ऑनलाइन चैंपियनशिप का दबाव बिल्कुल असली इवेंट की तरह: शिमोन शरीफ़

पूर्व भारतीय शूटर ने बताया कि उन्हें कैसे मिली इस ऑनलाइन टूर्नामेंट की प्रेरणा, इसकी क़ामयाबी और प्रतिक्रियाओं के बाद भविष्य में भी इसे कराने का विचार।

लॉकडाउन की वजह से अपने घरों में सीमित रहने वाले शूटर्स को ध्यान मे रखते हुए पूर्व भारतीय शूटर शिमोन शरीफ़ (Shimon Sharif) ने ऑनलाइन चैंपियनशिप आयोजित की थी, जिसकी तारीफ़ हर तरफ़ है और शूटर्स को इस समय भी एक प्रतिस्पर्धी इवेंट में शरीक़ होने का मौक़ा मिल गया।

15 साल पहले 2005 में indianshooting.com की स्थापना करने वाले शिमोन उस समय एक ऐक्टिव शूटर भी थे। एक बार फिर उन्होंने शूटिंग की दुनिया में क्रांति लाते हुए उस वक़्त ऑनलाइन चैंपियनशिप का आयोजन किया जब पूरी दुनिया में सब कुछ ठप पड़ा हुआ है। शरीफ़ की ये पहल भी रंग लाई और हर तरफ़ से उन्हें सराहना मिली, यही वजह है कि ऑनलाइन शूटिंग चैंपियनशिप क़ामयाब रही।

पहली ऑनलाइनल चैंपियनशिप में दुनियाभर के कुल 50 शूटर्स ने शिरकत की थी, जबकि दूसरी ऑनलाइन चैंपियनशिप पहले से भी ज़्यादा सफल रही जिसमें नॉकआउट मुक़ाबले से लेकर कॉमेन्ट्री और लाइव स्कोर तक की सुविधा थी।

इस चैंपियनशिप को 10 हज़ार से ज़्यादा दर्शकों ने फ़ेसबुक लाइव स्ट्रीम के ज़रिए देखा।

ओलंपिक चैनल ने फ़ोन के ज़रिए शिमोन शरीफ़ से बात की जहां उन्होंने कई बातों पर से पर्दे हटाया और ये भी बताया कि इस शानदार पहल का विचार उनके ज़ेहन में कहां से आया।

शिमोन शरीफ़ के साथ बातचीत के कुछ अंश:

सबसे पहले तो आपको दोनों ही ऑनलाइन चैंपियनशिप की सफलताओं के लिए मुबारकबाद, क्या आप बताएंगे कि इसका आइडिया आपको कैसे आया?

बहुत बहुत शुक्रिया। पहली चैंपियनशिप एक शानदार शुरुआत थी, और दूसरी तो उससे भी कहीं ज़्यादा अद्भुत, जहां कई लोगों ने इसमें शरीक़ होकर इसे ख़ास बना दिया।

असल में जब लॉकडाउन की वजह से ISSF वर्ल्ड कप (नई दिल्ली, म्यूनिख और बाकू) के साथ साथ कई और इवेंट स्थगित हो गए थे, तभी मैंने शूटर्स को व्यस्त रखने के लिए ऑनलाइन चैंपियनशिप के बारे में सोचा था।

एक शूटर या फिर किसी भी खिलाड़ी के लिए ये ज़रूरी होता है कि वह आने वाले इवेंट के लिए ख़ुद को तैयार रखें, और लगातार खेलते रहने से उन्हें प्रोत्साहन भी मिलता रहता है। और जब आगे कुछ न हो तो फिर वह बिल्कुल आलसी हो जाते हैं और उन्हें करने के लिए कुछ नहीं होता है।

इत्तेफ़ाक़ से उसी दौरान मैंने ये भी देखा कि कई मेरे दोस्त कॉर्पोरेट मीटिंग और वेबिनार्स में वीडियो-कॉलिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए शामिल हो रहे थे। तभी मेरे भी दिमाग़ में आया कि हम भी कुछ इस तरह से ही शूटिंग में भी कर सकते हैं।

ज़्यादातर शूटरों के पास घर में ही 10 मीटर और इस तरह की शूटिंग रेंज होती है, ताकि वह ट्रेनिंग कर सकें। ये सभी चीज़ें मेरे दिमाग़ में चल रहीं थीं जिसके बाद मैंने ऑनलाइन शूटिंग चैंपियनशिप को सच कर दिखाया।

हमने सुना है कि शायद इस तरह का इवेंट इससे पहले जर्मनी में भी हुआ था। क्या वहां से भी आपने कोई प्रेरणा ली ?

