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ओलंपिक में बॉक्सिंग: जानें इस रोमांचक खेल से जुड़ी हर जरूरी जानकारी

ओलंपिक में बॉक्सिंग का एक लंबा-चौड़ा इतिहास रहा है और इसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक माना जाता है।

लेखक रितेश जायसवाल ·

बॉक्सिंग या मुक्केबाज़ी का खेल करीब-करीब मानव सभ्यता के जितना ही पुराना है। इसकी जड़ें 3000 ईसा पूर्व के आसपास प्राचीन मिस्र तक फैली हुई हैं।

शुरू के दौर की बात की जाए, तो इस खेल में दो विरोधी एक-दूसरे के सामने मुक़ाबले के लिए खड़े होते थे, जो रिंग में एक दूसरे से टकराते। इसके बाद दोनों प्रतिद्वंद्वी सिर्फ अपनी मुट्ठी का उपयोग करते हुए एक-दूसरे पर मुक्कों की बौछार करते हुए जीत की तलाश में दिखाई देते थे। लेकिन समय के साथ ही मुक्केबाज़ी के खेल का विकास होता गया। बीते कई वर्षों में मुश्किल रणनीतियों और तकनीकि के शामिल होने के साथ यह एक रोमांचक खेल के तौर विकसित हुआ है।

हालांकि, आधुनिक मुक्केबाजी में शामिल किए सभी नियमों और जटिलताओं के बावजूद इस खेल की लोकप्रियता और उत्साह को बनाए रखने के लिए इसकी मूल भावना से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है।

ख़ासतौर से ओलंपिक बॉक्सिंग का इसमें बड़ा योगदान रहा है और सही मायने में इस खेल का साफ-सुथरा प्रतिबिंब ‘खेलों के महाकुंभ’ में ही नज़र आता है।

ओलंपिक बॉक्सिंग इतिहास

बॉक्सिंग का ओलंपिक खेलों के साथ बहुत करीबी रिश्ता रहा है। प्राचीन खेलों (ancient Games) में ओलंपिक मुक्केबाजी के खेल ने पहली बार ग्रीस में 688 ईसा पूर्व में अपनी उपस्थिति दर्ज की थी। इस प्रतियोगिता में स्मयर्ना के ओनोमैस्टोस पहली बार ओलंपिक बॉक्सिंग चैंपियन बने।

इतिहास के शोधकर्ताओं की बात करें तो वो भी ओनोमैस्टोस को प्राचीन मुक्केबाज़ी के नियमों को तैयार करने का श्रेय देते हैं।

1896 में आधुनिक ओलंपिक (modern-day Olympics) शुरू होने के साथ ही यूएसए में हुए 1904 सेंट लुइस गेम्स में बॉक्सिंग ने अपना डेब्यू किया। इस खेल में 18 स्थानीय मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने सात अलग-अलग भार वर्गों में मुक़ाबला किया।

तभी से ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में मुक्केबाज़ी का खेल स्थायी तौर पर अपनी जगह बनाए हुए है, लेकिन स्टॉकहोम 1912 ओलंपिक के समय स्वीडन इस खेल को प्रतिबंधित करना चाहता था।

वहीं, वूमेंस बॉक्सिंग यानी महिलाओं की मुक्केबाज़ी की बात करें तो वह हाल ही में 2012 लंदन ओलंपिक से शुरू हुई है।

ओलंपिक के इतिहास पर नज़र डालें तो खेलों के इस मंच पर यूएसए का दबदबा रहा है। मोहम्मद अली (कैसियस क्ले), जो फ्रैजीर (Joe Frazier), जॉर्ज फोरमैन (George Foreman) और फ्लॉयड मेवेदर जूनियर (Floyd Mayweather Jr.) जैसे दिग्गज मुक्केबाज़ों की चर्चा पूरी दुनिया में रही है। क्यूबा और पूर्व सोवियत संघ के देशों को भी बड़ी सफलताएं मिली हैं।

दिग्गज मुक्केबाज़ मोहम्मद अली

मुहम्मद अली (Muhammad Ali) के दिग्गज मुक्केबाज़ बनने के कारवां की शुरुआत रोम 1960 में ओलंपिक जीत के साथ शुरू हुई।

ओलंपिक बॉक्सिंग के नियम

बॉक्सिंग का नियम काफी सरल है – इस खेल में मुक्केबाज़ अपने प्रतिद्वंद्वी के सिर या धड़ पर मुक्के मारने की कोशिश करता है या कहें कि बॉक्सर अपने विरोधी को चकमा देते हुए उसे हिट करने की तलाश में रहता है।  

चोटों से बचने के लिए मुक्केबाज़ सुरक्षा देने वाले दस्तानों को पहनते हैं और इस खेल में बेल्ट के नीचे या सिर के पीछे कहीं पर भी प्रतिद्वंद्वी को मारना मना है।

