अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि कोच और खिलाड़ी दोनों की ही सोच एक होनी चाहिए

वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली इकलौती भारतीय एथलीट चाहती हैं कि कोच भारतीय एथलीट्स को समझदारी के साथ अगले लेवल पर ले जाने में मदद करें।

पहली भारतीय महिला खिलाड़ी जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीता हो। एशियन गेम्स की गोल्डमेडलिस्ट और दो बार की ओलंपियन, ये अंजू बॉबी जॉर्ज (Anju Bobby George) की उपलब्धियां हैं।

इन सब के अलावा 2003 में हुई वर्ल्ड एथलीट्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना इस केरल की खिलाड़ी की सबसे बड़ी कामयाबी है पेरिस के स्डेड डे फ्रांस में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में ये भारतीय खिलाड़ी ना केवल कांस्य पदक लेकर भारत लौटीं बल्कि उन्होंने समाज की लंबे समय से चल रही सोच को भी बदल डाला।

ओलंपिक चैनल के साथ एक्सक्लूसिव बाचतीच में इस भारतीय एथलीट ने अपने करियर और भविष्य के साथ साथ उनकी एकेडमी के बारे में भी बात की।

अंजू बॉबी जॉर्ज के साथ हुई बातचीत के कुछ अंशः

कोरोना वायरस (COVID-19) के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया है, आप इस समय से कैसे निपट रही हैं?

पूरे विश्व में किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ऐसा हो जाएगा। हां शुरुआत में हमने सुना था कि चीन में ऐसा कुछ हुआ है। हमने कभी नहीं सोचा था कि पूरा विश्व इससे प्रभावित होगा लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि हम ये भी प्लान नहीं कर सकते कि अगले महीने हमें क्या करना है।

मुझे खुशी है कि भारत अभी तक थोड़ा सुरक्षित है। जब से लॉकडाउन की घोषणा हुई है, मैं घर में ही हूं। मुझे लगता है कि वायरस के खिलाफ हम सही तरीके से लड़ रहे हैं। ये अच्छी बात है कि भारत में यह ज्यादा नहीं फैला। मुझे खुशी है कि भारत ने कुछ ऐसा किया, जिसे करने में अमेरिका और यूरोप जैसे देश नाकाम रहे

अंजू बॉबी जॉर्ज ने भारत की तरफ से वर्ल्ड एथलीट्स चैंपियनशिप के लॉन्ग जंप में इकलौता पदक जीता है।
अंजू बॉबी जॉर्ज ने भारत की तरफ से वर्ल्ड एथलीट्स चैंपियनशिप के लॉन्ग जंप में इकलौता पदक जीता है।अंजू बॉबी जॉर्ज ने भारत की तरफ से वर्ल्ड एथलीट्स चैंपियनशिप के लॉन्ग जंप में इकलौता पदक जीता है।

खासकर हमारा छोटा सा केरल जैसा राज्य इसके खिलाफ लड़ने में टॉप पर है। दुनिया में जितने भी देश हैं, उन्हें केरल मॉडल से सीखना चाहिए। जिस तरह से हम इस महामारी से लड़ रहे हैं, उससे मैं खुश हूं।

ऐसी स्थिति एथलीट्स के लिए कितनी चुनौतीपूर्ण है? खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयारी कर रहे थे, जो अब 2021 तक के लिए स्थगित हो गया है?

मेरे हिसाब से 2020 सीजन सभी एथलीट्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। यह ओलंपिक का साल था, एथलीट ओलंपिक साल के हिसाब से ही अपने कैलेंडर तैयार करते हैं। वह अपना सर्वश्रेष्ठ देकर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करते हैं और फिर वहां अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं।

आउटडोर एथलीट सीजन अप्रैल-मई में शुरू होता है। ज्यादातर भारतीय एथलीट भारतीय घरेलू सीजन में अच्छा प्रदर्शन कर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने की चाहत में थे लेकिन कोविड-19 की वजह से सब कुछ ही बंद हो गया।

