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हॉकी से लेकर गोल्फ़ में दिखी अद्भुत प्रतिभाएं – साल 2020 के उभरते सितारे

कोरोना वायरस से भले ही खेल की दुनिया पर भी 2020 में विराम लगा हो लेकिन इसके बावजूद कई भारतीय युवा खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से एक अलग पहचान बनाई।

लेखक सैयद हुसैन ·

किसी भी खेल इतिहास पर नज़र दौड़ाई जाए तो उभरते हुए युवा सितारों की ही वजह से खेल का भविष्य पक्का और सुनहरा होता है।

हर साल खेल प्रेमियों को इस बात का इंतज़ार रहता है कि किस युवा खिलाड़ी ने सभी का दिल जीता और कौन है जिसमें भविष्य का स्टार बनने का माद्दा है। हालांकि साल 2020 की बात करें तो कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से ये चुनौतियों से भरा रहा।

हालांकि इस घड़ी में भी कुछ भारतीय युवा ऐसे भी रहे जिन्होंने एक अलग छाप छोड़ी और उनमें भविष्य के स्टार की झलक नज़र आई।

हम आपके लिए लेकर आए हैं भारतीय खेलों से कुछ ऐसे ही युवाओं के नाम, जिनपर देश को है नाज़।

राज कुमार पाल – हॉकी

उत्तर प्रदेश से आने वाले युवा हॉकी खिलाड़ी राज कुमार पाल (Raj Kumar Pal) साल 2020 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम की ओर से डेब्यू करने वाले एकमात्र खिलाड़ी रहे। लेकिन टीम इंडिया के प्रमुख कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) को इस 22 वर्षीय खिलाड़ी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें हैं।

रीड का उनपर विश्वास ही था जिसने उन्हें FIH प्रो लीग के मुक़ाबले में 8 फ़रवरी 2020 को मज़बूत बेल्जियम के ख़िलाफ़ मैदान में जलवा बिखेरने का मौक़ा दिया।

रेड लॉयन्स के सामने खेलते हुए राज कुमार पाल ने रीड के भरोसे को तोड़ा नहीं और कमाल का प्रदर्शन किया जिसकी बदौलत ही भारत ने बेल्जियम पर 2-1 से यादगार जीत हासिल की।

सीनियर टीम में थोड़े ही समय खेलने के बाद राज कुमार ने अपनी प्रतिभा का सभी को क़ायल कर लिया और उन्होंने टोक्यो 2020 के लिए टीम इंडिया में क़रीब-क़रीब जगह पक्की कर ली है।

ESPN के साथ बातचीत में इस युवा हॉकी खिलाड़ी ने कहा, “मेरा लक्ष्य है ख़ुद को साबित करना, ताकि ओलंपिक जाने वाले दल का मैं हिस्सा बनूं। मैं अपना 100 फ़ीसदी देना चाहता हूं, और समझिए कि ये मेरी पहली सीढ़ी ही है।“

अंशु मलिक – रेसलिंग

अगर आप अंशु मलिक (Anshu Malik) की अलमारी की ओर नज़र डालेंगे तो आपको वह पदकों और ट्रॉफ़ियों से भरी मिलेगी। हरियाणा में जन्मी इस युवा महिला रेसलर ने बहुत ही कम समय में सीनियर लेवल पर ख़ुद को एक बेहतरीन महिला पहलवान के तौर पर साबित कर दिया है।

इसी साल रोम में आयोजित मैटियो पेलिकोन मेमोरियल रैंकिंग सीरीज़ (Matteo Pellicone Memorial Ranking Series) में अंशु मलिक ने 57 किग्रा भारवर्ग में रजत पदक जीतते हुए अपनी क़ाबिलियत साबित कर दी। इस दौरान उन्होंने कई दिग्गज पहलवानों को भी चारों ख़ाने चित कर दिया, जिसमें कनाडा की 2019 वर्ल्ड चैंपियन लिंडा मोराएस (Linda Morais) और नॉर्वे की 2014 यूथ ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता ग्रेस बलेन (Grace Bullen) भी शामिल हैं।

कोविड-19 के ब्रेक से पहले अंशु ने नई दिल्ली में आयोजित 2020 एशियन चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता था।

कोरोना महामारी के बाद बेलग्रेड में दोबारा बहाल हुई रेसलिंग प्रतियोगिता के इंडिविजुअल वर्ल्ड कप में भी इस 19 वर्षीय भारतीय महिला पहलवान ने रजत पदक जीतकर सभी को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया।

