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मेरे लिए कुश्ती खेल नहीं भावना है: विनेश फोगाट

अपने कोच के समर्थन से भारतीय रेसलर आने वाले महीनों में अपने 'जोन' में रहने की दिशा में ऊर्जा को बढ़ाने में व्यस्त है।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) के लिए सबसे महत्वपूर्ण उनकी भावना ही है।

वह खिलाड़ी जो अपनी भावना को काबू में रखना नहीं चाहती, तभी वह 2016 रियो ओलंपिक में  घुटने की चोट लगने के बाद अपने आंसू नहीं रोक पाई थी। हम ऐसा इसलिए भी कह सकते हैं क्योंकि वह 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के बाद भी अपनी खुशी नहीं छिपा पाई।

अब टोक्यो ओलंपिक में क्वालिफाई करने के बाद रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की पॉलिसी है कि वह जब तक कोटा हासिल करने वाला खिलाड़ी चोटिल नहीं हो जाता, वही गेम्स में हिस्सा लेगा। अब विनेश फोगाट ओलंपिक साल में अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत कर रही थी। जिस तरह से उन्होंने अपने सीजन की शुरुआत की, इसका मतलब यही है कि वह सही रास्ते पर जा रही हैं।

सीजन के पहले टूर्नामेंट मैटेलो पेलिकॉन मेमोरियल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने नई दिल्ली में हुई एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी अपने नाम किया।

जुलाई में होने वाले ओलंपिक से पहले कुछ ही टूर्नामेंट बचे थे। विनेश फोगाट 2016 रियो ओलंपिक की निराशा को भूलकर टोक्यो ओलंपिक में अपना सपना पूरा करना चाहेंगी, लेकिन कोरोना वायरस (COVID-19) की महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक को साल 2021 तक के लिए टाल दिया गया। यानी अब विनेश को ओलंपिक के मैट पर उतरने के लिए 2021 तक का इंतजार करना पड़ेगा।

हालांकि, भारतीय रेसलर इस बात से सहमत है कि इस स्थिति से बाहर निकलने का यह सही तरीका है। ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान “विनेश ने बताया कि उन्हें अब तक यकीन नहीं हो रहा है”

इस भारतीय रेसलर ने कहा “मैंने इस स्वीकार किया है लेकिन मुझे पहले जैसा ही लग रहा है। मैं किसी भी तरीके से नहीं कह सकती कि ओलंपिक को स्थगित करना गलत फैसला है। यह ज़रूरत के हिसाब से लिया गया फैसला है लेकिन मैं अभी भी इज़हार नहीं कर सकती की मैं कैसा महसूस कर रही हूं”। बात करते समय वह अपनी भावनाओं पर काबू कर लेती हैं।

विनेश फोगाट का सुरक्षित स्थान 

वह खिलाड़ी, जिसने अपने जीवन के हर पल में ओलंपिक के पोडियम पर खड़ा होने का सपना देखा हो, उसके लिए ओलंपिक का स्थगित होना दुख की बात है लेकिन वह इससे भी कुछ सीखने को तैयार है। 

यह भी एक कारण है कि बलाली गर्ल कम सोच रही है। विनेश फोगाट ने कहा कि यह उनके लिए सुरक्षित है हालांकि कई बार वह अपनी भावना नहीं छुपा पाती। 

विनेश ने बताया कि यह सोचना और मुश्किल है कि मैं उस दिन क्या महसूस कर रही होंगे। कुछ कहने से अच्छा यही है कि मैं बहुत ज्यादा इमोशनल होंगी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इसका पूरा उद्देश्य मुझे खुद को याद दिलाना है कि मैं किसी  दिन के लिए क्या कर रहा हूं। अगर जिस दिन मैं अपनी ट्रेनिंग अच्छे से ना करूं और उसी दिन फाइनल हार जाउं तो क्या होगा, इसलिए मैं सभी बातों को बहुत साफ तरीके से सोचती हूं और इसके बाद मैं मुझे पढ़ने को मिले कि मुझे इस पल में मानसिक तौर पर कैसे मजबूत होना है।”

ओलंपिक खेलों के स्थगित होने के कारण भारतीय रेसलर की सहनशीलता पर भी काम हो रहा है, लेकिन अभी विनेश फोगाट का पूरा ध्यान लॉकडाउन पर ना होकर अपने ही जोन पर है।

विनेश ने बताया कि “इस समय मेरा पूरा फोकस यही है कि मैं इस समय में खुद को पूरी तरह से फिट रख सकूं। इसके अलावा मानसिक तौर पर भी खुद को मजबूत बना सूं। मैं खुद को इस प्रक्रिया से बाहर नहीं होने देना चाहती, मैं ये बिल्कुल नहीं चाहती कि मुझे दोबारा से शुरुआत करनी पड़े।” 

