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खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी को तैयार करने वाले गोपीचंद, बिंद्रा और मैरी कॉम की ‘अद्भुत पाठशालाएं’

भारतीय एथलीट, खासकर ओलंपियंस को अपना अनमोल सपना पूरा करने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में हम यहां पर भारत की उन ख़ास खेल अकादमी के बारे में जानकारी लेकर आए हैं जो खिलाड़ियों के सपने को पूरा करने में उनकी सहायता करती हैं।

लेखक सैयद हुसैन ·

एक ओर जहां कुछ भारतीय एथलीट पदक और उपलब्धियां हासिल करके युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने, तो वहीं कुछ अन्य ने सभी से आगे बढ़ते हुए ‘अद्भुत पाठशाला’ यानी खेल अकादमी की नींव रखी। आज ये सभी अकादमी युवा पीढ़ी को उनके ही नक्शेकदम पर चलने के लिए तैयार करने का काम कर रही हैं।     

सच कहें तो इन पूर्व ओलंपियन और चैंपियन खिलाड़ियों ने भारत में इन खेल अकादमी की स्थापना करके देश का कर्ज चुकाने का काम किया है। इन खिलाड़ियों का लिए गया एक अद्भुत फैसला आज भारत की तस्वीर बदलने का काम कर रहा है।   

गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी

पीवी सिंधु (PV Sindhu), साइना नेहवाल (Saina Nehwal), पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap), किदाम्बी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) जैसे शटलरों को तराशने वाली गोपीचंद बैडमिंटन ऐकेडमी की स्थापना का सपना 2003 में पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) ने तभी देख लिया था, जब उन्होंने संन्यास भी नहीं लिया था।

पूर्व शीर्ष रैंकिंग वाले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी को आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 2001 के ऑल इंग्लैंड ओपन जीतने के लिए 5 एकड़ जमीन भेंट की गई थी। और तभी उन्होंने अपना सपना सेट कर लिया था, लेकिन इसके बाद कैसे और क्या करना है, ये एक कठिन काम था।

बहुत अधिक आर्थिक सहायता पाने में असमर्थ, पुलेला गोपीचंद को ऐकेडमी की शुरुआत करने के लिए हैदराबाद में अपने घर को गिरवी रखना पड़ा था।

सिडनी 2000 में प्रतिभागी रहे पुलेला गोपीचंद ने इंडिया टुडे से कहा था कि, ‘मैं ऐसा नहीं कर सकता [लोगों से पैसे मांगना]। इमारत अभी आधी ही बनी है अभी भी कोर्ट बनना बाक़ी है। हमें कुछ करने की ज़रूरत है।‘’

आज, हैदराबाद के गाचीबोवली के आउटर रिंग रोड में स्थित इस ऐकेडमी से दो ओलंपिक पदक विजेता, कई BWF विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता और कई सुपरसीरीज़ खिताब विजेता निकलकर आए हैं।

ऐकेडमी का ध्यान व्यावसायिक हितों से ज़्यादा प्रतिभाओं को निखारने पर रहता है और इसके लिए अपने खिलाड़ियों को 50-60 प्रतिशत से ज़्यादा की स्कॉलरशिप दी जाती है।

अभिनव बिंद्रा – अभिनव बिंद्रा फ़ाउंडेशन

एक समृद्ध पंजाबी परिवार में जन्मे अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने अपने सपने का पीछा करते हुए कभी भी सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं किया। लेकिन, उनके विदेशी प्रशिक्षण ने उन्हें एहसास दिलाया कि भारत हमेशा उनकी पहली पसंद था।

अभिनव बिंद्रा ने ओलम्पिक चैनल को बताया कि, "भारत में प्रशिक्षण हमेशा मेरे लिए एक प्लान बी था, लेकिन प्रगति के लिए, हमें अपने एथलीटों के लिए प्लान ए घर में ही बनाने की आवश्यकता है।"

स्वतंत्र भारत के एकमात्र ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता, अभिनव बिंद्रा ने उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण सुविधाओं के साथ भारतीय एथलीटों की सुविधा के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए हैं।

2009 में स्थापित अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन ने मोहाली, दिल्ली, बेंगलुरु, भुवनेश्वर और पुणे में पांच अभिनव बिंद्रा टार्गेटिंग परफ़ॉर्मेंस (ABTP) केंद्र खोले हैं।

