विपरीत परिस्थितियों में भी ख़ुद को बेहतर करने में लगी हैं अदिति अशोक

22 वर्षीय यह गोल्फ़र दूसरे ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए विपरीत परिस्थितियों के बावजूद धीरे-धीरे खुद को बेहतर करने में लगी हुईं हैं और वह जानती हैं कि ओलंपिक खेलों से पहले उन्हें क्या करने की ज़रूरत है।

अदिति अशोक (Aditi ashok) के लिए इस नए सीज़न की अभी शुरुआत ही हुई थी कि कोरोना वायरस (COVID-19) के बढ़ते प्रकोप की वजह से पूरी दुनिया सहित भारत भी लॉकडाउन में चला गया। अचानक लगे इस विराम से पहले भारतीय गोल्फ़र ने दो टूर्नामेंट लेडीज़ प्रोफेशनल गोल्फ एसोसिएशन (LPGA) और लेडीज़ यूरोपियन टूर (LET) में हिस्सा लिया था।

हालांकि, फ़्लोरिडा और ऑस्ट्रेलिया के LPGA इवेंट में वह अच्छी शुरुआत नहीं कर सकीं और कट-ऑफ़ पार करने में नाकाम रहीं। वह बोनविले में लेडीज़ क्लासिक में T-24 स्थान पर रहीं और न्यू साउथ वेल्स ओपन में शीर्ष दस (T-4) में रहीं। ये दोनों ही LET इवेंट थे।

देखा जाए तो यह उनके करियर की एक ख़ास विशेषता भी रही है। ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में उन्होंने बताया, “मैं उस तरह की गोल्फ़र हूं, जो धीरे-धीरे गति पकड़ती है। ऑफ-सीज़न के बाद दो LPGA इवेंट मेरे पहले इंवेट थे, इसलिए मैं उतना बेहतर नहीं खेल पा रही थी जितना मिड-सीज़न में खेलती हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “इन सभी बातों के अलावा फ़्लोरिडा में ख़राब मौसम की वजह से तेज़ तूफ़ान ने भी प्रदर्शन को थोड़ा प्रभावित किया। ऑस्ट्रेलिया में मैंने कुछ शॉट्स को छोड़कर बहुत बुरा प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन LPGA में आपको इन्हीं चीज़ों का ध्यान देना होता है।”

तो क्या यह ब्रेक उनके लिए गलत समय पर आया? इसपर उन्होंने कहा, “वास्तव में ऐसा कोई समय नहीं होता है जिसमें आप चीज़ों को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। मार्च से मई तक मेरी गति काफ़ी अच्छी रही, हमने आठ सप्ताह में सात टूर्नामेंट खेले। लेकिन उसके बाद दुनिया बड़ी मुश्किल से जूझने लगी।”

फिलहाल वह बेंगलुरु में अपने घर पर हैं और अपनी छत पर ही गोल्फ़ क्लब का इस्तेमाल कर पा रही हैं। गोल्फ़ बॉल उनकी छत से पड़ोसियों के घर को न जाए इसलिए उन्होंने अपनी छत के चारों ओर बेडशीट लगा रखी है।

रियो 2016 का उनका अनुभव

भले ही वह महज़ 22 साल की हों, लेकिन अदिति अशोक पहले ही रियो 2016 ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले चुकी हैं। जहां वह दूसरे राउंड तक अपनी जगह बनाने में क़ामयाब रहीं। अभी छह महीने पहले ही उन्होंने प्रो गोल्फ़र के तौर पर अपने कदम बढ़ाकर अपने करियर को नई ऊंचाईयां दी हैं। जिसकी वजह से पूरे देश का ध्यान उनपर और इस खेल पर पड़ा है। 

भारतीय गोल्फ़र ने गर्व से कहा, “मैंने कहीं पढ़ा कि उसके बाद भारत में गोल्फ़ के बारे में गूगल सर्च काफ़ी बढ़ गया था। उससे पड़ने वाले प्रभाव को मैंने भी देखा है और उस समय मुझे जो एक्सपोज़र मिला, वह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी।”

