कराटे काटा: इतिहास, मार्शल आर्ट में इसकी भूमिका, नियम और स्कोरिंग का तरीका

जापानी भाषा में काटा का मतलब फॉर्म्स (रूप) और कराटे के इतिहास के साथ ही साथ यह अन्य मार्शल आर्ट में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

किहोन, काटा और कुमीते कराटे के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। जबकि किहोन इसका मूल है या कहें कि मार्शल आर्ट मूव्स का मूल सिद्धांत है, कुमीते में विभिन्न मार्शल आर्ट तकनीकों का उपयोग करते हुए एक प्रतिद्वंद्वी या किसी साथी का सामना करना शामिल है।

लेकिन काटा को समझाना शायद अन्य दो की तुलना में थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि इसमें बहुत बारीकी और जटिलता है। इसलिए हम यहां इसे आपको समझाने के लिए इस शब्द को तोड़कर थोड़ा सरल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

कराटे में काटा का क्या मतलब होता है?

जापानी भाषा में काटा का मतलब 'फ़ॉर्म' (रूप) होता है।

‘काटा’ का अभ्यास या सही फ़ॉर्म और इसकी मुद्राएं बहुत सी मार्शल आर्ट तकनीकों का एक अभिन्न अंग है, खासतौर पर जो जापान के ओकिनावा से उत्पन्न हुई हैं। कराटे, जूडो, इआइडो, केनपो जैसे मार्शल आर्ट इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

हालांकि, काटा केवल मार्शल आर्ट तक ही सीमित नहीं है। यह पारंपरिक जापानी कला रूपों जैसे कि काबुकी (जापानी थिएटर) और चाडो (जापानी चाय समारोह) में भी काटा अभ्यास के कुछ अंश जुड़े हुए हैं।

मार्शल आर्ट में काटा की उत्पत्ति और कराटे से मिलना

जापानी मार्शल आर्ट और उसकी संस्कृति के एक बड़े हिस्से से जुड़े होने के बावजूद काटा की जड़ें मूल रूप से चीन से जुड़ी हुई हैं। प्राचीन समय में चीनी कुंग फू के मास्टर्स या इसकी प्रैक्टिस करने वालों को शब्दों या पेंटिंग के माध्यम से आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ही तकनीकों का उल्लेख करने में काफी मुश्किल होती थी।

इसलिए इसके बजाए उन्होंने 'फॉर्म' या कहें कि काटा को विकसित किया। इसमें कई सूक्ष्म अनुक्रमों के साथ अत्यधिक-विस्तृत मूवमेंट्स शामिल हैं- जैसे कि पंच, किक, ब्लॉक, फुटवर्क और श्वास लेने और छोड़ने की तकनीक। जिसका उद्देश्य उनकी मार्शल आर्ट तकनीकों को सुरक्षित तरीके से संग्रहित करना और भावी पीढ़ियों तक इसे पहुंचाना था।

14वीं शताब्दी के अंत में जब मिंग राजवंश ने फ़ुज़ियान प्रांत से कई चीनी परिवारों को जापान के रयूकू (वर्तमान में ओकिनावा के नाम से विख्यात) में बसने के लिए भेजा तो वे काटा को भी अपने साथ जापान ले गए।

स्थानीय और अप्रवासी चीनी परिवारों के बीच संस्कृतियों के आदान-प्रदान में काटा एक महत्वपूर्ण घटक रहा था।

यह चीनी मार्शल आर्ट के सभी रूपों का एक जगह इकठ्ठा होने के जैसा था। ख़ासतौर पर फ़ुज़ियान कुंग फू, जिसे काटा के माध्यम से और कई वर्षों में पहले से मौजूद स्थानीय रयुकुआन यानी हाथ से लड़ने की तकनीक के ज़रिए संग्रहित किया गया था। इसके बाद टी या टोड नाम से एक नई मार्शल आर्ट शैली का गठन किया गया था, जिसे बाद में कराटे के नाम से जाना जाने लगा।

कराटे में काटा ने इस जानकारी को आगे बढ़ाने में प्रमुख रूप से अपना काम जारी रखा और 1930 के दशक तक यह एकमात्र तरीका था, जिसमें पारंपरिक मास्टर्स ने मार्शल आर्ट के इस खेल को सिखाया था।

कराटे में काटा या कराटे काटा

कराटे की बात की जाए तो काटा मुख्य तौर पर असंख्य कराटे मूव्स और मूल तकनीकों का एक भंडार है, उन्हें वैसे ही प्रैक्टिस किया जाना चाहिए। जबकि कुछ कुमीते के मुक़ाबलों में उपयोग किए जाते हैं, हालांकि सभी नहीं या हो भी सकते हैं।

कुमीते मुकाबलों के दौरान कुछ काटा मूव्या या चालें भी चली जाती हैं और एक गैर-घातक मैत्री मैच के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ज्यादातर अकेले अभ्यास किए जाने वाले काटा में हर मूवमेंट वैसा ही होना चाहिए, जैसा कि पुस्तक में लिखा है।

जापान कराटे एसोसिएशन से मान्यता प्राप्त प्रशिक्षक सोमनाथ पाल चौधरी (Somnath Pal chowdhury) ने ओलंपिक चैनल को बताया, “काटा सही मायने में कराटे के मूव्स और तकनीक की लाइब्रेरी जैसा है। आप भले ही उसका इस्तेमाल कुमीते में उसकी जटिलता और घातक प्रकृति के कारण करें या न करें। काटा ही कराटे की धरोहर है और किसी को भी मूल रचना में बदलाव करने की कोई जरूरत नहीं है।”

“लेकिन कुमिते में आप काटा में सीखी तकनीकों का उपयोग करने और नई चालों का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं। आप इसके नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार की तकनीकों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

कराटे में काटा क्यों महत्वपूर्ण है?