भारतीय खेल प्राधिकरण - अभिनव बिंद्रा टारगेटिंग परफॉर्मेंस सेंटर, बेंगलुरु के पादुकोण-द्रविड़ सेंटर फॉर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस में स्थित है, जो देश के बेहतरीन खेल केंद्रों में से एक है।

यहां एक ओलंपिक मानक स्विमिंग पूल, एक अंतरराष्ट्रीय आकार की फुटबॉल पिच, 16 बैडमिंटन कोर्ट और कई अन्य चीजों के बीच एक क्रिकेट का मैदान भी है।

भुवनेश्वर में ABTP वॉकर व्यू, डी वॉल, इस्सो मूव जैसी और भी शानदार मशीनों के लिए जाना जाता है, जो एक एथलीट के शरीर के पहलुओं को पढ़ता है और प्रशिक्षण विधियों को सही करने के लिए डेटा का उपयोग करता है।

योगेश्वर दत्त रेसलिंग अकादमी

दिल्ली में बसने से पहले योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने इंडोर सुविधा न होने की वजह से कई परेशानियां झेली हैं, ख़ास तौर से बारिश और सर्दी के मौसम में तो उन्हें प्रैक्टिस के लिए बहुत दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता था।

लेकिन हरियाणा का ये पहलवान अपने आने वाली पीढ़ियों को इन मुसिबतों से दूर रखना चाहता था।

योगेश्वर दत्त ने कहा, “जब एथलीट नेशनल कैंप का हिस्सा हो जाते हैं तो उन्हें सारी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन उससे पहले और वहां तक पहुंचने में उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।‘’

इसलिए 2012 के ओलंपिक-कांस्य पदक विजेता ने अपनी ऐकेडमी को शुरू करने के लिए सोनीपत के गोहाना के एक डिफंक्ट इंजीनियरिंग कॉलेज के परिसर में पांच साल के पट्टे पर जगह लेने के लिए अपनी सभी पहचान का इस्तेमाल किया।

प्रतिभाओं को पहचानने के लिए युवाओं को तराशने में विश्वास रखने वाले योगेश्वर दत्त को अपने इस मक़सद के लिए ज़्यादा साथ नहीं मिला।

जिसके बाद उन्होंने अपने 2014 एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक जीतने के बाद मिलने वाली सभी धनराशि को कॉलेज के हॉल और छात्रावास के कमरों को बनाने में लगा दिया।

हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में योगेश्वर दत्त ने कहा, ‘’जब भी मुझे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इनाम जीतने के बाद जो नगद पुरस्कार मिलता था, उसमें से मैं ज़्यादातर हिस्सा अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट में लगा दिया करता था।‘’

योगेश्वर दत्त रेसलिंग ऐकेडमी की स्थापना 2017 में हुई है, जहां फ़िलहाल सैकड़ों प्रतिभाओं को ये भारतीय ओलंपिक पदक विजेता निखार रहा है।

गन फ़ॉर ग्लोरी अकादमी

गगन नारंग (Gagan Narang) के संघर्ष से सभी अच्छी तरह परिचित हैं। उनके पिता को अपने बेटे की एयर राइफल ख़रीदने के लिए अपना घर बेचना पड़ा था ताकि गगन शूटिंग में अपना करियर बना सकें।

गगन नारंग ने पिता का वह सपना पूरी तरह साकार करते हुए देश के लिए लंदन 2012 में कांस्य पदक जीता, इतना ही नहीं उसके बाद इस खेल को दूसरों की पहुंच तक ले जाने के लिए भी उन्होंने एक सपना पाल लिया था।

ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत के दौरान गगन नारंग ने कहा, ‘’ 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान शूटिंग रेंज का निर्माण किया गया था और सरकार ने एक अच्छी टीम के निर्माण में भी निवेश किया था, और उस निवेश से किसी भी ओलंपिक में भारतीय शूटिंग टीम के सर्वश्रेष्ठ परिणाम मिले। अच्छे विदेशी कोच थे, बहुत सारे गोला-बारूद थे, और मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं भी उसी सिस्टम से यहां तक पहुंचा।‘’

‘’मैं हमेशा उस सिस्टम को वापस देना चाहता था जिसने मुझे बनाया है। इसलिए, मैंने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने के बाद मिली सारी धनराशी अपने इसी सपने को सच करने में लगा दी थी।‘’

