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सुमा शिरुर को विश्वास है कि लॉकडाउन के बाद भारतीय निशानेबाज़ करेंगे शानदार प्रदर्शन

COVID-19 के प्रकोप से पहले अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भारतीय जूनियर टीम की कोच का मानना है कि ओलंपिक के आस-पास निशानेबाज़ फिर से उसी रंग में लौट आएंगे।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

भारतीय शूटर्स ने पिछले कुछ समय से काफी शानदार प्रदर्शन किया है। ऐसे में पूरा देश उनसे ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा है।

पिछले सीज़न में उन्होंने मुश्किल से कोई मौका गंवाया था, भारतीय निशानेबाज़ अपने खेल को 2020 में एक लेवल और ऊपर ले जाने के लिए उत्सुक थे, विशेष रूप से ओलंपिक वर्ष होने के नाते, शूटर और उत्साहित थे।

लेकिन कोरोना वायरस (COVID -19) महामारी के चलते आयोजकों को एक साल तक खेलों को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद देश के निशानेबाज़ों को अपनी योजनाओं को फिर से बनाने बड़े।

इस समस्या से निपटने में पूर्व ओलंपियन सुमा शिरुर (Suma Shirur) उनकी मदद कर रही हैं।

पिछले कुछ वर्षों से पूर्व भारतीय निशानेबाज़ ने जूनियर राइफल टीम के साथ बेहतर प्रदर्शन वाले कोच की क्षमता में खुद को भारतीय शूटिंग के साथ जोड़ा हुआ है।

ओलंपिक चैनल ने 46 वर्षीय इस भारतीय शूटर के साथ इंटरव्यू किया, जिसमें भारतीय शूटिंग कैसे महामारी के प्रभावों से निपट रही है, कोचों की भूमिका और आगे की तैयारियों पर बात की गई।

पढ़िए उस इंटरव्यू के कुछ अंश:

आप पिछले दो वर्षों से भारतीय जूनियर राइफ़ल टीम के साथ हाई-परफ़ॉर्मेंस कोच हैं। आपका अनुभव कैसा रहा है?

मुझे लगता है कि ये शानदार रहा है। मुझे याद है कि जब मैंने भारतीय टीम की कमान संभाली थी, तब जूनियर टीम ने किसी भी विश्व कप में पदक नहीं जीता था। लेकिन टीम में शामिल होने के बाद, पिछले दो वर्षों में हमने 50 से अधिक पदक जीते हैं, नए विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं और अधिकांश प्रतियोगिताओं में अपना वर्चस्व कायम रखा है। मुझे लगता है कि ये पिछले दो वर्षों में एक शानदार सफर रहा है।

भारतीय निशानेबाज़ बेहद प्रतिभाशाली हैं। और जब वो अपने लय में होते हैं, तो वो खुद को, मुझे और देश को गौरवान्वित करते हैं। मैंने टीम के साथ होने का पूरा आनंद लिया है।

ऐसी महामारी की स्थिति को देखते हुए, इस समय में कोच की भूमिका कितनी बढ़ जाती है?

मुझे लगता है कि अब हमारी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। ये सीनियर निशानेबाजों को उतना प्रभावित नहीं कर सकता है जितना कि ये जूनियर्स को करेगा क्योंकि वो युवा और उनके मुकाबले नए हैं। वो शायद नहीं जानते होंगे कि ऐसी स्थिति को कैसे संभालना है।

मुझे लगता है कि उन्हें कोचों के समर्थन और मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी ताकि वो शूटिंग करते समय भटके नहीं और इसलिए उन पर अधिक फोकस करने की ज़रुरत है।

आपको पता होगा कि बच्चों को अपने आसपास दूसरे बच्चों की आवश्यकता होती है। वो अपनी उम्र के लोगों के साथ घूमना पसंद करते हैं। लंबे समय तक इस तरह के सामाजिक दूरी बनाए रखना आसान नहीं है, खासकर बच्चों के लिए। मुझे लगता है कि युवाओं को लंबे समय तक उनके घरों में बंद रहने से इसके अलग प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए, कोच को शूटर को प्रेरित रखने, उन्हें फोकस रखने और उन्हें प्रतिदिन टास्क देकर उन्हें इस चीज से बाहर निकलने में मदद करने की आवश्यकता होती है और रेंज में नहीं होने के बावजूद उन्हें गाइड करना होता है।

NRAI ने पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजों के लिए ऑनलाइन सत्र शुरू किया है। ऐसी पहल शुरू करने के लिए बातचीत कैसे हुई है?

