भारतीय स्टार शटलर बी साई प्रणीत ने धीरे-धीरे चढ़ीं है क़ामयाबियों की सीढ़ियां 

बैडमिंटन रैकेट को पहली बार पकड़ने से लेकर अब तक इस भारतीय शटलर का सफ़र लगातार ऊपर की ओर गया है और इस खेल में उन्होंने अपना एक अलग मुक़ाम बना लिया है।

बी साई प्रणीत के हाथों में रैकेट आने के पीछ उनकी आंटी भामिदीपति साई प्रणीत (Bhamidipati Sai Praneeth) की प्रेरणा थी, जो ख़ुद एक राष्ट्रीय स्तर की शटलर थीं और उन्हें ही देखकर प्रणीत ने बैडमिंटन में करियर बनाने का सपना संजोया था।

स्कूल के समय में साई प्रणीत को बैडमिंटन की ट्रेनिंग लेने के लिए कुल 18 किलोमीटर का सफ़र तय करना होता था और क़रीब चार घंटे का वक़्त लगता था। लेकिन इसके बावजूद कभी भी प्रणीत ख़ुद को न थका हुआ महसूस करते थे और न ही कभी उनका इससे दिल उचाट हुआ।

उनकी ये कड़ी मेहनत रंग लाई, प्रणीत ने अंडर-13 और अंडर-16 स्तर पर अपने प्रदर्शन से सभी को अचंभित कर दिया था। इनके प्रदर्शन को देखकर हैरान होने वालों में से एक पुलेला गोपीचंद भी थे।

जी हां, आंध्र प्रदेश के रहने वाले बी साई प्रणीत उन चुनिंदा भारतीय शटलरों में से हैं जो शुरुआत से ही इस ऐकेडमी का हिस्सा थे। 2008 में पुलेला गोपीचंद ने हैदराबाद में अपनी ऐकेडमी खोली थी और उस वक़्त बी साई प्रणीत वहीं बैडमिंटन के गुर सीखा करते थे।

पुलेला गोपीचंद के अंदर बस दो साल की ट्रेनिंग के बाद ही बी साई प्रणीत सुर्ख़ियों में आ गए थे, जब 18 साल की उम्र में उन्होंने मेक्सिको में आयोजित 2010 BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था।

बी साई प्रणीत के लिए करियर की पहली बड़ी उपलब्धि 2010 BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना था।
बी साई प्रणीत के लिए करियर की पहली बड़ी उपलब्धि 2010 BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना था।बी साई प्रणीत के लिए करियर की पहली बड़ी उपलब्धि 2010 BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना था।

दिग्गजों का दिलेरी से किया सामना

उसी साल प्रणीत ने इरान फ़ज्र इंटरनेशनल टूर्नामेंट के एकल और युगल दोनों ही ख़िताबों पर कब्ज़ा जमाते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी थी। बी साई प्रणीत के लिए अगली चुनौती 2013 में इंडोनेशिया ओपन में आई।

जहां इंडोनेशियाई दिग्गज तौफ़िक हिदायत (Taufik Hidayat) के साथ पहले राउंड में उनकी टक्कर हुई, तौफ़िक अपने घरेलू समर्थकों के सामने अपना फ़ेयरवेल टूर्नामेंट खेल रहे थे।

2004 ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता के सामने इस 21 वर्षीय भारतीय शटलर की चुनौती एक औपचारिकता के तौर पर देखी जा रही थी। लेकिन बी साई प्रणीत ने सभी को हैरान कर दिया और इस दिग्गज खिलाड़ी को 15-21, 21-12, 21-17 से हराते हुए एक बड़े उलटफेर को अंजाम दिया था।

इस जीत ने प्रणीत के आत्मविश्वास को पूरी तरह बढ़ा दिया था, नतीजा ये हुआ कि कुछ ही दिनों बाद सिंगापुर सुपर सीरीज़ में उन्होंने हांग कांग के उच्च वरीयता हासिल शटलर हू युन (Hu Yun)को भी मात दे दी थी।

हालांकि 2014 के अंत में साई प्रणीत के तेज़ी से आगे बढ़ते हुए करियर पर चोट ने ब्रेक लगा दिया था। लेकिन इससे साई प्रणीत के हौसलों पर विराम नहीं लगा और उन्होंने चोट से वापसी करते हुए तीन ख़िताबों को अपनी झोली में डाला। उन्होंने द श्रीलंका इंटरनेशनल चैलेंज, द लागोस इंटरनेशनल और द बांग्लादेश ओपन इंटरनेशनल चैलेंज पर कब्ज़ा जमाया।

