फ़ीचर | बास्केटबॉल

NBA की बड़ी लीग में खेलने के सपने को पूरा करने की दहलीज़ पर हैं प्रिंसपाल सिंह  

NBA जी-लीग सेलेक्ट टीम ’इग्नाइट’ में जगह बनाने वाले भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी प्रिंसपाल ने कई बड़े खिलाड़ियों को पछाड़कर इस मुक़ाम पर पहुंचे हैं। 

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

वो थोड़े शर्मीले हैं बहुत कम बोलते हैं, लेकिन जब बात NBA और आगामी जी-लीग सीज़न की होती है, तो वहां प्रिंसपाल सिंह (Princepal Singh) सबसे ज्यादा चर्चित हैं।

19 वर्षीय सिंह हाल ही में नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (NBA) की माइनर लीग या जी-लीग के लिए चुने जाने वाले सिर्फ चौथे भारतीय बने हैं

वो सतनाम सिंह (Satnam Singh), पालप्रीत सिंह बराड़ (Palpreet Singh Brar) और अमज्योत सिंह गिल (Amjyot Singh Gill) जैसे भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ियों की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। सतनाम और अमज्योत ने अपनी-अपनी जी-लीग टीमों के लिए प्रदर्शन किया, लेकिन पालप्रीत सिंह ऐसा करने से चूक गए।

लेकिन इनमें से कोई भी खिलाड़ी प्रिंसपाल सिंह के जितना युवा नहीं था। इस भारतीय खिलाड़ी ने ओलंपिक चैनल को बताया, "मैं बहुत उत्साहित हूँ। बस कोर्ट पर उतरने का इंतजार नहीं हो पा रहा है।”

“मैंने जी-लीग के बारे में बहुत कुछ सुना है और ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। हमारे सामने दो लोग खेल चुके हैं लेकिन मैं उनसे आगे बढ़कर NBA रोस्टर में जाना चाहता हूं।”

सतनाम 2015 में NBA में शामिल होने वाले पहले भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी बने, जबकि अमज्योत और प्रिंसपाल ने जी-लीग में खेलने के लिए एक अलग रास्ता अपनाया है।

छह फुट 10 इंच लंबे कद के खिलाड़ी, जो 7'2 ऊंचाई तक हाथ उठा सकते हैं, NBA जी-लीग सेलेक्ट टीम का एक हिस्सा होंगे। जिसमें दुनिया भर के अन्य लोगों के अलावा काई सोटो और जालन ग्रीन जैसी दिग्गजों के खेलने की उम्मीद है।

जी-लीग में एक नियमित करियर की दिशा में ये एक कदम के रूप में माना जा सकता है, इग्नाइट नामक टीम सीजन के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय और अकादमी टीमों का सामना करने के अलावा जी-लीग की टीमों के खिलाफ कुछ चुनिंदा मैच खेलेगी।

जहां इन खिलाड़ियों को जी-लीग की यात्रा के साथ होने वाली थकान और उससे बचने में मदद करेगा, वहीं प्रिंसपाल सिंह का मानना ​​है कि ये अवसर अपने साथ चुनौतियों का सेट लेकर आता है।

उन्होंने कहा, “ये एक खास अनुभव होगा, मुझे बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौक़ा मिलेगा और बड़े स्तर पर बास्केटबॉल खेलने का भी अवसर होगा, ये बहुत अच्छी बात है।”

“भले ही हम नियमित रूप से जी-लीग सीज़न नहीं खेल रहे हैं, मुझे लगता है कि हमारे मैचों पर कड़ी नज़र रखी जाएगी। मैं इसमें एक छाप छोड़ना चाहूंगा।”

‘बास्केटबॉल कैसे खेली जाती है? कोई नहीं जानता था’

पंजाब के गुरदासपुर के एक कस्बे डेरा बाबा नानक में पले-बढ़े एक युवा प्रिंसपाल सिंह ने कभी बास्केटबॉल के बारे में नहीं सुना था।

"उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, “मेरे गाँव में, हम बहुत से लोग वॉलीबॉल खेलते थे। मुझे याद है, हर शाम हम वो खेल खेलने के लिए जाते थे। लेकिन बास्केटबॉल के बारे में नहीं जानते थे। इसके बारे में किसी ने सुना भी नहीं था। हमारे लिए ये वॉलीबॉल था। बास्केटबॉल, क्या होता है? किसी को नहीं पता था।”

साल 2014 तक लैंकी लैड को हुप्स में पेश किया गया था, जिसने अपने पेशेवर करियर की शुरूआत की थी।

उन्होंने याद करते हुए कहा, “मुझे याद है, हम वॉलीबॉल ट्रायल के लिए लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम गए थे। लेकिन, मेरी मुलाकात लुधियाना बास्केटबॉल अकादमी के सचिव तेजा सिंह धालीवाल से हुई।”

