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दिविज शरण के पेस-भूपति को अपना आदर्श मानने से लेकर ओलंपिक उम्मीद बनने तक का सफ़र

वर्ल्ड रैंकिंग में 56वें स्थान पर काबिज़ इस टेनिस खिलाड़ी के नाम पांच एटीपी ख़िताब दर्ज हैं और वह रोहन बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाकर टोक्यो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने की उम्मीद कर रहे हैं।

लेखक रितेश जायसवाल ·

बचपन से ही लिएंडर पेस (Leander Paes) और महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) को टेनिस खेलते हुए देखकर बड़े हुए दिविज शरण (Divij Sharan) ने खेल के सर्वोच्च स्तर पर देश के लिए खेलने का सपना देखा। आगे चलकर अपने इसी सपने को पूरा करते हुए उन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता और अब उनका नाम अर्जुन पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।

अपने करियर की इस ऊंचाई तक पहुंचने के लिए दिविज शरण ने एक लंबा सफर तय किया है।

2019 में दो एटीपी युगल खिताब जीतने के बाद वह साल 2020 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े। अब 34 वर्षीय दिविज शरण आने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए भारत के संभावित खिलाड़ियों में से एक है।

16 साल के अपने लंबे प्रोफेशनल करियर के साथ नई दिल्ली के रहने वाले शरण आने वाले वर्षों में भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

दिविज शरण ने मैनचेस्टर के अपने घर से ओलंपिक चैनल पर फोन से बात करते हुए कहा, "मुझे आज भी यह है जब मैं लिएंडर पेस और महेश भूपति को देखा करता था। तभी मुझे पता चल गया था कि मुझे वास्तव में आगे क्या करना है। मैं हमेशा से डेविस कप और ग्रैंड स्लैम में देश का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम होना चाहता था।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरा अपने देश के लिए खेलना सम्मान और सौभाग्य की बात है। मैं अभी भी मजबूती से आगे बढ़ रहा हूं और उम्मीद करता हूं कि अभी तक जो कुछ भी हासिल किया है, आगे उससे बेहतर कर सकूंगा।”

दिविज शरण के लिए उनके करियर का अब तक का सफर काफी लंबा और शानदार रहा है।

ग्रैंड स्लैम जूनियर चैंपियनशिप में 2004 में फ्रेंच ओपन सेमीफाइनल में हमवतन तुषार लिब्रहान (Tushar Liberhan) के साथ 18 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी के तौर पर हिस्सा लेने के बाद से दिविज शरण ने अपनी रैंकिंग में काफी सुधार किया है और वह अब तक कुल पांच एटीपी खिताब जीत चुके हैं।

इस अनुभवी खिलाड़ी ने कहा, "एक अच्छे जूनियर सीज़न के बाद मैंने 5-6 साल आईटीएफ फ्यूचर्स और उसके बाद 4-5 साल एटीपी चैलेंजर्स खेलते हुए बिताए हैं। अब मैं एटीपी टूर, ग्रैंड स्लैम, डेविस कप और अन्य सर्किट में खेल रहा हूं। यह मेरे लिए बहुत ही अच्छा और सही सफर रहा है।”

ओलंपिक खेलों के स्थगन से मिला समय फ़ायदेमंद

2018 एशियन गेम्स और साथ ही 2019 पुणे चैलेंजर को जीतने के बाद रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी को टोक्यो ओलंपिक खेलों में युगल वर्ग में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है।

इसी बीच कोरोना वायरस (COVID-19) के बढ़ते प्रकोप की वजह से ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों को एक साल के लिए स्थगित कर दिया गया। जिसने कुछ एथलीटों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। वहीं शरण का मानना है कि यह उनके और रोहन बोपन्ना के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

