फ़ीचर

टेनिस को अलविदा कहने से पहले लिएंडर पेस के बारे में जरूर जानें ये 10 रोचक बातें

प्रोफेशनल टेनिस करियर में 28 साल से भी अधिक के लम्बे करियर में लिएंडर पेस बेमिसाल रहे हैं। जानिए उनके करियर की 10 दिलचस्प बातें।

लेखक रितेश जायसवाल ·

दुनिया में बहुत ही कम खिलाड़ियों का करियर वास्तव में भारतीय टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस जैसा रोमांचक रहा होगा। 46 वर्षींय इस एथलीट ने कोर्ट से बाहर और अंदर दोनों जगहों पर साहसिक कार्य किए, जिसके परिणामस्वरूप बहुत से ऐसी घटनाएं घटित हुईं जो यादगार बन गईं।

युगल में कई खिलाड़ियों के साथ बनाई जोड़ी

पेस ने युगल वर्ग में अपने पूरे करियर में पुरुष युगल स्पर्धाओं के लिए 100 से अधिक खिलाड़ियों के साथ जोड़ी बनाई। हालांकि, वह केवल हमवतन महेश भूपति और चेक गणराज्य के राडेक स्तेपानेक के साथ जोड़ी बनाते हुए ही पुरुष युगल वर्ग में ग्रैंड स्लैम जीतने में सफल रहे।

मिश्रित युगल में पेस ने 20 से अधिक महिला खिलाड़ियों के साथ जोड़ी बनाई। हालांकि वह केवल यूएसए की लीसा रेमंड और मार्टिना नवरतिलोवा, जिम्बाब्वे की कारा ब्लैक और स्विटजरलैंड की मार्टिना हिंगिस के साथ ही जोड़ी बनाते हुए कुछ बड़े खिताब हासिल करने में सफल रहे।

हालांकि, पेस 100 अलग-अलग खिलाड़ियों के साथ जोड़ी बनाने वाले टेनिस खिलाड़ियों में 47वें स्थान पर रहे, लेकिन कोई भी उनकी तरह 18 युगल ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं जीत सका।

मिश्रित युगल में सामंथा स्टोसुर के साथ लिएंडर पेस

पेस और भूपति की यादगार जोड़ी

लिएंडर पेस और महेश भूपति भारत में टेनिस के बड़े नाम रहे हैं। उस देश में जहां टेनिस अन्य खेल क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी या बैडमिंटन जितना लोकप्रिय नहीं है। हालांकि, पेस और भूपति की जोड़ी ऐसी रही जो लम्बे समय तक ऑन-ऑफ रहने के बावजूद जब भी मैदान पर वापस लौटी, तो अधिकांश अवसरों पर वे खिताब जीतने में सफल रही।

303–103 के जीत-हार के अनुपात के साथ पेस और भूपति ने डेविस कप में सबसे लंबे समय तक डबल्स जीतने के रिकॉर्ड को बनाए रखा। उन्होंने लगातार 24 खिताब जीते। इस जोड़ी ने 1995 से 2010 तक टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया। हालांकि, एक समय के बाद उनकी साझेदारी भी समाप्त हो गई।

एटीपी वर्ल्ड टूर फाइनल में लिएंडर पेस और महेश भूपति

हुनर के पैदाइशी शहंशाह

भारत एक ऐसा देश रहा जहां क्रिकेट या कबड्डी की तरह टेनिस प्रतिभाओं को निकलते हुए नहीं देखा गया, लेकिन पेस की प्रतिभा असमान्य थी। 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाली भारतीय फील्ड हॉकी टीम में मिडफील्डर के रूप में जाने जाने वाले प्रसिद्ध एथलीट पिता वेस पेस और 1980 के एशियाई बास्केटबॉल लीग में भारतीय बास्केटबॉल टीम की कप्तानी करने वाली माता जेनिफर पेस के घर में पेस का जन्म हुआ।

उनकी प्रखर प्रतिभा के संकेत उनके बचपन से ही नज़र आने लगे थे। 12 साल की उम्र में ही पेस जूनियर विंबलडन और उसके पांच साल बाद 1991 में यूएस ओपन खिताब पर अपना हुनर आजमाने में कामयाब रहे। इसके एक साल बाद साल 1992 में बार्सिलोना ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे और 1996 अटलांटा ओलंपिक में यादगार ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा खेलों में टेनिस में भारत का एकमात्र ओलंपिक पदक जीता।

आतंकी हमले से 10 घंटे पहले की कहानी

मानव सभ्यता के इतिहास में 9/11 सबसे भयानक आतंकवादी हमलों में से एक रहा है, जहां न्यूयॉर्क शहर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में विमानों के टकराने से कथित तौर पर 3000 से अधिक लोगों की जान चली गई। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि हमला होने से ठीक 10 घंटे पहले लिएंडर पेस ट्विन्स टावर्स के अंदर एक शॉपिंग मॉल में मौजूद थे।

पेस ने एएफपी को दिए गए एक इंटरव्यू में खुलासा किया था, “मेरे पास अभी भी एक रसीद है। मैंने कुछ खाकी पैंट खरीदीं। मैं डेविस कप के लिए विंस्टन-सलेम में वापस आने से पहले तीन दिनों के लिए जन्मदिन मनाने भारत वापस जा रहा था। इस दर्दनाक घटना के होने से 10 घंटे पहले मैं वहां मौजूदा था।”

