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भारत में NBA: खेल और खिलाड़ियों के सफ़र से लेकर वह सबकुछ जो आपको जानना चाहिए

भारत में दाखिल हो चुके बास्केटबॉल खेल अब अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार है और इससे जुड़ा हर प्रयत्न एक ही लक्ष्य को दर्शाता है और वह है भारत में बास्केटबॉल की लोकप्रियता।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (National Basketball Association – NBA) का पहला सीज़न साल 1949 में खेला गया था। भारत में आने से पहले बास्केटबॉल लीग ने लगभग 70 सालों का वर्चस्व अपने नाम किया हुआ था।

1984 में NBA ने इटली, मेक्सिको, ब्रिटेन, फ्रांस और फिलीपींस जैसे देशों में कदम रखने की ठानी और उन्हें सफलता भी प्राप्त हुई। भारत और NBA की बात करें तो यह रिश्ता 2019 में शुरू हुआ।

भारत में पहली बार इंडियाना पेसर्स और सैक्रामेंटो किंग्स ने मुंबई के डोम SVP स्टेडियम में जलवा दिखाया। USA की इस प्रसिद्ध लीग ने भारत में मानों अपनी पकड़ बनाना शुरू कर दिया था।

लीग के कमिश्नर एडम सिल्वर (Adam Silver) ने NBA इंडिया गेम्स से कहा था “यहां पर इन दो मुकाबलों का होना अद्भुत और ऐतिहासिक रहा।”

“लेकिन एक व्यवसाय को बढ़ाने के लिए यह एक बहुत छोटा क़दम था। आपको इसके अंदर तक जाना होगा और यही हमारा आगे का प्लान भी है।”

NBA की नज़र से देखा जाए तो यह छोटे छोटे कदम भारत में बास्केटबॉल के लिए लाभदायक साबित होंगे।

बास्केटबॉल और भारत का रिश्ता काफी पुराना है। 1980 ओलंपिक गेम्स में भारत ने इस खेल में भी हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं, सन 2000 से भारत में बास्केटबॉल का ब्रॉडकास्ट भी शुरू हो गया। धीरे धीरे खेल प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय हो रहा था और साथ ही युवा बच्चे इसे खेलने के भी इच्छुक थे।

साल 2012 में भारतीय प्रशंसकों को इस खेल को बिना रुकावट देखने का मौका तब मिला जब सोनी नेटवर्क (Sony Network) ने इस खेल का ठेका उठाया।

रेगुलर कवरेज ने बास्केटबॉल को भारत में और ज़्यादा लोकप्रिय कर दिया। प्लेऑफ जैसे अहम मुकाबलों के प्रसारण और NBA से जुड़े शो ने बास्केटबॉल का ज्ञान और रूचि दोनों भारतीय युवाओं में बढ़ा दी।

NBA अकादमी भारत

NBA ने केवल खेल का प्रसारण ही भारत में नहीं किया बल्कि इस खेल को खेलने के स्तर को भी बढ़ावा दिया। वह चाहते थे कि भारतीय जनता न सिर्फ इसे TV पर देखें बल्कि इसमें उच्चतम प्रदर्शन भी करे। इसी वजह से NBA ने भारत में अपनी अकादमी खोली और अब वहां युवा बच्चों को बास्केटबॉल खेलने की ट्रेनिंग दी जाती है।

देश की राजधानी दिल्ली के पास ही इस अकादमी की स्थापना की गई है। इसका एकमात्र लक्ष्य इस खेल को भारत में बढ़ावा देना है और बाकी खेलों की तरह ही इसमें भी करियर बनाना। यह तो सच है कि भारत में खेल और खिलाड़ियों को एक अलग ही दर्जा दिया जाता है और इसी विशेषता को देखते हुए NBA ने यह कदम उठाएं हैं।स्कॉट फ्लेमिंग (Scott Fleming), टॉड गेट्स (Todd Gates) और रोनाल्ड कास (Ronald Cass) जैसे दिग्गज कोचों द्वारा बास्केटबॉल के गुर सीखना मानों भारतीय खिलाड़ियों के लिए वरदान सा है। एक से बढ़कर एक कोच और बेहतरीन सुविधाएँ भारतीय बास्केटबॉल के भविष्य को निखारने में जुटी हुई है।

इस मेहनत का फल ज़ाया नहीं हुआ और कुछ भारतीय युवा खिलाड़ियों के लिए उत्तरी अमेरिकी कॉलेज के दरवाज़े खुल गए हैं। यह महज़ किसी खिलाड़ी की तरक्की नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्र की तरक्की है, एक खेल की तरक्कीसंजना रमेश (Sanjana Ramesh), वैष्णवी यादव (Vaishnavi Yadav), जगशान बीर सिंह (Jagshaan Bir Singh) और आशय वर्मा (Aashay Verma) इसी अकादमी से निकले हैं और आज वह अलग अलग कॉलेज की टीमों का हिस्सा हैं जिनमें यूनाइटेड स्टेट्स की NCAA भी शामिल है।

इन सब नामों में एक नाम और शुमार है और वह है प्रिंसपाल सिंह (Princepal Singh)। यह भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी 6 फुट, 10 इंच लंबा है और इन्होंने हाल ही में NBA G-League में कदम रखे हैं।NBA में भारतीय खिलाड़ी

ग़ौरतलब है कि युवा प्रिंसपाल सिंह NBA में जाने वाले पहले भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी नहीं हैं। सतनाम सिंह, एक किसान का बीटा कहलाए जाने वाले इस शख़्स ने NBA की चुनौतियों को पार किया और बहरत की ओर से बाहर जा कर खेलने वाला पहला खिलाड़ी बन गए। सतनाम सिंह डैलास मेवरिक्स (Dallas Mavericks) जैसी बड़ी टीम का हिस्सा बनें और इस वजह से पूरा भारत उन पर गर्व करता है।

इसके बाद सतनाम को G-League की टीम टेक्सास लीजेंड्स (Texas Legends) में भेज दिया गया। इतना ही नहीं, अम्ज्योत सिंह (Amjyot Singh) ने 2017 में माइनर लीग में कदम रखे और वह ओक्लाहोमा सिटी ब्लू (Oklahoma City Blue) से खेलने के बाद विस्कोन्सिन हेर्ड (Wisconsin Herd) से जुड़े हैं।

कौन हैं विशेष भृगुवंशी?

बास्केटबॉल में भारत की सूरत बदल रही है और भारतीय बास्केटबॉल का भविष्य कप्तान विशेष भृगुवंशी (Vishesh Bhriguvanshi) जैसे सुरक्षित और काबिल हाथों में हैं।

पॉवर फॉरवर्ड प्रिंसपाल सिंह NBA G-League सेलेक्ट टीम, इग्नाईट का हिस्सा बनेंगे। तस्वीर साभार: FIBA

विशेष भृगुवंशी जो कि एक अर्जुन पुरस्कार विजेता हैं उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत करते हुए कहा “मैं सुनहरे भविष्य का इंतज़ार कर रहा हूं। पिछले कुछ सालों में लोगों के दिमाग में बास्केटबॉल की छवि बन रही है। हम देख सकते हैं कि सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी वीडियो भी शेयर की जा रही हैं।”

“NBA भारत में अपना बेस बढ़ा रहा है जिससे भविष्य में यह खेल इस देश में और ज़्यादा प्रसिद्धी हासिल कर सकता है।”