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मेरा सबसे ख़ास मुक़ाबला: जब एचएस प्रणॉय ने ओलंपिक चैंपियन चेन लॉन्ग को हराया

अपने करियर में चीनी दिग्गज से तीन बार हारने के बाद, एचएस प्रणॉय से 2017 इंडोनेशिया ओपन मैच में किसी ने जीत की कोई उम्मीद नहीं की थी। भारतीय शटलर का मानना है कि इसी वजह से ऐसा हो पाया।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

एचएस प्रणॉय (HS Prannoy) ने भारतीय बैडमिंटन दल में एक अलग ही पहचान बनाई है। भले ही उन्होंने अभी तक सुपर सीरीज़ का खिताब नहीं जीता हो, लेकिन इस 28 वर्षीय शटलर ने अपने अब तक के करियर में शीर्ष अंतरराष्ट्रीय शटलरों को हराया है।

चाहे वो ली चोंग वेई (Lee Chong Wei) हो या लिन डैन (Lin Dan), पूर्व शीर्ष क्रम के डेनमार्क के जान ओ जोर्गेनसेन (Jan Ø Jørgensen) या उनके आदर्श तौफिक हिदायत (Taufik Hidayat), केरल के इस शटलर ने शायद ही किसी को बख्शा हो।

2017 इंडोनेशिया सुपर सीरीज प्रीमियर के क्वार्टर फाइनल में ओलंपिक चैंपियन चेन लॉन्ग (Chen Long) के खिलाफ अपनी जीत को एचएस प्रणॉय अपनी सबसे बड़ी जीत मानते हैं।

ये सिर्फ इसलिए नहीं है क्योंकि ये चार प्रयासों में चीनी खिलाड़ी पर उनकी पहली जीत थी या इससे उन्हें पहली बार सुपर सीरीज प्रीमियर प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में जगह बनाने में मदद मिली, ये इसलिए सबसे बड़ी जीत थी, क्योंकि उन्होंने अपने खुद के तरीकों पर मेहनत करके मैच जीता था।

एचएस प्रणॉय ने हाल ही में ओलंपिक चैनल से कहा, "इंडोनेशिया में चेंग लान्ग के खिलाफ जीतना दुनिया के लिए अच्छा था। इससे मुझ पर से काफी दबाव हट गया।”

"आप जानते हैं, जब ऐसी चीजें होती हैं, तो यो आपको आगे जाने का आत्मविश्वास देता है। आप खुद पर ज्यादा विश्वास करने लगते हैं। आपको भरोसा हो जाता है कि आप दुनिया में किसी को भी हरा सकते हैं। मुझे लगता है कि इस जीत ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया और जो मैं था वो वापस बना दिया।”

एचएस प्रणॉय की ख़राब फ़ॉर्म 

इंडोनेशिया ओपन में आने से पहले एचएस प्रणॉय बेहतर फॉर्म के लिए संघर्ष कर रहे थे। हालांकि उन्होंने उस सीजन में अपनी शानदार फॉर्म दिखाई, लेकिन भारतीय शटर लंबे समय तक उस फॉर्म को बरकरार नहीं रख सके, जिसके परिणामस्वरूप वो शुरुआती दौर से ही बाहर हो जाते थे। जैसा उन्हें ड्रॉ मिलता था, ऐसा लग रहा था कि एचएस प्रणॉय की किस्मत पहले से ही लिखी गई थी। 

लेकिन इन सब से बाहर निकलते हुए एचएस प्रणॉय ने अपना लय हासिल किया और शुरुआती दौर में इंडोनेशिया के तेज-तर्रार एंथनी गिन्टिंग को हराया और फिर मलेशियाई सुपरस्टार ली चोंग वेई को सीधे सेटों में हराया।

इस तरह के शानदार प्रदर्शन के बावजूद, पूर्व यूथ ओलंपिक रजत पदक विजेता का कहना है कि उन्होंने चेन लॉन्ग के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा, “मैच में जाने से पहले मुझे कोई उम्मीद नहीं थी। मैंने उन्हें पहले कभी नहीं हराया था।”

