एक्सक्लूसिव: मेरा यह करियर मेरे पिता की दूरदर्शिता की देन है – एंथोनी अमलराज

2012 में शरत कमल को हराना इस 34 वर्षीय पैडलर के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

चेन्नई में पले-बढ़े होने की वजह एंथोनी अमलराज (Anthony Amalraj) का ध्यान स्वतः ही टेबल टेनिस की ओर बढ़ता चला गया। गौरतलब है कि इस शहर में टेबल टेनिस के खेल की समृद्ध विरासत है और तमिलनाडु राज्य से कई नेशनल चैंपियन भी निकले हैं।

भारतीय टेबल टेनिस स्टार एंथोनी अमलराज के लिए इस खेल में उनका सफर उनके ही घर से शुरू हुआ।

उनके पिता अरपुथराज (Arputharaj) एक राज्य स्तरीय खिलाड़ी थे और वह अपने बेटे को 2 साल की उम्र से ही अपने साथ सभी टूर्नामेंट में ले जाया करते थे। चेन्नई के इस युवा ने बचपन में कई खेलों में अपने हाथ आज़माए, लेकिन जब बात किसी एक खेल को चुनकर उसमें ही आगे बढ़ने की आई तो उनको कोई खास मुश्किल नहीं हुई।

एंथोनी अमलराज ने ओलंपिक चैनल को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बातचीत करते हुए समझाया, “मेरे लिए हालात एकदम सही थे। मेरे पिता को टेबल टेनिस के बारे में बहुत जानकारी थी और मेरे घर के पास डॉन बॉस्को क्लब था, जिससे मुझे पास में ही प्रैक्टिस करने का मौका मिल जाता था।”

उनकी अन्य पसंदीदा यादों के बारे में बात की जाए तो उनके लिए सभी रविवार भी खास हुआ करते थे, क्योंकि उस एक दिन उन्हें अपने पिता के साथ प्रैक्टिस करने का मौका मिलता था। हालांकि इसके लिए उन्हें छुट्टी वाले दिन भी ऑफिस जाना पड़ता था।

भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी ने कहा, "मेरे पिता के ऑफिस में एक टीटी टेबल था, इसलिए मुझे उनके साथ हर रविवार को व्यक्तिगत अभ्यास करने का मौका मिल जाया करता था। हम ब्रेकफास्ट करने के बाद वहां खेलने के लिए जाते और दोपहर के भोजन के लिए घर आकर फिर वापस चले जाते। यह वैसे ही तब तक जारी रहा, जब तक मैंने पेशेवर तौर पर टेबल टेनिस खेलने नहीं शुरू कर दिया।”

अरपुथराज को भले ही इस खेल को छोड़ना पड़ा, क्योंकि उन्हें आगे अपना परिवार चलाना था। लेकिन उन्होंने अपने बेटे को इस खेल के लिए खूब प्रोत्साहित किया।

करियर में आया नया मोड़

एंथोनी अमलराज ने 10 साल की उम्र में राजस्थान की एक प्रसिद्ध अकादमी में अपना दाखिला लिया और जूनियर स्तर पर प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए वह अंडर-12 और अंडर-14 दोनों ही नेशनल चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच गए, लेकिन कोई भी खिताब नहीं जीत सके।

सीनियर टूर्नामेंट में भी उनकी कहानी ऐसे ही आगे बढ़ी। यह भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी 2015 में आसानी से सेमी-फाइनल में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा, लेकिन अचंत शरत कमल से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

अगले कुछ वर्षों में भी ठीक ऐसा ही हाल रहा। हालांकि, एंथोनी अमलराज 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मेंस टीम इवेंट में भारतीय टेनिस दिग्गज के साथ कांस्य पदक जीतने में कामयाब रहे। उन्हें राष्ट्रीय खेलों में अपने अतीत से बेहतर करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी।

2012 में उनके करियर में उस वक्त नया मोड़ आया जब उन्होंने अचंत शरत कमल को हराकर सीनियर नेशनल चैंपियनशिप जीती। यह वह सपना था जो उन्हें 15 साल से परेशान कर रहा था और वह इसे अपने करियर का टर्निंग प्वाइंट मानते हैं।

एंथोनी अमलराज ने स्वीकार करते हुए कहा, “देखो, तुम अपना नाम तभी बना पाते हो जब एक बड़ा टूर्नामेंट जीतते हो। उसके बाद ही लोग आप पर अहम मामलों पर भरोसा करना शुरू करते हैं। तब तक लोग मुझे केवल एक चैलेंजर के रूप में जानते थे लेकिन उस नेशनल खिताब ने सभी धारणाओं को बदल दिया। यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था।”

फरवरी 2012 में जीता गया यह खिताब एंथोनी अमलराज की छह महीने की कड़ी मेहनत का नतीजा था। इसने उन्हें ज़ोनल टूर्नामेंट में भी आगे बढ़ने में काफी मदद की। इसके साथ ही उन्होंने एक आंतरिक कार्पोरेट इवेंट में भी शरत कमल को हराने में कामयाबी हासिल की।

