साइना नेहवाल और पारुपल्ली कश्यप: बैडमिंटन इतिहास में पति और पत्नी की क़ामयाब जोड़ी

भारतीय बैडमिंटन के दो सुपर स्टार साइना नेहवाल और उनके पति पारुपल्ली कश्यप दशकों से एक दूसरे के ख़ुशी और ग़म में शरीक़ हैं 

आधुनिक भारतीय बैडमिंटन की पहली स्टार साइना नेहवाल (Saina Nehwal) ने बीजिंग 2008 में अपने पहले ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर भारतीय खेल में क्रांति ला दी थी। चार साल बाद, वह लंदन 2012 में अपने कांस्य पदक के साथ ओलंपिक पोडियम पर खड़ी होने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं और तब एख नई ऊंचाइयों पर पहुंच गईं थीं।

भारतीय बैडमिंटन के उत्थान में एक और नाम पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap) का रहा है, जो 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में अपने कांस्य के साथ प्रमुखता से पहुंचे थे। 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने निलुका करुणारत्ने (Niluka Karunaratne)को हराकर ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले भारत के पहले पुरुष शटलर बने थे।

उन्होंने 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और 32 वर्षों में ऐसा करने वाले पहले पुरुष भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए। पारुपल्ली कश्यप और साइना नेहवाल, दो भारतीय बैडमिंटन के सबसे बड़े नाम, अविश्वसनीय ऊँचाई और चोट से जूझने में एक साथ रहे हैं।

वे एक दशक से अधिक समय से एक जोड़ी हैं, आधिकारिक तौर पर 2018 में दोनों परिणय सूत्र में बंधे थे।

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शुरूआती साल

साइना नेहवाल और पारुपल्ली कश्यप 1997 में एक शिविर से एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन केवल 2002 में नियमित रूप से मिलना शुरू किया जब उन्होंने हैदराबाद में एक साथ प्रशिक्षण लिया।

जब तत्कालीक मुख्य राष्ट्रीय टीम के कोच, पुलेला गोपीचंद ने 2004 में अपनी बैडमिंटन अकादमी की स्थापना की, तो ये जोड़ी उनके नीचे प्रशिक्षण के लिए स्थानांतरित हो गई और उन्होंने उस वर्ष विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप से पहले की अवधि में डेटिंग शुरू कर दी थी।

पारुपल्ली कश्यप ने इस बात को सालों बाद ईएसपीएन के साथ हुई बातचीत में स्वीकार किया था।

इस भारतीय महिला बैडमिंटन स्टार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “जब आप प्रशिक्षण लेते हैं तब भी प्रतियोगिता होती है और मैं प्रशिक्षण में भी कश्यप से बेहतर होने के लिए दृढ़ थी। ऐसा नहीं है कि मुझे उन्हें जीतते हुए देखना पसंद नहीं था, लेकिन मेरे अंदर प्रतिस्पर्धी भावना बहुत ज्यादा है।”

यह संबंध और मजबूत हो गया क्योंकि प्रभावशाली युवाओं ने टूर्नामेंट के लिए दुनिया भर में एक साथ यात्रा की, हालांकि उन्होंने इसे बाहरी दुनिया के लिए प्रकट नहीं किया, लेकिन हर कार्यक्रम में नैतिक और भावनात्मक समर्थन के लिए एक-दूसरे का समर्थन किया।

ओलंपिक की ऊंचाई

संयोग से, पिछला दशक साइना नेहवाल और पारुपल्ली कश्यप दोनों के लिए यादगार था। यह 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के साथ शुरू हुआ, जहां वे दोनों पदक के साथ लौटे, पहले एक स्वर्ण और बाद में कांस्य। 2012 के लंदन ओलंपिक में, उन्होंने नए रिकॉर्ड बनाए - साइना नेहवाल ने भारतीय बैडमिंटन का पहला ओलंपिक पदक जीता, जबकि पारुपल्ली कश्यप क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर बने।