उन्होंने कहा, “मैं मैच में जाने से पहले तीन बार उनसे हार चुका था। इसलिए, हमेशा एक ऐसा मानसिक दबाव रहता है, जब आप उस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खेलते हैं, जिसे आपने 3-4 बार खेलने के बावजूद कभी नहीं हराया हो। मैं हमेशा सोचता था कि वो बहुत कठिन प्रतिद्वंदी है।”

उनकी डिफेंसिव क्षमता को जानने के बाद चेन लॉन्ग को हराना आसान नहीं था

तो ऐसा क्या हुआ, जिससे वो उस दिन जीत गए? उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि उस दिन कुछ भी बदला था। केवल एक चीज जो मुझे याद है कि मैं अपनी लय में था।”

“ऐसा अक्सर नहीं होता है। लेकिन जब भी ऐसा होता है, मैं परिणाम के बारे में ज्यादा नहीं सोचता हूं। अक्सर, हम एक परिणाम के लिए मुक़ाबला करते हैं। जैसे कि हमें लीड लेने की आवश्यकता है, ज्यादा अंक नहीं गवांने हैं। लेकिन जब आपके पास ऐसे लक्ष्य नहीं होते हैं, तो आप चिंता मुक्त होते हैं और बस शटल को फॉलो करते हैं। उस दिन मैं कुछ इसी तरह की मानसिकता के साथ खेला था।”

एचएस प्रणॉय ने मैच से पहले क्या सोचा? 

चेन डिफेंस करने के लिए अपनी डिफेंसिव क्षमताओं और कौशल के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में उन्हें हराने के लिए कुछ विशेष करने की जरूरत थी। इस तरह एचएस प्रणॉय ने दिमाग से खेलना शुरू किया। 

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि चेन लॉन्ग जैसा कोई भी खिलाड़ी डिफेंसिव होना पसंद करता है। मैं देखता हूं कि किसी भी आक्रामक खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी मानसिक बाधा यही होती है। क्योंकि आपको पता होता है कि आप जैसा भी शॉट खेलेंगे, दूसरी ओर से उसका रिटर्न जरूर आएगा।” 

हालांकि एचएस प्रणय चाहते थे कि जब तक हो सके गेम में बने रहें। उन्होंने स्कोर की परवाह नहीं की – कि क्या वो आगे चल रहे हैं या पीछे? ये सब कुछ भारतीय खिलाड़ी के लिए मायने नहीं रखता था।

उन्होंने आगे कहा, “उनके जैसे खिलाड़ी के खिलाफ कोई अंक हासिल करने का कोई उद्देश्य नहीं था। मेरा एकमात्र उद्देश्य लंबे समय तक खेलना था। केवल एक चीज जो मैं खुद से कह रहा था, वह ये था कि मुझे खेल खत्म करना था। मैं चाहता था कि ये और लंबा चले। मैं बस गेम में बने रहना चाहता था।”

एचएस प्रणॉय का मानना ​​है कि स्कोरबोर्ड के बारे में चिंता न करना नुकसान से ज्यादा फायदा होता है। भारतीय शटलर ने अपने खेल का आनंद लेना शुरू कर दिया, उन्होंने कोर्ट पर अपने इरादों के साथ खेलना शुरु किया, कुछ शानदार ड्रॉप शॉट्स के साथ उन्होंने हर किसी को आश्चर्यचकित कर दिया और अपने शक्तिशाली जंप स्मैश के साथ अंक हासिल कर चेन लॉन्ग को परास्त कर दिया।

उन्होंने कहा, "मैं अपने आप को याद दिला रहा था कि मुझे इस खिलाड़ी के खिलाफ जीतने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। मैं जो करना चाहता था, वो था कि उनसे बेहतर खेलना, जो मैंने पिछली बार के मुक़ाबले में किया था। मुझे कभी भी जीत की उम्मीद नहीं थी, ये बस हो गया।”

एचएस प्रणॉय शायद चेन लॉन्ग पर अपनी जीत को भाग्यशाली ब्रेक मान सकते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि इससे उन्हें अपनी क्षमताओं पर थोड़ा और विश्वास करने में मदद मिली।