फ़ीचर | हॉकी

ललित उपाध्याय: स्टिंग ऑपरेशन में फंसने से लेकर भारतीय हॉकी टीम के फ़ॉर्वर्ड बनने की कहानी

भारतीय हॉकी टीम के अटैकर ललित उपाध्याय आज टीम की मज़बूत कड़ी हैं, लेकिन एक वक़्त ऐसा भी आया था जब उनका करियर शुरू होने से पहले ख़त्म होने के कगार पर था

लेखक सैयद हुसैन ·

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पिछले ही महीने एफ़आईएच प्रो लीग में नीदरलैंड के ख़िलाफ़ अपना डेब्यू किया था, जहां तीसरी रैंकिंग की टीम के ख़िलाफ़ उन्होंने एक के बाद एक दो जीत दर्ज की थी। इस मुश्किल परीक्षा में क़ामयाब होने की कहानी भी टीम इंडिया के अटैकर ललित उपाध्याय ने ही अपनी हॉकी स्टिक से लिखी थी।

इस फ़ॉर्वर्ड खिलाड़ी ने दो गोल अपने नाम किए थे, और लगातार अपने आक्रामण के दम पर डच बैकलाइन में हड़कंप मचा रखा था। जिसके बाद उन्हें पहले मैच में ‘मैन ऑफ़ द मैच’ के ख़िताब से भी नवाज़ा गया था। लेकिन आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि एक दशक पहले उनके भारत की ओर से खेलने के सपने पर मानो विराम लग गया था।

स्टिंग ऑपरेशन जिसने ललित के सपने पर लगा दिया था विराम !

ललित उपाध्याय बचपन से ही प्रतिभा के धनी के थे, 11 साल की उम्र से ही ललित अपने बड़े भाई को हॉकी खेलता देख और प्रेरित होकर इस खेल में करियर बनाने की ठान चुके थे। बनारस में स्कूल से ही वह इस खेल से जुड़ गए थे और हॉकी खेलने का सपना उनकी आंखों में समां चुका था।

इस सपने को पंख देते हुए अगले 4 सालों में ही वह काफ़ी आगे पहुंच गए थे, और अंडर-21 भारतीय टीम के साथ उन्हें अभ्यास करने का भी मौक़ा मिल गया था। जब लगने लगा था कि इस युवा खिलाड़ी का करियर काफ़ी सुनहरा होने जा रहा है और जल्द ही वह अपने सपने को सच कर सकते हैं, तभी कुछ ऐसा हुआ और वह अर्श से फ़र्श पर आ गिरे, वह भी बिना उनकी ग़लती के। बल्कि उस घटना के बाद ये पक्का हो चला था कि अब ललित का सपना सीनियर टीम से खेलने का ख़त्म होने के क़रीब है।

दरअसल, 2008 में एक न्यूज़ चैनल के संवाददाता ने ख़ुद को एक एजेंट बताते हुए उस वक़्त के आईएचएफ़ सचिव के ज्योतिकुमारन से मुलाक़ात की और कहा कि अगर उत्तर प्रदेश के एक खिलाड़ी का चयन राष्ट्रीय टीम में हो जाता है तो वह आईएचएफ़ के साथ एक प्रायोजक डील कर सकते हैं। जब ज्योतिकुमारन ने पूछा कि वह खिलाड़ी है कौन ? तब ललित उपाध्याय का नाम सामने रख दिया गया।

हालांकि इसके बाद ज्योतिकुमारन को हटा दिया गया था, लेकिन इस स्टिंग ऑपरेशन ने ललित उपाध्याय के करियर पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। जबकि युवा ललित को इस डील के बारे में कुछ पता नहीं था, लेकिन उनका नाम भारतीय हॉकी और खेल जगत में तेज़ी से फैल गया था और वह बदनामी के शिकार हो रहे थे।

उनके ऊपर आरोप लग गए थे कि वह पैसा देकर टीम में आना चाह रहे हैं, जिसके बाद वह चयनकर्ताओं की नज़रों से ओझल होते जा रहे थे। जिस खेल को वह बचपन से देखते और खेलते बड़े हुए थे और जिसमें करियर बनाने का सपना देखा था, उसे सच करने के बेहद क़रीब आकर वह उनसे कोसों दूर जा चुका था और ख़त्म होने के कगार पर था। ‘’एक वक़्त मैंने तो सोच लिया था कि इस खेल को छोड़ दूं।‘’ स्क्रॉल के साथ बातचीत में ललित उपाध्याय ने ये कहा था।

पूर्व कप्तान का मिला ललित को साथ

ऐसा सोचना हर किसी के लिए स्वाभाविक हो जाता है, जिसके साथ ऐसा हुआ हो। लेकिन ललित के साथ उनका परिवार खड़ा था, ‘’उन्होंने कहा कि अगर तुम हॉकी छोड़ देते हो तो लोगों को लगेगा कि सच में तुम पैसे के बल पर टीम में आना चाहते थे।‘’ उसी इंटरव्यू में ललित ने ये कहा।

जिसके बाद ललित ने सबकुछ भुलाने की कोशिश की और दोबारा से बनारस में स्थित स्पोर्ट्स ऑथिरीटी ऑफ़ इंडिया के सेंटर में मेहनत करनी शुरू कर दी। और यहीं से उन्हें एक नई उम्मीद मिली, और इसमें सबसे बड़ा योगदान था भारतीय हॉकी टीम के पूर्व दिग्गज और कप्तान धनराज पिल्ले का।

पूर्व भारतीय दिग्गज को ललित उपाध्याय ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने एयर इंडिया की ओर से खेलने का उन्हें ऑफ़र दे दिया। जिसे ललित ने ख़ुशी के साथ स्वीकार किया और फिर जमकर मेहनत में लग गए। उन्होंने अपनी क़ाबिलियत को बढ़ाते हुए कुछ बेहतरीन स्किल्स सीखी और अपने तरकश में तीर जोड़ते गए। ललित को इसके बाद 2012 में हुए वर्ल्ड सीरीज़ हॉकी टूर्नामेंट में ‘रूकी ऑफ़ द ईयर’ के ख़िताब के लिए सबसे ज़्यादा वोट हासिल हुए।

ललित उपाध्याय ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और इस युवा खिलाड़ी का आख़िरकार भारत के लिए खेलने का सपना साकार हो गया। जब उन्होंने 2014 में भारतीय सीनियर टीम में डेब्यू किया, ललित उस साल हुए हॉकी वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया का हिस्सा बने। उसके बाद से तो फिर ललित ने भारत के लिए कई जीत में अहम भूमिका निभाई जिसमें 2016 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और 2017 एशिया कप में गोल्ड मेडल शामिल है। ललित के लिए उनके करियर का भी सबसे शानदार पल 2017 एशिया कप में स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा होना है। 2018 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम के भी ललित सदस्य थे।

ललित उपाध्याय की सबसे बड़ी ख़ासियत है कि वह फ़्रंट लाइन पर शानदार खेलते हैं। भारतीय हॉकी टीम के कोच के लिए भी ललित इसलिए ही एक बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं, ललित का खेल बहुत हद तक टीम इंडिया के मौजूदा कोच ग्राहम रीड की ही तरह आक्रामक है। भारतीय टीम पिछले एक साल में मानसिक स्तर पर भी बहुत मज़बूत हुई है, और इसमें ललित उपाध्याय जैसे खिलाड़ियों की भूमिका अहम रही है।