अंशु मलिक की नज़र अब टोक्यो 2020 में 57 किग्रा भारवर्ग में जगह बनाने पर है, हालांकि इसके लिए उनके सामने पूजा ढांढा (Pooja Dhanda) और सरिता मोर (Sarita Mor) जैसी भारतीय पहलवानों की चुनौती भी है।

सुरेश सिंह वंगजाम – फ़ुटबॉल

सुरेश सिंह वंगजाम 2020 में बेंगलुरु एफ़सी के सबसे बड़ी खोज में से एक रहे हैं। तस्वीर साभार: ISL मीडिया

2017 में भारत में आयोजित FIFA अंडर-17 वर्ल्ड कप (FIFA U-17 World Cup) में देश की ओर से खेलने वाले मिडफ़ील्डर सुरेश सिंह वंगजाम (Suresh Singh Wangjam) के लिए साल 2020 किसी सपने से कम नहीं रहा है।

इंडियन एरोज़ के लिए खेलने वाले सुरेश सिंह ने इंडियन सुपर लीग (ISL) के 2019-20 सी ज़न में बेंगलुरु एफ़सी में भी जगह बना पाने में क़ामयाब रहे थे।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने प्रदर्शन से सभी को दिवाना बनाते हुए उन्होंने जनवरी 2020 में पहले-11 खिलाड़ियों में अपनी जगह भी पक्की कर ली।

20 वर्षीय इस खिलाड़ी ने अगले तीन महीनों में एक के बाद एक धांसू प्रदर्शन करते हुए अपनी टीम को सेमीफ़ाइनल तक का सफ़र तय करा दिया था।

हालांकि उन्हें ISL ईमर्जिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर का अवॉर्ड नहीं मिल पाया क्योंकि सुमित राठी (Sumit Rathi) ने इस मामले में उन्हें पीछे छोड़ दिया।

लेकिन अगर आईएसएल के इस सीज़न की बात करें तो जहां एक तरफ़ सुमित राठी का प्रदर्शन उनकी टीम मोहन बागान के लिए कुछ ख़ास नहीं जा रहा, तो वहीं दूसरी ओर ये मणीपुरी खिलाड़ी बेंगलुरु एफ़सी के लिए अहम हिस्सा बने हुए हैं और अब तक 8 में से 7 मैचों में वह टीम के पहले-11 खिलाड़ियों में रहे हैं।

भारतीय फ़ुटबॉल टीम (Indian Football Team) के कोच इगोर स्टिमक (Igor Stimac) भी इस खिलाड़ी की तारीफ़ करते हुए कभी नहीं थकते और वह मानते हैं कि इनमें प्रतिभा कूट-कूट कर भरी हुई है।

करणदीप कोचर – गोल्फ़

करणदीप कोचर ने साल 2020 में लाजवाब प्रदर्शनों की झड़ी लगा दी। तस्वीर साभार: PGTI

दिग्गज शूटर अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) के भांजे करणदीप कोचर (Karandeep Kochhar) ने अपनी पहचान उनसे अलग खेल में बना ली है, और वह है गोल्फ़।

21 वर्षीय इस गोल्फ़ खिलाड़ी के लिए साल 2020 अद्भुत रहा है।

उन्होंने इस साल चंडीगढ़ में आयोजित PGTI प्लेयर्स चैंपियनशिप का ख़िताब अपने नाम किया जो प्रोफ़ेशनल के तौर पर उनकी पहली टाइटल थी। ये तो बस शुरुआत थी, इसके बाद उन्होंने दिग्गज और ओलंपियन अनिर्बान लाहिड़ी (Anirban Lahiri), चार बार के यूरोपियन टूर विजेता एसएसपी चौरसिया (SSP Chawrasia), 8 बार के एशियन टूर विजेता ज्योति रंधावा (Jyoti Randhawa) और अर्जुना अवॉर्ड से सम्मानित गगनजीत भुल्लर (Gaganjeet Bhullar) को शिकस्त देते हुए PGTI टूर के जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल (Jeev Milkha Singh Invitational) ख़िताब पर भी कब्ज़ा जमाया।

इस युवा भारतीय गोल्फ़र की नज़र अब 2021 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई करने पर है।

“मैं जानता हूं कि ओलंपिक में खेलना कितना ख़ास होता है, ये मेरे लिए गर्व की बात होगी अगर मैंने टोक्यो का टिकट हासिल कर लिया।“

इसमें कोई शक़ नहीं है कि 2020 एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है लेकिन इन युवा खिलाड़ियों ने अपने लाजवाब प्रदर्शन से आने वाले साल से एक नई उम्मीद भी जगा दी है।