टोक्यो ओलंपिक: ओलंपिक खेलों के लिए पूरी तरह तैयार हैं सविता पूनिया

रियो 2016 में भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया का कहना है कि उनकी टीम इस समय बेहतर स्थिति में है।

साल 2016 में रियो ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने वाली भारतीय हॉकी महिला टीम की गोलकीपर सविता पूनिया टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए काफी उत्सुक हैं। सविता पूनिया (Savita Punia) ने हाल ही में एक इंटरव्यू में ओलंपिक चैनल को बताया कि, “भारत की महिला हॉकी टीम कई सालों तक ओलंपिक खेलों का हिस्सा नहीं रही है। ऐसे में लगातार ओलंपिक के लिए हॉकी टीम का क्वालिफाई करना बहुत ही खुशी की बात है।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछले ओलंपिक खेलों में हमारा प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था। यही वजह है कि हम टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने और इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए दृढ़ संकल्पित रहे”।

अर्जुन अवॉर्ड विजेता और 2017 एशिया कप की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर सविता पूनिया टोक्यो ओलंपिक खेलों में सफलता हासिल करने की कर रहीं उम्मीद
अर्जुन अवॉर्ड विजेता और 2017 एशिया कप की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर सविता पूनिया टोक्यो ओलंपिक खेलों में सफलता हासिल करने की कर रहीं उम्मीदअर्जुन अवॉर्ड विजेता और 2017 एशिया कप की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर सविता पूनिया टोक्यो ओलंपिक खेलों में सफलता हासिल करने की कर रहीं उम्मीद

रियो 2016 का अनुभव लाभदायक

भारतीय हॉकी महिला टीम ने रियो 2016 में दूसरी बार ओलंपिक खेलों में भाग लिया था और उस दौरान टीम बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। चार मैच हारने के बाद टीम 12वें स्थान पर रही। हालांकि, सविता पूनिया टोक्यो ओलंपिक में रियो की उन गलतियों को सुधारने की उम्मीद कर रही हैं। हरियाणा के सिरसा की 29 वर्षीय इस खिलाड़ी ने बताया कि वो ऐसा क्यों सोचती हैं।

उन्होंने कहा, “2016 में ओलंपिक में हमने पिछली बार जब प्रतिस्पर्धा की थी, तब हमें ज्यादा अनुभव नहीं था। हम जानते थे कि हमें वहां जाना है और अच्छा खेलना है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के स्तर से हम आगाह नहीं थे। इस बार मुझे पता है कि सभी से उम्मीदें अधिक हैं, क्योंकि बीते कुछ वर्षों में हमारा प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है”।

महिला हॉकी टीम की गोलकीपर को लगता है कि अधिक अनुभव और खुद से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने की चाहत नौवीं रैंक पर काबिज़ भारत के टोक्यो में सफलता हासिल करने की संभावना अधिक होगी। 

उन्होंने कहा, “इस बार हम अधिक अनुभवी हैं और जानते हैं कि रैंकिंग बहुत कम मायने रखती है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम को ही जीत हासिल होती है। इसलिए हम हर एक मैच को गंभीरता से लेते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए आगे बढ़ेंगे।”

गोलकीपर के तौर पर भारत की पहली पसंद सविता पूनिया ने कहा, “मैं क्वार्टर-फाइनल में जगह बनाने जैसे वादे नहीं करना चाहती। यदि हम पूरे आत्मविश्वास के साथ अच्छा खेलते हैं तो हमें सफलता जरूर मिलेगी।”

सविता पूनिया पिछले साल यूएसए के खिलाफ मैच में गेंद पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। चित्र साभार: हॉकी इंडिया
सविता पूनिया पिछले साल यूएसए के खिलाफ मैच में गेंद पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। चित्र साभार: हॉकी इंडियासविता पूनिया पिछले साल यूएसए के खिलाफ मैच में गेंद पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। चित्र साभार: हॉकी इंडिया

स्पीड हॉकी में अच्छी फिटनेस साबित होगी मददगार

शीर्ष स्तर के अनुभव के अलावा रियो 2016 और टोक्यो ओलंपिक में एक बड़ा अंतर फिटनेस के स्तर का है। भारतीय महिला हॉकी टीम इस समय बेहतर स्तर पर है। सविता पूनिया ने कहा, “युवा और अनुभवी सभी जानते हैं कि ओलंपिक दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन है, इसलिए टीम इसे ध्यान में रखते हुए तैयारी और प्रतिस्पर्धाओं में मुकाबला कर रही है।”

“हमने एशियाई खेलों के बाद से कड़ी मेहनत करना शुरू कर दिया है। हमें यह अच्छी तरह पता है कि ओलंपिक अब बहुत दूर नहीं है। इसलिए हम अपनी फिटनेस पर भी अधिक ध्यान दे रहे हैं।”