और जब ग्रीष्मकालीन खेलों को एक साल के लिए स्थगित किया जा रहा था, कोरोनोवायरस के प्रकोप के कारण, कुछ एथलीटों को ऑफ-गियर फेंक दिया, शरण का मानना है कि यह उनके और रोहन बोपन्ना के लिए अच्छा काम किया है।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह स्थगन अच्छा है। इससे मुझे और रोहन दोनों को हमारी रैंकिंग और खेल पर काम करने में समय मिला है। यही नहीं हमें ओलंपिक खेलों से पहले कई टूर्नामेंट खेलने का भी समय मिलेगा। हम अच्छी स्थिति में हैं और एक बार चीजें ठीक हो जाएं तो हम अपने खेल पर काम करेंगे।”

दिविज शरण और रोहन बोपन्ना ने ज़ाग्रेब में क्रोएशिया के खिलाफ भारत की ओर से प्रतिनिधित्व किया था, जिसके बाद COVID-19 महामारी की वजह से सभी खेल आयोजनों को स्थगित कर दिया गया था।

हालांकि रोहन बोपन्ना ने डेविस कप मुकाबले में लिएंडर पेस के साथ जोड़ी बनाई थी। दिविज शरण ने खुलासा किया कि वह और बोपन्ना पिछले एक साल में बिट्स और पीस में जोड़ी बनाने के बाद क्ले सीज़न के शुरू होने पर एक साथ खेलने की योजना बना रहे थे।

उन्होंने कहा, "हमने मोरक्को, हंगरी और पुर्तगाल में टूर्नामेंट खेलने के बारे में बात की थी। क्ले कोर्ट सीज़न में ये तीन टूर्नामेंट थे जिन्हें हम फ्रेंच ओपन तक साथ में खेलना चाह रहे थे।"

लॉकडाउन के बाद वापसी की तैयारी

बीते दो सप्ताह से लॉकडाउन में अब धीरे-धीरे कुछ छूट मिलना शुरू हो गई है। ऐसे में दिविज शरण कुछ उन भारतीय एथलीटों में से एक हैं, जिन्होंने 66 दिनों के बाद अपनी आउटडोर ट्रेनिंग शुरू कर दी है।

भारतीय शीर्ष ने 13 मई को अपनी पत्नी सामंथा मुरे शरण के साथ मैनचेस्टर के कोर्ट में कदम रखे। हालांकि चीजें अभी काफी धीमी हैं, इसलिए दिविज शरण समय समय के साथ अपने प्रैक्टिस सेशन को बढ़ाने की सोच रहे हैं।

उन्होंने बताया, "पहले कुछ सेशन बहुत थके हुए से रहे, लेकिन हर बीतते दिन के साथ हमें लगने लगा कि हम गेंद को अब बेहतर तरीके से हिट कर पा रहे हैं। हमारा पहला सत्र 45 मिनट का था। अब हमने समय की अवधि को बढ़ा दिया है। कुछ दिन पहले से यह एक घंटे से अधिक का हो गया और अब हम दो घंटे अभ्यास कर रहे हैं। इसलिए यह प्रगति काफी अच्छी रही है।

हालांकि, टेनिस कैलेंडर को हालात में सुधार होने तक अनिश्चित काल के लिए रोक दिया गया है। इसलिए दिविज शरण खुद पर बहुत दबाव नहीं डाल रहे हैं। वह सप्ताह में चार या पांच बार तक ही अपने प्रशिक्षण को सीमित रख रहे हैं।

दिविज शरण ने कहा, "कोर्ट पर जाकर पागलों की तरह कई घंटे बिताने का अभी कोई मतलब नहीं है, क्योंकि हमारे पास आने वाले समय में अभी कोई भी टूर्नामेंट होना सुनिश्चित नहीं है। मैं धीरे-धीरे प्रैक्टिस को आगे बढ़ा रहा हूं और खुद को फिट रख रहा हूं। अगर, फिर से शुरू (टूर्नामेंट) होने की घोषणा कर दी जाती है और मेरे पास तैयारी के लिए एक महीना भी होता है, तो मैं तैयार हो जाऊंगा।"