जब साक्षी मलिक ने भारत को दिलाया था महिला रेसलिंग में पहला ओलंपिक पदक

रोहतक की इस लड़की ने खेलों के महाकुंभ ओलंपिक में ऐतिहासिक पदक के साथ अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया था।

रियो डी जेनारियो में उस शानदार और ऐतिहासिक रात को अब चार साल हो गए हैं, लेकिन आज भी जब भारत में महिला रेसलिंग की बात होती है तो ज़ेहन में सबसे पहले साक्षी मलिक (Sakshi Malik) का नाम आता है।

अगर 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता फ़ोगाट (Geeta Phogat) के स्वर्ण पदक ने महिला रेसलिंग को सबसे आगे ला दिया, तो वह साक्षी मलिक थीं जिन्होंने इसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक अलग पहचान दिलाई।

लेकिन ओलंपिक पोडियम का वह सफ़र 27 वर्षीय साक्षी के लिए आसान नहीं था, बल्कि वह तो ओलंपिक गेम्स में जाने वाली भी नहीं थीं।

उस वक़्त 58 किग्रा भारवर्ग में खेलने वाली साक्षी मलिक लंबे समय तक गीता फ़ोगाट के बाद दूसरे नंबर पर रहा करतीं थीं।

रियो 2016 तक ये तय था कि वह गीता फ़ौगाट ही होंगी जो ओलंपिक में महिला रेसलिंग की ध्वजवाहक रहेंगी। लेकिन रियो गेम्स से पहले उन्हें इसके लिए क्वालिफ़ाई करना था।

रियो 2016 में जाने से पहले किसी ने साक्षी मलिक से उम्मीद भी नहीं की होगी और इस भारतीय महिला पहलवान ने ही भारत को दिलाया था 2016 ओलंपिक का पहला पदक। तस्वीर साभार: UWW
रियो 2016 में जाने से पहले किसी ने साक्षी मलिक से उम्मीद भी नहीं की होगी और इस भारतीय महिला पहलवान ने ही भारत को दिलाया था 2016 ओलंपिक का पहला पदक। तस्वीर साभार: UWWरियो 2016 में जाने से पहले किसी ने साक्षी मलिक से उम्मीद भी नहीं की होगी और इस भारतीय महिला पहलवान ने ही भारत को दिलाया था 2016 ओलंपिक का पहला पदक। तस्वीर साभार: UWW

लेकिन 2015 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ख़राब प्रदर्शन के बाद अब उन्हें मंगोलिया में होने वाले ओलंपिक क्वालिफ़ाइंग इवेंट के ज़रिए रियो का टिकट हासिल करना था।

अचानक आया बुलावा

मंगोलिया में भी तस्वीर नहीं बदली और गीता फ़ोगाट को पहले ही दौर में हार नसीब हुई। गीता ने इस हार के साथ ही ओलंपिक कोटा भी गंवा दिया था।

गीता की परेशानी यहीं नहीं ख़त्म हुई, हार के बाद गीता ने रेपेचाज राउंड को फ़ॉरफिट कर दिया था जिसके बाद रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (WFI) ने उन्हें निलंबित कर दिया था और तुर्की में होने वाले फ़ाइनल क्वालिफ़ाइंग इवेंट में उनकी जगह साक्षी को मौक़ा दिया।

साक्षी मलिक के लिए ये सबकुछ इतना अचानक हुआ था कि उन्हें ज़्यादा सोचने और समझने का भी समय नहीं मिला। द क्विंट के साथ बातचीत में साक्षी ने कहा, ‘’मुझे पता था कि मुझे तुर्की में अंतिम क्वालिफ़ायर में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा या फिर मुझे चार सालों का और इंतज़ार करन होगा।‘’

रोहतक की लड़की पर दबाव बमुश्किल दिखाई दिया, और उन्होंने आसानी के साथ चीन की ज़ैंग लैन (Zhang Lan) को मात देते हुए रियो 2016 का कोटा हासिल कर लिया था।

