1996 अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस का पदक जीतना आज भी है यादगार 

भारतीय टेनिस के दिग्गज़ खिलाड़ी लिएंडर पेस ने 44 वर्षों में देश के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक का ज़िक्र किया और बताया कि उस समय उनके दिमाग में क्या चल रहा था।

भारत के अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस (Leander Paes) को इतिहास में एक बेहतरीन खिलाड़ी के तौर पर जाना जाता है, उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। वहीं, लिएंडर पेस ने ओलंपिक चैनल से एक्सक्लूसिव बातचीत की और अपने तमाम अनुभवों को साझा किया। इसके साथ ही अटलांटा में उस यादगार रात के बारे में भी जिक्र किया।   

उन्होंने कहा कि जब एथलीटों के लिए एक समय आता है और वह सामानरूप से एक पंक्ति में रहते हैं ताकि कोई गलत न हो। दरअसल, यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे एथलीटों के लिए पवित्र स्थल के तौर पर जाना जाता है। जैसा कि 1996 के अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस ने पदक हासिल कर साबित किया था।

लिएंडर पेस ने ओलंपिक चैनल से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा, "उस मुकाबले में पहला सेट हारने के बाद, जब मैं दूसरे सेट में 1-2 और 30-40 से पीछे था कि तभी मेरे लिए कुछ जादू सा हुआ। हालांकि मुझे वास्तव में याद नही है कि उस 45 मिनट की अवधि में क्या हुआ था।“   

लिएंडर पेस ने 44 वर्षों में भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल का किस्सा साझा किया। बता दें कि 1996 के अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस ब्राज़ील के फ़र्नान्डो मेलीगेनी को मात देकर कांस्य पदक हासिल किया था।  

उन्होंने आगे कहा, "जब मैंने मुकाबले में ब्रेक-पॉइंट को सुरक्षित किया तो उस गेम को 2-2 से हासिल किया और दूसरा सेट भी हासिल किया। वहीं, तीसरे सेट में 5-4 से मुकाबले में आगे रहते हुए मैं फिर लय हासिल कर चुका था।" लिएंडर पेस ने कहा कि मैं अभी भी अटलांटा की उस जादुई रात को समझने की कोशिश करता हूं कि आखिर वह हुआ कैसे।

उन्होंने उस मुकाबले के बारे में आगे बात करते हुए कहा, "मैं इस पल को याद नहीं करता क्योंकि मैं 1.4 अरब लोगों के लिए खेलता हूं।“ उन्होंने आगे कहा, “जब आप डेविस कप या ओलंपिक खेलने के लिए बाहर जाते हैं तो यह आपके लिए पूरी तरह से एक अलग एहसास होता है।"

जब खिलाड़ी अपने स्वर्णिम दौर में होता है

पेस ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी अपने खेल के स्वर्णिम दौर में होता है तो वह ज्यादा प्रतिस्पर्धा करने की चुनौती को आसानी से संभाल सकता है। उस दौर में खिलाड़ी ज्यादा फोकस होता है।

जब पेस या कोई और एथलीट अपनी लय में होता है तो वह पूरी तरह अपनी ही दुनिया में रहता है। उस समय खिलाड़ी अपने लक्ष्य को निर्धारित कर उसे हासिल करने की कोशिश करता है। पेस के अनुसार ऐसे मौके बार-बार नहीं आते, लेकिन जब भी ऐसा होता है तो यह काफी महत्वपूर्ण होता है, जैसा कि 1996 अटलांटा ओलंपिक में हुआ था।

इस दिग्गज ने कहा, “जब मैं सेमीफाइनल में आंद्रे अगासी (Andre Agassi) से हार गया था तो 24 घंटों तक परेशान रहा, लेकिन कांस्य पदक के मैच के समय हालात बदल गए थे। फ़र्नान्डो मेलीगेनी (Fernando Meligeni) के खिलाफ उस मैच से पहले मुझे लगा कि मुझे अब दिमाग शांत कर इस मैच पर ध्यान लगाना चाहिए।“

भारत के कांस्य पदक विजेता लिएंडर पेस, स्पेन के रजत पदक विजेता सर्गी ब्रुगेरा और 1996 अटलांटा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता आंद्रे अगासी पोडियम पर एक साथ
भारत के कांस्य पदक विजेता लिएंडर पेस, स्पेन के रजत पदक विजेता सर्गी ब्रुगेरा और 1996 अटलांटा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता आंद्रे अगासी पोडियम पर एक साथभारत के कांस्य पदक विजेता लिएंडर पेस, स्पेन के रजत पदक विजेता सर्गी ब्रुगेरा और 1996 अटलांटा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता आंद्रे अगासी पोडियम पर एक साथ

कड़ी मेहनत के साथ अटलांटा ओंलपिक की तैयारी की थी

लिएंडर पेस ने 1996 ओलंपिक गेम्स के लिए अपनी मानसिक शक्ति और दृढ़ संकल्प के साथ तैयारी की थी। लिएंडर ने कहा, "आपको मालूम होगा कि मैंने अटलांटा ओलंपिक के लिए काफी तैयारी की थी और जैसे ही 1992 में बार्सिलोना मकुाबला खत्म हुआ तो मैंने उसके बाद ही तैयारी करना शुरु कर दी थी और मैंने अटलांटा के लिए तकरीबन चार साल की तैयारी की।

उन्होंने आगे कहा, “मैं उन टूर्नामेंटों में खेलने के लिए प्रो टूर से भी समय निकाल चुका था। यह उन परिस्थितियों से मिलता-जुलता था, जो अटलांटा में माउंटेन है। मैं दक्षिण अमेरिका के उन सभी कठिन कोर्ट में मुकाबले खेले, जहां खेलना अपने आप में एक चुनौती होती है।" बता दें कि जब वह अटलांटा में मुकाबले खेलने के लिए गए तो वहां उनके लिए कुछ आसान नहीं था। 

 तैयारी के अवसर मिलते ही एक जादू हुआ

लिएंडर ने कहा, "वहां उस दौरान मेरे लिए कुछ जादुई और रहस्यमय जैसा हुआ था, जो मुझे अपने शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है, लेकिन पीट सम्प्रास (Pete Sampras) ने उन्हें बाहर खींचा, जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा, और फिर रिचे रेनेबर्ग (Richey Reneberg) को मैंने तीन सेटों में मात दी थी।"

लिएंडर पेस का सिंगल्स मुकाबलों में उस साल ओलंपिक का देश का पहला कांस्य पदक था, जो करोड़ो भारतीयों के लिए खुशी की बात थी। जिसे आज भी यादगार लम्हे के तौर पर याद किया जाता है। 

सात बार के ओलंपियन खिलाड़ी ने कहा, "उस पल को याद करने की कोशिश करते हुए ऐसा लगता है जैसे एक गर्म कमरे में भी आपके रोंगटे खड़े हो जाएं।"

लिएंडर पेस को अपने टेनिस करियर के आखिरी वर्ष में एक बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है। लेकिन इस साल क्या होता है और कैसा होता है, उन्हें छोड़ भी दिया जाए तो भारत के अरबों फ़ैंस के लिए पेस ने जो लम्हें दिए हैं वे हमेशा यादगार रहेंगे।

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