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जानिए ओलंपिक में शामिल किए रग्बी के ट्वटी-20 सेवेंस के बारे में सबकुछ   

ओलंपिक में शामिल किये जाने से भारत में भी मिलेगा रग्बी सेवेंस को बढ़ावा

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

रग्बी आधुनिक ओलंपिक का हिस्सा रहा था। 1900 के पेरिस गेम्स में एक पूर्ण पदक खेल के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी।

2016 रियो ओलंपिक में रग्बी को फिर से ओलंपिक अनुसूची में शामिल किया गया था, लेकिन यह वैसा रग्बी नहीं था जिसके बारे में हम जानते हैं। यह खेल का बहुत छोटा, तेज़ और ज्यादा उग्र संस्करण था। इसकी उत्पत्ति "रग्बी" शहर के इंग्लिश पब्लिक स्कूल में हुई थी। शहर के नाम के आधार पर इस खेल का नाम रख दिया गया।

सेवन्स जैसा कि नाम से पता चलता है, कि यह सात लोगों की दो टीमों के बीच खेला जाता है जो पारंपरिक 15-ए-साइड प्रारूप के विपरीत है। भले ही यह 15 के प्रारूप के समान आयाम वाले क्षेत्र पर खेला जाता है, लेकिन इस प्रारूप में प्रत्येक हाफ सामान्य के 40 मिनट के बजाय सात मिनट का रहता है।

पूर्व भारतीय रग्बी कप्तान नासिर हुसैन ने ओलंपिक चैनल को बताया, "यह ओलंपिक गेम्स के लिए रग्बी का अधिक अनुकूल संस्करण है, जो 15-ए साइड प्रारूप के विपरीत है।"

उन्होंने आगे कहा, "मूल रूप से सेवेंस इस खेल का जल्दबाजी वाला काफी तेज और ज्यादा रोमांचक संस्करण है। भारतीय दृष्टिकोण से यह क्रिकेट के ट्वेंटी-20 मैचों की तरह है। यह राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों, क्षेत्रीय दक्षिण पूर्व एशियाई खेलों जैसे बहु-खेल आयोजनों का भी हिस्सा रहा है। यह खेल का छोटा संस्करण है, इसलिए प्रत्येक टीम दिन में दो या तीन मैच खेल सकती है। 16 या 24 टीमों का टूर्नामेंट तीन दिनों में ही खत्म हो जाता है।"

पेरिस 1900 गेम्स में पूर्ण पदक के खेल के रूप में शुरुआत करते हुए रग्बी आधुनिक ओलंपिक का हिस्सा था, लेकिन 1924 गेम्स के बाद इसे शामिल नहीं किया गया। करीब एक सदी से रग्बी को बाहर कर दिया। यह किसी भी अवतार में सबसे भव्य मच पर वापसी करेगा।

हर पल रोमांचक से भरे खेल रग्बी सेवेंस को फिर से ओलंपिक में शामिल किया जा रहा है। 2009 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने रियो 2016 गेम्स में सेवेंस को शामिल करने के लिए मतदान किया था।

यहां तक सेवेन्स को ओलंपिक में शामिल करने के लिए मार्ग भी प्रशस्त किया। चार साल में होने वाले इस आयोजन में शामिल होने से इसे नए बाजारों में प्रवेश करने में मदद मिली।

हुसैन कहते हैं, "सेवेंस एक ऐसा संस्करण है, जिसका नए बाजार और क्षेत्र में प्रवेश करना आसान है। इस खेल के पारंपरिक प्रारूप का आकार बड़ा है। रग्बी सेवेंस अधिक मुक्त-प्रवाह जो दर्शकों को अपनी सीट से खड़ा होने के लिए मजबूर कर देता है। मुझे लगता है कि 120 से अधिक देश जो रग्बी खेलते हैं उनमें से ज्यादातर 15 खिलाडियों वाले प्रारूप की बजाय रग्बी सेवेंस खेलना पसंद करेंगे।"

मैच के दौरान बॉल को अपने कब्जे में लेते पूर्व भारतीय रग्बी कप्तान नासिर हुसैन

"इसे ओलंपिक में शामिल किया जाना भारत में इस खेल को बढावा देने में मदद करेगा। खेल मंत्रालय भी इसमें दिलचस्पी ले रहा है। रग्बी में भारत के लिए मान्यता प्राप्त करना भी आसान होगा क्योंकि यह एक ओलंपिक गेम है।

नई दिल्ली में आयोजित 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सेवंस टीम का नेतृत्व करने वाले हुसैन ने पिछले 10 सालों में इस खेल में कई छलांग लगाई और देश में इसका विस्तार किया। भारत में अब 8581 पंजीकृत खिलाड़ी हैं, जिनमें 2760 महिलाएं शामिल हैं।

भारतीयों में रग्बी सेवेंस क्यों सफल हो सकती है?

भारतीय रग्बी में सबसे बड़ी समस्या खिलाडियों की लम्बाई को लेकर रही है। उन्होंने अपने से लम्बे-चौड़े और मजबूत विरोधियों का मुकाबला करने में हमेशा मुश्किल का सामना किया, लेकिन सेवेंस इस तरह की परेशानी नहीं है।

उन्होंने कहा कि “यह प्रमाणित बात है कि रग्बी सेवेंस केवल आकार पर केंद्रित नहीं होता है। यह गति, धैर्य, चपलता, कौशल पर निर्भर करता है जो भारतीय खिलाडियों के शरीर के आकार-प्रकार के ज्यादा अनुकूल है। इसका उदाहरण श्रीलंका है जो शरीरिक बनावट में हमारे समान हैं लेकिन उन्होंने एशियाई मोर्चे पर काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत के लिए ही नहीं कई विकासशील देशों के लिए यह उन्हें अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा करने मौका देता है।”

हालांकि रग्बी अभी भी हमारे देश में एक विकासशील खेल है, लेकिन भारतीय महिलाओं ने विशेष रूप से एशियाई सर्किट पर कुछ उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। 2017 में एशिया रग्बी सेवेंस ट्रॉफी में सबसे उल्लेखनीय रजत पदक हासिल करना था।

ओलंपिक में शामिल होकर रग्बी सेवेंस खेल की परंपराओं को तोड़ने हुए और नए क्षेत्रों में पहुंच बनाने के लिए तैयार है।