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वो 10 एथलीट जो टोक्यो 2020 में भारत को कर सकते हैं गौरवांवित

टोक्यो ओलंपिक में भारत की ओर से तजुर्बे के साथ युवा जोश भी शामिल है। ऐसे 10 खिलाड़ी जो इस ओलंपिक गेम्स में मेडल की चमक जीत सकते हैं। 

लेखक जतिन ऋषि राज ·

खेल की दुनिया का सबसे बड़ा नाम है ओलंपिक गेम्स और इस बार यह गेम्स जापान में होने जा रहा हैं। भारतीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू और इंडियन ओलंपिक एसोसीएशान का मानना है कि 2020 ओलंपिक गेम्स भारतीय खेमे के लिए ख़ास रहेगा। टोक्यो 2020 के नाम से मशहूर इन गेम्स की कीमत भारत के लिए बहुत ज़्यादा है और इसमें कई दिग्गजों के साथ युवा खिलाड़ी भी खेलते दिखाई देंगे।आइए एक नज़र डालते हैं उन 10 नामों पर जो खेलों के इस महाकुंभ में भारत की सफलता की कुंजी साबित हो सकते हैं।

विनेश फोगाट – नाम ही काफी है

विनेश फोगाट एक ऐसा भारतीय नाम है जिस पर महिला पहलवानी की उम्मीदें टिकी हुई हैं। 2016 रियो ओलंपिक के दौरान घुटने की चोट के कारण ओलंपिक में मेडल जीतने का उनका सपना अधूरा रह गया था और चीन की सुन यानन के खिलाफ हुए मुकाबले को उन्हें बीच में ही छोड़ना पड़ा था। लेकिन अब समय बदल चुका है और पिछले कुछ सालों में शानदार प्रदर्शन करके विनेश ने टोक्यो 2020 के लिए खुद को तैयार कर लिया है।

50 किग्रा में खेलती विनेश ने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में शानदार प्रदर्शन की बदौलत गोल्ड मेडल पर हक जमाया। हालांकि अब यह भारतीय पहलवान 53 किग्रा में खेलेंगी। लोगों को लग रहा था कि वर्गभार बदलने के बाद विनेश को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन उन्होंने अपने कौशल पर भरोसा करते हुए इसपड़ाव को भी आसानी से पार कर लिएशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के दौरान विनेश ने भारत के खेमे में ब्रॉन्ज़ मेडल डाला और उसके बाद अपनी लय को बरकरार रखा। यासरडोगू इंटरनेशनल और पोलैंड ओपन में इन्होंने अपने परिणाम को बेहतर कर गोल्ड मेडल हासिल किया और भारत के सम्मान में चार चांद लगा दिए।इतना ही नहीं विनेश फोगाट पहली भारतीय रेसलर बनीं जिन्होंने 2020 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई किया।

इस पहलवान ने ओलंपिक साल की शुरुआत भी गोल्ड मेडल जीत कर ही की। रोम रैंकिंग सीरीज़ के दौरान जीत ने विनेश के हौंसलों को नई उड़ान दी है और पूरा भारत टोक्यो 2020 में उनसे मेडल जीतने की उम्मीद कर रहा है।

बजरंग पुनिया – गुरु की राह पर

बजरंग पुनिया एक ऐसे भारतीय पहलवान हैं जिन्होंने पहलवानी में पिछले कुछ सालों में भारत को सम्मानित किया ही है लेकिन मैट के बाहर अपने रिश्तों को मज़बूती से साझा भी किया है। अपने गुरु योगेश्वर दत्त से पुनिया महज़ 14 साल की उम्र में मिले थे और उन्हीं से इस युवा ने पहलवान बनने की प्रेरणा ली। गौरतलब है कि योगेश्वर ने 2012 ओलंपिक गेम्स में भारत को ब्रॉन्ज़ मेडल जितवाया था और उन्होंने बहुत से भारतीय युवा रेसलरों को प्रेरित भी किया। पुनिया ने 2016 ओलंपिक गेम्स में न खेलने का फैसला किया और वे इसलिए क्योंकि योगेश्वर उस समय अपने आखिरी ओलंपिक गेम्स की ओर बढ़ रहे थे।

