फ़ीचर

साल 2020 के सर्वश्रेष्ठ विचार: COVID से परेशान होने के बावजूद एथलीटों ने कुछ ऐसी बाते कहीं जिसने लड़ने की ताक़त दी

परीक्षा से भरे इस साल में एथलीटों की कुछ बेहतरीन बातों को संजोए ओलंपिक चैनल आपके सामने लेकर आया है ये स्पेशल फ़ीचर।

लेखक सैयद हुसैन ·

साल 2020 कई तरह से सभी के लिए चुनौतियों से भरा रहा है, फिर चाहे वह कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी से लड़ना हो या फिर उसकी वजह से पैदा हुई स्थिति; ये एक ऐसा साल रहा जिसने चैंपियनों की भी परीक्षा ली। पूरी दुनिया में एथलीटों के लिए भी चीज़ें कुछ अलग नहीं रहीं।

दुनिया जब इस महामारी से जूझ रही है तो ऐसे में ओलंपिक चैनल ने भी खेल की दुनिया के कई बड़े नामों से बात की और उनके विचार जाने।

यहां हम उनमें से कुछ बेहतरीन और प्रेरणादायक क्वोट्स आपके सामने लेकर आए हैं।

अभिनव बिंद्रा ने एथलीटों पर जाताया भरोसा

कोविड-19 की वजह से टोक्यो ओलंपिक गेम्स को भी एक साल के लिए स्थगित करना पड़ा था।

इस बीच भारतीय शूटिंग दिग्गज अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने एथलीटों पर भरोसा जताया और कहा कि खिलाड़ी इन परिस्तिथियों का डट कर सामना करने के लिए तैयार हैं

अभिनव बिंद्रा को भरोसा है कि खिलाड़ी कोरोना महामारी की वजह से लगे ब्रेक के बाद अच्छे अंदाज में वापसी करेंगे  

“मुझे भरोसा है कि न सिर्फ़ भारतीय एथलीट बल्कि पूरी दुनिया के खिलाड़ी इस मिट्टी के बने होते हैं जो इन हालातों का सामना डट कर करने के लिए तैयार रहेंगे। इन चुनौतियों को भी वह सकारात्मक अंदाज़ में स्वीकार करेंगे और इसी हिसाब से आगे की योजना बनाएंगे।“

दोगुने जोश के साथ करेंगे वापसी

2016 रियो पैरालंपिक गेम्स की रजत पदक विजेता और भारतीय पैरालंपिक कमेटी की अध्यक्ष दीपा मलिक (Deepa Malik) ने भी कहा था कि एथलीट एक नए जोश के साथ और भी मज़बूत इरादे के साथ वापसी करेंगे

“जब आपको लगता है कि आपके हाथ से कुछ जा रहा है तो आपके लिए उस चीज़ का महत्व और बढ़ जाता है और उसकी अहमियत का एहसास होता है। मैं मानती हूं कि इस महामारी की स्थिति से एथलीट और भी मज़बूत होंगे। ये उनके लिए एक मौक़ा है और वे अब दोगुने जोश के साथ ओलंपिक की तैयारी करेंगे।“

उसकी फ़िक्र मत करिए जो आपके नियंत्रण में नहीं

ज़्यादातर वक्त घर के अंदर भी रहना आसान नहीं होता, बहुत से एथलीटों को इस दौरान ये भी समझ में आ गया।

भारतीय महिला टीम के प्रमुख कोच शोर्ड मारिन ने क़रीब 10 महीने बेंगलुरु के नेशनल कैंप में बिताए। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया

लेकिन आख़िर कैसे कोई बिना बाहर निकले ख़ुद को व्यस्त रख सकता है ? इस सवाल का जवाब भारतीय महिला टीम के प्रमुख कोच शोर्ड मारिन (Sjoerd Marjine) के पास मौजूद है।