गगन नारंग स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन (GNSPF) ने आगे चलकर गन फॉर ग्लोरी ऐकेडमी की शुरुआत की जो भारत की पहली निजी रूप से प्रबंधित शूटिंग सुविधा है।

GNSPF की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है 'प्रोजेक्ट लीप,' जिसका उद्देश्य निशानेबाजों के चयनित पूल से असाधारण प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें बेहतर बनाना है।

2017 में शुरू की गई इस परियोजना ने भारत की मौजूदा शीर्ष रैंक की महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल शूटर जैसी एलावेनिल वलारिवन (Elavenil Valarivan) जैसी प्रतिभाओं को खोजा है। इस ऐकेडमी ने पिछले तीन सालों में कई जूनियर और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बेहतरीन निशानेबाजों को सामने लाया है।

हालांकि 2019 में भारी सरकारी फंड के बाद से ये ऐकेडमी और भी बड़ी हो गई है।

13 शहरों में फैली अब ये ऐकेडमी निशानेबाजों को चुनने और प्रशिक्षित करने के लिए, आदिवासी भागों सहित देश भर में प्रतिभा की खोज कर रही है।

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मैरी कॉम-SAI बॉक्सिंग अकादमी

एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) को अपने शुरुआती दिनों में काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसलिए, भारतीय मुक्केबाज ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि मणिपुर के दूसरे नवोदित मुक्केबाज़ को भी इसका सामना न करना पड़े।

2012 ओलंपिक कांस्य पदक विजेता को इम्फाल के राष्ट्रीय खेल गांव में उनकी उपलब्धियों के लिए राज्य सरकार की ओर से 3.3 एकड़ जमीन दी गई थी, और इस मुक्केबाज़ ने तब से क्राउड-फंडिंग शुरू की है और परिणामस्वरूप एक बेहतरीन मुक्केबाज़ी ऐकेडमी तैयार है।

द क्विंट के साथ 2014 में बातचीत में मैरी कॉम ने कहा था, ‘’ मैं अपनी मुक्केबाज़ी ऐकेडमी के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना चाहती हूँ, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, मुक्केबाज़ी रिंग्स, मुफ्त भोजन, ट्रैक सूट आदि शामिल हों।‘’

मैरीकॉम-SAI बॉक्सिंग ऐकेडमी 2015 में स्थापित हुई थी, टूर्नामेंट के दौरान कोचिंग, लॉजिंग, भोजन और अन्य लागत ये सबकुछ मुक्केबाज़ों को ऐकेडमी की ओर से ही उपलब्ध कराया जाता है।

12-18 वर्ष की आयु के बीच मुक्केबाज़ी प्रतिभाओं की पहचान करने के उद्देश्य से ये ऐकेडमी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकास पर केंद्रित है।

मैरी कॉम ने हमेशा शिक्षा को बहुत महत्व दिया है और उनकी ऐकेडमी एथलीटों के स्कूल ख़र्च को भी वहन करती है। मैरी कॉम रीजनल बॉक्सिंग फाउंडेशन भी बच्चों की बॉक्सिंग प्रतिभा के आधार पर स्कूलों के साथ बातचीत करता है।

मैरी कॉम इस पर कहती हैं कि, "मेरा एक सपना है, जो मेरी तरह कई और मैरी कॉम बनाने का है।‘’

इनके अलावा, कुछ अन्य खेल अकादमी भी भारत के ओलंपिक खिलाड़ियों द्वारा चलाई जाती हैं और वहां भी बच्चे सही प्रशिक्षण हासिल करके शीर्ष स्तर पर पहुंचने के प्रयास में लगे हुए हैं। ये हैं वो कुछ अन्य ख़ास अकादमीः

भारत में अन्य खेल अकादमी
अकादमी संचालक खेल
प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन और अन्य खेल
ऊषा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पीटी ऊषा एथलेटिक्स
अंजू बॉबी स्पोर्ट्स फाउंडेशन अंजू बॉबी जॉर्ज कई खेल
कर्णम मलेश्वरी फाउंडेशन कर्णम मलेश्ववरी कई खेल
डोला एंड राहुल बनर्जी स्पोर्ट्स फाउंडेशन डोला बनर्जी और राहुल बनर्जी तीरंदाज़ी
ज्वाला गुट्टा एकेडमी ऑफ एक्सीलेंस ज्वाला गुट्टा बैडमिंटन