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मेरे खेल आदर्श: एचएस प्रणय के लिए तौफिक हिदायत क्रिकेट के 'भगवान' सचिन तेंदुलकर की तरह थे

बैडमिंटन को आसान बनाने की तौफीक हिदायत की अद्भुत क्षमता ने युवा एचएस प्रणॉय का ध्यान आकर्षित किया।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

वो एक ऐसे शटलर थे, जिसके सर्वश्रेष्ठ फॉर्म और कौशल को देखना बहुत ही खुशी की बात होती थी। उनके हर शॉट और स्ट्रोक में मास्टर-क्लास दिखता था और खिताब जीतना तो उनके लिए बाएं हाथ का खेल था। लगता था उन्हें इसी खेल के लिए बनाया गया है।

किसी एथलीट के लिए प्रेरणा बनने और उसे अपनी क्षमता के अनुसार न्याय करने का हौसला देते थे। अपने शानदार खेल से वो सबका ध्यान वो अपनी ओर खीच लेते थे, उनकी ये क्षमता उन्हें अदभुत बनाती थी। इंडोनेशियाई दिग्गज तौफिक हिदायत (Taufik Hidayat) ने भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी को इसी तरह प्रभावित कर दिया।

हिदायत चिराग शेट्टी (Chirag Shetty) के लिए एक प्रेरणा थे और अनुभवी भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय के लिए भी एक आदर्श हैं। एचएस प्रणॉय (HS Prannoy) ने ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में कहा, "मेरे लिए, तौफीक बैडमिंटन में सबसे बड़े आदर्शों में से एक है,"

"मुझे याद है कि जब मैं छोटा था और अपने जूनियर लेवल पर खेलता था, तब मैं उनकी तरह खेलना चाहता था, तो मैं उनके खेल को बहुत देखता था।"

'सीडी के जरिए देखता था तौफिक के मैच रिप्ले'

एक बारे के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता, एक बार के विश्व चैंपियन और दो बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता तौफिक हिदायत ने अपने करियर में काफी सफलता हासिल की।

इंडोनेशियाई दिग्गज अपने बैकहैंड और बैडमिंटन से कोर्ट के हर इंच को कवर करने की क्षमता के लिए अच्छी तरह से जाने जाते थे, जिसने उन्हें अधिकांश शटल को रिटर्न करने में सफलता मिलती थी। तौफिक हिदायत की भी एक शैली थी जो बहुत ही शानदार थी, एक ऐसा गुण जो एचएस प्रणॉय को आकर्षित करती थी।

प्रणॉय ने कहा, "तौफीक ने बैडमिंटन को वास्तव में आसान बना दिया जिस तरह से वो खेलते थे, मुझे लगता है कि वो बैडमिंटन को आकर्षक बनाने में सक्षम थे। वो वास्तव में बेहतरीन खिलाड़ी थे और नियमित रूप से अपने फॉर्म को बरकरार रखने में सक्षम थे।”

"अगर किसी खिलाड़ी से उनकी तुलना कि जाए, तो मैं कहूंगा कि वो सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) की तरह खेलते थे। बेशक, दूसरे खिलाड़ी वास्तव में सचिन से अच्छी बल्लेबाजी कर सकते हैं, लेकिन बच्चे सचिन को फॉलो करना चाहते हैं क्योंकि उनके पास सबसे अलग और अद्भुत शैली है।”

इंडोनेशियाई दिग्गज तौफिक हिदायत के बेहतरीन खेल शैली ने भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय को प्रभावित किया।

1990 और 2000 के दशक में पलने और बढ़ने का मतलब था कि भारत में बैडमिंटन के लिए उतना टेलीविजन कवरेज नहीं था और जब वह तौफिक हिदायत के मैच देखना चाहते थे, तो एचएस प्रणय को धैर्य के साथ बहुत कुछ करना पड़ता था।

प्रणॉय ने कहा, "मुझे याद है कि मैंने अपने पिताजी से उनके दोस्तों से मैच की सीडी लाने के लिए कहा था और मेरे एक चाचा थे जो विदेश में रहते थे, जब भी वो हमसे मिलने आते, तो उनसे हमें टेप और सीडी मिलते थे। मैं एक ही मैच को पांच या छह बार देखता था।”

“इसलिए, तौफीक के लिए मेरी सभी शुरुआती यादें ज्यादातर रिप्ले हैं और उसमें लाइव मैच नहीं है। मुझे लगता है कि सोशल मीडिया ने वास्तव में उस प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया है।

जब तौफिक हिदायत के खिलाफ कोर्ट में उतरे प्रणॉय

हालांकि अधिकांश खिलाड़ियों को बचपन के हीरो के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने का मौका नहीं मिलता है - कई खिलाड़ी शीर्ष पर रहते हुए अपने करियर को लंबा नहीं कर पाते हैं - एचएस प्रणॉय उन भाग्यशाली लोगों में से एक थे, जिन्हें 20 साल की उम्र में एक टूर्नामेंट में अपने हीरो तौफिक हिदायत के खिलाफ खेलने का मौका मिला।

एचएस प्रणय को 2013 के इंडिया ओपन में दूसरे दौर में तौफिक हिदायत का सामना करने का मौका  मिला। जिसमें भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने 26-24, 21-9 से जीत दर्ज की। प्रणय ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया, जहां वो ली चोंग वेई से हार गए।

"मेरे लिए यह एक शानदार अनुभव था क्योंकि जब आप बड़े हो जाते हैं, तो आप हमेशा अपने हीरो के खिलाफ खेलना चाहते हैं, लेकिन आपको कभी नहीं लगता कि ये वास्तव में होगा। मैच के बाद, मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या ये सच है या ये सब सिर्फ एक सपना था।

"बेशक, तौफिक तब तक रिटायरमेंट के करीब थे, लेकिन मुझे बस इतनी खुशी थी कि मुझे उनके जैसे दिग्गज के खिलाफ खेलने का मौका मिला।"

हालांकि प्रणॉय ने मैच के बाद तौफिक हिदायत के साथ ज्यादा बातचीत नहीं की, लेकिन भारतीय शटलर ने इंडोनेशिया के दिग्गज को प्रभावित किया और कुछ टिप्स लिए।

प्रणॉय ने कहा, "मुझे लगता है कि यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है- तौफीक, ली चोंग वेई (Lee Chong Wei) और लिन डैन (Lin Dan) जैसे खिलाड़ियों ने मुझे उनके साथ खेलने के बाद ही नोटिस किया।"

"ये सब वास्तव में आपको कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है और थोड़ी सी पहचान आपको ये विश्वास दिलाती है कि आप बहुत बेहतर कर सकते हैं।"

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी को वर्तमान में रेस टू टोक्यो ’रैंकिंग में 30वें स्थान पर रखा गया है - जो टोक्यो ओलंपिक के लिए ड्रा का निर्धारण करता है - और उन्हें अपने पहले ओलंपिक में सीधे प्रवेश पाने के लिए शीर्ष -16 में पहुंचना होगा।