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माय ग्रेटेस्ट गेम: जब भारतीय बॉक्सर ने लंदन की हार का बदला रियो में लिया

लंदन 2012 में अजीबो गरीब हार का सामना करने के बाद भारतीय बॉक्सर विकास कृष्ण ने रियो 2016 में चार्ल्स कॉनवेल के खिलाफ अपनें पुख्ता पंचिस की पहचान कराई।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

विकास कृष्ण (Vikas Krishan) में कभी भी आत्मविश्वास की कमी नहीं रही है।

चाहे वह यूएसए के फेमस मेडिसन स्क्वायर गार्डन में प्रो बॉक्सिंग की सफलता को छूना हो या अपने प्रतिद्वंदियों को ललकार कर चेतावनी देनी हो, भारतीय बॉक्सर विकास कृष्ण ने हमेशा ही अपने कदम आगे की ओर बढ़ाए हैं।

इतने बड़े बॉक्सर ने भी दुःख के बादलों को स्वीकारा है और उनका भी दिल टूटा है। अपने पहले ओलंपिक यानी लंदन 2012 के दौरान इस भारतीय मुक्केबाज़ को जल्द ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था और वह समय इस एथलीट के लिए अच्छा नहीं रहा था।

20 वर्षीय विकास कृष्ण का सामना यूएसए के एरोल स्पेनस (Errol Spence) के खिलाफ वेल्टरवेट वर्ग में हुआ और भारतीय बॉक्सर के हाथ 13-11 से जीत आई।

इसके बाद वह हुए जो चौंका देने वाला था। इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (International Boxing Association – AIBA) द्वारा मुकाबले की वीडियो दोबारा देखी गई जहां पाया गया कि विकास ने बहुत से फ़ाउल किए थे जो रेफरी की नज़रों में नहीं आ पाए थे।

ऐसे में AIBA ने एरोल स्पेनस को 4 अंक देने की साझी जिस वजह से वह कृषण के खिलाफ 15-11 विजयी घोषित किए थे। यह एक अनोखा कारण था जिस वजह से विकास कृषण को ओलंपिक गेम्स से बाहर होना पड़ा था।

इसके बाद उन्होंने वही किया जो असल खिलाड़ी करता है, वह है अगले मौके की तैयारी। इसके बाद उन्होंने रियो 2016 के लिए क्वालिफाई किया और मन बना लिया था कि अब मुक़ाबलों में जीत केवल सर्वसम्मति निर्णय से ही होगी।

इसके बाद राउंड ऑफ़ 32 में बॉक्सरचार्ल्स कॉनवेल (Charles Conwell) ने इस जोश की गर्माहट को महसूस भी किया।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए विकास ने कहा “2012 में मेरी जीत को पलट दिया था तो ऐसे में अमेरिकी मुक्केबाज़ के खिलाफ़ मेरे उपर अतिरिक्त दबाव भी था। मुझे लगता है कि निजी तौर पर कॉनवेल मेरे लिए फायदेमंद था।

Vikas Krishan was dominant against Charles Conwell at Rio 2016.

जीत की राह

चाहे भारतीय मुक्केबाज़ विकास कृष्ण अपने दूसरे ओलंपिक गेम्स की ओर बढ़ रहे थे और वहीं चार्ल्स कॉनवेल महज़ 18 वर्ष के थे लेकिन कोई भी मुकाबले से पहले विजेता का अंदाजा नहीं लगा सकता था।

कृषण ने अपने भारवर्ग को बढ़ाते हुए मिडलवेट किया और कॉनवेल ने रियो में क्वालिफाई बिना हारे हुए किया था।

इस विषय पर बात करते हुए विकास कृष्ण ने कहा “मुझे याद है यह बातचीत हो रही थी और कॉनवेल ने लगातार 12 या 13 मुकाबले जीते थे और यह भी बोला जा रहा था कि शायद वज़न की वजह से में उनका मुकाबले नहीं कर पाऊंगा।”

“इसके बाद मुझमे उन्हें हराने का जोश और ज़्यादा आ गया। मुझे इस चीज़ ने और ज़्यादा ताकत दे दी।

मुकाबले के दिन भारतीय मुक्केबाज़ ने उम्दा खेल दिखाते हुए अपने पंच को तेज़ रखा और ठीक जगह पर मारने की कोशिश की। दूसरे राउंड में भी विकास ने अपने हिसाब से खेल को चलाया और अपने प्रतिदेवंदी को लगातार चकमा देते रहे।

“मैं अपने प्लान के साथ बना रहा। दूसरे राउंड में मुझे लगा कि निर्णय को स्प्लिट कर दिया जाएगा तो में ज़्यादा आक्रामक हो गया और वैसा मेरे लिए करना एक बदलाव था।”

“उस दिन मेरा दायां हाथ बहुत ज़्यादा मज़बूत नहीं था नहीं तो मैं कुछ हुक भी मारता। लेकिन अंत मं उसकी ज़रूरत ही नहीं पढ़ी।

तीसरे राउंड में चार्ल्स कॉनवेल ने भी खुद को मुकाबले में पूरी तरह से झोंक दिया लेकिन लय विकास के पास थी और उन्होंने इस मुकाबले को 3-0 से जीत लिया।

इसके बाद विकास ने टर्की के ओंडर सिपाल (Onder Sipal) को राउंड में 16 में मात दी और क्वार्टरफाइनल में बेक्टेमिर रोज़मतजोन (Bektemir Melikuziev) के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा।

भारतीय बॉक्सर विकास कृषण ओलंपिक मेडल जीतने से एक कदम से चूक गए थे लेकिन अब उनकी नज़र टोक्यो गेम्स पर है। इस बार यह खिलाड़ी ओलंपिक में गोल्ड में गोल्ड मेडल जीतने के इरादे से जा रहा है और उन्हें इस लक्ष्य को पूरा करना का भरोसा भी है।