फ़ीचर

वो दिग्गज खिलाड़ी, जिन्होंने भारत में महिला फुटबॉल के लिए आगे का रास्ता तैयार किया

शांति मल्लिक से लेकर दुर्गा बेमबेल देवी तक - भारतीय महिला फुटबॉल के सबसे बड़ी खिलाड़ियों पर एक नज़र।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

भारत अगले साल फीफा अंडर -17 महिला विश्व कप की मेजबानी करने जा रहा है और 2022 में होने वाला 2022 एएफसी महिला एशिया कप देश में महिला फुटबॉल के लिए बड़ा मौका होगा

चार दशकों से अधिक पुराने इतिहास के बाद, भारत में महिला फुटबॉल पिछले 10 वर्षों से आगे बढ़ रही है। भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने मुख्य कोच मेमोल रॉकी की देख-रेख में 2018 में एशियाई ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स के दूसरे दौर में पहुंचने में सफल रही थी, जो इतिहास में पहली बार हुआ था, इससे पचा चलता है कि टीम कितना आगे बढ़ चुकी है।

यूथ विश्व कप की मेजबानी करना और भारतीय सरजमीं पर प्रमुख एशियाई प्रतियोगिता का आयोजन होना, अगली पीढ़ी को आगे ले जाने की प्रेरणा के रूप में काम करेगी।

एक उज्ज्वल भविष्य की ओर देखने से पहले, भारतीय महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को अतीत और वर्तमान पर ध्यान देना होगा, जिन्होंने कई बाधाओं के बावजूद ये सब संभव बना दिया।

शांति मल्लिक – भारत की फुटबॉल स्टार

1975 से 1991 तक, भारत में महिलाओं का फुटबॉल, महिला फुटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFFI) द्वारा चलाया जाता था, जो कि एशियन लेडीज फुटबॉल कंफेडरेशन (ALFC) के तहत संचालित होता था।

ALFC, हालांकि, फीफा और एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) दोनों द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं था, इसलिए राष्ट्रीय टीम ने कई मैचों और प्रतियोगिताओं को अनौपचारिक रूप से खेला।

इसके बावजूद, भारतीय टीम उस समय एशिया में एक प्रमुख ताकत थी और 1979 और 1983 एएफसी महिला चैंपियनशिप में उपविजेता रही और हांगकांग में 1981 के संस्करण में तीसरे स्थान पर रही।

उस समय की भारतीय महिला टीम की सबसे बड़ी स्टार कप्तान शांति मल्लिक (Shanti Mallick) थीं। एक बेहतरीन स्कोरर और एक नेतृत्व की क्षमता रखने वाली मल्लिक तकनीकी रूप से भी प्रतिभाशाली फुटबॉलर थीं और जैसा कि कहा जाता है, उन्हें अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय कैरियर में एक बार भी रेड या येलो कार्ड नहीं मिला था।

बंगाल की ये खिलाड़ी 1978 में एक कुशल क्रिकेटर, हॉकी खिलाड़ी और एक राष्ट्रीय स्तर की हैंडबॉल चैंपियन भी थीं।

उनकी बहुत सी फुटबॉल उपलब्धियों को आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड बुक में प्रदर्शित नहीं किया जा सकता था, लेकिन मलिक देश में महिला फुटबॉल के लिए एक सच्ची अग्रणी थीं और 1983 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पहली भारतीय महिला फुटबॉल खिलाड़ी बनीं।

ओइनम बेम्बेम देवी - भारतीय फुटबॉल की दुर्गा

बेमबेम देवी को भारतीय महिला फुटबॉल का लीजेंड खिलाड़ी माना जाता है। Photo: AIFF.

मणिपुर से आने वाली ओइनम बेमबेम देवी (Oinam Bembem Devi) ने 15 साल की उम्र में भारतीय महिला टीम की सीनियर टीम में प्रवेश किया और 2016 में संन्यास लेने से पहले 21 साल तक टीम की सेवा की।

मिडफील्डर ने राष्ट्रीय टीम के लिए 85 मैच खेले और 32 गोल किए। हालाँकि, ये बेमबेम ने जो हासिल किया है, उसके आगे ये गोल की संख्या कुछ भी नहीं है।

बेमबेम की कप्तानी में, भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने तीन बैक-टू-बैक SAFF कप खिताब (2010 में बांग्लादेश में, 2012 में श्रीलंका और 2014 में पाकिस्तान में) और दो दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक (2010 में बांग्लादेश और 2016 में भारत में) जीते।

उन्हें 2001 में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) की पहली महिला खिलाड़ी के रूप में नामित किया गया और 2013 में उन्होंने फिर से पुरस्कार जीता।

2017 में, वह मल्लिक के बाद अर्जुन पुरस्कार जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय महिला फुटबॉल खिलाड़ी बनीं और तीन साल बाद, पद्म श्री - भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला फुटबॉलर बनीं।

बेमबेम का ऐसा प्रभाव था कि उन्हें अक्सर भारत में महिलाओं के फुटबॉल का दुर्गा (रक्षा की देवी) कहा जाता था। बेमबेम ने भारतीय महिला फुटबॉल खिलाड़ियों की आने वाली पीढ़ी को प्रेरित किया और एक कोच के रूप में ऐसा करना जारी रखा।

