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नीरज चोपड़ा: जेवलिन में भारत को है इनसे ओलंपिक पदक की बड़ी उम्मीद 

इस भारतीय जेवलिन थ्रोअर ने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए जीता था गोल्ड

लेखक सैयद हुसैन ·

हरियाणा के खंडरा गांव में जन्मे नीरज चोपड़ा का अब तक का सफ़र काफ़ी हैरान करने वाला रहा है। 12 साल की उम्र में मोटापे का शिकार नीरज को उनके घर वालों ने खेल से जोड़ा ताकि उनका वज़न कम हो सके। जिसके बाद पानीपत में स्थित शिवाजी स्टेडियम में नीरज ने जमकर ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया था। दौड़ में तब नीरज को बिल्कुल शौक़ नहीं था और झुकाव क्रिकेट के प्रति ज़्यादा था।

एक दिन नीरज की नज़र स्टेडियम में कुछ सीनियर खिलाड़ियों पर पड़ी जो जेवलिन थ्रो खेल रहे थे, उनसे प्रेरित होकर नीरज ने जेवलिन थ्रो में हाथ आज़माना चाहा। नीरज अब इस खेल में करियर बनाने के लिए ठान चुके थे और जमकर मेहनत करने लगे। ये उनके गांव और भारत की ख़ुशक़िस्मती ही है कि वह लड़का आगे चलकर नीरज चोपड़ा बन गया। वह नीरज चोपड़ा, जिसने पहली बार जेवलिन थ्रो में भारत को 2018 एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जिताया।

मोटापे पर दर्ज की जीत

‘’जब मैं 11 साल का था तो मेरा वज़न 80 किलो था, इसको कम करने के लिए मैं छुट्टियों में पानीपत में स्थित शिवाजी स्टेडियम जाया करता था। हालांकि मैं वज़न कम करने के लिए बहुत दौड़ा करता था, लेकिन दौड़ मुझे कभी पसंद नहीं थी। मैं दूर से ही अपने सीनियर जयवीर को प्रैक्टिस करते देखता रहता था जो उस वक़्त हरियाणा से जेवलिन खेलता था। एक दिन मैंने जयवीर से पूछकर जेवलिन में हाथ आज़माया, जिसके बाद मुझे लगा कि मैं इसे और भी दूर फेंक सकता हूं। और धीरे-धीरे मुझे इस बात का अहसास हो गया कि मैं इसके लिए ही बना हूं।‘’ : भारत से प्रकाशित होने वाले अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में नीरज चोपड़ा ने ये बताया

पानीपत का वह स्टेडियम जहां से नीरज ने अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी, वहां के इंतज़ाम कुछ ख़ास नहीं थे, न ही वहां कोई अच्छे कोच या ट्रैक्स थे। जिसके बाद वह 14 साल की उम्र में पंचकूला आ गए, और उन्होंने ताऊ देवी लाल स्टेडियम में स्थित एथलेटिक्स नर्सरी से अपने करियर को दिशा देना शुरू कर दिया था।

नीरज के करियर के शुरुआत कुछ घरेलू प्रतियोगिताओं में से एक थी 2012 एथलेटिक्स चैंपियनशिप, जहां उन्होंने 68.46 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता और एक नया रिकॉर्ड भी बना डाला था। यहीं से नीरज के सुनहरे करियर ने आकार ले लिया था।

ऐतिहासिक उपलब्धियां

2013 में नीरज चोपड़ा यूक्रेन के डोनेटस्क में आयोजित IAAF वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंचे, जहां 16 वर्षीय नीरज का प्रदर्शन काफ़ी निराशाजनक रहा और उन्होंने 19वां स्थान हासिल किया। हालांकि इस दौरान उन्होंने पूरे सीज़न का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 66.75 मीटर की दूरी तय की थी।

धीरे धीरे नीरज अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार लाते जा रहे थे, और हर एक प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन निखर रहा था। 2015 में चीन के वुहान में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज ने 70.5 मीटर की दूरी तक जेवलिन थ्रो करते हुए 9वां स्थान प्राप्त किया। इसके अगले सीज़न में नीरज ने साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतते हुए अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपने आगमन का एलान कर दिया था, उसी साल उन्होंने एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी रजत पदक जीता।

सबसे शानदार ये रहा कि उसी सीज़न में नीरज चोपड़ा ने IAAF अंडर-20 वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतकर सभी को हैरान कर दिया था। जहां उन्होंने 86.48 मीटर की दूरी तक भाला फेंकते हुए जूनियर स्तर पर एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया था। चोपड़ा पहली बार जेवलिन में भारत के नए सितारे बनकर उभरे थे, क्योंकि इससे पहले किसी भी भारतीय ने इस स्तर पर जेवलिन में गोल्ड नहीं जीता था।

IAAF अंडर-20 वर्ल्ड कप में जेवलिन थ्रो करते हुए नीरज चोपड़ा

अगले दो सालों में तो नीरज चोपड़ा ने ट्रैक एंड फ़ील्ड में अपनी एक अलग पहचान ही स्थापित कर ली थी। नीरज ने 2018 एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतते हुए भारत का नाम रोशन कर दिया था। उनका प्रदर्शन भी हर प्रतियोगिता में पहले से बेहतर हो रहा था, कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज ने 86.47 मीटर के साथ गोल्ड जीता तो एशियन गेम्स में नीरज ने 88.06 मीटर दूर भाला फेंका था, जो आज तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।

नीरज ने 2018 में आयोजित IAAF डायमंड लीग में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और चौथे स्थान पर रहे थे। जो पिछली बार की तुलना में उनका सर्वश्रेष्ठ था, इससे पहले वह इसी प्रतियोगिता में 7वें स्थान पर रहे थे।

चोट का शिकार

2018 का सीज़न ख़त्म होने के बाद, नीरज चोपड़ा की कोहनी में चोट आई जिसकी वजह से वह अगले कुछ महीने तक सर्किट से बाहर रहे। मई 2019 में ये बात सामने आई कि उन्हें अब कोहनी की सर्जरी करानी होगी, जिसके बाद उन्हें 2019 IAAF वर्ल्ड चैंपियनशिप से बाहर होना पड़ा।

राष्ट्रीय ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप से भी उन्हें इसलिए ही आख़िरी वक़्त में नाम वापस लेना पड़ा था।

लेकिन अब ये युवा एथलीट चोट से पूरी तरह उबर चुका है और टोक्यो ओलंपिक 2020 पर उनकी नज़र है।

चोट के बाद वापसी करते हुए अपने पहले ही प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता में नीरज ने जनवरी में शानदार वापसी की और टोक्यो 2020 के क्वालिफ़ाइंग मार्क को भी पीछे छोड़ते हुए टोक्यो का टिकेट हासिल कर लिया।

नीरज की नज़र अब अपने पुराने बीते वक़्त को पीछे छोड़ते हुए साल 2020 को यादगार बनाने पर है।