सिर्फ़ जर्मनी ही नहीं, कई और देशों में भी ऐसे इवेंट हुए थे, लेकिन उन सबसे यह बिल्कुल अलग है।

वहां शूटर्स से अपनी एक्टिविटी को रिकॉर्ड करने के बाद वीडियो भेजने को कहा जाता था, जिसके बाद शूटर्स का स्कोर तय किया जाया था। इस लॉकडाउन में ऐसे भी वीडियो के ज़रिए कोचिंग जारी है।

लेकिन हमने जो चैंपियनशिप की वह बिल्कुल रियल टाइम थी, जहां एक दूसरी की गतिविधियों को सभी देख रहे थे और सब कुछ पारदर्शी था। दूसरे इवेंट की जो आपने बात की, उसे मैं ऑफ़लाइन तो नहीं कह सकता, लेकिन यहां आपको लाइव कॉमेंट्री भी देखने को मिली, नतीजे भी लगातार सुनाए जा रहे थे, जो बिल्कुल एक रियल लाइफ़ शूटिंग का अहसास करा रहा था।

इस चैंपियनशिप के लिए शूटर्स को मनाना और शरीक़ करना आपके लिए कितना आसान या मुश्किल था ?

ये एक बिल्कुल नए तरीक़े का इवेंट था, और ज़ाहिर है जब कुछ नया हो रहा होता है तो इंसान की आदत होती है कि वह थोड़ा उसको लेकर हिचकिचाता भी है।

इसलिए उन्हें समझाने के लिए, मैंने अपनी ख़ुद की साख के बारे में बात की, ज़ाहिर है मैं भारतीय शूटिंग टीम का हिस्सा रहा हूं और खेल के साथ मेरा लंबा जुड़ाव रहा। मेरी बात का असर हुआ और मैंने कई खिलाड़ियों को इस तरह पहली बार आयोजित हो रही ऑनलाइन चैंपियनशिप में साथ लेकर आया।

उनके पास ये एक मौक़ा लेकर भी आया था कि वह ख़ुद को दुनिया में इस समय चल रहे कोरोना वायरस (COVID-19) की ख़बरों से दूर रखें और एक बार फिर खेल में ख़ुद को व्यस्त करें, जो सभी एथलीट चाहते भी हैं।

इतना ही नहीं इस चैंपियनशिप में वैसे भी शूटर्स शरीक़ हुए जो किसी वजह से प्रतिभागी नहीं हो पाए थे। उन्हीं में से एक थीं भारतीय महिला शूटर मेहुली घोष (Mehuli Ghosh), उनका टार्गेट सिस्टम सेट अप नहीं हो पाया था इसलिए वह इसमें प्रतिभागी के तौर पर शामिल नहीं हो पाईं लेकिन उन्होंने पूरी प्रतियोगिता लाइव देखी और बाद में मुझसे कहा कि इसमें प्रतिस्पर्धा शानदार थी और वह आगे इससे ज़रूर जुड़ना चाहेंगी।

बड़े स्तर पर आयोजित हुई इस चैंपियनशिप में क्या कुछ तकनीकी चुनौतियों का भी आपको सामना करना पड़ा ?

जैसा मैंने पहले भी कहा कि ये बिल्कुल नई चीज़ थी, और सभी के लिए ये पहली बार था इसलिए इसका कोई ब्लू प्रिंट मौजूद नहीं था।

हमने इवेंट के एक दिन पहले टेस्ट रन किया था, मैंने सभी प्रतिभागियों को एक दिन पहले शाम के 4 बजे भारतीय समयनुसार सभी को ऑनलाइन एकत्रित होने को कहा था, ताकि अगर कोई दिक़्क़त हो तो उसे सही कर लिया जाए।

जो बड़ी परेशानी थी वह ये थी कि कई शूटर्स का इंटरनेट कनेक्शन कट जा रहा था, जिसकी वजह से वह ज़ूम एप से लॉगआउट हो जा रहे थे, और हमें उन्हें तुरंत दोबारा जोड़ना पड़ रहा था।

दूसरी परेशानी ये आ रही थी कि कैसे जल्द से जल्द स्कोर इकट्ठा करते हुए उसे सभी के सामने लाया जाए, जो बिना कई लोगों के मौजूदगी के बहुत मुश्किल हो जाता है।