हालांकि, उनकी सफलता की शुरुआत का यह समय खिताब जीतने के एक साल पहल पहले लिए गए जीवन को बदल देने वाले निर्णय के बाद आया।

मन से लड़ाई को मेहनत से हराया

मार्च 2011 में भारतीय टेबल टेनिस सीज़न समाप्त होने के ठीक बाद एंथोनी अमलराज मानसिक तौर पर बहुत अच्छी स्थिति में नहीं थे। 34 वर्षीय का मानना है कि वह स्वाभाविक रूप से प्रतिभाशाली नहीं हैं और इसलिए शीर्ष पर पहुंचने के लिए उन्हें अधिक मेहनत करनी पड़ी।

भारतीय टेबल टेनिस स्टार ने स्वीकार किया, “मेरे पास मेरी तकनीक और रणनीति थी, एक अच्छा कोच था और शायद देश में शरत कमल के बाद दूसरा सबसे अच्छा कोच था। फिर भी मैं उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया, जहां मैं पहुंचना चाहता था।”

एंथनी अमलराज ने क़तर ओपन का पहला क्वालिफ़ाइंग राउंड आसानी से जीता
एंथनी अमलराज ने क़तर ओपन का पहला क्वालिफ़ाइंग राउंड आसानी से जीताएंथनी अमलराज ने क़तर ओपन का पहला क्वालिफ़ाइंग राउंड आसानी से जीता

इसी के बाद उन्होंने प्रसिद्ध मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के डॉक्टर टीके वाडिवेल पिल्लई से संपर्क करने का फैसला किया। उन्होंने अमलराज को हिप्नोथेरपी की सलाह दी। यह वह चीज़ थी, जिसने इस एथलीट के अवचेतन मन को बेहतर करने में मदद की।

एंथोनी अमलराज ने खुलासा करते हुए कहा, “मैंने उनके साथ पांच महीने तक काम किया, मार्च से अगस्त 2011 तक। उनकी ट्रेनिंग ने मुझे टेबल के सामने होते हुए बिल्कुल निडर बना दिया।”

इससे पहले वह लगातार स्कोर-बोर्ड को देखते रहते और कई बार दबाव में चले जाते। हिप्नोथेरपी के सत्रों ने उन्हें एक ऐसा तंत्र विकसित करने में मदद की, जिसने उन्हें अगले लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की। इस प्रक्रिया को उन्होंने कोच सुब्रमण्यन रमन की सलाह के बाद हासिल किया था।

ऐसे व्यक्ति के लिए जो लगातार स्कोर-बोर्ड को देखता रहेगा और कई बार दबाव में विलीन हो जाता है, हाइपोथेरेपी सत्रों ने उसे एक ऐसा तंत्र विकसित करने में मदद की, जो उसे अगले बिंदु पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देगा, एक प्रक्रिया जो उसने कोच सुब्रमण्यन रमन द्वारा सहायता प्राप्त की थी।

उन्होंने कहा, “इससे पहले नॉकआउट मेरे लिए एक दलदल के जैसा था, अगर मैं किसी खिलाड़ी से प्री-क्वार्टर या उससे पहले कभी हार जाता तो मैं सेमीफाइनल में भी उससे हार जाता था।"

“लेकिन यह एक ऐसी प्रक्रिया नहीं है जो सभी पर समान रूप से काम करती है। अलग-अलग खिलाड़ियों की अलग-अलग जरूरतें होती हैं - मेरे परिवार ने मुझे मानसिक तौर पर मजबूत बनाया है, इसलिए मुझे केवल टेबल पर एक नई मानसिकता की आवश्यकता थी, जो मुझे हिप्नोथेरपी की मदद से मिली।”

एंथोनी अमलराज का अगला कदम

उसके बाद से उन्हें बहुत सी सफलताएं मिली हैं। उन्होंने राष्ट्रीय खिताब, राष्ट्रमंडल खेलों में पदक, एशियाई खेल और दुनियाभर के विभिन्न प्रो टूर इवेंट में शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि अभी तक उनका ‘खेलों के महाकुंभ’ में हिस्सा लेने का सपना अधूरा है। 

वर्तमान में वह अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ (ITTF) द्वारा दी गई 100वीं रैंक पर काबिज़ हैं। अगले साल टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह बनाने के लिए उन्हें इस सत्र के शुरू होने के साथ ही बहुत अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

एंथनी अमलराज ने कहा, “मैंने अपने करियर में जो भी जीता है, उसे हासिल करने के लिए वास्तव में कड़ी मेहनत की है।"

भारतीय टेबल टेनिस स्टार ने अपनी बात को खत्म करते हुए अंत में कहा, “मेरे लिए अभी जो महत्वपूर्ण बात है, वह है उतनी ही कड़ी मेहनत करना। शायद ओलंपिक में खेलने के लिए खुद पर और जोर देना होगा।”

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