उनका लंबा कद देखकर धालीवाल को यकीन हो गया कि प्रिंसपाल सिंह बास्केटबॉल अच्छा खेलेंगे। जिस व्यक्ति ने सतनाम और अमज्योत सहित देश के कई शीर्ष प्रतिभाओं को पहचाना था, उन्होंने आगे चलकर खिलाड़ियों के विकास के लिए काम किया।

प्रिंसपाल सिंह ने अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा, "मुझे बास्केटबॉल के लिए सिर्फ दो सप्ताह देना है। अगर मुझे ये पसंद नहीं आया, तो मैं वॉलीबॉल में वापस जा सकता हूं।”

“मैं थोड़ा उलझन में था, लेकिन फिर मैंने इस नए खेल को खेलने का मन बनाया। मुझे वॉलीबॉल से ज्यादा इस खेल में मजा आने लगा। मैं इस खेल को अच्छी तरह से समझने लगा।"

प्रिंसपाल सिंह के आगे की योजना

आने वाले महीनों में प्रिंसपाल सिंह ने अमेरिका के ओहियो में तीन साल की स्कोलरशिप के लिए लगभग 400 उम्मीदवारों को पछाड़ने से पहले लुधियाना केंद्र में बास्केटबॉल की मूल बातें सीखीं। लेकिन वीजा के मामले में अड़चन आने का मतलब पंजाब के इस युवा को अपने सपने को छोड़ने जैसा था।

प्रिंसपाल सिंह ने याद करते हुए कहा, "छह महीने हो गए थे, मैं लुधियाना अकादमी में प्रशिक्षण ले रहा था, जब स्पायर के लोग ट्रायल के लिए आए।"

“मेरे पास वास्तव में अच्छा अवसर था (स्पायर इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण के लिए)। मैं उनकी अकादमी में भी खेलने के लिए उत्साहित था। लेकिन वीजा बाधा बन रही थी। बाद में, NBA अकादमी में जाने का मौका मिला। मुझे लगता है भगवान ने मेरे लिए पहले से ही योजना बनाई हुई थी।”

साल 2017 में प्रिंसपाल सिंह को नई दिल्ली में NBA अकादमी इंडिया में शामिल किया गया। ये देश के शीर्ष बास्केटबॉल प्रतिभाओं के लिए शीर्ष स्तर का प्रशिक्षण केंद्र है।

डेढ़ साल बाद, भारतीय खिलाड़ी NBA ग्लोबल अकादमी में चले गए, जो ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर चलाया जाता है।

ग्रेजुएशन से पहले इस युवा ने ग्लोबल अकादमी में अगले दो साल बिताए। प्रिंसपाल सिंह का मानना ​​है कि कैनबरा के अनुभव ने उन्हें आज के पेशेवर रूप देने में मदद की है।

उन्होंने कहा, “कैनबरा में, मेरे साथ दुनिया भर के खिलाड़ी थे। सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनाने के लिए दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ को ऑस्ट्रेलिया में लाया गया था। और मैं उनके बीच भाग्यशाली था।”

"उस दौरान मेरे मन में एक सवाल था कि एक पेशेवर खिलाड़ी का जीवन कैसा होता है। ये केवल प्रशिक्षण के बारे में नहीं और आप कोर्ट में क्या करते हैं, बल्कि ये भी कि आप अपने आप को कोर्ट के बाहर कैसे ले जाते हैं। कैसे आप अंक अर्जित करते हैं। यह कुछ ऐसा है जो मैंने वहां सीखा है।”

"मेरे खेल में भी सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद एक पेशेवर एथलीट का जीवन जीना था। ये कुछ ऐसा है जो मैंने ऑस्ट्रेलियाई में भी अनुभव नहीं किया था।"

ग्लोबल अकादमी के सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक, प्रिंसपाल सिंह सीजन के लिए इग्नाइट रोस्टर बनाने वाले एकमात्र ग्रैजुएट हैं। हालांकि कुछ का कहना है कि यो अवसर अपने साथ दबाव की भावना लाता है, हालांकि भारतीय हूपस्टर ऐसा कुछ नहीं सोचते हैं।

लॉस एंजिल्स लेकर्स के एंथनी डेविस के फैन प्रिंसपाल ने कहा, "नहीं, ऐसा कोई दबाव नहीं है क्योंकि मैंने यूएसए में NBA अकादमी के लिए खेला है। इसलिए ऐसा कोई दबाव नहीं है।"

“मैं किसी भी तरह का दबाव नहीं लेता। मैं अपना सौ फीसदी देता हूं और अपना खेल और अभ्यास करता हूं। मैं इस नए अनुभव का आनंद लेना चाहता हूं और मजे करना चाहता हूं। यही मेरे आगे की योजना है।"