जीव मिल्खा सिंह अपने आदर्श फ़्रेड कपल्स के शांत आचरण से हैं काफ़ी प्रभावित

ये जीव के पिता मिल्खा ही थे जिन्होंने अपने बेटे को उनकी पसंद के खेल में करियर बनाने की आज़ादी दी थी, लेकिन फ़्रेड कपल्स के प्रोफ़ेशनल रवैये ने जीव को गोल्फ़ के लिए प्रेरित किया।

भारतीय गोल्फ़र जीव मिल्खा सिंह (Jeev Milkha Singh) को एथलीट बनने के लिए उनके पिता और दिग्गज धावक मिल्खा सिंह (Milkha Singh) ने ही प्रेरित किया था।

लेकिन अपने पिता का खेल न चुनकर जीव ने दूसरे खेल में करियर बनाया और इसमें उनके आदर्श अमेरिका के प्रसिद्ध गोल्फ़र फ़्रेड कपल्स (Fred Couples) रहे हैं।

ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में जीव मिल्खा सिंह ने ख़ुलासा किया, "मेरे आदर्श फ़्रेड कपल्स हैं। मैं बचपन से उनका खेल देखते देखते बड़ा हुआ हूं, मैं उन्हें इसलिए पसंद करता हूं कि वह ख़ुद को गोल्फ़ कोर्स के अंदर और बाहर दोनों ही जगह बहुत बेहतरीन तरह से रखते हैं।"

वह एक लाजवाब खिलाड़ी हैं, उन्होंने कई प्रतियोगिताएं जीती हैं। जिस तरह की उनकी छवि है, जिस अंदाज़ में वह लोगों से बात करते हैं, वह उन्हें गोल्फ़ कोर्स के बाहर भी शानदार इंसान बनाता है।

2013 में वर्ल्ड गोल्फ़ हॉल ऑफ़ फ़ेम में शामिल रहने वाले फ़्रेड कपल्स वर्ल्ड नंबर-1 भी रह चुके हैं और उन्होंने 15 PGA टूर टाइटल भी अपने नाम की है। जिसमें सबसे ख़ास है 1992 का मास्टर्स टूर्नामेंट, जिसके एक साल बाद जीव मिल्खा सिंह प्रोफ़ेशनल गोल्फ़र बने थे।

मीडिया और फ़ैन्स फ़्रेड कपल्स को उनके ड्राइव और स्विंग के लिए ‘बूम बूम’ के नाम से पुकारते हैं, साथ ही साथ उनकी छवि मैदान और मैदान के बाहर बेहद शांत रही है। जीव मिल्खा सिंह के ऊपर फ़्रेड की इन्हीं ख़ासियतों ने काफ़ी प्रभाव छोड़ा।

दबाव को छोड़ा पीछे

जब जीव मिल्खा सिंह को अपने आदर्श के साथ खेलने का मौक़ा मिला तो उन्होंने इस मौक़े को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

मैंने एक बार नहीं कई बार उनके साथ खेला है, और बहुत आनंद लिया है। मैंने जब भी उनकी ओर देखा, हमेशा उन्हें बताया कि वह कितने ख़ास हैं। मैंने ये भी कहा कि हमेशा बस उन्हें ही जीतते हुए देखना चाहता था और किसी को नहीं।

जीव मिल्खा सिंह ने आगे कहा, "वह बहुत शांत खिलाड़ी हैं, उनकी शांति किसी को भी प्रेरित कर सकती है। वह कभी भी अपनी भावनाओं को ज़ाहिर नहीं करते हैं, वह बस अपना काम सही से अंजाम देने की कोशिश करते हैं। वह कितने ज़्यादा प्रेरणादायक हैं ये मैंने उन्हें पहली मुलाक़ात में ही कह दिया था।"

एक उभरते हुए खिलाड़ी के तौर पर जीव मिल्खा ने अपने उन दिनों को भी याद किया जब एक कॉलेज इवेंट में फ़्रेड कपल्स आए थे और जीव ने उनसे ऑटोग्राफड लिया था।

"जब भी मैं फ़्रेड के साथ किसी प्रोफ़ेशनल टूर पर यूरोप या अमेरिका में खेलता हूं तो मैं हमेशा उन्हें कहता हूं कि आप सर्वश्रेष्ठ हैं।"

मिल्खा सिंह: एक पिता, दोस्त और नायक

अपने पिता और नायक मिल्खा सिंह के बारे में भी जीव मिल्खा सिंह ने बात की और बताया कि हमारे बीच एक दोस्त जैसा रिश्ता है।

घर पर मेरे हीरो मेरे पिता मिल्खा सिंह हैं। 14-15 साल की उम्र से ही मेरे और उनके बीच एक दोस्त जैसा रिश्ता है। इस तरह का रिश्ता एक बाप और बेटे में बहुत ही कम देखने को मिलता है।

1999 में अर्जुन अवॉर्ड से नवाज़े गए जीव मिल्खा सिंह ने आगे कहा, "उन्होंने हमेशा मुझे एक दोस्त की तरह बात करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने हमेशा कहा कि कभी भी, कुछ भी मुझसे छिपाना मत। उन्होंने कहा कि वह उनपर पूरी तरह भरोसा कर सकते हैं और मैंने भी स्वीकार किया। और तब से लेकर आज तक हम दोनों के बीच वही रिश्ता बना हुआ है।"

यहां तक कि पहली बार जब जीव मिल्खा सिंह गोल्फ़ कोर्स पर उतरे थे तो उनके साथ मिल्खा सिंह भी मौजूद थे। यहीं से जीव मिल्खा सिंह के गोल्फ़ करियर के सफ़र की शुरुआत हुई।

एक एथलीट का पिता जब मिल्खा सिंह जैसा दिग्गज हो तो फिर चोट से लेकर विफलता तक में इससे काफ़ी मदद मिलती है, जो जीव मिल्खा सिंह के साथ भी हुआ।

"जब मैं ख़राब दौर से गुज़र रहा था तो उनसे काफ़ी बात करता था और वह हमेशा मुझे यही समझाते थे कि ये ज़िंदगी का एक हिस्सा है और बस तुम मानसिक तौर पर मज़बूत बनो।"

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