक गणराज्य में कल्दनो एथलेटिक्स मीट में लगातार तीसरा स्वर्ण जीता और टाबर एथलेटिक्स मीट में अपनी झोली में चौथा स्वर्ण पदक जीता।

20 दिनों में चोट से उबरकर हिमा दास ने मेज़िनारोडनी एटलेटिकि मितिंक में पाँचवाँ स्वर्ण पदक जीता।

यूरोपियन स्पर्धाओं में उच्च श्रेणी की प्रतिस्पर्धा नहीं देखी जाती है, लेकिन चोट से वापसी करते हुए हिमा दास ने आत्मविश्वास और विश्वास दिया कि वह टोक्यो में भारत के लिए पदक की मजबूत उम्मीदवार बनने जा रही हैं।

टोक्यो ओलंपिक को साल 2021 तक स्थगित कर दिया गया है। ऐसे में हिमा दास के पास अब अपने ओलंपिक के लिए तैयार होने और क्वालिफिकेशन हासिल करने के लिए प्रयाप्त समय है।

पिछले साल सितंबर में पीठ में चोट लगने के बाद एक रिहैब में आकर हिमा धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं, जबकि फैंस उनके जल्दी ठीक हो जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।