शुरुआत में ओलंपिक के बारे में कोई सूचना नहीं थी, कि वह होगा या नहीं। ये भी नहीं पता था कि ये स्थगित होगा या रद्द ही हो जाएगा, किसी को नहीं पता था कि क्या होगा। अब जब ओलंपिक की नई तारीख का ऐलान हो चुका है तो सभी एथलीट चैन की सांस ले रहे होंगे।

भारतीय ओलंपिक संघ के एथलीट आयोग के अध्यक्ष के रूप में, भारतीय एथलीटों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

मैं बस ये चाहूँगी कि वह सभी मानसिक तौर पर मजबूत रहें। जैसे वह हर सीजन के लिए होते हैं। आपका प्रदर्शन वो है जिसे आप घर पर बैठ कर नहीं कर सकते, हां एक चीज आपके हाथ में है और वह है फिटनेस। फिटनेस में आप अपना शत प्रतिशत दे सकते हैं।

कुछ एथलीट्स के पास यह सुविधा है कि देश टॉप ट्रेनिंग सेंटर जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स पटियाला या बेंगलुरु स्थित (SAI साउथ सेंटर) में प्रैक्टिस कर सकते हैं। हां आप ट्रैक पर नहीं जा सकते लेकिन यहां बहुत सी सुविधा है, जिनसे आप प्रैक्टिस कर सकते हैं

एक ओलंपियन के लिए ओलंपिक के स्थगित के क्या मायने है?

ओलंपिक 4 साल का एक सर्कल है। आप समापन कार्यक्रम के बाद से ही अगले खेलों की तैयारी शुरू कर देते हैं। अब जो इस शेड्यूल के हिसाब से तैयारी कर रहा होगा, उसके लिए निश्चित तौर पर यह बुरी खबर है लेकिन हकीकत ये भी है कि कोई कुछ नहीं कर सकता।

मैं मानती हूं कि स्पोर्ट्स सभी के लिए मायने रखता है, खासकर उनके लिए जो ओलंपिक में हिस्सा लेने का सपना देखते हैं लेकिन इंसान की जान से महत्वपूर्ण कुछ और नही है और यही सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आप इसे दो तरीके से देख सकते हैं। वह एथलीट जो इस ओलंपिक के बाद संन्यास लेने वाले थे, अब जब वह 2021 तक स्थगित हो गया है तो उनकी रणनीति क्या रहेगी। क्या वह एक और साल सीनियर लेवल पर प्रदर्शन कर पाएंगे?। आप याद रखिए प्रोफेशनल लेवल पर आप को बहुत ज्यादा मेहनत की आवश्यकता होती है।

अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि टोक्यो खेलों का स्थगन तीन साल पहले युवाओं को उनके ओलंपिक सपने को साकार करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि टोक्यो खेलों का स्थगन तीन साल पहले युवाओं को उनके ओलंपिक सपने को साकार करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि टोक्यो खेलों का स्थगन तीन साल पहले युवाओं को उनके ओलंपिक सपने को साकार करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

इसके अलावा कई ऐसे भी खिलाड़ी हैं, जो 2020 खेलों में पहली बार हिस्सा लेने वाले हैं, मेरा मतलब है कि वह बैच जो 2024 ओलंपिक की तैयार हो रहा है। उनके लिए यह गोल्डन चांस है। अगर वह कड़ी मेहनत करते हैं और अपने से अनुभवी खिलाड़ियों को चुनौती देते हैं तो उनका सपना 3 साल पहले ही पूरा हो सकता है।

एक ऐसा करियर जिसने भारत को एथलेटिक्स में बड़ा सपना दिखाया। आप मैदान पर अपना समय कैसे याद करती हैं?

