एफ़आईएच प्रो लीग में अभी तक कैसा रहा है भारतीय टीम का प्रदर्शन 

भारतीय टीम तीन जीत और एक हार के साथ एफआईएच प्रो लीग की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर है लेकिन टीम को अभी भी डिफेंस में सुधार और आक्रमण में एकजुट होने की ज़रूरत है।

कलिंगा स्टेडियम में विश्व चैंपियन बेल्जियम के खिलाफ एफआईएच प्रो लीग में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का प्रदर्शन मिला जुला रहा। टीम ने ठीक-ठाक प्रदर्शन करते हुए एक मुकाबले में जीत हासिल की जबकि एक मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा।

ये प्रदर्शन दुनिया की तीसरे नंबर की टीम नीदरलैंड को दो बार हराने के दो सप्ताह बाद आया, जहां भारतीय टीम विश्वस्तरीय टीमों के खिलाफ खेले अबतक 4 में से 3 मुकाबलों में जीत हासिल की है और एक में हार का समना करना पड़ा है। इसमें भारतीय टीम की वापसी करते हुए एक जीत भी शामिल है जो काफी सराहनीय है।

किसी भी अभियान में कुछ सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होते हैं, उनपर एक नज़र डालते हैं:

गोलकीपर्स का शानदार प्रदर्शन जारी

बेल्जियम के खिलाफ एफआईएच प्रो लीग में भारत के दोनों मैचों में चर्चा का विषय बना पीआर श्रीजेश और कृष्ण पाठक द्वारा किए गए कई शानदार सेव। जहां 31 वर्षीय श्रीजेश ने नियमित रूप से टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया, वहीं 22 वर्षीय पाठक को जब भी मौका मिला उन्होंने बेहतर ही किया।

दोनों ने बेल्जियम के खिलाड़ियों को गोलपोस्ट में पहुंचने का कम ही मौका दिया, जो लगातार हमले करने के बावजूद दो मैचों में सिर्फ चार गोल ही कर सके। जबकि उनके प्रदर्शन को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि उनके गोल की संख्या 10 तक जा सकती थी।

सिर्फ नीदरलैंड के खिलाफ दूसरे मैच में भारतीय गोलकीपर से चूक देखने को मिली, जहां उन्होंने तीन गोल किए थे, हालांकि बाद में भारतीय फॉरवर्ड्स ने उसकी भरपाई कर दी।

2020 ओलंपिक के लिहाज से गोलकीपरों का प्रदर्शन शानदार रहा है। विशेष रूप से इस साल उन्होंने खुद के डिफेंस को बेहतर किया है।

कमजोर डिफेंस मे सुधार की ज़रुरत

भारतीय हॉकी टीम ने अब तक एफआईएच प्रो लीग में अपने प्रत्येक मैच में कम से कम एक गोल खाया है, जबकि प्रत्येक मैच में दो या या उससे अधिक गोल किया है।

बेल्जियम के खिलाफ 2-1 की जीत में, भारतीय हॉकी टीम ने रेड लायंस को ज्यादातर सर्कल से बाहर रखा और जो भी प्रयास किए गए उसे भारतीय गोलकीपर द्वारा असफल कर दिया गया।

हरमनप्रीत सिंह ने रविवार को कई मौकों पर गलतियां की, जो टीम की डिफेंस की स्थिति को बताने के लिए काफी है। जिससे बेल्जियम को गोल करने के आसान मौके मिले, जो अंततः बेल्जियम की जीत का कारण बना।

टीम के डिफेंडर्स उतने चौकस नहीं हैं जितने भारतीय टीम के फॉरवर्ड और गोलकीपर्स हैं। ये एक ऐसा विभाग है जहां मुख्य कोच ग्राहम रीड को जल्द ही सुधार करने की ज़रुरत है।

युवाओं ने मौक़ों को भुनाया

एफआईएच प्रो लीग के चार मैचों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम में कई युवाओं को मौका मिला और विश्वस्तरीय टीमों के खिलाफ उनका प्रदर्शन टीम के लिए उत्साहजनक संकेत है।

19 वर्षीय विवेक प्रसाद को दूसरे गेम में बेल्जियम के खिलाफ महत्वपूर्ण बराबरी करने का मौका मिला, वहीं उन्होंने नीदरलैंड के खिलाफ शूटआउट में अपने पेनल्टी को गोल में बदलते हुए भी यादगार प्रदर्शन किया। उन्होंने लगातार विपक्षी घेरे में खुद को एक कवच के रुप में स्थापित किया।

