मेरी नज़र में बजरंग पूनिया हैं ओलंपिक पदक के सबसे बड़े दावेदार: योगेश्वर दत्त

2012 के लंदन खेलों के कांस्य पदक विजेता को टोक्यो में रवि कुमार, दीपक पूनिया और विनेश फोगाट से भी बहुत उम्मीदें हैं।

ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने हाल ही में ओलंपिक चैनल से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ‘खेलों के महाकुंभ’ के बीते कुछ संस्करणों में कुश्ती के खेल में भारत के पदक जीतने की निरंतरता की ओर इशारा किया। योगेश्वर दत्त ने कहा, “भारत हमेशा कुश्ती में अच्छा रहा है, वरना आप हमें इस खेल में लगातार पदक जीतते हुए नहीं देखते (बीते ओलंपिक खेलों में)।”

हालांकि, देश में कुश्ती की संस्कृति की जड़ें काफी गहरी रही हैं। चाहे गांवों के दंगल और अखाड़ों की बात हो या शहरों में स्थित आधुनिक मैट की बात हो, इस खेल में ओलंपिक पदक हासिल करना हमेशा से आम बात नहीं रही है।

यह अपने देश की संस्कृति ही है जिसकी बदौलत भारत के लिए खाशाबा दादासाहेब जाधव (Khashaba Dadasaheb Jadhav) ने कुश्ती में स्वतंत्रता के बाद अपना पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीता। उन्होंने 1952 में हेलसिंकी में कांस्य जीता था। लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि इस खेल में भारत ने दूसरा पदक 56 साल बाद जीता।

अपने ओलंपिक मेडल के साथ योगेश्वर दत्त
अपने ओलंपिक मेडल के साथ योगेश्वर दत्तअपने ओलंपिक मेडल के साथ योगेश्वर दत्त

अटलांटा 1996 में लिएंडर पेस (Leander Paes) ने कांस्य पदक जीतकर देश के व्यक्तिगत ओलंपिक पदक के सूखे को समाप्त किया, लेकिन ओलंपिक खेलों में कुश्ती के दूसरे ओलंपिक पदक का इंतज़ार उसके बाद भी जारी रहा।

तीन ओलंपिक खेलों में चार ओलंपिक रेसलिंग मेडल

2008 के बीजिंग खेलों में सालों से चला आ रहा लम्बा इंतज़ार तब खत्म हुआ, जब सुशील कुमार (Sushil Kumar) ने पुरुषों के फ्री स्टाइल 66 किलोग्राम इवेंट में कांस्य पदक जीता। उसके बाद अगले दो ओलंपिक खेलों में भारत की झोली में तीन और पदक आए।

जहां सुशील कुमार लंदन 2012 में रजत पदक जीतने के बाद दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने, वहीं साक्षी मलिक (Sakshi Malik) रियो 2016 में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।

इसलिए, जब योगेश्वर दत्त से अगला ओलंपिक पदक जीतने वाले दावेदार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने हमें बताया कि वह टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती में एक और ओलंपिक पदक भारत की झोली में आने की संभावनाओं के बारे में पूरी तरह से आश्वस्त हैं। ऐसे में आप इस बात का अंदाज़ा आसानी से लगा सकते हैं कि हालिया इतिहास उनके पक्ष में क्यों रहा है।

योगेश्वर दत्त ने कहा, "हम कुश्ती में बीजिंग, लंदन और रियो खेलों में ओलंपिक पदक जीत चुके हैं और हमारे सभी पहलवान जो कि वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के ज़रिए टोक्यो के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं, यह उपलब्धि अपने आप में एक बड़ी बात है और इसे किसी भी हाल में कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

साल 2006 में हुए एशियन गेम्स में योगेश्वर दत्त ने जीता था ब्रॉन्ज़ मेडल
साल 2006 में हुए एशियन गेम्स में योगेश्वर दत्त ने जीता था ब्रॉन्ज़ मेडलसाल 2006 में हुए एशियन गेम्स में योगेश्वर दत्त ने जीता था ब्रॉन्ज़ मेडल