दत्त गेम्स में जीत तो न सके लेकिन उन्होंने बजरंग को ट्रेनिंग देने का फैसला किया और आने वाले ओलंपिक गेम्स में मेडल जीतने का लक्ष्य तैयार किया। अपने गुरु की तकनीकों पर भरोसा करते हुए पुनिया ने 2017 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में ज़बरदस्त खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। पुनिया ने अपनी लय को जारी रख 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को इस बड़े मंच पर सम्मानित किया। इसके बाद इस पहलवान ने 2019 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल पर अपना कब्ज़ा जमाया। इसके बाद पुनिया ने ओलंपिक गेम्स का कोटा जीत पूरे देश में खुशियों की लहर दौड़ाई। अपने तकनीक भरे खेल से पुनिया ने रोम रैंकिंग सीरीज़ में भी गोल्ड मेडल जीता और अपने हुनर का प्रमाण पेश किया।

मैरी कॉम – दमदार पंच, अनुभव और हुनर का अटूट मिश्रण 

भारत की सबसे चहेती महिला बॉक्सर, मैरी कॉम। यह भारत में केवल एक नाम नहीं हैं बल्कि प्रेरणा की जीती जागती मिसाल है। ज़िन्दगी के हर पड़ाव को पार करती हुई इस बॉक्सर ने भारत और पूरे विश्व में अपना नाम कभी न मिटने वाली स्याही से लिख दिया है। 2012 ओलंपिक गेम्स में मैरी क इकलौती भारतीय बॉक्सर थीं जिन्होंने गेम्स के लिए क्वालिफाई किया था। इतना ही नहीं उन्होंने लंदन गेम्स में शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया और लंदन की गलियों तक अपने हुनर का डंका बजाया। 

हालांकि मैरी कॉम 2016 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई करने से चूक ज़रूर गईं थीं लेकिन इन्होंने इसके बाद अपने जीत के सिलसिले को रुकने नहीं दिया। उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड स्थापित किया है जो आज तक कोई और खिलाड़ी छू भी नहीं पाया। वो पहली बॉक्सर बनीं जिन्होंने एआईबीए वर्ल्ड चैंपियनशिप में 8 मेडल अपने नाम किए हैं। ऐसा करने वाली वे पहली और इकलौती खिलाड़ी हैं। 

खिलाड़ी की ज़िन्दगी में मुश्किलें तो आती ही रहती हैं औमैरी कॉम की सबसे बड़ी कठिनाई तब आई जब उन्होंने 49 किग्रा की जगह 51 किग्रा वर्ग में लड़ने की ठानी। हालांकि अपने तजुर्बे को काम में लाते हुए उन्होंने निकहत ज़रीन को आड़े हाथ लेते हुए बीएफआई नेशनल ट्रायल्स में अपने नाम का दबदबा कायम रखा।

पीवी सिंधु करेंगी कोर्ट पर कब्ज़ा

20 साल की उम्र में कुछ खिलाड़ी ओलंपिक गेम्स में भाग लेने का सपना देखते हैं और कुछ खिलाड़ी इतनी कम उम्र में ओलंपिक मेडल अपने देश के लिए जीत लेते हैं। पीवी सिंधु, एक ऐसा भारतीय नाम जिन्होंने बैडमिंटन के ज़रिए भारत को अलग अलग मंच पर सम्मानित किया है। 2016 रियो में सिल्वर मेडल जीत सिंधु ने अपने भविष्य का प्रमाण दिया और उसे समय समय पर साबित भी किया।

अपने खेल के ज़रिए सिंधु ने दिलों के साथ-साथ मेडल जीतने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेकर सिंधु ने मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया और सिंगल्स में सिल्वर पर अपने नाम की मुहर लगाई। इसके बाद 2018 एशियन गेम्स में भी इस बैडमिंटन स्टार ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया और 2019 बीडब्लूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप को जीत कर इतिहास बना दिया।