इसके बाद आने वाली प्रतियोगिताओं में बी साई प्रणीत अब सीनियर सर्किट में अपना नाम दर्ज करा चुके थे, यानी अब उन्हें कई दिग्गजों से सामना करना था। 2016 ऑल इंग्लैंड ओपन में उनके सामने पहले ही राउंड में मलेशिया के स्टार शटलर ली चॉन्ग वी (Lee Chong Wei) की चुनौती थी।

तीन बार के ओलंपिक रनर अप मलेशियाई शटलर उस समय बेहतरीन फ़ॉर्म में थे, लिहाज़ा अगले दौर में जाने के वह प्रबल दावेदार थे। लेकिन यहां भी साई प्रणीत ने अपने खेल का जौहर दिखाते हुए इस मलेशियाई शटलर को पहले ही राउंड में बाहर का रास्ता दिखा दिया। प्रणीत ने ली चॉन्ग को सीधे गेम्स में शिकस्त देते हुए अपनी जीत का डंका बजा दिया था।

रैंकिंग में लगाई छलांग

2016 में बी साई प्रणीत ने साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक और BWF ग्रां प्री का पहला ख़िताब कनाडा ओपन के तौर पर जीतते हुए सीज़न का अंत BWF रैंकिंग में 30 के आस पास किया।

2017 में भी इस भारतीय शटलर ने उसी लय को बरक़रार रखा, सैयद मोदी इंटरनेशनल में उन्होंने रजत पदक जीता तो सिंगापुर ओपन के ख़िताब के साथ प्रणीत ने अपनी पहली BWF सुपरसीरीज़ जीती।

बी साई प्रणीत सुपरसीरीज़ ख़िताब जीतने वाले सिर्फ़ चौथे भारतीय शटलर थे, उनसे पहले ये कारनामा साइना नेहवाल (Saina Nehwal), पीवी सिंधु (P.V. Sindhu) और किदाम्बी श्रीकांत ने ही अंजाम दिया था।

2017 के अंत में थाईलैंड ओपन मे स्वर्ण पदक के साथ साई प्रणीत ने BWF रैंकिंग में 20 पायदान की लंबी छलांग लगाई और 36वें रैंकिंग से सीधे वर्ल्ड नंबर-16 के साथ साल का अंत किया।

1983 के बाद 36 सालों में वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले बी साई प्रणीत पहले भारतीय पुरुष शटलर हैं।
1983 के बाद 36 सालों में वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले बी साई प्रणीत पहले भारतीय पुरुष शटलर हैं।1983 के बाद 36 सालों में वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले बी साई प्रणीत पहले भारतीय पुरुष शटलर हैं।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में रचा इतिहास

इंडियन ओपन, ऑस्ट्रेलिया ओपन, BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप और सैयद मोदी इंटरनेशनल के क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचते हुए बी साई प्रणीत ने 2018 में अपनी रैंकिंग में और सुधार किया, अब वह 16वें से 12वें पायदान पर पहुंच गए थे।

अब बारी थी 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप की, जहां बी साई प्रणीत ने 16वीं सीड के साथ एंट्री ली थी। पहले चार राउंड में प्रणीत ने सभी मुक़ाबले सीधे गेम्स में जीतते हुए सेमीफ़ाइनल का सफ़र तय किया और देश के लिए कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

1983 में प्रकाश पादुकोण के बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय पुरुष शटलर बन गए थे।

इस क़ामयाबी पर बी साई प्रणीत ने कहा था, ‘’ये मेरी ज़िंदगी का सबसे शानदार टूर्नामेंट था, मेरे करियर की सबसे बड़ी और यादगार जीत।‘’

अब है ओलंपिक की बारी

2012 और 2016 में ओलंपिक में जगह बनाने के बेहद क़रीब पहुंचकर चूक जाने वाले बी साई प्रणीत का सपना इस बार साकार होता दिखाई दे रहा है।

कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से BWF ने वर्ल्ड रैंकिंग को फ़िलहाल फ़्रीज़ कर दिया है, लेकिन बी साई प्रणीत एकमात्र भारतीय पुरुष शटलर हैं जो टॉप-16 में रहते हुए टोक्यो ओलंपिक के लिए डायरेक्ट क्वालिफ़िकेशन हासिल करने की दहलीज़ पर खड़े हैं।

टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल करने की उम्मीद संजोय बी साई प्रणीत इस वक्त BWF वर्ल्ड रैंकिंग में 13वें स्थान पर हैं।

बी साई प्रणीत के पूर्व कोच और गुरू पुलेला गोपीचंद ने कहा कि, ‘’मेरी नज़र में जो मुक़ाम साई ने पुरुष बैडमिंटन में हासिल किया है, वह शानदार है और भविष्य में वह इससे भी अच्छा करने की क्षमता रखते हैं।‘’

ज़ाहिर तौर पर इस हैदराबादी शटलर के लिए ये तो बस एक शुरुआत है, अभी मंज़िल बाक़ी है।

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