कई भारतीय पहलवान पदक जीतने में सक्षम

योगेश्वर दत्त ने कहा, “देखिए, हमने ओलंपिक के बीते तीन संस्करणों में कुश्ती में कई पदक जीते हैं। टोक्यो ओलंपिक में पदक के लिए हमारी सबसे बड़ी उम्मीदें बजरंग (पूनिया), विनेश फोगाट और दीपक पूनिया हैं। जो अभी नए और युवा हैं, उनके पास बेहतर होने के लिए बहुत समय है।”

37 वर्षीय के अनुसार एक अन्य संभावित पदक विजेता भी है। वह हैं भारत के टोक्यो से जुड़े पहलवान दीपक कुमार (Deepak Kumar), जो योगेश्वर दत्त के साथ ही कुश्ती स्कूल, छत्रसाल स्टेडियम से ताल्लुक़ रखते हैं।

उन्होंने ज़ोर देते हुए आगे कहा, “अगर दीपक पदक जीत सकता है तो यह बहुत अच्छा होगा, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि युवा खिलाड़ी पर बहुत अधिक दबाव न डाला जाए। क्योंकि उसके पास अभी भी बड़ी उपलब्धियों को हासिल करने के लिए बहुत समय है। लेकिन बजरंग, विनेश और रवि कुमार सभी पदक जीतने के लिए सक्षम हैं।”

“उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तीन बार के विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता और एशियाई खेलों के साथ-साथ राष्ट्रमंडल खेल चैंपियन बजरंग पूनिया कुश्ती में भारत का एक और ओलंपिक पदक जीतने के प्रबल दावेदार हैं”।

योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, "वह पिछले एक साल से अच्छा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। क्योंकि अगर वह अपनी फॉर्म में बने रहते हैं तो इस एक साल में ही वह पोडियम स्थान हासिल कर सकते हैं। वह ओलंपिक पदक जीतने में सक्षम हैं और पिछले साल अपने भार वर्ग में वह बहुत अच्छे पहलवान रहे हैं।"

फोकस और लेग डिफेंस पर ध्यान दें बजरंग पूनिया

योगेश्वर दत्त के मुताबिक अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक में बजरंग पूनिया एक पोडियम स्थान हासिल कर सकते हैं।

2012 के कांस्य पदक विजेता ने कहा, “मैंने हमेशा से उसे तैयार किया है और कहा है कि वह कुश्ती पर अधिक ध्यान केंद्रित करे। अगर वह कड़ी मेहनत करते है तो अच्छा प्रदर्शन करने की संभावनाएं बेहतर हो जाती हैं।"

योगेश्वर दत्त ने सलाह देते हुए कहा, “उन्हें अपने लेग डिफेंस में सुधार करना चाहिए क्योंकि हर कोई जानता है कि यह उनकी कमजोरी है। इसलिए उन्हें अपनी कुश्ती के कमज़ोर पहलुओं पर काम करना चाहिए।”

भारत की महिला पहलवानों के बारे में योगेश्वर दत्त को लगता है कि विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) पोडियम स्थान हासिल करने में सक्षम हैं। गौरतलब है कि रियो 2016 के क्वार्टर फाइनल में घुटने की चोट की वजह से वह बाहर हो गईं थीं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है।

उन्होंने कहा, "भारत के हमारे सभी पहलवानों ने जैसे कि रवि कुमार, दीपक पूनिया और विनेश फोगाट ने बीते दो-तीन वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है... और मैं उन्हीं के लिए प्रार्थना करता हूं और आशा करता हूं कि वे देश के लिए पदक जीतें।"

देश के अन्य सभी प्रतिभाशाली पहलवानों के साथ टोक्यो ओलंपिक में अब भारतीय कुश्ती के पदक जीतने की उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।

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