यह कई वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम था, परुपल्ली कश्यप ने अनुभवी पत्रकार बोरिया मजूमदार और नलिन मेहता को अपनी पुस्तक, ड्रीम्स ऑफ अ बिलियन: इंडिया और ओलंपिक गेम्स में याद किया। उन्होंने कहा, ‘’हमने पहले कभी इस तरह का प्रशिक्षण नहीं लिया था और इसने हमें ओलंपिक में जाने वाले तेज-तर्रार मैचों के लिए तैयार किया। अगर साइना को ओलंपिक से पहले बुखार नहीं होता, तो वह और भी बेहतर तरीके से तैयार होतीं।‘’

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एक साल बाद, वह पहले BWF विश्व चैंपियनशिप पदक से चूक गए, जबकि साइना नेहवाल भी सेमीफाइनल से एक कदम पीछे रह गईं।

2014 में, पारुपल्ली कश्यप ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता, जो 1982 में सैयद मोदी के बाद ऐसा करने वाले पहले पुरुष भारतीय बैडमिंटन स्टार बने, और साइना नेहवाल ने उसी साल अपना पहला एशियन गेम्स पदक जीता (कांस्य)।

साइना नेहवाल ने यहां से पीछे मुड़कर नहीं देखा,और वह 2015 में शीर्ष रैंकिंग वाली महिला एकल खिलाड़ी बन गईं और विश्व चैंपियनशिप में रजत जीतने के लिए आगे बढ़ीं।

अक्टूबर 2015 में, पारुपल्ली कश्यप ने अपनी पहली चोट का सामना किया, और इस समय साइना नेहवाल ने भावनात्मक तौर पर उनका ख़ूब ख़्याल रखा था।

स्क्रॉल.इन के साथ इंटरव्यू में साइना नेहवाल के पति ने कहा, "हम शुरू से ही एक-दूसरे के परिणामों के बारे में चिंतित रहते थे ... (जब मैं हार गया था) तो वह मेरी माँ की तरह क्रोधित हो जाती थी।"

“वह केवल मुझे बताती थी कि आपको कड़ी मेहनत करनी है।"

वह घुटने की चोट के कारण रियो 2016 ओलंपिक की यात्रा करने से भी चूक गए थे, जबकि साइना नेहवाल ने इस इवेंट की शुरुआत में ही हार मान ली थी, जहां पीवी सिंधु ने एक ऐतिहासिक रजत पदक के साथ दुनिया के सामने एक अलग पहचान बनाई।

यह दोनों के लिए एक कठिन समय था। कश्यप ने तब ईएसपीएन से बातचीत में कहा था, ‘’हम एक समान दौर से गुजर रहे हैं और एक-दूसरे को प्रेरित करने की कोशिश कर रहे हैं।‘’

“हम एक दूसरे से सीखने, मदद और सुधार करने की कोशिश करते हैं। हम सब कुछ - आदान-प्रदान करते हैं। ”

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❤️ 📸: @revanthtummala

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साइना नेहवाल के जीवनसाथी और कोच

पारुपल्ली कश्यप को अक्सर साइना नेहवाल के कोच के तौर पर डगआउट में देखा गया है, जो एक प्रक्रिया थी जो कई वर्षों से अनौपचारिक रूप से चल रही थी।

कश्यप ने कहा, "साइना जानती थी कि वह मुझ पर भरोसा कर सकती हैं और साथ ही, मैं वास्तव में अपनी चोट की वजह से खेल नहीं सकता था इसलिए मुझे लगा कि कम से कम मैं इतना कर सकता हूं कि उसके लिए कुछ शटल फेंक दूं।"

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पारुपल्ली कश्यप मुख्य रूप से खेल के तकनीकी पहलुओं के साथ उनकी मदद करते हैं, एक ऐसा क्षेत्र जो उन्हें लगता है कि वह वहां बेहतर हैं, और साइना नेहवाल की मानसिक शक्ति के साथ मिलकर इसका अच्छा फल 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी मिला।

भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी ने धीरे-धीरे अपने रूप को फिर से हासिल करना शुरू कर दिया था और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में पीवी सिंधु के खिलाफ उतरी थीं, जहां उन्होंने बाद में सीधे गेमों में बाजी मारते हुए इवेंट में अपना दूसरा स्वर्ण जीता।

आख़िर में कश्यप ने कहा कि, “कभी-कभी ऐसा लगता है कि हमारे शुरुआती दिनों से अब तक कुछ भी नहीं बदला है।‘’

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