साथ ही साथ, इस बात पर भी ध्यान रखना पड़ रहा था कि हज़ारों लोग लाइव देख रहे हैं, तो ये भी दबाव था कि अगर कुछ गड़बड़ी हुई तो अच्छा नहीं लगेगा। लेकिन शुक्र इस बात का है कि सब कुछ अच्छे से हो गया।

दूसरी ऑनलाइन चैंपियनशिप में पहले से भी ज़्यादा शूटर्स ने की शिरकत। तस्वीर साभार: indianshooting.com/Twitter
दूसरी ऑनलाइन चैंपियनशिप में पहले से भी ज़्यादा शूटर्स ने की शिरकत। तस्वीर साभार: indianshooting.com/Twitterदूसरी ऑनलाइन चैंपियनशिप में पहले से भी ज़्यादा शूटर्स ने की शिरकत। तस्वीर साभार: indianshooting.com/Twitter

शूटिंग काफी हद तक एक ऐसा खेल है, जहाँ आप दूसरे खेल के विपरीत ख़ुद से प्रतिस्पर्धा करते हैं। क्या इस वजह से भी ऑनलाइन शूटिंग का आयोजन करना अपेक्षाकृत आसान रहा ?

शूटिंग एक ऐसा खेल है जो ऑनलाइन चैंपियनशिप को मूल आकार देने में क़ामयाब रहा। क्योंकि टेनिस, बैडमिंटन या बॉक्सिंग की ऑनलाइन प्रतियोगिता कराना मुमकिन नहीं है।

फिर भी मैं ये तो नहीं कहूंगा कि इसे आयोजित करना आसान है, लेकिन शूटिंग के लिए एक वर्चुअल संस्करण में वह सबकुछ मौजूद है जिससे स्कोर की तुलना की जा सकती है और उस आधार पर विजेताओं की घोषणा होती है।

रेंज में शूटिंग करना और ऑनलाइन इवेंट में शूटिंग करना, इन दोनों में कितना अंतर है और एक शूटर पर दबाव कैसा रहता है ?

हालांकि मैंने कभी भी किसी ऑनलाइन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लिया है, लिहाज़ा अपना अनुभव तो नहीं बता सकता।

लेकिन भारतीय शूटर जिन्होंने इसमें हिस्सा लिया जैसे कि दिव्यांश सिंह पंवार (Divyansh Singh Panwar), मनु भाकर (Manu Bhaker) और संजीव राजपूत (Sanjeev Rajput) ने ये माना और मुझसे साझा भी किया है कि इसमें भी दबाव बिल्कुल वैसा ही था जैसे रेंज में होने वाले इवेंट में रहता है। मुझे लगता है कि एक शूटर के लिए ये बहुत अहम है।

क्या इस तरह का इवेंट आने वाले समय में बड़े स्तर पर देखा जा सकता है ? मेरे कहने का मतलब है कि क्या ISSF के अंदर ऐसा कोई इवेंट संभव है ?

मुझे पूरा यक़ीन है कि ISSF ने इस इवेंट को ज़रूर देखा होगा, क्योंकि शूटिंग बिरादरी एक दूसरे के बेहद क़रीब है।

असल में कोई भी ISSF इवेंट तभी मुमकिन है जब अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ (IOC) की मान्यता हासिल हो।

मैं एक और बात कहना चाहूंगा कि ये ऑनलाइन चैंपियनशिप सिर्फ़ लॉकडाउन तक ही सीमित नहीं रहेगी। मेरी पूरी कोशिश होगी कि आगे भी मैं इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित कराता रहूं, मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस चैंपियनशिप में और भी शूटर्स हिस्सा लेंगे, क्योंकि अभी कई निशानेबाज़ों के पास घर पर सेट अप मौजूद नहीं था।

उन्हें रेंज में जाने के लिए ट्रैवल करना पड़ता है जहां जाकर वह प्रैक्टिस करते हैं, और यहां यानी ऑनलाइन चैंपियनशिप में वे बिना यात्रा किए अपने घर से ही दुनिया के दिग्गज शूटर्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं जिससे उनके यात्रा और रहने के ख़र्चे में भी कमी आएगी। साथ ही साथ ये उन शूटर्स के लिए भी फ़ायदेमंद हो सकता है जो राष्ट्रीय टीम का फ़िलहाल हिस्सा नहीं हैं, लेकिन यहां से वह अपने कौशल में निखार ला सकते हैं।

मुझे यक़ीन है कि जैसे-जैसे यह आगे विकसित होगा, हमारे पास बेहतर तकनीक भी होगी और इससे शूटिंग को आगे बढ़ने में भी मदद मिलेगी।

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