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रोज़ाना की रुकी हुई ज़िन्दगी को खेल जगत की इन फिल्मों से दोबारा रफ़्तार दें

COVID 19 की वजह से खेल रुक गया है लेकिन खेल से जुड़ीं फ़िल्में देखकर एक बार फिर जिएं ये प्रिय पल

लेखक जतिन ऋषि राज ·

कोरोना वायरस ने खेल जगत या यूं कहें कि रोज़ाना ज़िन्दगी को मानो रोक कर रख दिया है। जहां बहुत सी प्रतियोगिताएं रद्द कर दी गईं हैं वहीं आम जनता भी दफ्तर जाने की जगह घर से काम करने पर मजबूर हो गई है।

इस लेख के ज़रिए हम आपके लिए खेल जगत से जुड़ीं कुछ ख़ास फ़िल्में लाएं हैं जिन्हें देख आप अपना मन भी बहला सकते हैं और स्पोर्ट्स की दुनिया में एक बार फिर दाखिल हो सकते हैं।

मैरी कॉम

माना गया है जब आपने अपने जुनून का पीछा करते हैं तो दुनिया में एक मिसाल बन जाते हैं। वैसी ही कहानी रही भारतीय मुक्केबाज़ मैरी कॉम की। लंदन ओलंपिक गेम्स में ब्रॉन्ज़ जीतने वाली मैरी पर आधारित फिल्म मैरी कॉम में मैरी का किरदार जानीमानी अभिनेत्री प्रियांका चोपड़ा ने बखूबी निभाया।

मैरी के रूप में ढलने के लिए प्रियांका ने मैरी ही जैसी ट्रेनिंग कर परदे पर उनकी सफल ज़िन्दगी के साथ इंसाफ किया। यह फिल्म 2014 में रिलीज़ हुई थी और इसमें मैरी के 2008 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप से लेकर ओलंपिक गेम्स तक के सफ़र को दर्शाया गया है और साथ ही उनके निजी जीवन का लेखा जोखा दिखाया गया है।

चक दे इंडिया

भारत में खेल पर आधारित फिल्मों की बात करें तो एक नाम और इस फ़ेहरिस्त में जुड़ जाता है और वह है चक दे इंडिया। 2002 कॉमनवेल्थ गेम्स की कहानी को भारतीय महिला हॉकी टीम से जोड़कर इस फिल्म ने बहुत से मिश्रण तैयार कर जनता का मन खूब प्रसन्न किया। जाने माने अभिनेता शाहरुख खान ने इस फिल्म में कोच की भूमिका निभायी जो समाज से लड़ कर अपने देश के गौरव को सम्मान दिलाने की ज़िद पकड़ लेते हैं।

इस फिल्म ने जनता का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी और कहानी समेत हर किरदार को प्रेरणा का पात्र बनाकर स्वीकारा गया।

भाग मिल्खा भाग

कॉमनवेल्थ गेम्स और मल्टी एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके मिल्खा सिंह की कहानी जब परदे पर आई तो मानों पूरे भारत में खुशियों और गर्व की लहर दौड़ उठी। फरहान अख्तर जो कि मिल्खा सिंह की भूमिका निभा रहे थे उन्होंने कठिन प्रयास कर उस किरदार के साथ इंसाफ किया और दर्शकों में अपनी एक अलग जगह बना ली।

यह कहानी बँटवारे से पहले और बाद के कुछ दृश्यों पर आधारित है और दिखाया गया है कि जब देश हर चीज़ से जूझ रहा था तो एक इंसान में जुनून पनप रहा था और इस जुनून ने उसके देश को गौरवान्वित करने में कोई कसार नहीं छोड़ी।

गौरतलब है कि यह फिल्म “रेस ऑफ़ माय लाइफ” नामक किताब पर आधारित है जिसे मिल्खा सिंह ने खुद लिखा था। इस फिल के राइट्स उन्होंने महज़ 1 रुपये में बेचे थे और मांग की थी कि मुनाफे का कुछ प्रतिशत मिल्खा सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट में जाए ताकि वे ज़रूरत मंद खिलाड़ियों की मदद कर सकें।

दंगल

दंगल फिल्म फोगाट परिवार की कुश्ती की कहानी है। गीता फोगाट और बबीता कुमारी और उनके पिता महावीर सिंह फोगाट पर आधारित इस कहानी को सच्चाई और सीख के साथ परदे पर दिखाया गया है।

आमिर खान द्वारा दर्शाया गया एमेचुयर रेसलर महावीर सिंह के किरदार को मजबूरन कुश्ती छोडनी पड़ जाती है लेकिन कुश्ती उन्हें नहीं छोडती। अपनी बेटियों के ज़रिए अपने कुश्ती के सपने को पूरा करने की जिद्द ने अपनी बेटियों के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने तक का सफ़र तय किया।

जनता के साथ फिल्म इंडस्ट्री ने भी इस फिल्म को बहुत पसंद किया।

गोल्ड

गोल्ड एक ऐसी फिल्म है जो काल्पनिक तरीके से दिखाती है कि कैसे आज़ाद भारत की पहली नेशनल हॉकी टीम ने ओलंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। 1948 समर ओलंपिक गेम्स की इस कहानी को अभिनेता अक्षय कुमार ने बखूबी दर्शाया है।

अक्षय कुमार का किरदार तपन दास के जीवन पर आधारित है जिसने भारतीय हॉकी को कदम कदम पर बहुत कुछ दिया है।

पान सिंह तोमर

पान सिंह तोमर फिल्म में सच्चाई को बहुत उम्दा तरीके से परदे पर दिखाया गया है। इस काल्पनिक फिल्म में पान सिंह तोमर की ज़िंदगी की सच्चाई भी छुपी है जिसे इरफ़ान खान ने शानदार तरीके से परदे पर पेश किया है।

आर्मी में भागने की सज़ा को पूरा करते करते भारत को पान सिंह तोमर के रूप में एक तेज़ और उत्तम धावक मिला।

स्टीपलचेज़ नेशनल रिकॉर्ड विजेता हालातों की वजह से गलत कार्य करने लगे और उनका करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया। यह फिल्म सच्चाई और हालातों का मिश्रण है और सभी किरदारों ने अपने अपने काम के साथ इंसाफ किया है।