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माय ग्रेटेस्ट गेम: जब सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने भारत को ऐतिहासिक जीत की राह दिखाई

ओलंपिक सिल्वर मेडल विजेता के खिलाफ भारतीय बैडमिंटन मिक्स्ड टीम में खेलते हुए सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और अश्विनी पोनप्पा ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई और जीत की ओर ले गए।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

2018 कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए ऐतिहासिक रहा।

प्रशंसकों द्वारा भारत में खिलाड़ी और खेल को उंचा दर्जा दिया जाता है तो ऐसे में खिलाड़ियों ने भी अपने प्रदर्शन से प्रशंसकों का मन खूब लुभाया है। 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में अच्छे प्रदर्शन के बाद 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में (2018 Commonwealth Games) भारतीय खिलाड़ियों ने मेडल की झड़ी लगा दी। उस संस्करण में भारत ने कुल 66 मेडल अपने नाम किए जिनमें 26 गोल्ड, 20 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं। इस संस्करण में ऐसे भी पल देखें गए जब किसी भारतीय खिलाड़ी ने पहली बार कॉमनवेल्थ में मेडल जीता हो और यह भी एक वजह है जिसने 2018 कॉमनवेल्थ को ख़ास बनाया है।

इस लिस्ट को टॉप टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने किया। टेबल टेनिस युवा खिलाड़ी मनिका बत्रा (Manika Batra) ने जिस भी इवेंट मई भाग लिया था उस इवेंट में कम से कम एक मेडल ज़रूर जीता था। इतना ही नहीं बल्कि CWG में वुमेंस टीम ने अपना पहला गोल्ड मेडल भी हासिल किया।

इसके बाद जेवलिन थोर्वर नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) अपने डिसिप्लिन में पहले भारतीय बनें जिन्होंने CWG में गोल्ड मेडल जीता। वहीं वेटलिफ्टर मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) भारत के लिए गोल्ड कास्ट में पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

ऐसे में भारतीय बैडमिंटन सितारे भी कहां पीछे रहने वाले थे। साइना नेहवाल (Saina Nehwal) ने हमवतन पीवी सिंधु (PV Sindhu) को हराया और गेम्स में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। इतना ही नहीं बल्कि उस संस्करण में मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारत ने खिताब अपने नाम किया।

उस मुकाबले को भारतीय बैडमिंटन स्टार सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी (Satwiksairaj Rankireddy) ने अपने जीवन के सबसे बेहतरीन मुकाबलों में से एक बताया।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए भारतीय शटलर ने कहा “आप जानते हैं कि उस समय बहुत से लोगों को लगता था कि अपने प्रतिद्वंदियों के आगे हम खड़े तक नहीं हो पाएंगे क्योंकि हमारा डबल्स उनके आगे कमज़ोर था।”

“उस दिन प्रशंसकों ने पूरा दिन बहुत साथ दिया। मुझे याद है कि उस दिन एरीना पूरा भरा हुआ था, बहुत से भारतीय प्रशंसक भी थे और साथ ही उतने मलेशिया के फैंस भी थे और फिर वहां कुछ लोग ऐसे थे जिनके लगता था कि हम कुछ नहीं कर पाएंगे।”

शटलर ने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “मैंने खुद के लिए बहुत से नकारात्मक भाव पैदा कर लिए थे। मुझे लोगों को गलत साबित करना अच्छा लगता है। मुझे ऐसी चीज़ों को चुनौती की तरह लेना पसंद है। तीसरी गेम में मैं उस ज़ोन में आ चुका था। मुझे बस हारना नहीं था। मुझे एक पॉइंट साबित करना था।”

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और अश्विनी पोनप्पा ने ओलंपिक सिल्वर मेडल विजेता चैन पेंग सून और गोह लिउ यिंग को फाइनल में मात दी।

अश्विनी पोनप्पा (Ashwini Ponnappa) के साथ कोर्ट पर जोड़ी बनाकर उतरे सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने ओलंपिक सिल्वर मेडल विजेता चैन पेंग सून (Chan Peng Soon) और गोह लिउ यिंग (Goh Liu Ying) को पहली गेम 21-14 से हराया।

दूसरी गेम में भी भारतीय जोड़ी ने अच्छा खेल दिखाया लेकिन मलेशियाई खिलाड़ियों ने स्फूर्ति और अच्छे शॉट्स का प्रमाण पेश करते हुए उसे जीता और मुकाबले को तीसरी गेम तक ले गए।

लय को अपने साथ रखते हुए चैन पेंग सून और गोह लिउ यिंग ने फाइनल गेम की शुरुआत बेहतरीन तरीके से की और मध्य समय तक 5 अंकों की बढ़त भी बनाई। जब सब लोग भारतीय सपने के खिलाफ खड़े थे तब उन्हीं की टीम ने उन्हें प्रोत्साहन दिया और मेडल पर भारत का नाम लिखने में मदद की।

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने कहा “यह एक कारण है कि मुझे टीम इवेंट खेलना पसंद है। आप कभी अकेले नहीं होते। मुझे याद है मैं गोपी सर (पुल्लेला गोपीचंद) और टैन कोच (Tan Kim Her) से ब्रेक के दौरान बात कर रहा था। मुझे नहीं लगता कि उन्हें कभी भी ऐसा लगा कि हम मुकाबला हार जाएंगे।”

“कोच टैन में बहुत आत्मविश्वास था कि हम लीड लेंगे और मुकाबले को जीत जाएंगे। साथ ही आपकी पूरी टीम आपका जोश बढ़ा रही है। टाई का पहला मुकाबला हमारा था और दबाव बहुत ज़्यादा नहीं था। हमे पता था कि किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) और साइना नेहवाल हमारी वापसी करा देंगे और उसके बाद मेरा मेंस डबल्स का मुकाबला भी बचा हुआ था।”

किदांबी श्रीकांत ने मलेशिया के ली चोंग वेई को सधे सेटों से मात दी।

सभी को चौंकाते हुए सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और अश्विनी पोनप्पा ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए 5-मैच मुकाबले में भारत को 1-0 से बढ़त दे दी थी।

इसके बाद किदांबी श्रीकांत ने बैडमिंटन दिग्गज ली चोंग वेई (Lee Chong Wei) के खिलाफ मेंस सिंगल्स में जलवा दिखाया और नेहवाल ने तीन गेम मुकाबले में सोनिया चिया (Soniia Cheah) को मात दी और पोडियम के सबसे ऊपरी हिस्से पर जगह बना ली।

 सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी का मानना है कि गोल्ड कास्ट की जीत ने भारतीय बैडमिंटन को नई दिशा दी है। उन्होंने बात करते हुए कहा “मुझे याद है कि साइना दीदी ने मुझे कहा था कि यह जीत हमे डबल्स टीम की वजह से मिली है।”

“बिलकुल, श्रीकांत भैया ने बहुत अच्छा खेल दिखाया और नेहवाल ने बेहतरीन फिनिश भी दी लेकिन वह जानती थी कि अश्विनी और मैंने उन्हें बहुत अच्छी लय प्रदान कर दी थी। वह एक अच्छा भाव था जब उन्होंने हमारी कोशिश को सरहाया।”

“मुझे लगता है कि उस जीत के बाद लोग भारतीय बैडमिंटन डबल्स को भी तवज्जो देने लग गए हैं। उसके बाद सबने कहा ‘भारत के डबल्स भी अच्छे हैं’। हम उस दिन डबल्स की वजह से जीते।”