ओलंपिक पदक जीतने के बाद मेरे मुक्केबाज़ी के सफ़र की शुरुआत होगी – अमित पंघल

टोक्यो 2020 में भारतीय मुक्केबाज़ अमित पंघल देश की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक हैं

भारत ने भले ही जॉर्डन के अम्मान में आयोजित एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स में कमाल का प्रदर्शन करते हुए 2020 ओलंपिक के लिए अपने सबसे बड़े दल पर मुहर लगा दी हो , लेकिन इस फ़हरिस्त में दो नामों की बात ही कुछ और है।

एक नाम है एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) का जिन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक पर कब्ज़ा जमाया था। बिना मैरी कॉम का नाम लिए भारतीय मुक्केबाज़ी की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन उनके अलावा भी एक और नाम है, और वह हैं अमित पंघल (Amit Panghal)।

24 वर्षीय इस भारतीय मुक्केबाज़ ने ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स के क्वार्टरफ़ाइनल मुक़ाबले में फ़िलिपींस के कार्लो पालम (Carlo Paalam) को स्प्लिट निर्णय से हराते हुए ओलंपिक 2020 का टिकट हासिल कर लिया है।

सिर्फ़ 5’3” (पांच फ़िट, तीन इंच) लंबे अमित पंघल अपने कैटेगिरी (52 किग्रा) में भले ही दूसरों से छोटे क़द के हों, लेकिन उनका पंच काफ़ी ताक़तवर और सटीक है।

भाई-भाई का खेल बन गया था मुक्केबाज़ी

अमित को पहली बार मुक्केबाज़ी में आने के लिए उनके बड़े भाई अजय ने प्रेरित किया था, जो ख़ुद भी एक मुक्केबाज़ बनना चाहते थे। और उनके कोच ने उन्हें इसकी और जाने के लिए ख़ूब प्रोत्साहित किया।

ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में अमित पंघल ने कहा, ‘’मैं शायद तब 11 या 12 साल का था, जब मेरे बड़े भाई ने मुझे मुक्केबाज़ी में लाया था। शुरुआत में तो मैं सिर्फ़ एक फ़िटनेस रूटीन के तौर पर मुक्केबाज़ी किया करता था, लेकिन मेरे कोच अनिल धनकर ने कहा कि मैं भविष्य में देश के लिए अच्छा कर सकता हूं।‘’

हालांकि बॉक्सिंग के लिए ज़रूरी गीयर और खाने पीने की रूटीन के हिसाब से चलना मेरे लिए तब काफ़ी महंगा था। और तब मेरे भाई अजय ने इसे पूरा करने के लिए ख़ुद को झोंक डाला।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के साथ बातचीत के दौरान अमित पंघल ने कहा, ‘’मेरे भाई भारतीय आर्मी में हवलदार बन गए थे, और वहां से होने वाली आमदनी का ज़्यादातर हिस्सा वह मेरी ज़रूरतों को पूरा करने में लगाते थे। वह हमेशा कहते थे कि तुम किसी और चीज़ के बारे में मत सोचो और सारा ध्यान मुक्केबाज़ी पर लगाओ।‘’

अमित पंघल ने अपने पहले ओलंपिक यानी टोक्यो 2020 के लिए किया क्वालिफ़ाई
अमित पंघल ने अपने पहले ओलंपिक यानी टोक्यो 2020 के लिए किया क्वालिफ़ाईअमित पंघल ने अपने पहले ओलंपिक यानी टोक्यो 2020 के लिए किया क्वालिफ़ाई

बड़े स्तर पर जब मिलने लगी क़ामयाबी

अमित पंघल ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप का ख़िताब अपनी पहली ही कोशिश में हासिल कर लिया था, ये साल 2017 था जब पहली बार अमित ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। तब 21 वर्षीय इस मुक्केबाज़ ने सभी को हैरान करते हुए ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरीं थीं। ये साल अमित के लिए और भी ख़ुशियां लेकर आया जब ताशकंत में उस साल हुई एशियन चैंपियनशिप में भी अमित के नाम कांस्य पदक आया।

