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दूसरे खेलों में अवसर के अभाव ने भारतीय महिलाओं को रग्बी की तरफ मोड़ा: नासिर हुसैन 

रग्बी में देश के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने दिखाई अपनी प्रतिभा 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारत में एक अपेक्षाकृत युवा खेल के रूप में रग्बी ने युवा भारतीय महिलाओं की कल्पना को मजबूती प्रदान की है।

बॉम्बे जिमखाना में कीचड़ से भरे मैदान पर 2009 में यह एक प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ जो देश में एक अद्भुत रूप में बदल गया। भारतीय महिलाओं विशेष रूप से देश के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने अप्रत्याशित उत्साह के साथ रग्बी में भाग लिया और इसमें एक छाप छोड़ना शुरू कर दिया।  

भारतीय रग्बी और फुटबॉल संघ ने 2009 में मुंबई में महिलाओं के लिए पहला राष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित किया। उस समय एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो और फुटबॉल जैसे खेलों के खिलाड़ियों को लेकर टीमें बनाई गई थी, लेकिन इसके एक दशक बाद 2020 के अंत तक देश में 2760 पंजीकृत महिला रग्बी खिलाड़ी हैं। 

भारतीय रग्बी टीम के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन कहते हैं, "महिलाओं के रग्बी को चुनने के पीछे कारणों में से एक अन्य खेलों में मौकों का अभाव भी है। हमने देखा कि महिला प्रतिभागियों में जबरदस्त उत्साह था।”

2009 में ओलंपिक कार्यक्रम में रग्बी सेवेंस को शामिल किये जाने से भारतीय रग्बी को भी एक सुनहरा ब्रेक मिला। यह 2016 रियो ओलंपिक का भी हिस्सा रहा। न केवल विश्व निकाय ने इस खेल को विश्व स्तर पर विकसित करने के लिए एक अभियान चलाया, बल्कि भारतीय महासंघ के लिए सरकारी बजट के उपयोग को आसान बना दिया। 

हुसैन कहते हैं, "सेवेंस रग्बी का एक ऐसा संस्करण है, जिसको नए मार्केट और क्षेत्रों में पेश करना आसान है।"

“जैसा की हम जानते हैं कि सेवेंस, रग्बी 15s का प्रगतिरत रूप है। हमने गेट इनटू रग्बी’के साथ शुरुआत की, जो पूर्व प्रमुखता से गैर-संपर्क रग्बी के लिए जमीनी स्तर पर सामूहिक भागीदारी कार्यक्रम है। अगला कदम रग्बी सेवेंस और फिर अंततः रग्बी 15s में पहुंचना रहा है।”

भारतीय महिलाओं ने 2009 में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय रग्बी सेवेंस अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला। जबकि पारंपरिक 15-a-साइड प्रारूप में खेल की शुरुआत 2018 में की।

भारतीय महिलाओं की रग्बी में बहुत सी प्रतिभाएं हैं। इनमें ओडिशा और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों की महिलाओं की प्रमुख भागीदारी है। बिहार की पहचान खेलों में नहीं होने के बावजूद यहां से भी प्रतिभायें इसमें शामिल हुई हैं। 

22 सदस्यीय वर्तमान भारतीय दल में सात ओडिशा से, तीन पश्चिम बंगाल से और चार बिहार से हैं। महाराष्ट्र का मुंबई और पुणे जो पारंपरिक रग्बी का हब है, वहां से राष्ट्रीय दल में केवल पांच खिलाड़ी शामिल हैं। 

ग्रामीण इलाकों की युवा लड़कियों के लिए रग्बी आउटरीच कार्यक्रम ने स्वीटी कुमारी के रूप में एक आदर्श उदाहरण पेश किया है। संगठित खेल के साथ 20-वर्षीय ने एथलेटिक्स में शुरुआत की थी, लेकिन जब वह पहली बार उन्होंने रग्बी में अपना हाथ आजमाया तो इसी को भविष्य के लिए चुना। उसने पहली बार भारतीय राष्ट्रीय प्रणाली में एक जूनियर के रूप में प्रवेश किया, लेकिन रैंक के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ी।

रग्बी मैच के दौरान बॉल पकड़े हुए स्वीटी कुमारी

एशिया रग्बी ने उन्हें "महाद्वीप का सबसे तेज खिलाड़ी" का नाम दिया, जबकि लोकप्रिय महिलाओं की रग्बी वेबसाइट स्क्रैमकेन्स ने उन्हें जनवरी 2020 में 'अंतर्राष्ट्रीय युवा खिलाड़ी' का नाम दिया।”

बिहार की राजधानी पटना के बरह तहसील के नवादा गांव की रहने वाली कुमारी कहती हैं, "मैं एक धावक थी और एथलेटिक्स काफी अच्छा था, लेकिन मुझे पता था कि इस खेल में मुझे जो प्रशिक्षण और समर्थन मिला था, वो मुझे ज्यादा आगे नहीं ले जा सकता था। लेकिन रग्बी को चुनने के कुछ साल बाद ही भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।”

भारतीय रग्बी टीम की अन्य महिलाओं की तरह कुमारी को भी न केवल उसके गांव, बल्कि देश के बाहर की दुनिया को देखने का मौका दिया।

कुमारी के अनुसार, दुबई में (2017 में) यूथ ओलंपिक गेम्स रग्बी सेवेंस क्वालिफायर के लिए चुने जाने के बाद मैंने अपना पासपोर्ट बनवाया।

स्वीटी के पिता एक बैंक एजेंट और मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।

उनका कहना है, "मेरे माता-पिता को तब तक यह भी पता नहीं था कि मैंने रग्बी को खेल रूप् में चुना है, न ही उन्होंने पहले कभी यह खेल देखा था।”

“मुझे एथलेटिक्स भी पसंद था, लेकिन यह एक ऐसा खेल है जहां हर कोई दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करता है और प्रतिभागियों के बीच कोई सौहार्द नहीं है। जब मैं रग्बी सेटअप में शामिल हुई, तो यहां किसी भी संदेह या डर के बारे में लड़कियों ने एक-दूसरे का साथ दिया। यह एक अलग एहसास था, जो एक परिवार की तरह नजर आया। इसका हिस्सा बनकर मुझे सही में बहुत अच्छा लगा।”

विकास की ओर अग्रसर भारतीय टीम को महाद्वीपीय स्तर पर मामूली सफलता मिली है। टीम ने लाओस में 2017 एशियाई रग्बी सेवेंस ट्रॉफी में रजत पदक जीतकर सर्वश्रेष्ठ परिणाम दिया। 2019 में भारत ने अपने पहले 15-ए-साइड मैच में उच्च रैंक वाले सिंगापुर को 21-19 से हराया और एशिया महिला Div-1 रग्बी 15s चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता।

पांच फुट से भी लंबी कुमारी याद करती हुई कहती हैं, "जब मैंने पहली बार एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला था, तो मुझे इस बात की चिंता थी कि हम दूसरे देशों की लंबी और मजबूत लड़कियों के सामने कैसे मुकाबला करेंगे। भले ही हम कद में छोटे हैं, लेकिन मुकाबला करने नहीं डरते।"

एक विकासशील देश में रहना जहां महिलाओं को समानता का अधिकार नहीं है, उन्हें उपेक्षित समझा जाता है।