यह 24 वर्षीय खिलाड़ी फिलहाल बीडब्लूएफ की रैंकिंग में छठे पायदान पर है और टोक्यो 2020 में क्वालिफाई करने के लिए इनके पास बेहद उज्जवल अवसर भी हैं। अगर ऐसा होता है तो 2020 ओलंपिक गेम्स में इनके रैकेट से मेडल की दस्तक ज़्यादा मुश्किल नहीं होगी।

मनु भाकर का लक्ष्य – टोक्यो 2020

साल 2017 मनु भाकर के लिए एक सपने की तरह आया और उन्हें खेल की दुनिया में उज्जवल भविष्य बनाने का हौंसला दे गया। इसी साल भाकर ने एशियन जूनियर चैंपियनशिप जीत कर अपने भविष्य का प्रमाण दिया और बता दिया कि भारतीय शूटिंग सुरक्षित हाथों में है। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत के लक्ष्य से उतरी भाकर ने खिताब जीत दुनिया में अपने नाम की छाप छोड़ दी। इतना ही नहीं आईएसएसएफ वर्ल्ड कप और यूथ ओलंपिक में भी अपने प्रदर्शन की बदौलत इस युवा खिलाड़ी ने खूब वाह-वाही लूटी।

जैसे-जैसे समय बीत रहा था यह खिलाड़ी आगे बढ़ रही थी। 2019 आईएसएसएफ वर्ल्ड कप के दौरान भाकर ने 5 गोल्ड मेडल जीतकर एक बार फिर अपने हुनर का प्रमाण दिया। इतना ही नहीं, इन्होंने फिर एशियन शूटिंग चैंपियनशिप के हवाले से दो और गोल्ड मेडल आने देश के सम्मान में लगा दिए। म्यूनिख में हुई शूटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के ज़रिए मनु भाकर ने ओलंपिक कोटा जीता और वे फिलहाल टोक्यो की तैयारियों में लीन हैंहालांकि 2020 ओलंपिक गेम्स में 25 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने के लिए यह खिलाड़ी उत्साहित है।

फील्ड की क्वीन – रानी रामपाल

भारतीय महिला हॉकी टीम की बात होती है तो रानी रामपाल का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। रानी टीम की कप्तानी के साथ साथ उच्च कोटि का खेल भी अपने बस्ते में लिए चलती हैं। 2020 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई करने के लिए रानी रामपाल का योगदान अहम है। यूएसए के खिलाफ नाज़ुक समय पर गोल दागने वाली इस खिलाड़ी ने ओलंपिक गेम्स का उदेश्य रख उसे सफल किया।

भारतीय महिला हॉकी टीम की दिग्गज सुनीता लाकरा के खेल छोड़ने के बाद रानी के ऊपर दोहरी ज़िम्मेदारी आ गई है। हालांकि उन्होंने 2017 महिला एशिया कप में जीत के साथ अपने सफल लीडर होने का प्रमाण दिया और साथ ही 2018 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल के साथ अपने करियर में एक और उपलब्धि जोड़ ली।

रानी रामपाल की ज़िन्दगी में एक और सुनेहरा पल तब जुड़ा जब उन्होंने “वर्ल्ड गामस एथलीट ऑफ़ द ईयर” अवार्ड जीता और हॉकी के साथ-साथ खेल की दुनिया में भी अपने नाम का परचम लहराया।

नीरज चोपड़ा – जेवलिन हीरो

नीरज चोपड़ा फिलहाल आखिरी भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने 2020 ओलंपिक गेम्स का कोटा अपने नाम कर अपने कारवां को आगे बढ़ाया है। जेवलिन थ्रो नामक खेल में खेलते इस युवा ने भारत को समय समय पर कामयाबी का तोहफा दियइनका नाम नज़र में तब आया जब इन्होंने 2016 साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत पूरे राष्ट्र को सम्मानित किया। इतना ही नहीं उन्होंने आईएएएफ वर्ल्ड अंडर 20 चैंपियनशिप का भी खिताब अपने नाम कर अपने उज्जवल भविष्य का प्रमासमय के साथ साथ नीरज ने अपने खेल को भी बढ़ाया और कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसी कठिन प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे। पिछले साल चोट के कारण इनके खेल में गिरावट देखी गई लेकिन हर खिलाड़ी अपने हौंसलों से आगे बढ़ता है और उन्होंने ओलंपिक गेम्स का टिकट हासिल कर दुनिया में एक बार फिर अपने नाम की छाप छोड़ दी।