विशेषज्ञ वेन लोम्बार्ड, जिन्हें एथलीटों में सर्वश्रेष्ठ के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने भारतीय हॉकी महिला टीम को फिटनेस पर ध्यान केंद्रित करने पर ज़ोर दिया। टीम पर उनका प्रभाव तब स्पष्ट हुआ जब सविता पुनिया ने उनके आने के बाद इसपर बात की और बताया कि फिटनेस की वजह से टीम के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ा।

सविता पूनिया ने दावा करते हुए कहा, “हमारी टीम का हिस्सा होना एक बड़ा फायदा है। वह 2017 से यहां हैं और पहले वर्ष में हमने टीम के प्रदर्शन और फिटनेस में बहुत अंतर नहीं देखा। लेकिन पिछले दो वर्षों से हमारी टीम को जो परिणाम मिल रहे हैं, वह एक तरह से फिटनेस के कारण ही हैं। उनके फिटनेस टिप्स बहुत मददगार साबित हुए है और इसने सभी खिलाड़ियों को खुद को आगे बढ़ाने और बेहतर बनाने में मदद की है।”

वेन लोम्बार्ड पर केवल खिलाड़ियों को ही नहीं बल्कि उनके कोच सोर्ड मरिन को भी अटूट विश्वास है। सविता पूनिया ने आगे कहा, “भारतीय टीम का हिस्सा होने के नाते वेन लोम्बार्ड अब हमारे लिए एक बड़ी उम्मीद बन गए हैं। हमारे कोच को भी उनपर बहुत भरोसा है और यह सुनिश्चित करता है कि वह हमारी फिटनेस पर अधिक काम करना चाहते हैं। कभी-कभी हम हॉकी नहीं खेलते हैं, लेकिन जिम और दौड़ना जारी रखते हैं।”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह कोई संयोग नहीं है फिटनेस बेहतर होने की वजह से हमारे खेल कौशल में काफी विकास हुआ है - दुनिया की अन्य सभी शीर्ष टीमों का भी यही मंत्र है।

उन्होंने कहा, “इससे पहले हम फिटनेस से ज्यादा अपने खेल और तकनीक पर ध्यान देते थे, लेकिन बेहतर परिणाम नहीं मिलने की वजह से हमें इस बाद का एहसास हुआ कि फिटनेस का बहुत अधिक महत्व है।”

“अगर हम जर्मनी और नीदरलैंड की टीम को देखें तो उनकी फिटनेस का स्तर सबसे अच्छा है। यही वजह है कि वे इन दिनों अपने खेल की मांग के अनुसार स्पीड हॉकी को खेलने में सक्षम हैं। स्पीड हॉकी खेलने के लिए फिटनेस का स्तर अच्छा होना बहुत जरूरी है।”

सविता पूनिया ने पिछले साल यूएसए के खिलाफ मैच में अपने साथियों के साथ पेनल्टी कॉर्नर का बचाव किया। चित्र साभार: हॉकी इंडिया
सविता पूनिया ने पिछले साल यूएसए के खिलाफ मैच में अपने साथियों के साथ पेनल्टी कॉर्नर का बचाव किया। चित्र साभार: हॉकी इंडियासविता पूनिया ने पिछले साल यूएसए के खिलाफ मैच में अपने साथियों के साथ पेनल्टी कॉर्नर का बचाव किया। चित्र साभार: हॉकी इंडिया

टोक्यो के मौसम की स्थितियों से अवगत होना जरूरी

फिटनेस-केंद्रित प्रशिक्षण सत्रों के विस्तार के चलते भारतीय गोलकीपर ने खुलासा किया कि कैसे वह दोपहर के सत्र आयोजित करके टोक्यो ओलंपिक के लिए अपेक्षित परिस्थितियों में खुद को अभ्यस्त कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “पहले सप्ताह (प्रशिक्षण के) के दौरान यह कठिन था क्योंकि दोपहर के दौरान मौसम बहुत गर्म होता है, लेकिन हम अपने लक्ष्य के बारे में जानते थे और हम कठिन से कठिन हर संभव प्रशिक्षण ले रहे थे। भले ही यह मुश्किल है, फिर भी हम अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसी परिस्थितियों (जापान के समान) में प्रशिक्षित करने के लिए प्रेरित हैं।"

ओलंपिक खेलों का समय जैसे-जैसे कम हो रहा है सविता पुनिया और भारत की महिला हॉकी टीम के अन्य खिलाड़ी अपनी तैयारियों के मामले में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। क्या टीम 1980 के खेलों की तरह चौथे स्थान पर रहेगी या टोक्यो में उससे आगे तक का सफर तय करेगी, यह देखने दिलचस्प होगा।

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