मेरी आदर्श मुक्केबाज़ मैरी कॉम बेमिसाल हैं: मंजू रानी

मैरी कॉम और मंजू रानी दोनों ही 2019 विश्व चैंपियनशिप और इंडिया ओपन के लिए भारतीय मुक्केबाज़ी दल की हिस्सा रही हैं।

कई लोगों को आश्चर्य लगता है कि इतने संघर्ष के बाद, इतने वर्षों से 37 वर्षीय एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) लगातार इतना बेहतर प्रदर्शन कैसे कर पाती हैं। इस सवाल का जवाब शायद युवा मुक्केबाज़ मंजू रानी (Manju Rani) को पता है।

अपने पूरे जीवन में मुक्केबाज़ी के करियर में मैरी कॉम को आदर्श मानने वाली मंजू रानी 2018 में ही नेशनल कैंप में 2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता से मिली।

मंजू रानी तब से अपनी आदर्श मुक्केबाज़ के साथ ट्रेनिंग कर रही हैं क्योंकि दोनों विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप, इंडिया ओपन और अन्य टूर्नामेंटों में पिछले साल भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं।

कई महीने साथ में ट्रेनिंग करने के बाद 20 वर्षीय मुक्केबाज़ को अब पता है कि मैरी कॉम को कौन सी चीज बाकियों से अलग करती है।

मंजू रानी ने ओलंपिक चैनल से कहा, "मैंने देखा कि वो अपने ट्रेनिंग सेशन का आनंद लेती हैं। वो दूसरों की तुलना में अपने फुटवर्क पर अधिक ध्यान केंद्रित करती हैं।"

“उन्होंने बहुत कुछ हासिल किया है और जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं उन्हें देखती रहती हूं। मैं किसी दिन उनकी तरह बनना चाहती हूं।”

लंबे समय तक करना पड़ा संघर्ष

जब मंजू रानी ने मुक्केबाज़ी की शुरुआत की थी, तब उन्हें भी अपनी आदर्श मैरी कॉम की तरह मुश्किलों से उबरना पड़ा।

हरियाणा के रिठल फोगाट गांव में जन्मी मंजू रानी जब 10 साल की थीं तभी ही उनके पिता को लीवर कैंसर हो गया था, और फिर उनकी माँ को गाँव में एक कॉस्मेटिक्स की दुकान खोलनी पड़ी थी।

हालात तब मुश्किल हो गए जब मंजू रानी ने कोच सुबी सिंह बेनीवाल के अंदर अपना ज्यादातर बचपन कबड्डी खेलने के बाद बॉक्सिंग में उतरने का फैसला किया।

मंजू रानी ने कहा, "मैंने ज़िला स्तर और अन्य जगहों पर हाथ आजमाए, लेकिन वास्तव में कभी भी बड़े स्तर पर सफलता नहीं मिली और मैंने 2018 तक कोई पदक नहीं जीता।"

तभी मंजू रानी को मुक्केबाज़ी की तरफ ले जाने वाले कोच ने खेल को बदलने की सलाह दी थी।

“मुझे हरियाणा से नहीं चुना गया और पंजाब की नेशनल टीम से प्रतिस्पर्धा का निर्णय लिया। मैंने इस बार खिताब जीता।"

2019 साल रहा बेमिसाल

उसके बाद मंजू रानी को कोई रोक नहीं पाया।

नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के साथ वर्ष की शुरुआत करते हुए, इस छुपे रूस्तम ने 2019 स्ट्रैंड्जा मेमोरियल टूर्नामेंट में रजत के साथ सभी को चौंका दिया।

यूरोप की सबसे पुरानी और सबसे अधिक प्रतिष्ठित मुक्केबाज़ी स्पर्धाओं में से एक में दूसरे स्थान पर रही मंजू ने नेशनल कैंप में स्थान पक्का कर लिया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ चुका था।

