सौरभ चौधरी: अपने आदर्श अभिनव बिंद्रा की तरह ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना है लक्ष्य

भारतीय शूटर को अब अपने ओलंपिक डेब्यू के लिए एक साल का इंतज़ार करना होगा, लेकिन जब वह निशाना लगाएंगे तो लक्ष्य एक ही होगा

दुनिया के किसी भी कोने में एक 16 साल के बच्चे की ज़िंदगी या तो कॉलेज और उसकी पढ़ाई में व्यस्त रहती है या फिर वह जवानी में हो रहे बदलाव को महसूस कर रहा होता है। बहुत कम ऐसे होते हैं जो इस कच्ची उम्र में भी शिद्दत से कड़ी मेहनत कर रहे होंते हैं और रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाते हैं। लेकिन भारतीय शूटर सौरभ चौधरी (Saurabh Chaudhary) उन्हीं में से एक हैं।

रोचक बात ये है कि सौरभ के नाम जूनियर और सीनियर दोनों ही स्तर पर पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल का वर्ल्ड रिकॉर्ड एक ही प्वाइंट पर दर्ज है। जो उन्होंने 16 साल की उम्र में हासिल किया था।

पिछले साल नई दिल्ली में आयोजित शूटिंग वर्ल्ड कप में सौरभ चौधरी ने बेहतरीन अंदाज़ में सीनियर मेंस टीम में अपना डेब्यू किया था, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। उन्होंने अपने पहले ही टूर्नामेंट में रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता और टोक्यो ओलंपिक के लिए भी क्वालिफ़ाई कर लिया।

ये तो बस इस किशोर के नाम कई पदकों की फ़ेहरिस्त में से एक है, उम्मीद है कि वह इस प्रदर्शन को अपने पहले ओलंपिक में भी दोहराएं।

बचपन से ही प्रतिभा के धनी

हालांकि सौरभ चौधरी की उम्र बहुत कम है, लेकिन उन्होंने शूटिंग पांच साल पहले से यानी 13 वर्ष की उम्र से ही करते आ रहे हैं। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब वह अपने एक दोस्त के साथ गांव कलीना (उत्तरप्रदेश में स्थित एक गांव) से कुछ दूर गए थे, जहां सौरभ का दोस्त शूटिंग सीखने जाता था। सौरभ को पहली ही बार में शूटिंग ने इतना प्रभावित कर दिया कि उन्होंने अगले दिन से ही शूटिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी।

उनके कोच अमित श्योरॉण (Amit Sheoran) और शूटिंग रेंज में मौजूद दूसरे सभी बच्चे सौरभ की प्रतिभा देखकर दंग रह गए थे। बस तीन से चार महीनों में ही उन्होंने अपने सभी साथियों को पीछे छोड़ दिया था, जिसके बाद कोच को आख़िरकार सौरभ के परिवार से गुज़ारिश करनी पड़ी कि अब वक़्त आ गया कि इन्हें पिस्टल ख़ीरद कर दी जाए।

शूटिंग के लिए पिस्टल काफ़ी महंगी होती है और सौरभ जिस परिवार से आते थे, उनके लिए इतना ख़र्च कर पाना बहुत मुश्किल था। लेकिन उन्हें ये पता था कि जिस प्रतिभा का धनी उनका बच्चा है, अगर उसे सही समर्थन मिला तो उसका भविष्य उज्जवल हो सकता है। लिहाज़ा सौरभ के सपने को सच करने के लिए उनके घर वालों ने कर्ज़ लेकर उन्हें पिस्टल दिलाई थी।

सौरभ के बड़े भाई नितिन चौधरी ने स्क्रॉल.इन के साथ बातचीत में कहा, ‘’हम सभी परिवार के सदस्यों के बीच इस बात को लेकर चर्चा हुई और फिर हमने फ़ैसला किया कि सौरभ के लिए पिस्टल ख़रीदनी चाहिए। सौरभ के पास हालांकि अब दो-दो पिस्टल हैं, लेकिन वह अभी भी पहली वाली से ही शूट करता है।‘’

परिवार का समर्थन सौरभ को इस क़दर था कि उनके लिए घर में ही दो कमरों के आमने सामने एक शूटिंग रेंज बनाई गई, ताकि वह शांति से शूटिंग की प्रैक्टिस कर सकें। ये कुछ ऐसा था जो उन्हें शूटिंग रेंज में भी नहीं मिल सकता, क्योंकि वहां कई और बच्चे भी सीख रहे होते हैं।

सौरभ चौधरी के नाम है मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट का जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड। तस्वीर साभार: ISSF
सौरभ चौधरी के नाम है मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट का जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड। तस्वीर साभार: ISSFसौरभ चौधरी के नाम है मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट का जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड। तस्वीर साभार: ISSF