सैखोम मीराबाई चानू – टोक्यो 2020 में उठाएंगी भारत का भार

सैखोम मीराबाई चानू का भी 2016 रियो ओलंपिक का सफ़र असफल रहा। क्लीन एंड जर्क कैटेगरी में खेलते हुए इस खिलाड़ी से उम्मीदें तो बहुत थीं लेकिन वे अपने कौशल को दिखा न सकीं।

हालांकि तब से लेकर अब तमीराबाई चानू का सफ़र देखते ही बना है। 2017 वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल जीत इस खिलाड़ी ने वापसी का ऐलान किया। इस प्रतियोगिता में इन्होंने 194 किग्रा वज़न उठाकर एक शानदार प्रदर्शन दिखाया। इतना ही नहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में 196 किग्रा वज़न उ मीराबाई चानू ने गोल्ड तो जीता ही और अपने व्यक्तिगत आंकड़ों को भी ऊंचा किया।

वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के दौरान मीराबाई चानू ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड हासिल किया। 49 किग्रा में 201 किग्रा वज़न उठाकर उन्होंने भारत में खूब इज्ज़त कमाई। हालांकि वे जीत तो नहीं पाई लेकिन अपने होने का मज़बूत प्रमाण ज़रूर पेश किया। 2016 ओलंपिक गेम्स में अच्छा प्रदर्शन न करने की वजह से मीराबाई चानू को बाहर होना पड़ा।

अमित पंघल हैं लड़ने को तैयार

जिस दिन से अमित पंघल ने बॉक्सिंग को चुना उसी दिन से इस खिलाड़ी और खेल के बीच दोस्ती हो गई। पहली बार नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शिरकत करते हुए गोल्ड मेडल जीता और अपने भविष्य का प्रमाण पेश किया। इसके बाद एशियनअमेच्योर बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत अपनी लय को कायम रखा।

2017 एआईबीए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप हसनबॉय दुस्मातोव के हाथों से पटकनी खाने के बाद इस खिलाड़ी ने 2018 के स्ट्रैंड्झा कप और एशिया गेम्स में गोल्ड मेडल जीत कर वापसी की और कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में सिल्वर मेडल जीत कर निरंतरता का भी प्रमाण दिया।एआईबीए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अमित पंघल सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बॉक्सर बने। 48 किग्रा के बाद 52 किग्रा में खेलना पंघल के लिए मुश्किलों से भरा तो ज़रूर होगा लेकिन असल खिलाड़ी भी वही है जो अपने खेल से किसी भी परिस्थिति को परख अपने हिसाब से जीत का परचम लहराए।

मां बनने के बाद मिर्ज़ा की वापसी

भारतीय टेनिस खेमा तब खुश हुआ जब सानिया मिर्ज़ा ने ओलंपिक गेम्स में शिरकत करने की इच्छा जताई। रियो ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ मेडल मैच को हारने के बाद मिर्ज़ा ओलंपिक गेम्स में ज़बरदस्त वापसी कर इस दफा मेडल जीतने की कोशिश में होगीं।

साल 2017 में लगी चोट क कारण मिर्ज़ा को कोर्ट से बाहर रहना पड़ा। उसके बाद उन्होंने मां बनने का निर्णय लिया और इस वजह से भी उनके अभ्यास में रुकावट देखीगई। हालांकि होबार्ट इंटरनेशनल में जीत के साथ वापसी करने के बाद अब मिर्ज़ा का अगला लक्ष्य टोक्यो 2020 होगा।