पेस का बॉलीवुड सपना  

भारत में मनोरंजन की बात होते ही पहला नाम बॉलीवुड का लिया जाता है। इस अद्भुत फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनने के सपने से लिएंडर पेस भी अछूते नहीं रहे सके। हालांकि, बॉलीवुड में उनके प्रयास करने के समय ने कई लोगों को आश्चर्यचकित किया। क्योंकि उन्होंने "राजधानी एक्सप्रेस" नाम की फिल्म का चयन उस वक्त किया, जब पेस विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर चल रहे थे।

अशोक कोहली द्वारा निर्देशित इस फिल्म से पेस ने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया और फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म में जिमी शेरगिल, गुलशन ग्रोवर और सयाली भगत के अलावा पूजा बोस, प्रियांशु चटर्जी, मुकेश ऋषि, सुधांशु पांडे और कई अन्य प्रमुख नाम शामिल थे। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने में असफल रही।

रियो ओलंपिक में पेस को नहीं मिला कमरा

2016 रियो ओलंपिक पेस का रिकॉर्ड सातवां ओलंपिक था। लेकिन इस बार वह कई असमान्य कारणों से चर्चा में रहे। पहले तो उन्होंने काफी बहस के बाद रोहन बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाने पर हामी भरी, लेकिन वह खेलों के इस महाकुंभ के शुरू होने से एक दिन पहले ही वहां पहुंच गए। कथित तौर पर पेस की न्यूयॉर्क में विश्व टीम टेनिस टूर्नामेंट में अन्य कई प्रतिस्पर्धाएं थीं, ऐसे में शायद ही उन्हें बोपन्ना के साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिला।

पेस के रियो पहुंचने के बाद ही कुछ और बातें सामने आईं, जिसमें पता चला कि उनके लिए कमरा ही आवंटित नहीं किया गया था। इस बात का खुलासा उन्होंने बाद में किया। यह भी बताया गया कि उन्हें भारतीय शेफ डी मिशन राकेश गुप्ता के कमरे में अपने कपड़े बदलने पड़े।

ऑस्ट्रेलिया ओपन में लिएंडर पेस और मार्टिना हिंगिस

गाड़ियों के शौक़ीन पेस

जब आप इतने लंबे समय तक अपने करियर के शिखर पर होते हैं, तो जाहिर है कि आपके पास पैसे या किसी भी अन्य सुविधा की कोई कमी नहीं रह जाती है। एक स्पोर्ट स्टार के तौर पर अपने पूरे करियर में उनके खेल के अलावा भी कई अन्य शौक़ रहे। नतीजतन, उनका कार संग्रह भी बहुत खास रहा है। जिसमें फोर्ड एंडेवर और पोर्श केयेन जैसी शानदार गाड़ियां शामिल हैं।

कभी भी पेस को कम न आंके

पेस हमेशा से ही साथ में खेलने के लिए एक आसान साथी नहीं रहे हैं। लंदन ओलंपिक के बाद सानिया मिर्ज़ा इस टेनिस दिग्गज के साथ जोड़ी न बनाने की अपनी इच्छा को लेकर काफी सुर्खियों में रहीं। इन वर्ष पेस के फॉर्म में न रहने की वजह ने भी इस वाक्ये में एक अहम भूमिका निभाई। 

हालांकि, पेस जैसे अद्भुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी के लिए यह सारी बातें शायद ही मायने रखती थीं। क्योंकि उन्होंने तीन साल बाद मार्टिना हिंगिस के साथ जोड़ी बनाई और 2015 में ऑस्ट्रेलिया ओपन, विंबलडन, और यूएस ओपन और 2016 में फ्रेंच ओपन जीतकर एक बार फिर अपने हुनर को साबित किया।

मोहम्मद अली और मदर टेरेसा को माना अपना आदर्श

करियर में इतने लंबे समय तक खेलने के लिए अनिवार्य रूप से किसी में खेल के प्रति असीम इच्छाशक्ति और जुनून होना चाहिए। तो आइए उन व्यक्तियों पर एक नज़र डालते हैं जो पेस के लिए आदर्श रहे हैं। सही मायने में प्रसिद्ध मुक्केबाज़ मोहम्मद अली और मदर टेरेसा उनके आदर्श रहे और उन्हीं के गुणों को पेस ने अपने जीवन में धारण करने की कोशिश की। नतीजा आज सभी के सामने है। वह दुनियाभर में टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी के तौर पर जाने जाते हैं।

स्कूबा डाइविंग का उठाते हैं लुत्फ

टेनिस एक जबरदस्त एथलेटिक खेल है, जो प्रत्येक लम्बे सत्र के बाद शरीर को थकाने का काम करता है। ऐसे में पानी से जुड़ी गतिविधियां पेस को लगातार उनके जोश को बनाए रखने में मददगार साबित करती हैं। यह बात आपको आश्चर्यचकित करेगी कि वह सबसे अधिक स्कूबा डाइविंग को पसंद करते हैं।