“हम ये सोच कर परेशान नहीं हो सकते कि हमें अगले कुछ महीनों या साल में क्या करना है। इसकी जगह हमें रोज़ाना ख़ुश रहने की कोशिश करनी चाहिए, मैं मानता हूं कि ये कहना आसान है लेकिन करना नहीं। लेकिन मैंने ये एहसास किया है कि आप उसके बारे में सोचें जो आप के हाथ में है, उसकी फ़िक्र मत करिए जो आपके नियंत्रण में नहीं। मैंने लॉकडाउन के समय एक किताब लिखना शुरू किया क्योंकि लिखने से मुझे जोश आता है। मुझे ऐसा लगा कि मैंने कुछ अच्छा और उपयोगी किया और इससे अगले दिन भी मुझमें जोश भरा रहा।“

कैसे दीपा कर्माकर ने कोच को ग़लत साबित किया था

भारतीय जिमनास्ट दीपा कर्माकर (Dipa Karmakar) के लिए ये साल वर्दान बन कर आया।

इस सीज़न दीपा लगातार चोटों से जूझ रहीं थीं, इस वजह से टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल करना दीपा के लिए बेहद मुश्किल था। लेकिन जैसे ही ओलंपिक को एक साल के लिए स्थगित किया गया तो दीपा को चोट से उबरने के लिए पूरे एक साल मिल गए।

ओलंपिक चैनल के साथ उस ऐतिहासिक पल की वर्षगांठ पर बातचीत करते हुए इस भारतीय जिमनास्ट ने अपने विदेशी कोच की उस बात को याद किया और उन्होंने अपने सपने को साकार करने का संकल्प लिया

दीपा कर्माकर अपने लगातार दूसरे ओलंपिक में क्वालिफ़ाई करने की पूरी कोशिश में हैं।

“मुझे याद है हमारे विदेशी कोच ने हम सभी को लाइन में खड़ा किया था और कहा था कि सिर्फ़ लड़कों के ही पदक जीतने (कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 के दौरान) का अवसर है। इस बात से मुझे बहुत तक़लीफ़ हुई थी, यहां तक कि मेरे कोच बिशेश्वर नंदी की आंखों में भी आंसू आ गए थे। मैं बिल्कुल टूट गई थी और यही सोच रही थी, आख़िर महिला क्यों नहीं जीत सकती ?”

“तब मैं और नंदी सर के दिमाग़ में प्रोडुनोवा का आइडिया आया। ये मुश्किल था लेकिन मैंने सोच लिया था कि 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में मैं पदक जीतकर रहूंगी और सभी को ग़लत साबित करूंगी।“

विकास कृष्ण का ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने के लिए समर्पण

दो बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके मुक्केबाज़ विकास कृष्ण (Vikas Krishan) ये भलीभांती जान चुके हैं कि उस स्तर पर कैसे क़ामयाबी मिल सकती है। लिहाज़ा इसमें कोई हैरानी की बात नहीं कि इसके लिए विकास किस जुनून और जज़्बे के साथ अपने ओलंपिक के सपने को साकार करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में भी अपने उसी समर्पण के बारे में बात की।

भारतीय कृष्ण विकास: मैं अपने बच्चों के लिए एक उदाहरण बनना चाहता हूं

कॉमनवेल्थ मिडिलवेट चैंपियन एक साल की प्रो बॉक्सिंग के बाद एमेच्युर बॉक्सिंग...

“अगर ओलंपिक स्वर्ण पदक के बदले में मुझसे कोई मेरी जान भी मांगे तो मैं देने के लिए तैयार हूं। मैं कहूंगा कि बेशक मेरी जान ले लो लेकिन स्वर्ण पदक के साथ मुझे बस एक दिन जीने का मौक़ा देना। मैं पूरी तरह से डायट पर हूं और मैंने अपना वज़न भी कम कर लिया है और इसके लिए जमकर अभ्यास भी कर रहा हूं। जो भी हो सकता है, मैं वह सबकुछ कर रहा हूं।“