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आज है ख़राब फ़ॉर्म लेकिन उम्मीद है जल्द बदलेगी क़िस्मत - साक्षी मलिक

2016 रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक टोक्यो ओलंपिक में अपनी क़िस्मत बदलने की उम्मीद कर रही हैं

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

भारत ने साल 2016 रियो ओलंपिक में 117 एथलीट्स के साथ अपना सबसे बड़ा दल भेजा था, जिनमें से केवल दो ही मेडल जीतने में कामयाब हो पाए। पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने जहां सिल्वर मेडल जीता तो वहीं साक्षी मलिक (Sakshi Malik) कांस्य पदक जीतने में सफल रही। इसी के साथ साक्षी भारत की पहली महिला रेसलर बनीं,जिन्होंने ओलंपिक पदक जीता।

यही नहीं ये पहला मौका था, जब भारत की तरफ से केवल महिला खिलाड़ियों ने ही मेडल जीता हो। साक्षी मलिक को ये पता है कि इस लेवल के लिए कैसी तैयारी करनी है और इसी के साथ उन्हें उम्मीद है कि ओलंपिक के लिए नई तारीख की घोषणा को बाद भारतीय पहलवान ज्यादा पदक जीतेंगे।

ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान साक्षी ने बताया कि “मैं ये तो नहीं बता सकती कि हम कितने पदक जीतेंगे, हां ये जरूर कहूंगी कि ये ओलंपिक भारतीय पहलवानों के लिए सफल रहेगा”।

विनेश फोगाट (Vinesh Phogat), बजरंग पुनिया (Bajrang Punia), दीपक पुनिया (Deepak Punia) और रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) पहले ही ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं। ये पहली बार है कि जब भारतीय पहलवानों ने 4 कोटा हासिल किए हैं।

साक्षी मलिक ने रियो 2016 में 58 किलोग्राम कैटेगिरी में कांस्य पदक जीता था और उनका अनुभव टोक्यो ओलंपिक में काफी काम आएगा। साक्षी ने बताया कि “वो मेरी जिंदगी को बदलने वाला पल था, उस ओलंपिक ने मुझे काफी कुछ सिखाया, जैसे कि ट्रेनिंग और फिर क्वालिफाई करना, ये मेरी लिए अच्छी बात है”।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मेरे लिए ये गर्व की बात है कि मेरी वजह से कई महिलाओं को प्रेरणा मिली और समाज में बदलाव आया।

खराब फॉर्म से निपटने की क्षमता

साक्षी मलिक, जो अभी 62 किलोग्राम कैटेगिरी में शिफ्ट हुई है कि शुरुआत इतनी अच्छी नहीं रही। इस खिलाड़ी को 2 बार की कैडिट चैंपियन सोनम मलिक (Sonam Malik) से नेशनल ट्रायल्स में हार झेलनी पड़ी। हालांकि सोनम मलिक इवेंट में पदक नहीं जीत सकीं, जिसकी वजह से रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (Wrestling Federation of India) को एक और ट्रायल करवाना पड़ा। अब साक्षी दूसरे मौके का भी फायदा नहीं उठा पाई और दोबारा सोनम से हार गई।

27 साल की ये पहलवान अब अपनी तकनीक और स्टांस में बदलाव के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं लेकिन अब तक उन्हें इसका ज्यादा फायदा नहीं हुआ।

साक्षी ने अपने दिल की बात करते हुए कहा कि “कोई भी एथलीट हमेशा सर्वश्रेष्ठ स्थान पर नहीं रह सकता”। इसके अलावा उन्होंने कहा कि “खिलाड़ियों के जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं और यह मेरा केवल बुरा समय है। मैं अपनी कमजोरियों पर लगातार मेहनत के साथ तकनीक में कुछ बदलाव कर रही हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि जल्दी ही किस्मत बदलेगी”

लॉकडाउन का असर

कोरोना वायरस के कारण सभी खेल इवेंट को स्थगित कर दिया गया है, जहां एशियन ओलंपिक क्वालिफायर्स तो टला ही बल्कि ओलंपिक पर भी काफी असर पड़ा।

इस ब्रेक ने एथलीट्स के जीवन पर गहरा असर छोड़ा है, वह अच्छे से प्रैक्टिस और ट्रेनिंग नहीं कर पाते और यही परेशानी इस कांस्य पदक विजेता के साथ भी है।

साक्षी ने बताया कि “रेसलिंग एक ऐसा खेल है, जहां आपको पार्टनर की जरुरत होती है और अभी ऐसा नहीं हो पा रहा है। मैं घर पर थोड़ी बहुत ट्रेनिंग कर लेती हूं और अपनी अखाड़े में फिटनेस पर लगातार काम कर रही हूं”। इसके अलावा जब साक्षी से पूछा गया कि एक साल ओलंपिक टलने पर किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है तो उन्होंने कहा कि “आपको अपनी डाइट पर ध्यान देना होता है। हम ओलंपिक के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और एक साल तक फॉर्म को बरकरार रखना मुश्किल है लेकिन यही हमारा काम है”

टोक्यो ओलंपिक का टल जाना साल 2016 रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक के लिए अच्छा साबित हो सकता है क्योंकि उनकी लगातार लड़ने की क्षमता उन्हें अपने दूसरी ओलंपिक में हिस्सा दिला सकती है।