रियो 2016 में रचा इतिहास

इस भारतीय पहलवान ने 2016 में अपने पहले ओलंपिक के लिए क्वालिफाई तो कर लिया था, लेकिन साक्षी मलिक कभी भी देश की पदक की दावेदार नहीं थीं।

साक्षी मलिक (IND) ने एसुलु ताइनीबेकोवा (KGZ) को 8-5 से हराया

साक्षी मलिक (IND) ने एसुलु ताइनीबेकोवा (KGZ) को 8-5 से हराया

अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra), जीतू राय (Jitu Rai), सानिया मिर्जा (Sania Mirza), विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) और साइना नेहवाल (Saina Nehwal) जैसे बड़े नामों पर देश की निगाहें टिकी हुई थीं, जबकि एक युवा साक्षी मलिक से उम्मीद की जा रही थी कि वह अपने करियर में आगे बढ़ने का अनुभव हासिल करेंगी।

लेकिन निशानेबाजों और टेनिस सितारों के असफल रहने के बाद देश एक बार फिर उस खेल पर उम्मीदों के साथ नज़र बनाए हुए था जिसने पिछले दो संस्करणों में पदक दिलाए थे।

जहां अपने साथी विनेश फोगाट को बाहर निकलते हुए देखने के बाद, अब साक्षी मलिक पर दबाव आ गया था। साक्षी ने बाद में तब के बारे में डेकन हेराल्ड के साथ बातचीत में कहा था, ‘’थोड़ा दबाव भी था और मूड भी थोड़ा डाउन था, लेकिन मैंने सोच लिया था कि अपनी बाउट के अलावा मैं किसी बात पर ध्यान नहीं दूंगी।‘’

जिस तरह से इस भारतीय पहलवान ने 58 किग्रा भारवर्ग में कैरीओका एरिना में अपने क़दम रखे थे, उससे उनपर दवाब साफ़ झलक रहा था। लेकिन  शुरुआती दौर में जीत के बाद क्वार्टरफाइनल में उन्हें रूसी वेलेरिया कोब्लोवा (Valeria Koblova) के हाथों 2-9 से हार का सामना करना पड़ा था।

लेकिन कोब्लोवा ने इसके बाद फ़ाइनल में जगह बना ली और साक्षी को रेपेचाज राउंड के ज़रिए पजक जीतने का एक और मौक़ा मिल गया था। इस बार साक्षी ने निराश नहीं किया और इतिहास रच डाला।

साक्षी की शानदार वापसी

साक्षी मलिक का कांस्य पदक का मुक़ाबला तब की एशियन चैंपियन किर्गरिस्तानी पहलवान एसुलु टाइनिबेकोवा  (Aisuluu Tynybekova) के ख़िलाफ़ था।

साक्षी के लिए शुरुआत बेहद निराशाजनक रही थी और तुरंत ही वह कीर्गिस्तानी पहलवान से 0-5 से पीछे हो गईं थीं। अब लगने लगा था कि भारत का रियो 2016 में पदक का इंतज़ार और लंबा हो जाएगा, तभी साक्षी ने अद्भुत वापसी करते हुए भारतीय उम्मीदों को ज़िंदा कर दिया था।

साक्षी मलिक ने टाइनिबेकोवा के ख़िलाफ़ कुछ बेहतरीन दांव लगाते हुए स्कोर को 5-5 पर ले आईं थीं। लेकिन साक्षी ये जानती थीं कि अगर मुक़ाबला बराबरी पर समाप्त हुआ तो जीत किर्गीस्तानी पहलवान को मिलेगी क्योंकि शुरुआत में उन्होंने साक्षी पर 4 अंकों वाला दांव खेला था।

बाउट के आख़िरी लम्हों में साक्षी ने बेहतरीन अंदाज़ में प्वाइंट हासिल किया जिसने उन्हें कांस्य पदक विजेता बना दिया था। साक्षी ख़ुशी से मैट पर झूम रहीं थीं और उनके कोच ने उन्हें अपने कंधों पर उठा लिया था, और साक्षी के हाथों में भारतीय तिरंगा लहरा रहा था।

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