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माय ग्रेटेस्ट गेम: जब पूजा रानी ने एशियन गोल्ड जीतने के लिए वर्ल्ड चैंपियन को किया चित

भारतीय बॉक्सर का मानना है कि एशियन चैंपियनशिप में चीन की वांग लीना को हराने से आत्मव्श्वास मिला है जो कि टोक्यो गेम्स जैसे बड़े मंच कर कारगर साबित होगा।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारतीय महिला मुक्केबाज़ पूजा रानी (Pooja Rani) के करियर का सर्वश्रेष्ठ 2019 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप, थाईलैंड में आया था।

पदक जीतने से ज़्यादा बड़ी जीत पूजा के लिए उनका अंदाज़ था। सभी मुश्किलों के बावजूद यह भारतीय रिंग में डटी रही और साहस के साथ लड़ती रहीं और यही उनकी जीत का असली कारण भी बना।

फाइनल मुकाबले में चीन की वांग लीना (Wang Lina) के खिलाफ हुए मुकाबले को भारतीय बॉक्सर सबसे कड़ा और दिलचस्प बताती हैं।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए पूजा रानी ने बताया “उस समय कोई मुझसे गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद नहीं लगा रहा था। उस समय मैं भी इंजरी से वापस आ रही थी। लेकिन चीन से आई वर्ल्ड चैंपियन को हराना और सबको गलत साबित करना मेरे लिए ख़ास रहा।”

यह मेडल पूजा रानी के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल भी साबित हुआ।

इससे पहले पूजा गोल्ड के सबसे नज़दीक 2012 एशियन चैंपियनशिप में आईं थीं लेकिन लंदन 2012 की ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता ली जिन्जी (Li Jinzi) के खिलाफ उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

बातचीत को आगे बढ़ाते हुए बॉक्सर ने कहा “सेमीफाइनल जीतने के बाद मुझे पता लगा था कि मेरा फाइनल मुकाबला चीन की बॉक्सर और वर्ल्ड चैंपियन के खिलाफ है। सच कहूं तो मुझे मेरे जीतने के मौके कम लग रहे थे।”

फाइनल से पहले उड़ी नींद

मुकाबले से पहले अपने प्रतिद्वंदी का किया हुआ विश्लेषण इस भारतीय खिलाड़ी के हित में रहा और उन्होंने उसी हिसाब से ही रणनीति बनाई जिससे उन्हें बखूबी लाभ मिला।

29 वर्षीय मुक्केबाज़ ने अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “फाइनल से पहले वाली रात मैं सो नहीं पाई थी और लीना के खिलाफ मुकाबले के मन में चित्र बना रही थी। कुछ देर तक में सतर्क थी और उन्हें मापने की कोशिश कर रही थी। मेरा प्लान उस समय आक्रामक रवैया अपनाने का था जिस समय उन्हें उसकी उम्मीद बिलकुल भी न हो।”

“वह काम आ रहा था और मेरा भरोसा भी बढ़ रहा था कि मैं जीत सकती हूं। मैंने खुद को ‘बकल ऑफ़ पूजा’ कह कर प्रोत्साहन दिया और वहीं से मैं आगे बढ़ गई।”

पूजा रानी ने फाइनल को 4-1 के स्प्लिट निर्णय से जीता था लेकिन परिणाम जानने के लिए उन्हें थोड़ा इंतज़ार करना पड़ा था।

वह एक सपने जैसा था। उस प्रतियोगिता में आपको अंतिम निर्णय तभी पता चलता है जब बाउट ख़त्म हो जाता है। हर राउंड के बाद स्कोर नहीं बताया जाता। तो जैसे ही उन्होंने कहा कि मैं विजेता हूं तो मुझे बेहद अच्छा लगा।”

अपने शांत स्वभाव के लिए जानी जाने वाली रानी ने रिंग में ख़ुशियों को ज़ाहिर किया जो कि उनके स्वभाव के विपरीत है।

जीत ने लगाए करियर में चार चांद

भारतीय महिला बॉक्सर ने माना कि वह दोस्त, रिश्तेदार, कोच द्वारा मिली वाहवाही से मैं अभिभूत थी। हालांकि इस मुकाबले ने उनके करियर में भी चार चांद लगा दिए और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

“सच कहूं तो मुझे भरोसा नहीं था कि मैं लीना को मात दे सकती हूं। लेकिन उस मुकाबले की जीत ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दे दिया। इसने मुझे ऐसा बना दिया कि मैं कुछ भी कर सकती हूं।”

अपने आत्मविश्वास पर सवार हो कर आगे बढ़ रही भारतीय मुक्केबाज़ ने टोक्यो ओलंपिक गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया है। ऐसा उन्होंने 8 मार्च 2020 को थाईलैंड की बॉक्सर पोर्ननीपा चुटी (Pornnipa Chutee) को एशिया ओशिनिया बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स के दौरान पटकनी देने किया।

भारतीय खिलाड़ी के लिए यह एक सपना है और उन्हें हर हाल में इसे जीना ही है। ओलंपिक में डेब्यू कर रही पूजा रानी अपने अनुभव के साथ आगे बढेंगी और रिंग में भारत की शान को बढ़ावा देने के लिए खेलेंगी।