मैंने बहुत जल्दी ही शुरुआत कर दी थी लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर मैं काफी लेट पहुंची। उन दिनों हम किसी भी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मुश्किल से प्रतिस्पर्धा करते थे। वहीं उस वक्त आज की तरह सिस्टम की कमी थी। आज एथलीट को सिर्फ प्रदर्शन पर ध्यान देना होता है, बाक़ी चीज़ें खुद हो जाती हैं। मेरे समय में हर चीज के लिए दौड़ना पड़ता था। हम केवल बड़े इवेंट के लिए ही जाते थे, कभी भी ग्रां प्री जैसे इवेंट में नहीं गए।

मेरे केस में बॉबी (कोच और पति) थ, जिन्होंने बड़ा सपना देखा था।वह हमेशा चाहते थे कि मैं बड़े लेवल पर अच्छा प्रदर्शन करूं ना कि खुद को नेशनल लेवल तक सीमित रखूं, उन्होंने हर चीज के लिए प्लान बनाया। मैं हमेशा उनकी शुक्रगुजार रहूंगी।

6.83 का आपका नेशनल रिकॉर्ड, जो आपने 2004 ओलंपिक में बनाया था, जो अभी भी कायम है, इसपर क्या कहेंगी आप ?

आप लॉन्ग जंप में देखे तो मुझे लगता है कि भारतीय खुद को साबित कर चुके हैं। मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि देश में पहले भी और अब भी प्रतिभाशाली एथलीट्स हैं, यहां तक कि मेरे से भी बेहतर लेकिन यह दुखद है कि हम ये इंटरनेशनल लेवल पर साबित नहीं कर पाए।

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह प्लानिंग की कमी होना है। अगर मैं बाकी एथलीट्स की तरह मेहनत करती तो मैं वहां नहीं पहुंच पाती, जहां मैं अपनी करियर के दौरान पहुंची हूं। मैं यही कहना चाहती हूं कि कोच का लक्ष्य और उनकी प्लानिंग भी काफी कारगर साबित होती है। मेरे करियर में तो यही हुआ है।

अंजू बॉबी जॉर्ज अपनी सफलता का श्रेय अपने पति और लंबे समय से कोच बॉबी जॉर्ज को देती हैं, जिन्होंने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अंजू बॉबी जॉर्ज अपनी सफलता का श्रेय अपने पति और लंबे समय से कोच बॉबी जॉर्ज को देती हैं, जिन्होंने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।अंजू बॉबी जॉर्ज अपनी सफलता का श्रेय अपने पति और लंबे समय से कोच बॉबी जॉर्ज को देती हैं, जिन्होंने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

भारतीय एथलीटों की सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद करने के लिए आवश्यक प्राथमिक चीजों में से एक कोच का ज्ञान भी कितना अहम होता है ?

मैं सहमत हूं कि एथलीट तो हमेशा सभी को दिखता है लेकिन जब आप उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे होते हैं, तो आपके पास कभी समय नहीं होता है या आप अपनी दिनचर्या को रणनीतिक या योजना बनाने के ज़ोन में नहीं होते हैं। तो यह काम कोच आपके लिए करता है।

मेरे मामले में बॉबी ने ही सब कुछ किया, उन्होंने ही मुझे बताया कि किस प्रतियोगिता के क्या रणनीति बनाई जा सकती है। मैं कौन सी जंप कर सकती हूं और किस जंप में मुझे अपनी एनर्जी बचा कर रखनी है। इसके अलावा मेरे विपक्षी कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके हिसाब से भी रणनीति में बदलाव करते रहते थे। आपको कोई चाहिए, जो आपको बताए कि क्या हो रहा है ताकि आप मैदान के बीच में दबाव महसूस न करें।

आप भारतीय एथलीट्स का भविष्य कैसा देखती हैं?

