ओलंपियन की ज़िंदगी पर आधारित कुछ ऐसी किताबें जो आपको आइसोलेशन के दौरान पढ़ना चाहिए 

अधिकांश लोगों और एथलीटों ने कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी से लड़ने के लिए अलग-थलग तरीकों को अपनाया है, भारतीय ओलंपियनों पर कुछ किताबें हैं, जब वो भी इस महामारी को झेल रहे हैं।

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के साथ जहां तक काम करने की बात है, तो टोक्यो 2020 की तैयारियों में तेजी आई है, वर्तमान में खेल की दुनिया में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा है।

कोरोना वायरस प्रकोप के बाद हाल के प्रतिबंधों ने दुनिया भर के एथलीटों को आइसोलेट (घर में ही रहना) करने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन वास्तव में क्या वो अपने रोज के प्रशिक्षण व्यवस्थाओं के साथ समझौता करेंगे?

ओलंपिक चैनल भारत की ओलंपिक विजय पर कुछ पुस्तकों को प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे टोक्यो से जुड़े एथलीट प्रेरणा ले सकते हैं।

अ शॉट एट हिस्ट्री: माय ऑब्सेसिव जर्नी टू ओलंपिक गोल्ड एंड बियॉन्ड

अ शॉट एट हिस्ट्री एक ऐसी कहानी है जो भारत के अब तक के पहले और एकमात्र व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) की यात्रा को दर्शाती है। पुस्तक में अभिनव बिंद्रा के इतिहास-बनाने वाले करियर के बारे में बताया गया है, जिसमें ये भी बताया गया है कि वो ओलंपिक स्वर्ण के अलावा विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। 2004 में हार्टब्रेक से उबरने वाली एक कहानी, जो दर्शाती है, 2004 एथेंस ओलंपिक में एक घटना के बाद वह कैसे स्वर्ण पदक से वंचित रह गए थे और उसके बाद वो कैसे एक महान शूटर बने।

एथेंस में मिली हार ने अभिनव बिंद्रा को एक शूटर के रूप में बदल दिया, जो 2004 के ओलंपिक में दिल टूटने के बाद बहुत दुखद था। खुद रोहित बृजनाथ और अभिनव बिंद्रा द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में यह भी बताया गया है कि कैसे वह एक वैज्ञानिक बन गए, जो कभी भी किसी भी प्रयोग के लिए तैयार थे, जिसमें उनका खुद का दिमाग भी शामिल था। उन्होंने कहा, कड़ी मेहनत के माध्यम से उन्होंने बीजिंग में स्वर्ण और सर्वश्रेष्ठता हासिल की थी। इस बुक में इस विषय को ही ए शॉट एट हिस्ट्री में लिखी गई है।

दीपा कर्माकर: द स्मॉल वंडर

जुनून, कठिन परिश्रम और समर्पण की एक कहानी, दीपा करमाकर (Dipa Karmakar): द स्मॉल वंडर, ओलंपिक में जिमनास्टिक में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिला की कहानी बताती है। 2019 में एकामरा स्पोर्ट्स लिटरेचर अवार्ड्स में वर्ष की जीवनी के विजेता, बिश्वेश्वर नंदी, दिग्विजय सिंह देव और विमल मोहन द्वारा लिखित पुस्तक दीपा करमाकर के जीवन का एक ज्वलंत विवरण है।

किताब में रियो 2016 में ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक बच्चे के रूप में उनकी यात्रा को दर्शाया गया है, जहां उन्होंने प्रोडुनोवा इवेंट में भाग लिया। इस किताब में ये भी बताया गया है कि कैसे रियो ओलंपिक में हासिल किया गया उनके द्वारा चौथे स्थान ने देश में खेल के लिए एक निर्णायक क्षण बन दिया। त्रिपुरा से देशवासियों के दिलों तक की उनकी यात्रा सभी बाधाओं के खिलाफ लड़ाई के बाद, प्रेरणा और दृढ़ संकल्प का नतीजा है। उनके संघर्ष की वजह से उन्हें भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

माय ओलंपिक जर्नी:  50 ऑफ इंडियाज लीडिंग स्पोर्ट्सपरसन ऑन द बिगेस्ट टेस्ट ऑफ देअर करियर