रियो ओलंपिक में अन्य खेलों के भारतीय एथलीटों के साथ ही खेल गांव में रहने का अनुभव काफ़ी अलग था। इसके अलावा क्योंकि गोल्फ़ के एक व्यक्तिगत खेल है, इसलिए एक टीम का हिस्सा बनना उनके लिए काफ़ी नया था।

उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा अनुभव है जिसे आप केवल तभी समझ सकते हैं जब आप वहां पर हों। आप इसके बारे में पढ़ सकते हैं, लेकिन वहां होकर दूसरे खेल के विभिन्न लोगों से मेल-जोल बढ़ाने की बात ही कुछ और है।”

अदिति अशोक ने आगे कहा, “मैंने पहले दो दिनों में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन सभी जानते है कि अंत अच्छा नहीं हुआ। जो फिर इस बात की पुष्टि करता है कि मैंने रियो जाने से पहले केवल पांच या छह टूर्नामेंट ही खेले थे, इसलिए मैं अपनी फ़ॉर्म को बरक़रार नहीं रख सकी।”

हालांकि, रियो उनके लिए एक यादगार दौरा रहा। अदिति अशोक ने 2016 के ओलंपिक खेलों के बाद के इवेंट में अपना परचम लहराया। उन्होंने LPGA कार्ड कमाया और बाद में इंडियन ओपन जीतकर, वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।

लैपेल पिंस का संग्रह करने वाली इस भारतीय गोल्फ़ खिलाड़ी ने कहा, “इंडियन ओपन जीतना हमेशा से मेरा पहला लक्ष्य था, अमेच्योर करियर के समय से ही। यह मेरे लिए और भी ख़ास हो गया क्योंकि इस लक्ष्य को मैंने पहले ही LET में हासिल कर लिया।”

अदिति अशोक ने एक सप्ताह बाद क़तर ओपन जीता और फिर दुबई में तीसरे स्थान पर रहते हुए अपने सीज़न का शानदार अंत किया।

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Happy #OlympicDay 😀

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आगे की राह और मंज़िल

2016 ओलंपिक से कुछ ही समय पहले उन्होंने प्रो-गोल्फ़ में क़दम रखा था। ऐसे में इस भारतीय गोल्फ़र का मानना है कि तब से अब तक चार वर्षों में उन्होंने LET और LPGA से जो अनुभव इकट्ठा किया है, वह इस बार उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा।

अदिति अशोक वर्तमान में टोक्यो ओलंपिक के लिए अंतरराष्ट्रीय गोलेफ़ महासंघ (IGF) की रैंकिंग में शीर्ष-60 (38वें) में हैं। ओलंपिक खेलों से पहले कुछ इवेंट में कई खिलाड़ी हिस्सा नहीं लेंगे, ऐसे में भारतीय गोल्फ़र के लिए आगे की राह बेहतर नज़र आती है।

उन्होंने कहा, “हम यह नहीं जानते कि जब सीज़न फिर से शुरू होगा तो आप वास्तव में चीजों को कैसे हासिल कर सकेंगे, इसपर कोई योजना नहीं बनाई जा सकती है। लेकिन मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि मैं अगले साल की पहली छमाही तक जितने भी LPGA टूर्नामेंट होंगे, उसमें खेलूंगी।

प्रोफेशनल दौरे (प्रो) पर अपने पांचवें वर्ष में क़दम रखने के साथ ही अदिति अशोक ख़ुद को और बेहतर और मज़बूत करेंगी। क्योंकि वह एक बार पहले ही ओलंपिक का अनुभव हासिल कर चुकी हैं, इसलिए 2021 में होने वाले ओलंपिक खेलों में उनकी नज़र पोडियम स्थान पर होगी।

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