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ISSF वर्ल्ड कप: एक संक्षिप्त इतिहास

1986 से हर साल आयोजित होने वाला यह इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन वर्ल्ड कप एक ब्लू रिबैंड इवेंट है।

लेखक सतीश त्रिपाठी ·

खेल में अनुशासन जो और चीजों की तरह धैर्य का प्रतीक है, जहां शूटिंग सबसे दिलचस्प खेलों में देखे जाने वालों में से एक है।

यह खेल और खेलों की तरह एक्शन से भरपूर यानि एड्रेनालाईन-पंपिंग की तरह नहीं होता है, क्योंकि इस खेल में सटीक, एकाग्रता और और बॉडी पोजिशन एक शूटर की तरह रहती है। इस दौरान शूटिंग रेंज में शूट के समय ध्यान पूर्वक देखना रहता है।

शूटिंग, इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन (ISSF) द्वारा नियंत्रित किया जाता है, ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप की तरह यह हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है और यह ओलंपिक खेलों में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी खेलों में से एक है।

ISSF वर्ल्ड कप निशानेबाजी में सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय इवेंट में गिना जाता है और जहां सभी निशानेबाजों के लिए एक वर्ल्ड कप मेडल उनके लिए अभिलाषित स्मृति के तौर पर होती है। जहां ISSF वर्ल्ड कप की शुरुआत 1987 में हुई थी।

ISSF विश्व कप की शुरुआत

बताते चलें कि शूटिंग 1896 में किसी न किसी रूप में उद्घाटन संस्करण के बाद से ओलंपिक का एक हिस्सा था। वहीं, ISSF शूटिंग को नियंत्रित करने वाले अंतरराष्ट्रीय निकाय का गठन 1907 में हुआ था।

ISSF ने 1947 से शुरू होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता आयोजित करने का फैसला लिया और शूटिंग को आने वाले वर्षों में यूरोपीय चैंपियनशिप, अमेरिकी और एशियाई खेलों में एक अनुगामी के रूप में शामिल किया गया।

हालांकि, 1970 और 1980 के दशक की शुरुआत में कई देशों ने खुद मेजबानी की, जिसमें मेक्सिको, जर्मनी, क्यूबा, ​​रोमानिया और कई अन्य देश शामिल थे, जिन्होंने खुद के प्रमुख प्रतियोगिताओं की मेजबानी की और बेहतरीन निशानेबाजों को हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित भी किया।

आखिरकार ये प्रतियोगिताएं ISSF वर्ल्ड कप आयोजित करने का आधार बनी। उन योजनाओं ने 1986 में एक बड़ा रूप लिया और ISSF ने इसको लेकर एक नई पहल की शुरुआत की, जिसमें निशानेबाजों के लिए प्रतिस्पर्धा और ओलंपिक के लिए कोटा हासिल करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मौका मिले। इसके साथ भी यह भी तय किया गया कि वर्ल्ड कप में शूट किए गए स्कोर को वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए माना जाएगा।

जहां अलग-अलग देशों द्वारा आयोजित प्रमुख प्रतियोगिताओं को जल्द ही ISSF वर्ल्ड कप के रूप में नामित किया गया। वहीं, यह सिलसिला आज भी जारी है, जिसमें अलग-अलग शहरों में हर साल कई राइफल और पिस्टल और शॉटगन वर्ल्ड कप आयोजित किए जाते हैं।

शुरुआत के सालों में, हर साल छह ISSF वर्ल्ड कप आयोजित किए जाते थे और 1992 में यह संख्या घटकर पांच हो गई थी। हालांकि, 1996 के बाद से प्रत्येक वर्ष चार ISSF वर्ल्ड कप और ओलंपिक वर्षों में तीन आयोजित किए जाते हैं।

वहीं, पहला ISSF वर्ल्ड कप 1986 में मेक्सिको सिटी में आयोजित किया गया था, जिसमें 10 मीटर एयर राइफल, 10 मीटर एयर पिस्टल, 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन, और पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल की कैटेगरी शामिल थी।

मेक्सिको के ग्वाडलजारा में 2018 ISSF वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर राइफल और 10 मीटर एयर पिस्टल में मिश्रित टीम इवेंट को शुरु किया गया था।

भारतीय शूटर गगन नारंग ने ISSF वर्ल्ड कप में दो स्वर्ण और चार कांस्य पदक अपने नाम किए हैं।

ISSF हर साल 1988 से शुरू होने वाले ISSF विश्व कप फाइनल का आयोजन करता है, जिसमें सर्वश्रेष्ठ स्कोर वाले आठ निशानेबाज़ - प्रत्येक देश से सिर्फ दो निशानेबाज़ - ISSF वर्ल्ड कप में भाग लेने की अनुमति दी जाती है। इसके अलावा, डिफेंडिंग चैंपियन, और ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप के पदक विजेता को वाइल्ड कार्ड अनुमति दी जाती है।

2017 के बाद से, ISSF हर दूसरे वर्ष में वर्ल्ड कप फाइनल की मेजबानी कर रहा है। वहीं, ISSF वर्ल्ड कप राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं के लिए आयोजित किया जाता है, साथ ही हर साल अलग से एक शॉटगन वर्ल्ड कप भी आयोजित किया जाता है।

