मेंटॉर की भूमिका में हैं भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश

भारतीय टीम के नियमित सदस्य युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए उत्सुक हैं और वह ये काम बड़ी अच्छी तरह कर रहे हैं।

ये खिलाड़ी विपक्षी की चाल को विफल करने के लिए मुखर और बहुत अच्छे हैं लेकिन हाल के दिनों में भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) का एक और पहलू सामने आया है और वह है एक संरक्षक का।

केरल के इस खिलाड़ी ने साल 2006 में सीनियर टीम की तरफ से अपना पहला मैच खेला। लेकिन लंदन 2012 ओलंपिक में भारत के खराब प्रदर्शन के बाद पीआर श्रीजेश गोलकीपर के रूप में भारतीय टीम की पहली पसंद बन गए।

शुरुआती सालों में श्रीजेश के लिए ये सफर इतना आसान नहीं था और उनके करियर में कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन समय बीतने के साथ ही श्रीजेश दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में शुमार हुए। रैंकिंग के माध्यम से भी वह लगातार आगे बढ़ते गए और साल 2016 में उन्हें बेस्ट गोलकीपर के तहत FIH अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।

इस अवधि में भारतीय हॉकी टीम रैंकिग में सुधार करती गई और अब एक बार फिर विश्व की टॉप टीमों में खुद को शुमार किया, हालांकि इसके लिए टीम मैनेजमेंट की भी तारीफ होनी चाहिए, जिन्होंने ये सुनिश्चित किया कि जब टीम से सीनियर खिलाड़ी जाएं तो युवा खिलाड़ी इसके लिए तैयार रहें। अब गोलकीपिंग में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है।

अब श्रीजेश भारतीय टीम में एक दशक से ज्यादा समय से हैं और बिना किसी शंका के वह पिछले 5-7 सालों में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर रहे हैं. लेकिन इस गोलकीपर को दूसरे किसी गोलकीपर ने अब तक चुनौती नहीं दी है।

युवा खिलाड़ियों पर पीआर श्रीजेश की नज़र

अब स्थिति बदल रही है और खुद पीआर श्रीजेश ऐसा कर रहे हैं। अगर युवा कृष्ण पाठक (Krishan Pathak) और सूरज कार्केरा (Suraj Karkera) की माने तो टीम में होने उनके लिए अच्छी बात है

ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान 23 साल के कृष्ण ने बताया कि “अगर आप उनके आसपास भी हैं तो आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है। श्रीजेश भाई एक लीडर है और यह वो बात है जो मैं उनसे सीख रहा हूं। वह हमेशा टीम के लिए तैयार रहते हैं।”

ये किसी भी खेल के लिए सबसे अच्छी बात है, पीआर श्रीजेश उन खिलाड़ियों में से एक हैं जो अक्सर भारतीय डिफेंस के लिए तत्पर रहते हैं। भरे हुए स्टेडियम में भी आप उनको सुन सकते हैं, जहां वो टीम की डिफेंस को सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं, यही नहीं 32 साल के श्रीजेश टीम की लगातार हौसला अफजाई करते रहते हैं।

कृष्ण पाठक को अभी तक टीम में कम ही मौके मिले हैं लेकिन इसका फायदा उन्होंने उठाया है। फोटो: हॉकी इंडिया
कृष्ण पाठक को अभी तक टीम में कम ही मौके मिले हैं लेकिन इसका फायदा उन्होंने उठाया है। फोटो: हॉकी इंडियाकृष्ण पाठक को अभी तक टीम में कम ही मौके मिले हैं लेकिन इसका फायदा उन्होंने उठाया है। फोटो: हॉकी इंडिया

पिछले साल पीआर श्रीजेश ने ज्यादातर समय बेंच पर ही बिताया है क्योंकि टीम मैनेजमेंट गोलकीपर्स को बारी बारी से मौका देने की पॉलिसी अपना रही है।2019 में ओलंपिक क्वालिफ़ायर के अलावा टीम किसी भी महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है। भारत के कोच ग्राहम रीड रिजर्व कीपर्स को मौका देने के पक्ष में थे। इसके पीछे आइडिया ये भी था कि पीआर श्रीजेश पर से दवाब भी कम हो सके।

पीआर श्रीजेश ने बताया कि मुझे लगता है कि “ये सही फैसला है। मैंने 2006 में डेब्यू किया था लेकिन टीम का नियमित सदस्य साल 2012 में बना। रिजर्व कीपर्स को चाहिए कि वह मिल रहे मौकों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएं और मैं भी उन्हें ऐसा करते हुए देखना चाहता हूं।” इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बाहर जाने और प्रदर्शन करने के बारे में नहीं है बल्कि उन्हें अपने अनुभव से सीखना भी होगा।

हालांकि पीआर श्रीजेश इस बात से इंकार नहीं करते हैं कि खेलते समय युवा गोलकीपर के माइंड सेट में बदलाव होता है और उन्हें यह आगे बढ़ने के साथ साथ खेल में शीर्ष पर रखने के लिए मदद करेगा।

टॉप पर रहने की भूख

भारतीय स्टार ने कहा कि “युवा खिलाड़ी अपने अनुभव के हिसाब से सुधार करते हैं, जो मौके उन्हें मिले हैं उनसे वह सीखते हैं। आपको खुद को बेहतर बनाने के लिए ऐसा करना ही होगा नहीं तो दूसरे आपकी जगह ले लेंगे। यही खेल की सच्चाई है।”

पीआर श्रीजेश का मानना है कि युवाओं की मदद करने से खेल के शीर्ष पर बने रहने में मदद मिलती है। फोटो: हॉकी इंडिया
पीआर श्रीजेश का मानना है कि युवाओं की मदद करने से खेल के शीर्ष पर बने रहने में मदद मिलती है। फोटो: हॉकी इंडियापीआर श्रीजेश का मानना है कि युवाओं की मदद करने से खेल के शीर्ष पर बने रहने में मदद मिलती है। फोटो: हॉकी इंडिया

जब उनसे गोलकीपर्स के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। मेरे लिए मेरी प्रतिस्पर्धा खुद से है। मैंने अब तक जो भी किया है उससे संतुष्ट होने वाला नहीं हूं। मैं हर गुजरते दिन, हर प्रशिक्षण सत्र के साथ सुधार करने की कोशिश करता हूं। मुझे टीम को, कोचों को यह साबित करना होगा कि मैं अभी भी देश में सर्वश्रेष्ठ हूं।”

इस स्तर पर खुद को साबित करने की उनकी भूख और भविष्य की प्रतिभाओं को निखारने की उनकी ये इच्छा साबित करती है कि भारतीय हॉकी गोलकीपिंग विभाग सुरक्षित हाथों में है।

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