लेकिन सही मायनों में साल 2018 ने अमित पंघल के लिए सबकुछ बदल कर रख दिया था, गोल्ड कोस्ट में हुए 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में अमित पंघल ने रजत पदक जीता और फिर उसी साल एशियन गेम्स में अमित पंघल ने स्वर्ण पदक जीतते हुए शोहरत की बुलंदियों पर पहुंच गए थे।

एशियन गेम्स के फ़ाइनल में उन्होंने हसनबॉय दुसमतोव (Hasanboy Dusmatov) को शिकस्त देते हुए गोल्ड मेडल जीता था। ये वह मुक्केबाज़ थे जिनके नाम 2016 रियो ओलंपिक का स्वर्ण पदक था, यहीं से अमित पंघल ने ख़ुद को मुक्केबाज़ी की दुनिया में स्थापित कर दिया था।

2019 एशियन चैंपियनशिप में भी अमित पंघल ने गोल्ड मेडल जीता और वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीतते हुए तो इतिहास रच डाला था। उनसे पहले किसी भी भारतीय पुरुष मुक्केबाज़ ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक नहीं हासिल किया था। 2015 और 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में शिव थापा (Shiva Thapa) और गौरव बिधुरी (Gaurav Bidhuri) ने ही उनसे पहले कांस्य पदक जीता था।

इस वर्ल्ड चैंपियनशिप को मनीष कौशिक (Manish Kaushik) ने एक और कांस्य जीतते हुए यादगार बना दिया था।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीते रजत पदक और कुछ बेहतरीन क़ामयाबियों के दम पर अमित पंघल 52 किग्रा कैटेगिरी में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक संघ (IOC) की मुक्केबाज़ी रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर भी पहुंच गए। जिसके बाद जॉर्डन के अम्मान में हुई एशियन बॉक्सिंग क्वालिफ़ायर्स में अमित एक बड़े दावेदार थे, हालांकि उन्होंने क्वार्टरफ़ाइनल जीत के साथ 2020 ओलंपिक में तो स्थान पक्का कर लिया। लेकिन सेमीफ़ाइनल में उन्हें निराशा हाथ लगी, जब हू जियांगुआन (Hu Jianguan) ने उन्हें मात दे दी थी।

अब है ओलंपिक पदक जीतने का सपना

अनिल धनकर ने जो बात अमित पंघल को कही थी कि ‘देश के लिए तुम अच्छा करोगे’, यही बात आज भी पंघल के ज़ेहन में दौड़ती रहती है और इसी बात ने अमित को यहां तक पहुंचाया है।

अमित पंघल ने आगे कहा, ‘’जब भी मैं सोकर उठता हूं, मैं पहले से भी अच्छी प्रैक्टिस करना चाहता हूं ताकि मैं ज़्यादा से ज़्यादा देश का नाम बढ़ा सकूं।‘’

और दूसरे सभी एथलीट की तरह अमित का भी ख़्वाब है कि उनके नाम भी ओलंपिक पदक हो, एक ऐसी क़ामयाबी जो अभी तक सिर्फ़ दो ही भारतीय मुक्केबाज़ हासिल कर सके हैं। बीजिंग 2008 में विजेन्दर सिंह (Vijender Singh) और लंदन 2012 में मैरी कॉम, इन दोनों ने भारत के लिए कांस्य पदक जीता था। अमित पंघल को उम्मीद है कि इस बार टोक्यो 2020 में भारत इसको दोगुना कर देगा।

अमित पंघल ने कहा, ‘’मुझे उम्मीद है कि भारत इस बार मुक्केबाज़ी में दो पदक जीत सकता है, हमें इसलिए विश्वास है कि हमारी ट्रेनिंग काफ़ी अच्छी हुई है। हमने हाल ही में कई पदक जीते हैं और ओलंपिक में अपने प्रतिद्वंदियों की कमज़ोरियों पर निशाना साधेंगे।‘’

उन्होंने अपनी बात को ख़त्म करते हुए कहा, ‘’मैं अपने इन्हीं प्रदर्शनों को ओलंपिक में भी दोहराने की कोशिश करूंगा, और मुझे भरोसा है कि एक मुक्केबाज़ के तौर पर मेरा सफ़र ओलंपिक पदक जीतने के बाद ही शुरू होगा।‘’

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