ISSF शॉटगन वर्ल्ड कप

शॉटगन की इवेंट में दो कैटेगरी होती हैं - ट्रैप शूटिंग और स्कीट शूटिंग। पहला ISSF शॉटगन वर्ल्ड कप भी 1986 में मेक्सिको सिटी में आयोजित किया गया था। जहां पहले 12 वर्षों के लिए, 1986 से 1997 तक ISSF शॉटगन वर्ल्ड कप केवल पुरुषों के लिए आयोजित किया जाता था। उसके बाद मिस्र के काहिरा में 1998 के ISSF शॉटगन वर्ल्ड कप से शुरू होने वाली महिलाओं की ट्रैप और स्कीट प्रतियोगिता को पहली बार शामिल किया गया था।

ISSF शॉटगन वर्ल्ड कप में ट्रैप मिश्रित टीम इवेंट 2018 के खेलों में ग्वाडलाजारा मेक्सिको में शुरूआत हुई थी, जबकि स्कीट मिश्रित टीम इवेंट निकोसिया, साइप्रस में होने वाले 2020 ISSF शॉटगन वर्ल्ड कप में इसकी शुरुआत हुई थी।

ISSF वर्ल्ड कप में सबसे सफल निशानेबाज़

जर्मन पिस्टल शूटर राल्फ शुमान (Ralf Schumann) ISSF वर्ल्ड कप में सबसे सफल एथलीट हैं। उन्होंने अपने 26 वर्षों के खेलों में कुल 56 पदक हासिल किए हैं, जिसमें 39 स्वर्ण पदक उनके नाम पर हैं।

वहीं, राइफल शूटर राजमंड डेब्वेविक (Rajmond Debevec) ISSF वर्ल्ड कप में कुल 67 पदक, जिसमें अपने 27 स्वर्ण पदक के साथ पदक तालिका में सबसे ऊपर काबिज हैं। साथ ही अमेरिकी विन्सेन्ट हैनकॉक (Vincent Hancock) शॉटगन में कुल 16 पदक, जिसमें उन्होंने 12 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

राजमंड डेब्वेविक ISSF वर्ल्ड कप में सबसे सफल राइफ़ल शूटर हैं।

सर्बियाई पिस्टल शूटर जस्ना सेकरिक (Jasna Sekaric) कुल 61 पदक हासिल की हैं, जिसमें 37 स्वर्ण पदक के साथ वह ISSF वर्ल्ड कप में सबसे सफल महिला एथलीट हैं, जबकि बुल्गारिया की वेसेला लेचेवा (Vesela Lecheva) कुल 55 पदक, जिसमें 31 स्वर्ण पदक के साथ राइफल तालिका में सबसे ऊपर हैं। इसके साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका के किम्बर्ली रोडे (Kimberly Rhode) शॉटगन की तालिका में कुल 33 पदक, जिसमें 21 स्वर्ण पदक के साथ काबिज हैं।

ISSF वर्ल्ड कप में भारतीय एथलीट

ISSF वर्ल्ड कप के लिए भारतीय निशानेबाजों की टीम और अन्य सभी प्रमुख कार्यक्रमों का चयन भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) द्वारा किया जाता है। वहीं, ISSF वर्ल्ड कप में पदक जीतने वाले पहली भारतीय शूटर सोमा दत्ता (Soma Dutta) थी। जिन्होंने दक्षिण कोरिया के सियोल में 1986 के ISSF वर्ल्ड कप में महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन में रजत पदक हासिल किया था।

भारतीय निशानेबाज़ को ISSF विश्व कप स्वर्ण जीतने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन आखिरकार यह 2003 में USA के फोर्ट बेनिंग में ISSF वर्ल्ड कप में हासिल हुआ, जब अंजलि भागवत (Anjali Bhagwat) ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम गौरवान्वित किया।

ISSF वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय शूटर अंजलि भागवत थीं।

भारत के पहले ओलंपिक शूटिंग पदक विजेता, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) हैं, जिन्होंने ISSF वर्ल्ड कप में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक अपने नाम किया है। दिलचस्प बात यह है कि दिग्गज अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra), जिन्होंने भारत का अब तक का एकमात्र ओलंपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। जहां ISSF वर्ल्ड कप में कभी स्वर्ण पदक नहीं आया था। जहां उनका रिकॉर्ड प्रतियोगिता में दो कांस्य पदक के बराबर है।

लंदन 2012 के कांस्य पदक विजेता गगन नारंग (Gagan Narang) ने अपना जादू दिखाते हुए और सफलता हासिल की, ISSF वर्ल्ड कप में दो स्वर्ण पदक और चार कांस्य पदक जीते, जबकि ओलंपिक पदक विजेता साथी विजय कुमार (Vijay Kumar) ने ISSF वर्ल्ड कप में दो सिल्वर पदक अपने नाम किए। भारत ने पहली बार 2017 में नई दिल्ली में राइफल और पिस्टल वर्ल्ड कप की मेजबानी की। हालांकि, शॉटगन वर्ल्ड कप पहली बार 1997 में भारत में ही आयोजित किया गया था।