कृष्ण पाठक का प्रदर्शन भी देखने लायक रहा, बेल्जियम के खिलाफ मनदीप सिंह की बराबरी वाली गोल में दिलप्रीत सिंह का असिस्ट और राज कुमार पाल की रेड लायंस के खिलाफ सीनियर टीम में डेब्यू, जैसे कई पल भारतीय युवाओं के लिए शानदार रहे।

भारत के विवेक प्रसाद नीदरलैंड के ख़िलाफ़ शूट आउट में स्कोर करते हुए। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया
भारत के विवेक प्रसाद नीदरलैंड के ख़िलाफ़ शूट आउट में स्कोर करते हुए। तस्वीर साभार: हॉकी इंडियाभारत के विवेक प्रसाद नीदरलैंड के ख़िलाफ़ शूट आउट में स्कोर करते हुए। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया

रुपिंदर पाल सिंह की शानदार वापसी

भारतीय हॉकी टीम के डिफेंडर रूपिंदर पाल सिंह की चोट के बाद वापसी के साथ साल के अंत में कुछ अच्छी खबर मिली। आपको बता दें कि अनुभवी रुपिंदर टीम की लाइन-अप का एक महत्वपूर्ण अंग हैं और बेल्जियम के खिलाफ दोनों मैचों में उनकी अनुपस्थिति ने जाहि कर दिया कि वो क्यों टीम के एक महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं।

मुख्य कोच ग्राहम रीड ने 2020 ओलंपिक की तैयारियों के लिए टीम में सबको मौका देने के लिए रुपिंदर पाल सिंह को शुरुआती गेम में स्टार्टिंग इलेवन से बाहर रखा और दूसरे मैच में टीम से बाहर कर दिया।

उप-कप्तान हरमनप्रीत सिंह और बीरेंदर लाकड़ा को डिफेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन दोनों में से कोई भी जिम्मेदार को सही से नहीं संभाल सका। डिफेंस के मामले में रुपिंदर पाल सिंह से गेंद छिनना मतलब तूफान का समना करना जैसा होता है, अपने अनुभव और कला से वो किसी को भी चकमा देने की क्षमता रखते हैं।

आपको बता दें कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम के शुरुआती इलेवन में इस 30 वर्षीय खिलाड़़ी की इसलिए आवश्यकता होती है क्योंकि वो टीम में सर्वश्रेष्ठ ड्रैग-फ्लिकर हैं। हरमनप्रीत सिंह ने अच्छा खेल नहीं दिखाया और पिछले दोनों मैच में उनका प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था इसमें कोई संदेह नहीं है। वो पेनल्टी कॉर्नर का फायदा नहीं उठा सके और ना ही अमित रोहिदास, जिन्हें ये काम सौंपा गया था।

फॉरवर्ड कर रही है लगातार गलतियां

पिछले साल अप्रैल में ग्राहम रीड के आने के बाद से भारतीय पुरुष हॉकी टीम की मानसिकता में उल्लेखनीय बदलाव आया है। ये टीम बहुत अधिक हमला करने लगी है और यही कारण है कि एफआईएच प्रो लीग में अब तक चार मैचों में 12 गोल हो चुके हैं।

यही नहीं उसी आक्रामक रणनीति ने भारतीय हॉकी टीम को नीदरलैंड के खिलाफ मैच में वापस लाने में मदद की, बेल्जियम के खिलाफ टीम के प्रदर्शन से ये भी पता चला कि उन्हें अपने मौके को भुनाने के लिए और सटीक होने की आवश्यकता है। मनदीप सिंह, रमनदीप सिंह, विवेक प्रसाद और ललित उपाध्याय अलग-अलग मौकों पर साधारण गलतियां कर रहे थे।

टीम के हालिया प्रदर्शन को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि इन सबके अलावा मिडफ्ल्ड में सुधार की ज़रुरत है जहां कप्तान मनप्रीत सिंह जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्हें अपने मिडिलर्स को अच्छी तरह से व्यवस्थित करने की जरुरत है ताकि ज्यादा से ज्यादा गेंद उसके कब्जे में रहे और अधिक से अधिक मौके बनाने के अवसर प्राप्त हो सकें।

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