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जब आप से उम्मीद कम होती है, तब क़ामयाबी भी कहीं बड़ी मिलती है: अंजुम मोदगिल

3 पोजिशन की स्पेशलिस्ट माने जाने वाली अंजुम मोदगिल ने 2018 ISSF विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर एयर राइफल निशानेबाज़ी में भी अपना लोहा मनवाया।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

टोक्यो ओलंपिक खेलों के शुरू होने की उलटी गिनती शुरू हो गई है। भारत इतिहास की सबसे बड़ी शूटिंग की टीम भेजने के लिए तैयार है। उस टीम में भारतीय निशानेबाज़ अंजुम मोदगिल (Anjum Moudgil) भी शामिल हैं, जो इस टीम में सबसे पहले शामिल हुई थीं।

मोदगिल पहली भारतीय निशानेबाज़ थीं, जिन्होंने टोक्यो के लिए अपना कोटा सुरक्षित किया, दक्षिण कोरिया के चांगवोन में ISSF (इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन) विश्व चैंपियनशिप 2018 (ISSF World Championships 2018) में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीता।

चंडीगढ़ में जन्मी निशानेबाज़ इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन मानती हैं। राष्ट्रमंडल खेलों 2018 में मौदगिल ने 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में सिल्वर मेडल भी जीता था।

मोदगिल ने ओलंपिक चैनल से कहा, “मैं राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर खुश थी। मैंने CWG रिकॉर्ड बनाया और पदक जीता। जहां तक ​​पदक का सवाल  है, मुझे लगता है कि विश्व चैंपियनशिप पदक मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।”

“ओलंपिक कोटा जीतना वास्तव में कुछ अलग था। मैंने वास्तव में इसके बारे में कभी नहीं सोचा था। वो बहुत अच्छा दिन था।”

उम्मीद से आगे निकलीं मोदगिल

अक्सर सबसे बेहतरीन जीत तब होती है जब कम से कम उम्मीद की जाती हो और चांगवॉन में अंजुम मोदगिल की जीत भी वास्तव में ऐसी ही रही।

सिर्फ 24 साल की मोदगिल को टूर्नामेंट में 10 मीटर एयर राइफल में के बजाय, 3 पोजिशन एयर राइफल निशानेबाज़ के रूप में दर्जा दिया गया था। क्योंकि उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 3 पोजिशन में ही अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी।

उन्होंने कहा, 'विश्व चैंपियनशिप में मेरी तीन स्पर्धाएं थीं और एयर राइफल पहली थी। सभी ने मुझे 3 पोजिशन का शूटर माना, इसलिए एयर राइफल मैच में कोई दबाव या उम्मीद नहीं थी।"

वास्तव में, उन्हें खुद से बहुत कम उम्मीदें थीं क्योंकि इवेंट से पहले वो 10 मीटर एयर राइफल ट्रेनिंग में अपने लय से बहुत दूर थीं और वह बहुत सारी ग़लतियाँ कर रही थीं। लेकिन इस दिन, चीजें पूरी तरह बदल गईं।

उन्होंने कहा, “मैच के दौरान, मैंने सिर्फ तकनीक और प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने का मन बनाया था। मैंने स्कोर के बारे में ज्यादा नहीं सोचा। इससे मुझे काफी फायदा हुआ।”

जब अंजुम मोदगिल का दिल धड़कने लगा

मोदगिल ने क्वालिफ़ायर्स में तीसरा स्थान हासिल किया और आठ महिलाओं के साथ फाइनल में जगह बनाई। जब तक उन्हें इस बात की जानकारी होती, तब तक वो शीर्ष पांच में पहुंच चुकी थीं और ओलंपिक कोटा अब सिर्फ एक कदम दूर था।

मोदगिल ने कहा, “एक बार जब मैं शीर्ष पाँच में पहुँच गई, तो मैंने महसूस किया कि ओलंपिक कोटा भी मिल सकता है। मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। हालांकि मैंने अच्छा प्रदर्शन जारी रखा और रजत पदक जीता।“

उन्होंने दक्षिण कोरिया की हाना इम (Hana Im) (251.1) के बाद पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल करने के लिए कुल 248.4 स्कोर हासिल किया। एक अन्य लोकल फेवरेट जंग यूं-हेन (Jung Eun-hea) (228.0) चौथे स्थान पर रहीं, जबकि भारतीय निशानेबाज़ अपूर्वी चंदेला (Apurvi Chandela) (207.00) ने कांस्य पदक जीता। चंदेला ने इवेंट में अंतिम कोटा स्थान हासिल किया।

अपने कांस्य पदक के साथ मोदगिल, तेजस्विनी सावंत के बाद विश्व चैंपियनशिप पोडियम पर पहुंचने वाली दूसरी भारतीय महिला बनी, जिन्होंने 2010 में 50 मीटर राइफल प्रोन में स्वर्ण पदक जीता था।

करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि

इस कारनामे के बाद मोदगिल के शूटिंग करियर में एक नया मोड़ आया।

“कोटा जीतने के बाद, एयर राइफल में मुझसे उम्मीदें बढ़ गईं। इसलिए, विश्व चैंपियनशिप के बाद जितना समय मैं एयर राइफल को दे रही थी, उससे कहीं ज्यादा समय देने लगी। लेकिन दोनों इवेंट्स मेरे लिए अभी भी महत्वपूर्ण हैं।”

एयर राइफल पर ज्यादा फ़ोकस करने का फायदा मिला है। 2019 में वो महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल की ISSF वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे नंबर पर पहुंच गईं और वर्तमान में चौथे स्थान पर हैं। इसके अलावा वो महिलाओं की 50 मीटर 3 पोजिशन में भी शीर्ष रैंक वाली भारतीय निशानेबाज़ हैं।

टोक्यो के लिए तैयार मोदगिल अपने पहले ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्साहित हैं।

भारतीय शूटर ने कहा, "मुझे लगता है कि एक बार जब आप ओलंपिक कोटा जीत लेते हैं, तो मानसिक रूप से बहुत कुछ बदल जाता है। आपको टीम के रूप में भी अच्छा प्रदर्शन करना होता है और अपना 100 प्रतिशत देना होता है।”