पारंपरिक तौर पर कराटे की प्रैक्टिस करने वालों का मानना ​​है कि कराटे के लिए काटा में महारत हासिल करना जरूरी है।

यह एक कराटेका की शरीरिक यांत्रिकी को बेहतर करने में मदद करता है, जिसमें मांसपेशियों की संरचना भी शामिल है। क्योंकि किसी को भी मार्शल आर्ट तकनीकों को ठीक से करने की आवश्यकता होती है।

काटा की जानकारी आपको यह समझने में भी मदद करती है कि कूल्हों और कोर से पैरों और हाथों के विपरीत शक्ति कैसे उत्पन्न की जाए - एक कराटेका के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सबक होता है।

इसके अलावा, काटा आपको एक सफल कराटेका बनने के लिए सही तौर पर सांस लेने की तकनीकों में महारत हासिल करने और दिमाग को एक विशेष उद्देश्य पर केंद्रित रखने में भी मदद करता है।

कराटे काटा नियम और स्कोरिंग का तरीका

जहां काटा का अभ्यास पारंपरिक तकनीकों और शैलियों को उनके मूल में संरक्षित और भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए किया जाता है, वहीं कराटे उसी के मूल रूप को और आगे बढ़ाने का काम करता है। इसने प्रतिस्पर्धी खेलों में भी अपना रास्ता खोज लिया है।

कराटे काटा को 8x8 मीटर की न फिसलने वाली मैट पर प्रतियोगियों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जो इवेंट के दौरान सफेद कराटेगी (कराटेका की पोशाक) पहनकर खड़े होते हैं।

एक काटा प्रतियोगिता तीन लोगों की एक टीम में या एक व्यक्तिगत बाउट के तौर पर हो सकती है। वहीं प्रतिभागियों की संख्या ही एलिमिनेशन राउंड के लिए स्थापित किए जाने वाले समूहों की संख्या निर्धारित करती है।

नियमित तौर पर कराटे काटा प्रतियोगिताओं में प्रतिभागी जोड़ी बनाकर प्रदर्शन करते हैं और उन्हें नीली या लाल बेल्ट दी जाती है। जब दोनों प्रतियोगी अपने-अपने काटा मूव्स का प्रदर्शन कर लेते हैं तो पांच जज अपने विजेता को चुनने के लिए फ्लैग सिस्टम (नीले या लाल ध्वज) का उपयोग करते हैं।

टाई-ब्रेकर राउंड में भी प्रतियोगियों को एक ही राउंड में किसी भी काटा मूव का दोबारा इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं है।

विश्व कराटे महासंघ (WKF) द्वारा स्थापित नियमों के अनुसार, "काटा नृत्य या नाट्य प्रदर्शन नहीं है। इसमें पारंपरिक मूल्यों और सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करना चाहिए।

“लड़ाई के दौरान यह अपने मूल रूप में ही होना चाहिए और इसकी तकनीकों में एकाग्रता, शक्ति और संभावित प्रभाव को प्रदर्शित करना चाहिए। यह सही मायने में शक्ति, ताकत और गति को प्रदर्शित करे। इसके साथ ही साथ इसमें अनुग्रह, लय और संतुलन भी होना जरूरी है।”

प्रतियोगियों का आकलन 70 फीसदी तकनीकी प्रदर्शन के लिए और 30 फीसदी एथलेटिक प्रदर्शन के लिए किया जाता है। जिन प्रतियोगियों को उनके पक्ष में ज्यादा झंडे दिखाए जाते हैं, उन्हें ही विजेता घोषित किया जाता है।

भले ही अस्तित्व में काटा के कई रूप हैं, लेकिन विश्व कराटे फेडरेशन ने 102 काटा मूव्स को इस्तेमाल करने की इजाजत दी है और इन्हें WKF मान्यता प्राप्त इवेंट्स में ही प्रदर्शित किया जाता है।

पाल चौधरी ने समझाते हुए कहा, “प्रतिभागियों की तकनीकों में काटा का सही एटीट्यूड (तरीका), क्षमता, सटीकता, समझ और जानकारी जैसे बुनियादी पहलुओं के ज़रिए आंका जाता है। सही एटीट्यूड का मतलब है कि जब कोई खिलाड़ी खेल क्षेत्र में आता है, तो उसकी स्पिरिट, आंखे, आसन और उसकी मन की स्थिति बहुत मायने रखती है।”

ओलंपिक में काटा

कराटे के साथ कुमीते भी टोक्यो ओलंपिक के ज़रिए अपना डेब्यू करने जा रहा है, जल्द ही काटा को भी मेडल इवेंड के तौर पर शामिल किया जाएगा।

ओलंपिक खेलों में प्रतिभागी WKF द्वारा अनुमोदित 102 कराटे काटा मूव्स का प्रदर्शन करेंगे और सात जजों का एक पैनल प्वाइंट सिस्टम के ज़रिए सभी के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगा।

प्रतिभागियों को सात तकनीकी बिंदुओं - स्टांस, तकनीक, मूव्स में बदलाव, समय, सांस लेने के सही तरीके, फोकस और अनुरूपता के साथ ही तीन एथलेटिक बिंदुओं - शक्ति, गति और संतुलन के आधार पर आंका जाएगा।

टोक्यो ओलंपिक खेलों में दुनिया के शीर्ष कराटेका भाग लेने के लिए तैयार हैं और इसी के साथ सदियों पुरानी कला अपना नया इतिहास रचेगी।

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