दिग्विजय सिंह देव और अमित बोस द्वारा लिखित, यह पुस्तक पचास प्रमुख भारतीय ओलंपियन की कहानियों को दर्शाती है। इसे पढ़ने के बाद आपको पता चलेगा कि देश में कैसे तैयार हुए बेहतरीन खिलाड़ी। इस पुस्तक के कुछ भागों में सुशील कुमार (Suhsil Kumar), लिएंडर पेस (Leander Paes), कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari), अभिनव बिंद्रा और बलबीर सिंह (Balbir Singh) शामिल हैं।

भारतीय खेल के पायनियर जैसे मिल्खा सिंह (Milkha Singh), पी.टी. उषा (P T Usha) और अंजलि भागवत (Anjali Bhagwat) भी इस किताब के पन्नों में अपनी आशाओं, अंधविश्वासों और चुनौतियों का खुलासा करते नज़र आ रहे हैं। हालांकि इन कहानियों में से कुछ में आपको हंसी भी आएगी तो, दूसरी ओर कुछ एथलीटों के संघर्षों को जानकर आपकी आँखें नम भी हो जाएंगी, जिसमें से कुछ एथलीट मुकाबला करते हुए अपनी संघर्षपूर्ण जिंदगी से बाहर आ गए हैं।

ड्रीम्स ऑफ अ बिलियन: इंडिया एंड द ओलंपिक गेम्स

टोक्यो ओलंपिक के साथ बोरिया मजूमदार और नलिन मेहता ने वर्षों से ओलंपिक खेलों में भारत के बेहतरीन क्षणों का एक संग्रह तैयार किया। ड्रीम्स ऑफ अ बिलियन: इंडिया एंड द ओलंपिक गेम्स में एमसी मैरी कॉम, पीवी सिंधु (PV Sindhu) और अभिनव बिंद्रा जैसे दिग्गजों की कहानियां हैं।

इस पुस्तक में यह भी पूछा गया है कि एक अरब का देश कैसा होता है और ओलंपिक में इतनी कम उपलब्धियां क्यों हैं। खेलों में भारत के अतीत की कहानी के अलावा, भारतीय ओलंपिक की दुनिया में पर्दे के पीछे क्या होता है, इसके बारे में एक अंदरूनी सूत्र का दृष्टिकोण भी पेश है और टोक्यो 2020 के लिए भारत की तैयारी का आकलन भी है।

अनब्रेकेबल

भारत की महान मुक्केबाज़ एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom), अनब्रेकेबल की कहानी पाठकों को उस यात्रा के बारे में बताती है जो छह बार के विश्व चैंपियन ने की है। सीमित साधनों के परिवार में जन्मी, यह पुस्तक हमें उस संघर्ष और जुनून के बारे में बताती है जो मैरी कॉम ने खेल के शिखर पर पहुंचाने के लिए किया है।

अपने संघर्षपूर्ण बचपन से लेकर भारतीय मुक्केबाजी के साथ, राजनीति का सफर, इस पुस्तक में ये सब है। विवाह और फिर विश्व चैंपियनशिप में जीत ने निश्चित रूप से एक महिला होने के नाते उन्होंने इसे गलत साबित कर दिया कि ये सिर्फ पुरुषों का खेल है।

पीआर श्रीजेश के लिए ये हैं बेहतरीन समय

भारतीय पुरुष हॉकी टीम में प्रैंकस्टर के रूप में जाने जाने वाले, गोलकीपर पीआर श्रीजेश (P R Sreejesh) का जीवन कहीं और की तुलना में ड्रेसिंग रूम में ज्यादा गुजरा है। खेल से दूर होने पर भी केरल का ये खिलाड़ी आइसोलेशन के समय भी सबसे बेहतर समय गुजार रहा है।

”उन्होंने हाल ही में ईएसपीएन इंडिया को बताया कि “हमारे पास इन दिनों बहुत समय है और कहीं जाना भी नहीं है, टीम में हम में से कई ने SAI सेंटर में वॉलीबॉल खेलना शुरू कर दिया है जो हम कर रहे हैं। मैंने भी अब एक नई आदत के रूप में पढ़ना शुरू कर दिया है।”

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