हमारे देश में काबिलियत की कोई कमी नहीं है और जूनियर लेवल पर इसकी झलक दिख चुकी है। हमारे पास जूनियर लेवल पर जेवलिन (नीरज चोपड़ा) में वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर है, इसके अलावा हिमा दास (Hima Das) के रूप में 400 मीटर में वर्ल्ड चैंपियन है।

लेकिन, अगर आपको सीनियर लेवल पर अच्छा प्रदर्शन करना है तो कोच और खिलाड़ी दोनों का ही महत्व ज्यादा बढ़ जाता है, एक कोच ही है जो खिलाड़ी को बेहतर बनाता है। इससे आप सीनियर लेवल पर भी सफल होते हैं।

भारत ने एशियन स्टेज पर कई शानदार प्रदर्शन किया है, भारतीय एथलीट्स के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

अगर आप एशियन फील्ड पर देखें तो कितने वर्ल्ड स्टेज पर मेडल जीतने में सफल हुए हैं?। बहुत कम।

क़तर (मुताज़ एसा बार्शिम), ईरान से एक डिस्कस थ्रोअर (एहसान हादीदी), जापानी रिले टीम और कुछ  एक उच्च जम्पर है। जब आप यूरोप या यूएसए के साथ तुलना करते हैं तो एशियाई स्तर पर बहुत अधिक नहीं है।

एशियाई पदक जीतने के बाद, यदि आपको लगता है कि आप विश्व चैंपियनशिप या ओलंपिक में पदक जीत सकते हैं, तो ऐसा नहीं हो सकता है। असली मुकाबला यूरोप में है।

जब तक आपने पेरिस वर्ल्ड में कांस्य नहीं जीता, तब तक चौथे स्थान पर रहना भारतीय एथलेटिक्स में एक बड़ी उपलब्धि माना गया। आपने उस धारणा को बदलने में मदद की, अब भारत को उस पोडियम पर खड़े होने के लिए क्या करना चाहिए?

अगर हमे मेरे और बॉबी जैसे कोच व खिलाड़ी की जोड़ी मिलती है तो बेशक तौर पर हम जीत सकते हैं। एक कोच बताता है कि आप कितने प्रतिभाशाली हैं। आपको केवल प्रतिभाशाली ही नहीं होना बल्कि खुद पर विश्वास भी होना जरूरी है। जब आप इंटरेनल टूर्नामेंट में जाते हैं तो आपको अच्छे प्रदर्शन का विश्वास होना चाहिए।

अंजू बॉबी जॉर्ज को विश्वास है कि भारत में इतनी प्रतिभाएं मौजूद हैं जो दुनिया के दिग्गजों को चुनौती दे सकती हैं।
अंजू बॉबी जॉर्ज को विश्वास है कि भारत में इतनी प्रतिभाएं मौजूद हैं जो दुनिया के दिग्गजों को चुनौती दे सकती हैं।अंजू बॉबी जॉर्ज को विश्वास है कि भारत में इतनी प्रतिभाएं मौजूद हैं जो दुनिया के दिग्गजों को चुनौती दे सकती हैं।

आपको जब स्टेडियम के अंदर प्रवेश करें तो आपका ख़ुद पर विश्वास होना ज़रूरी है, क्योंकि आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है, कोच को भी रणनीति को मैदान पर उतारने में मदद करनी होती है।

लॉन्ग जंप के महान एथलीट माइक पॉवेल ने 2016 में बेंगलुरु में आपकी अकादमी का उद्घाटन किया। रिटायरमेंट के बाद ट्रेनिंग सेंटर खोलने का विचार कैसे आया?

मुझे नहीं लगता कि भारत में प्रतिभा की कमी है। भारत का हर राज्य एक यूरोपीय देश की तरह है। आपके पास  आबादी और जनसंख्या अधिक है । चाहे वह संस्कृति हो या जीवन का तरीका, सब कुछ अलग है।

मेरा मानना है कि भारत में, विशेषकर महिलाओं में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता है। लेकिन दुर्भाग्य से, मेरे पदक (2003 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य) के बाद हम उस स्तर तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाए हैं।

अगर मैं एक एथलीट के रूप में और बॉबी कोच के रूप में अपना अनुभव बांटता है तो इससे एथलीट्स को बहुत फायदा होगा। हम आसानी से और भी अंजू देश को दे सकते हैं क्योंकि पहले हमने ऐसा कर के दिखाया है।

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