उन्होंने पहले ही 2017 में इंडियन स्पोर्टस लीग (IWL) का खिताब जीतने में मणिपुर से ईस्टर्न स्पोर्टिंग यूनियन फुटबॉल क्लब की मदद की है और वो अंडर -15, अंडर -16 और अंडर -17 महिलाओं की राष्ट्रीय टीमों के साथ शामिल हैं।

“महिला फुटबॉल में बेमबेम एक प्रेरणा हैं। मौजूदा महिला खिलाड़ियों की राष्ट्रीय टीम की स्टार स्ट्राइकर बाला देवी ने कहा, "उन्हें एक खिलाड़ी के रूप में लगभग हर संभव पुरस्कार मिला है।"

बाला देवी - रेंजर्स नंबर 10

बेमबेम से प्रेरित वर्तमान टीम के कई सितारों में से एक, स्ट्राइकर बाला देवी ने पहले ही भारतीय महिला फुटबॉल इतिहास में अपना नाम लिख दिया है।

बेमबेम की तरह, बाला ने 15 साल की उम्र में सीनियर टीम में प्रवेश किया और 2005 से टीम में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस स्ट्राइकर ने राष्ट्रीय टीम में लगातार स्कोर करने के रिकॉर्ड को अपने पास रखा है। जिन्होंने 58 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 52 गोल किए हैं।

इन अविश्वसनीय रिकॉर्ड के साथ, ये आश्चर्य की बात नहीं थी जब वो 2020 में स्कॉटिश जाइंट रेंजर्स एफसी की टीम में शामिल हुईं।

भारतीय स्ट्राइकर बाला देवी ने स्कॉटिश जाइंट रेंजर्स एफसी के लिए जनवरी 2020 में हस्ताक्षर किए। Photo: AIFF

2014 और 2015 में दो बार की एआईएफएफ विमेंस प्लेयर ऑफ द ईयर का खिताब जीतने वाली बाला देवी ने जनवरी 2020 में स्कॉटिश महिला प्रीमियर लीग के साथ 18 महीनों के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिससे वह विदेशी महिला लीग में एक पेशेवर अनुबंध पर हस्ताक्षर करने वाली भारतीय महिला फुटबॉल खिलाड़ी बन गई।

रेंजर्स की पहली एशियाई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बाला ने स्कॉटिश क्लब की महिला टीम के लिए प्रतिष्ठित नंबर 10 जर्सी को भी हासिल किया।

अदिति चौहान – पूर्व स्टार खिलाड़ी

हालाँकि, बाला यूरोप में खेलने वाली पहली भारतीय महिला फुटबॉलर नहीं हैं।

भारतीय राष्ट्रीय टीम की गोलकीपर अदिति चौहान (Aditi Chauhan) ने महिला प्रीमियर लीग साउथर्न डिवीजन में वेस्ट हैम लेडीज़ टीम के लिए खेला है। ये इंग्लैंड की महिला फुटबॉल में एक तीसरी डिवीजन सेमी-प्रोफेशनल लीग है।

वो 2015 से 2018 तक हैमर्स के साथ थीं और लंदन में तीसरे एशियाई फुटबॉल पुरस्कारों में 2015 वुमन इन फुटबॉल अवार्ड भी जीता।

अदिति सालों से भारतीय महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की पहली पसंद की गोलकीपर रही हैं और उन्होंने कई अन्य सफलताओं के बीच 2018 में भारत के लिए ओलंपिक क्वालिफायर के दूसरे दौर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आशालता देवी - बेमबेम के रास्ते पर चलने वाली खिलाड़ी

भारतीय महिल राष्ट्रीय टीम की कप्तान के रूप में आशालता देवी (Ashalata Devi) ने अपनी भूमिका को शानदार तरीक से निभाया और एशिया की सबसे बेहतरीन डिफेंडर्स में से एक मानी गईं।

अशालता ने टोक्यो 2020 के लिए अपने ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स अभियान के दौरान भारत की कप्तानी की और 2019 के दक्षिण एशियाई खेलों में टीम का नेतृत्व किया।

भारत की कप्तान आशालता देवी 2019 में एएफसी महिला खिलाड़ी की पुरस्कार के लिए चुनी गई थीं। Photo: AIFF

कड़ी मेहनत करने वाली डिफेंडर 2012 से सीनियर टीम के साथ हैं और उन्हें 2019 में एआईएफएफ विमेंस प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया।

वो एएफसी प्लेयर ऑफ द ईयर 2019 पुरस्कार के लिए अंतिम तीन खिलाड़ी की शॉर्टलिस्ट में भी शामिल थीं। उन्हें चीन की ली यिंग और विजेता जापान की साकी कुमागई के साथ नामित किया गया था। जिसमें एक पूर्व महिला फीफा विश्व कप विजेता और 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक विजेता थीं।

भारतीय कप्तान ने दिवेही प्रीमियर लीग में मालदीवियन फुटबॉल क्लब न्यू रेडियंट के लिए विदेशों में भी खेला है।

इन प्रतिष्ठित पांच के अलावा, डंगमेई ग्रेस (Dangmei Grace), रत्नाबाला देवी (Ratnabala Devi), दलिमा छिब्बर (Dalima Chhibber) और युवा संजू यादव (Sanju Yadav) - 2020 एआईएफएफ प्लेयर ऑफ द ईयर विजेता के लिए फेवरेट हैं- सभी भारतीय महिला फुटबॉल खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी के लिए योग्य रोल मॉडल के रूप में उभरी हैं।