उनकी इस कोशिश में उनके कोच वोलर अकोस (Woller Akos) भी उनका पूरा साथ दे रहे हैं। हंगरी के ये कोच विनेश फोगाट के साथ साल 2018 से जुड़े हुए हैं और इसके बाद विनेश का फोगाट का इंटरनेशनल लेवल पर प्रदर्शन सुधरा है।

उस समय जब विनेश निजी कोच खोज रही थी, तो उनके पास कई शानदार नामों की लिस्ट थी लेकिन इन सभी में वह उनके साथ काम करना चाहती थी, जिसके साथ वह भावनात्मक रूप से जुड़ सके।

विनेश फोगट का कहना है कि वो एक डायरी रखती हैं, जिसमें वो अपनी भावनाओं को सहेजती हैं।

कुछ नामों पर गौर करने के बाद विनेश फोगाट ने वोलर अकोस को चुना। ये दोनों विनेश फोगाट के एक मित्र की मदद से मिले। इसके बाद ये दोनों 2018 एशियन गेम्स की ट्रेनिंग के दौरान मिले और एक दूसरे से प्रभावित हो गए। अकोस टीम विनेश फोगाट के सदस्य थे।

सही कॉर्ड पर प्रहार

अपने कोच के बारे में बताते हुए विनेश ने कहा कि वह काफी शानदार है और नतीजें बताते हैं कि उन्होंने मेरे साथ क्या किया है।” भारतीय स्टार ने कहा कि“वोलर वह इंसान है जो समझदारी और मुश्किल ट्रेनिंग में विश्वास रखता है। रेसलिंग केवल इसके लिए नहीं है कि कौन मजबूत है, बल्कि इसमें स्मार्ट भी होने पड़ता है और उन्होंने इसमें मेरी काफी मदद की।” 

प्रशिक्षण के मोर्चे पर कोई कसर नहीं छोड़ी गई है (अकोस को एक अनुशासनात्मक व्यक्ति के रूप में जाना जाता है), विनेश फोगट की हंगरियन कोच ने भावनात्मक स्तर पर मजबूत होने के लिए कैसी मदद की। इस पर विनेश ने कहा कि “वह मुझे और मेरी बॉडी लेंग्वेज को समझते हैं। मेरे लिए यह जरूरी है कि मैं कैसा महसूस कर रही हूं। अगर मेरा मूड ठीक है, तो सभी बातें मेरे पक्ष में जाती है।” 

विनेश ने बतया कि “अकोस की बात करें तो मोटिवेशन में कोई कमी नहीं है। वह जानता है कि मैं कब अपने जोन में नहीं हूं। मुझे उसे यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि मेरे लिए कुछ काम नहीं कर रहा है। जब वह मुझे देखेगा तब उसे इसका एहसास हो जाता है। ” 

वहीं मानसिक मजबूती के अलावा हंगरियन कोच विनेश फोगाट के साथ खामियों पर भी काम किया है और उन्हें ताक़तवर बनने में मदद की है। अकोस ने अपने खेल में कितना सुधार किया है तो हंसते हुए विनेश ने कहा कि सर्कुलर मोशन। 

विनेश ने बताया कि “शुरुआत में मैं वृत्तीय गति का इस्तेमाल नहीं करती थी, हमेशा वह मेरे लिए इन-ऑउट रहा है। इससे मेरे विरोधी को शुरुआत में ही मेरी टांग पकड़ने में मदद मिलती थी लेकिन अकोस ने मुझे सर्कुलर मोशन (वृत्तीय गति) में मदद की और इससे मुझे फायदा भी हुआ। अब मैं अपने पैरों को ज्यादा दूर लेकर नहीं जाती हूं।”

विनेश का बायां पैर हमेशा से ही गलत वजह से सुर्खियों में रहा है। पिछले कुछ सालों में विनेश ने शरीर के ऊपरी हिस्सें के मूवमेंट में सुधार किया है। विनेश ने बताया कि “मैंने कई और मूवों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है, अगर आपने गौर किया होगा कि तो मैं जल्दी अंक बटोरने का मौका नहीं देती। मैं शुरुआत में ही अंक हासिल करने की कोशिश करती हूं और ये रणनीति मेरे लिए कारगर साबित हो रही है।”

विनेश ने बताया कि ये कुछ छोटे छोटे सुधार है, जिन्हें मैं खुद में देख सकती हूं लेकिन इसके अलावा भी कई पहलू है, जिस पर मैंने काम किया है।

अब जो रेसलर इतनी भावनात्म हैं, उनके लिए ओलंपिक मेडल से कम कुछ मंजूर नहीं होगा।