फ़ीचर

चिराग शेट्टी के स्पोर्टिंग हीरो: शांत और धैर्यवान तौफिक हिदायत

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और बैडमिंटन विश्व चैंपियन हिदायत ने युवा चिराग शेट्टी को अपने शांत और धैर्यवान स्वभाव से प्रेरित किया।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

अगर पिछले दशक की बात करें तो बैडमिंटन कोर्ट पर इंडोनेशिया के दिग्गज खिलाड़ी तौफिक (Taufik Hidayat)हिदायत का वर्चस्व था।

केवल 19 साल की उम्र में हिदायत दुनिया के नंबर वन बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए, वहीं हिदायत ने अपने नेतृत्व में दो बार इंडोनेशिया को थोमस कप (Thomas Cup) का खिताब जिताया और एथेंस 2004 में ओलंपिक स्वर्ण (Olympic gold) जीतने से पहले 2002 में एशियाई खेलों (Asian Games) का स्वर्ण जीता।

इसके बाद भी हिदायत का शानदार समय जारी रहा और उन्होंने साल 2005 में अपना पहला और इकलौता वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीता, खिताबी मुकाबले में उन्होंने उभरते सितारे लिन डैन (Lin Dan) को मात दी।

साल 2000 में बड़े होने वाले फैंस के लिए तौफिक हिदायत एक प्रेरणा थे, सभी युवा इस खिलाड़ी की तरह बनना चाहते थे और भारतीय शटलर चिराग शेट्टी (Chirag Shetty) भी इससे अलग नहीं थे।

चिराग शेट्टी ने ओलंपिक चैनल से बातचीत में बताया कि “जब मैं अपने करियर को शुरू कर रहा था तो तौफिक हिदायत की तरह बनना चाहता था। मेरे पास शीर्ष एकल और युगल खिलाड़ियों के कुछ पोस्टर थे और वह उनमें से एक थे।”

इसके अलावा उन्होंने कहा कि “मैं जब बड़ा हो रहा था तो उन्हीं की तरह बनना चाहता था”

इमेज: एथेंस 2004 में तौफिक हिदायत पुरुष एकल ओलंपिक चैंपियन बने।

हिदायत को खेलते देखना

जहां एक तरफ कई युवा खिलाड़ियों को अपने हीरो के मैचों को लाइव देखने का मौका भी नहीं मिला, वहीं चिराग शेट्टी ने ना केवल उन्हें कोर्ट पर खेलते देखा है बल्कि उन्हें उनके साथ खेलना का मौका भी मिला है।

चिराग शेट्टी ने बताया कि “मुझे याद है कि जब मैं 10 साल के करीब का था तो तौफीक हिदायत एक समारोह के लिए मुंबई आए थे। मैं स्कूल और राज्य के लिए बैडमिंटन खेल रहा था और हम में से कुछ को उनके साथ खेलने का मौका मिला।”

भारतीय स्टार ने कहा कि “जिस तरह से वह खड़े थे, उससे मैं मंत्रमुग्ध था। वह उस समय के ओलंपिक और विश्व चैंपियन थे और उनके साथ खड़ा होना गर्व की बात थी।"

2004 में हिदायत ने एथेन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और 2005 में जब वह वर्ल्ड चैंपियन बनें तो चिराग का 8वां जन्मदिन एक महीने दूर था।

हिदायत जिस तरह से कोर्ट का इस्तेमाल करते थे और उन्हें जिस तरह कोर्ट के स्पेस की समझ थी, वह बहुत कम खिलाड़ियों को होती है। अब यही गुण चिराग में दिख रहे हैं और तभी वह युगल के शानदार खिलाड़ी बन चुके हैं।

हिदायत की तारीफ करते हुए चिराग ने कहा कि “मुझे उनका बैकहैंड बहुत पसंद था। मेरे शुरुआती दिनों में मैं भी बैकहैंड की बहुत प्रैक्टिस करता था और जैसा वह शॉट खेलते थे, उसी तरह मैं कोशिश करता था।”

इमेज: तौफिक हिदायत के बैकहैंड की दुनिया दिवानी थी

शांत रहने की सीख

शुरुआती साल में भले ही चिराग शेट्टी हिदायत से किसी भी तरह की सीख को लागू नहीं कर सकते थे लेकिन बाद में उन्होंने इस महान खिलाड़ी से बहुत महत्वपूर्ण सबक सीखा है।

चिराग ने बताया कि “हिदायत की सबसे बड़ी ताकत उनका हर समय शांत रहना था। वह इंडोनेशिया में खेलते थे, जहां लोग उनके लिए दिवाने थे और उस समय भी वह दुनिया के सबसे संयमित खिलाड़ी थे। ये एक चीज है जो मैंने उनसे सीखी है और उसे मैं अपने ऊपर लागू करता हूं।”

एक बात जो चिराग शेट्टी के बारे में है, वह उनका रिजर्व नेचर है, वह चाहे कोर्ट के अंदर हो या कोर्ट के बाहर। वह ऐसे खिलाड़ी हैं, जो पॉइंट हासिल करने और गंवाने के बाद ज्यादा एक्सप्रेशन नहीं दिखाते थे, यह आदत उन्होंने तौफिक हिदायत से सीखी।

इसके बारे में भारतीय स्टार ने कहा कि “जब मैं उनसे बच्चे के रूप में मिला था, तब भी उनमें कोई सेलेब्रेटी वाला घमंड नहीं था। वह उसी तरह शांत थे, जैसे वह कोर्ट के अंदर रहते थे। यह इस खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत थी।”

महान खिलाड़ी से मिली ये सीख भारत के युगल खिलाड़ी के लिए अगले साल होने वाले ओलंपिक में काफी काम आएगी।

चिराग शेट्टी और उनके युगल जोड़ीदार सतविकसाईराज रणकीरेड्डी (Satwiksairaj Rankireddy) वर्तमान में रेस टू टोक्यो रैंकिंग में 10वें स्थान पर है, जिसके कारण वह सीधे तौर पर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करते हैं।

अब इस जोड़ी की नजर अच्छे प्रदर्शन पर है और ओलंपिक पदक जीतकर वह देश का नाम रोशन करना चाहेंगे।