जब सौरभ बनने लगे सुर्ख़ियां

सौरभ को मिला परिवार का समर्थन और आर्थिक मदद तब रंग लाने लगी जब 2018 में पहली बार सौरभ ने सुर्खियां बटोरीं, ये मौक़ा था 2018 एशियन गेम्स में रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीतना। उन्होंने इस दौरान 42 वर्षीय जापानी शूटर तोमोयुकी मात्सुदा (Tomoyuki Matsuda) और हमवतन अभिषेक वर्मा (Abhishek Verma) को पीछे छोड़ दिया था।

एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले सौरभ भारत के सबसे युवा शूटर बन गए थे, और ऐसी फ़ेहरिस्त में अपना नाम शुमार कर लिया था जिसमें उनसे पहले सिर्फ़ चार भारतीय शामिल थे। उनके नाम हैं: रंधीर सिंह (Randhir Singh), रोनजन सोढ़ी (Ronjan Sodhi), जीतू राय (Jitu Rai) और मौजूदा राष्ट्रीय पिस्टल कोच जसपाल राणा (Jaspal Rana)।

जैसे जैसे समय आगे बढ़ता गया, सौरभ चौधरी भी उम्र के साथ साथ क़ामयाबियों की भी फ़ेहरिस्त भी बढ़ाते चले गए। 2018 में ही सौरभ ने अर्जेंटीना में आयोजित यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता, और ISSF जूनियर वर्ल्ड कप, ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन एयरगन चैंपियनशिप में भी उनके नाम 5 गोल्ड मेडल और एक कांस्य पदक रहे।

साल 2019 भी सौरभ के लिए बेहतरीन अंदाज़ में शुरू हुआ था, जहां उन्होंने टोक्यो 2020 में भी अपना स्थान पक्का कर लिया। साथ ही साथ सौरभ चौधरी और उनकी जोड़ीदार मनु भाकर (Manu Bhaker) की साझेदारी ने भी ख़ूब सुर्खियां बटोरीं।

इस जोड़ी ने 2019 शूटिंग वर्ल्ड कप के मिश्रित 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पदक जीता और फिर उन्होंने ISSF वर्ल्ड कप बीजिंग, म्यूनिख और रियो डे जेनारियो में भी दो व्यक्तिगत गोल्ड मेडल भी हासिल किए।

इस जोड़ी की क़ामयाबी का राज़ मनु भाकर से जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा, ‘’हम लोग एक दूसरे के साथ बहुत अच्छे से नहीं जुड़े हुए हैं, हम एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। लेकिन हम बस अपने व्यक्तिगत प्रदर्शनों पर ध्यान देते हैं, और हम दोनों एक दूसरे के बारे में बिल्कुल नहीं सोचते। और यही चीज़ हमें ज़्यादा निडर बनाती है और नतीजे आपके सामने हैं।‘’

अंजुम मोदगिल (Anjum Moudgil) और अपूर्वी चंदेला (Apurvi Chandela) के साथ साथ ये दोनों युवा भारतीय शूटर टोक्यो ओलंपिक में दावेदारी को बेहद मज़बूत बनाते हैं।

ओलंपिक गोल्ड पर है निशाना

भारत का ये युवा शूटर जिस तरह से आगे बढ़ रहा है और ख़ुद को इसने बनाया है, इसे देखते हुए सौरभ के कोच को भी उनसे काफ़ी उम्मीदें हैं।

सौरभ चौधरी के कोच अमित श्योरॉण ने स्क्रॉल.इन के साथ बातचीत में कहा, ‘’मुझे गर्व होता है कि मैंने जो कुछ भी उसे सिखाया था, उसे आज भी सब याद है और वह कुछ नहीं भूलता। हो सकता है भविष्य में कोई ऐसा हो जो सौरभ की तरह हो, लेकिन सौरभ का स्तर सभी से अलग है। कैसे कोई इतना अकेले रह सकता है, इतना शांत रह सकता है ? जिस तरह से सौरभ ने ख़ुद को बनाया है, दूसरा कोई नहीं कर सकता।‘’

सौरभ चौधरी के छोटे से करियर में ही अब तक जिस तरह से कई पदक और उपलब्धियां हासिल हो चुकी हैं, उसे देखते हुए उनसे ओलंपिक में स्वर्ण पदक की उम्मीद करना कहीं से ग़लत नहीं है। इस उम्र में जब कई एथलीट दबाव में ही बिखर जाते हैं, सौरभ बिल्कुल शांत और संयम रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर निशाना लगाते हैं।

सौरभ चौधरी भी चुनौतियों के लिए तैयार हैं, और हाल ही में उन्होंने फ़ॉर्ब्स इंडिया मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘’ये मेरा पहला ओलंपिक होगा, और मुझे उम्मीद है कि मैं अपने आदर्श और प्रेरणा अभिनव बिंद्रा की ही तरह ओलंपिक गोल्ड मेडल लेकर लौटूंगा।‘’

सौरभ के लिए सीनियर स्तर पर पहले दो साल किसी करिश्मे से कम नहीं रहे हैं, और अब जब IOC ने टोक्यो 2020 को एक साल के लिए स्थगित कर दिया है तो ये सौरभ के लिए ख़ुद को तैयार करने का सुनहरा मौक़ा है।

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