लगभग एक महीने के बाद, लॉकडाउन के शुरुआती दौर में, हमने महसूस किया कि इससे पहले कि कुछ गलत हो, हमारे पास कुछ करने का समय है। इसलिए हमने सभी स्तरों पर इन वीडियो सत्रों को शुरू किया। मेरे पास ओलंपिक टीम के साथ मेरे ऐकेडमी के निशानेबाजों भी हैं।

जैसा कि मैंने पहले कहा, युवाओं और बच्चों को बात करने के लिए उन्हीं के उम्र के लोग चाहिए होते हैं। इस तरह की पहल से उन्हें प्रेरणा मिलती है और वे आगे बढ़ते रहते हैं। इन वीडियो कॉल ने उन्हें एक मंच दिया है जहां वो अन्य युवाओं के साथ बातचीत कर सकते हैं, हँस सकते हैं, उनके साथ चैट कर सकते हैं।

मेरे लिए, मुख्य कार्य उन्हें मानसिक रूप से उत्तेजित रखना है। यही मैं करने की कोशिश कर रही हूं।  अब तक अच्छा रहा है विशेष रूप से ओलंपिक टीम के साथ, हमने एक ऑनलाइन फिजियोथेरेपी और फिटनेस सत्र शुरू किया है जो ये सुनिश्चित करने के लिए है कि हर कोई खुद को फिट रखे और आने वाले सत्र के लिए लिए तैयार हो।

इस वर्ष कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण, भारतीय शूटिंग 2020 के बचे हुए सत्र में क्या करने की उम्मीद कर रही है?

सब कुछ के लिए योजना बनाई गई है। हमारे पास A, B और C की योजना है और प्राथमिकता ये है कि हमें ये सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हर किसी के पास घर पर ट्रेनिंग करने के लिए उपकरण हों। होम ट्रेनिंग प्राथमिकता है और हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि ओलंपिक टीम में शामिल हर एक शूटर के घर पर एक बुनियादी सुविधा उपलब्ध हो। शुक्र है कि शूटिंग एक व्यक्तिगत खेल है और कई बार हम कुछ नया कर सकते हैं।

सुमा शिरूर ने आश्वासन दिया कि NRAI ने बचे हुए सीज़न में हर संभावना के लिए योजना बनाई है, जिससे शूटर का मुख्य उद्देश्य बना रहे। फोटो: ISSF

दूसरी योजना ये है कि अगले कुछ महीनों में ओलंपिक टीम के लिए आइसोलेशन शिविर लगाया जाए। और फिर हमें प्रतियोगिताओं के लिए तैयार रहना होगा, जो मुझे नहीं लगता कि इस वर्ष के अंत से पहले होगा। फिर भी, जब भी ऐसा होता है, हमारे पास एक योजना होगी।

यहां तक कि अगर लॉकडाउन को खोलना है, तो इस बात का बहुत ध्यान रखा जाएगा कि हमें स्वच्छता बनाए रखने और सोशल-डिसटेंसिंग के मामले में क्या करना है। इसलिए, इसे ध्यान में रखते हुए, बहुत सारे बदलाव करने होंगे जो भविष्य में हो सकते हैं।

*टोक्यो ओलंपिक से ठीक पहले भारतीय निशानेबाज़ दल 2020 के सीज़न में चोटी पर पहुंचकर आत्मविश्वास से लबरेज़ हो गई थी। लेकिन खेलों को स्थगित करने के बाद, कार्यक्रम को फिर से शुरू करना कितना चुनौतीपूर्ण है? *

यह बहुत निराशाजनक था (ओलंपिक को स्थगित करना) क्योंकि हमारे निशानेबाज़ बहुत अच्छा कर रहे थे। ये कुछ ऐसा है जो हमारे हाथ में नहीं है।

