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रियो 2016 में निराशा के बाद, टोक्यों के लिए पूरी तरह तैयार हैं विनेश फोगाट 

रियो 2016 में छाप छोड़ने में असफल रहने वाली भारतीय पहलवान अगले साल टोक्यो खेलों में पोडियम फिनिश करना चाहती हैं।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) की बात हो और 2016 रियो ओलंपिक में उनके क्वार्टर-फाइनल मुकाबले को याद न किया जाए, ये थोड़ा मुश्किल है।

31वें ओलंपियाड के खेलों में भारत के लिए पदक जीतने की फेवरेट पहलवान विनेश फोगाट से उम्मीद थी कि वो रियो ओलंपिक में पदक जीत कर ही दम लेंगी। लेकिन तभी एक चोट ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था।

अपने अंतिम आठ के मुकाबले में चीन की सुन यान (Sun Yanan) के खिलाफ, भारतीय पहलवान ने अपने प्रतिद्वंद्वी की पकड़ से बाहर निकलने के प्रयास में अपने दाहिने घुटने को चोटिल कर लिया। जिससे गंभीर चोट आई।

कैरीओका एरीना में मैट पर लेटी हुई भारतीय पहलवान किसी तरह उठकर बाउट जारी रखना चाह रही थीं।

उसने कहा, "मुझे अभी भी पता नहीं है कि क्या हुआ था। मैं बस उठकर जारी रखना चाहती थी। लेकिन मेरे पैर काम नहीं कर रहे थे।”

“मैं चाह रही थी कि कोई मुझे कुछ दर्द निवारक दवा दे दे। मैं फिर से वहां जाना चाहती थी। 'मैंने अभी हार नहीं मानी थी। मैं हार मानने वालों मे से नहीं हूं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं सब कुछ देख सकती थी और मैं वहाँ असहाय पड़ी हुई थी।”

2016 रियो ओलंपिक में चोट के बाद दर्द से तड़पती हुई विनेश फोगाट

विनेश फोगाट को उस शाम ओलंपिक पदक जीतने का भरोसा था, लेकिन इसके बजाय, वो आँसू लेकर अखाड़े से दूर हो गई थीं। वह व्हीलचेयर पर भारत लौटीं। 

उनके घुटने की चोट का पता लगाने के लिए उसकी सर्जरी हुई, उसके बाद मैट पर वापस लौटने से पहले बेंगलुरू में विशेषज्ञों की एक टीम की ने जांच की। 

कई लोग उनके ऊर्जावान, शानदार और जीवंत व्यक्तित्व को याद रखेंगे। विनेश फोगाट ने 2017 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में वापसी के बाद से एकाग्रता और दृढ़ संकल्प की एक और झलक दिखाई और प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।

मैट पर कदम रखना आसान नहीं होता और करियर में चोट के बाद फिर से आत्मविश्वास हासिल करना मुश्किल होता है। लेकिन विनेश फोगाट इस टेस्ट में भी अव्वल रही।

भारतीय पहलवान और अधिक भूख के साथ मैट पर लौटीं और अपनी नई वजन श्रेणी - 50 किग्रा में खेलने लगी।

रियो के बाद से हर चीज के लिए तैयार हैं विनेश 

इसके बाद 2018 सीज़न में उनका दबदबा रहा, जहां उन्होंने प्रमुख टूर्नामेंटों में जीत हासिल की। 

उन्होंने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक के साथ शुरुआत की और फिर कुछ महीने बाद 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

लेकिन सीज़न का मुख्य आकर्षण इंडोनेशिया में हुए एशियन गेम्स में देखने को मिला, जहां वो एशियाड में कुश्ती का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 

उन्होंने अपना फॉर्म 2019 में भी जारी रखा। पहलवान महावीर सिंह फोगाट से प्रशिक्षित लेने वाली पहलवान ने 53 किलोग्राम भार वर्ग में खेलने का फैसला किया, जिससे चोट के जोखिम को कम करने और अपने कुश्ती कैरियर को लम्बा करने में मदद मिल सके।

जब वो एशियाई चैंपियनशिप और आमंत्रण प्रतियोगिताओं में लय में थीं, तब विनेश फोगाट ने कजाकिस्तान में 2019 विश्व चैंपियनशिप में अपना लोहा मनवाया। 

एक मुश्किल ड्रा के बावजूद, भारतीय पहलवान विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं और भारत को टोक्यो 2020 के लिए ओलंपिक कोटा दिलाया। 

अपने प्रदर्शन से विनेश फोगाट ने ओलिंपिक और कई विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता पहलवानों सोफिया मैटसन और पूर्व वर्ल्ड मेडलिस्ट सारा हिल्डेब्रांड के खिलाफ भी शानदार प्रदर्शन किया है।

हालांकि COVID-19 महामारी ने पिछले महीनों में उनकी तैयारियों में बाधा डाल दी है, लेकिन उम्मीद यही है कि विनेश फोगाट टोक्यो ओलंपिक से पहले अपने लय में वापस लौट आएंगी। 

उन्होंने कुछ साल पहले कहा था, "रियो के बाद से मैं हर चीज के लिए तैयार हूं। मैंने मान लिया है कि कुछ चीजें मेरे नियंत्रण में नहीं हैं, चाहे चोटें हों या कुछ और। कुछ भी हो सकता है।

विनेश फोगाट ने आगे कहा, “लेकिन मैं उन सब चीजों को लेकर चिंता नहीं कर सकती कि मेरे साथ पहले किया हुआ, इसके बजाय भविष्य के लिए योजना बनाना बेहतर है।”