हालांकि उनकी प्रशिक्षण व्यवस्था कैंप में ज्यादा नहीं बदली, लेकिन वहां के वातावरण ने मंजू रानी को काफी सुधार करने में मदद की।

“डाइट से लेकर वर्कआउट टिप्स तक, सब कुछ नेशनल कैंप में बेहतर था। इस बॉक्सर ने कहा, "प्रशिक्षण पहले की तुलना में बेहतर था।"

मंजू रानी ने आगे कहा कि, “मुझे पता था कि मेरे पास क्या विशेषताएँ हैं, और मैं अपने कोच से उसके बारे में पूछती रही। मैंने उन्हें बेहतर बनाने पर अधिक ध्यान दिया और फिर एक शानदार सीज़न का आगाज़ हुआ।”

इंडियन ओपन और थाईलैंड ओपन में कांस्य पदक के साथ विश्व स्तर पर निरंतरता दिखाने के बाद, 48 किग्रा बॉक्सर ने पूर्व नेशनल चैंपियन मोनिका को हराकर भारत की विश्व चैंपियनशिप टीम में जगह बनाई।

2019 विश्व चैंपियनशिप में मंजू रानी ने 48 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीता
2019 विश्व चैंपियनशिप में मंजू रानी ने 48 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीता2019 विश्व चैंपियनशिप में मंजू रानी ने 48 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीता

फिर जारी रहा शानदार सफ़र

जहां मैरी कॉम (51 किग्रा), जमुना बोरो (Jamuna Boro) (54 किग्रा) और लोवलिना बोर्गोहेन (Lovlina Borgohain)(69 किग्रा) को 2019 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा, वहीं 19 वर्षीय मंजू रानी फाइनल में पहुंच गईं।

हालांकि छठी वरीयता प्राप्त मंजू रानी रूस की दूसरी वरीयता प्राप्त एकातेरिना पलसेस्वा (Ekaterina Paltceva) से 1-4 से हार गईं, स्वर्ण पदक का मुकाबला काफी करीबी था लेकिन रूसी पहलवान ने लेफ्ट हुक लगाकर बढ़त हासिल की और फिर मैच भी अपने नाम कर लिया।

हालांकि अब विश्व चैंपियनशिप के अनुभव के साथ, मंजू रानी को पता है कि टूर्नामेंट के अगले संस्करण में अपने पदक का रंग बदलने के लिए उन्हें क्या करने की ज़रुरत है।

मंजू रानी ने कहा कि, “मैं अपने गार्ड पर काम कर रही हूँ। जब मैं लड़ती हूं तो ये थोड़ा नीचे रहता है। इसके अलावा, मुझे अपने फुटवर्क में भी सुधार करनी होगा।"

भविष्य में एक और बदलाव की चाहत

इतने दमदार सफर के बावजूद मंजू रानी अब तक टोक्यो 2020 में भारत की सबसे बड़ी मुक्केबाज़ी दल का हिस्सा नहीं हो पाईं हैं और होंगी भी नहीं क्योंकि उनका भारवर्ग अलग है।

गैर-ओलंपिक लाइट-फ्लाइवेट श्रेणी की 48 किलोग्राम भारवर्ग की मुक्केबाज़ मंजू रानी ने पेरिस में होने वाले 2024 ओलंपिक को अपनी आँखों में बसा लिया है, जहां वो 51 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी।

मंजू रानी ने कहा, "मैं इस भारवर्ग को छोड़कर दो साल बाद दूसरे भारवर्ग में मुक्केबाज़ी करूंगी।"

20 वर्षीय ने मुक्केबाज़ ने बताया कि, “मुझे अभी 48 किग्रा वर्ग में कुछ जानकारी है और मैं इसमें और आगे बढ़ना चाहती हूं। धीरे-धीरे, अधिक अनुभव के साथ, मैं 51 किग्रा वर्ग में खेलूंगी।”

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