जहां तक ​​निशानेबाजों का सवाल है, हम उन्हें शारीरिक रूप से फिट रखने और ट्रेनिंग के मामले में ट्रैक पर हैं। लेकिन फिर इस साल कोई अंतरराष्ट्रीय इवेंट नहीं होनी है, हम अगले साल ओलंपिक के लिए कैसे ट्रेनिंग लें, इस बारे में एक ठोस योजना बनानी चाहिए।

मुझे लगता है कि अभी भी मौजूदा हालात को देखते हुए एक ठोस योजना बनाना मुश्किल है, लेकिन एक बार जब अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर खुल जाता है, तो उन्हें अपने लय में आने में 3-4 महीने का समय लगेगा।

लेकिन ये देखते हुए कि हमारे निशानेबाजों के पास प्रतिभा है और ये समझ है कि यह महामारी सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, दुनिया भर में फैली है, ऐसे में मुझे नहीं लगता कि पहले इतना अच्छा करने वाले हमारे शूटर अगले साल ओलंपिक के लिए अपने लय में वापस नहीं आ सकते हैं।

NRAI इस साल ओलंपिक टीम की घोषणा करना चाहती है। आपका क्या कहना है...

NRAI ओलंपिक टीम की घोषणा करेगा, जो कि 2-3 रिजर्व शूटरों के साथ टीम होगी। ये महत्वपूर्ण है ताकि चीजों को बेहतर तरीके से की जा सकें और आप इन निशानेबाजों का खयाल रख सकें। हम बहुत कम संख्या में निशानेबाजों को ट्रेनिंग कैंप में उनकी ट्रेनिंग करा सकें ताकि खेल जब फिर से शुरू होंगे तो वो तैयार हों। क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपको पता नहीं चलेगा कि आपको किसके साथ काम करना है। आपके पास निशानेबाजों की एक बड़ी संख्या होगी।

दूसरी बात ये है कि इन निशानेबाजों ने पिछले दो वर्षों से अपना स्थान बनाए रखने के लिए पहले ही सब कुछ कर लिया है। ये लोग हर एक प्रतियोगिता में रिजल्ट देते रहे हैं और अपने स्तर को बनाए रखा है। ये एक आसान काम नहीं है। वो ये काम दो साल से कर रहे हैं और मुझे यकीन है कि वो इसे अगले साल भी कर सकते हैं।

 मुझे लगता है कि ओलंपिक टीम का होना महत्वपूर्ण है। हमारे पास पिछले चार सालों से ओलंपिक नीति है और सभी निशानेबाजों को उनकी रैंकिंग और प्रदर्शन के आधार पर चुना गया है। इसलिए, मुझे लगता है कि नीति का सम्मान करना और टीम के साथ आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है जिसमें एक या शूटर और शामिल होंगे। 

रियो ओलंपिक 2016 के बाद, भारतीय शूटिंग ने टोक्यो ओलंपिक पर नज़र रखने के साथ अपने जूनियर कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने का एक जागरूक निर्णय लिया। आप इस परिवर्तन का हिस्सा रही हैं। क्या आप हमसे पिछले चार सालों के बारे में बता सकती हैं?

2016 एक ऐसा साल था जहां NRAI को फिर से सोचना पड़ा कि क्या करना है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सबकुछ जगह पर था (2016 ओलंपिक के लिए) लेकिन हम पदक नहीं जीत सके। मैं इन सभी परिवर्तनों को लाने के लिए, मैं अध्यक्ष और NRAI की भूमिका की सराहना करती हूं।

उन सभी पूर्व निशानेबाजों को शामिल किया गया जो पहले अपने खेल में शीर्ष पर थे और जानते थे कि सबसे बड़े मंच पर पदक लाने के लिए क्या करना होगा। मुझे लगता है कि पूरी प्रक्रिया में उन्हें शामिल करना भारतीय शूटिंग के लिए गेम-चेंजर था। मैं उस विश्वास की सराहना करती हूं जो राष्ट्रपति ने हमें पूरे कार्यक्रम को चलाने के लिए दिखाया।

2016 से पहले, हमारे पास कभी भी ओलंपिक नीति नहीं थी। लेकिन इस बार पूर्व निशानेबाजों के साथ, कोच और विशेषज्ञ इस नीति का मसौदा तैयार करने के लिए बैठे थे, ये कोचों के लिए एक ज़िम्मेदारी से भरी हुई भूमिका थी। जिसका परिणाम हर कोई देख सकता है।