पुरुषों और महिलाओं दोनों के ओलंपिक बॉक्सिंग मुक़ाबले में तीन मिनट के तीन राउंड होते हैं। प्रत्येक राउंड के बाद एक मिनट का ब्रेक दिया जाता है। मुक़ाबले के दौरान मुक्केबाज़ निम्नलिखित में से किसी भी तरीके से मैच जीत सकते हैं।

नॉक आउट या KO के ज़रिए जीत

जब मुक्केबाज़ अपने प्रतिद्वंद्वी पर ऐसे मुक्के मारे कि वो बॉक्सिंग रिंग के अंदर ज़मीन पर चित हो जाए और रेफरी द्वारा 10 की गिनती के भीतर मैच को फिर से शुरू करने में असमर्थ नज़र आए तो यह उस मुक्केबाज़ के लिए एक KO (नॉक आउट) जीत कहलाती है।

KO के निर्णय में बाउट तुरंत समाप्त हो जाती है, और जीतने वाले बॉक्सर को विजेता घोषित कर दिया जाता है।

अंकों के ज़रिए जीत

एक ओलंपिक बॉक्सिंग मुक़ाबला जो पूरे तीन राउंड तक चलता है, उसके विजेता का निर्णय अंकों के ज़रिए किया जाता है।

रिंग के किनारे बैठे पांच जज दोनों मुक्केबाज़ों को लड़ते हुए ध्यान से देखते हैं। इस दौरान वो किसी मुक्केबाज़ द्वारा प्रतिद्वंद्वी के टार्गेट एरिया पर सही पड़े मुक्कों की गिनती के ज़रिए, मुक़ाबले में बॉक्सर के दबदबे, तकनीक व सामरिक श्रेष्ठता को ध्यान में रखते हुए अंक देते हैं।

हर राउंड के अंत में प्रत्येक जज निर्णय मानदंड के आधार पर किसी राउंड के लिए विजेता को निर्धारित करने के लिए 10 अंक देते हैं। राउंड में हारने वाले को उस राउंड में प्रदर्शन के आधार पर सात से नौ अंक दिए जाते हैं।

मुक़ाबला खत्म होने के बाद प्रत्येक जज अंतिम विजेता को निर्धारित करने के लिए हर एक राउंड के स्कोर को जोड़ता है। एक मुक्केबाज़ सर्वसम्मत निर्णय (unanimous decision) से जीत सकता है यदि सभी पांच जजों का एक ही मत हो कि विजेता का दो या उससे अधिक राउंड में दबदबा रहा है।

अगर किसी स्थिति में जजों का निर्णय अलग-अलग होता है तो बहुमत को ध्यान में रखा जाता है और विजेता को विभाजित निर्णय (split decision) के द्वारा तय किया जाता है।

साल 2016 तक ओलंपिक बॉक्सिंग स्कोरिंग प्रणाली पूरी तरह से अमेच्योर बॉक्सिंग के जैसी थी और पूरी तरह से प्रतिद्वंद्वी को हिट करने पर आधारित थी।

हालांकि, रियो ओलंपिक से 10-अंक-अनिवार्य प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (AIBA) और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा अपनाया गया, जो स्कोरिंग प्रणाली को प्रो बॉक्सिंग के समान बना देता है।

एक बॉक्सिंग मुक़ाबले के विजेता को RPSC (जब रेफरी या रिंग के किनारे मौजूद डॉक्टर एक मुक्केबाज़ को मुक्केबाज़ी जारी रखने के लिए अनफिट करार दे देते हैं), वॉकओवर, डिसक्वालिफिकेशन (DSQ) या जब कोई बॉक्सर स्वेच्छा से रिंग छोड़ दे या बॉक्सर के कॉर्नर से तौलिया फेंका जाए (ABD) के ज़रिए भी घोषित किया जाता है। 

एक बॉक्सर जब निष्पक्ष खेलने के नियमों का उल्लंघन करने की तीन चेतावनियों को पार कर ले या खेल भावना से परे जाने की कोशिश करता है तो उसे फौरन डिसक्वालिफाई किया जा सकता है।

वूमेंस ओलंपिक बॉक्सिंग में अमेच्योंर बॉक्सिंग की तरह ही सुरक्षात्मक हेडगियर अनिवार्य हैं। जबकि मेंस ओलंपिक बॉक्सिंग में रियो 2016 से हेडगियर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

सही तरीके से अपर-कट का इस्तेमाल करने से विरोधी को नॉकआउट किया जा सकता है

ओलंपिक भार वर्ग और बॉक्सिंग टूर्नामेंट का प्रारूप

टोक्यो ओलंपिक में कुल 13 भार वर्ग हैं – जिनमें पुरुषों के लिए आठ और महिलाओं के लिए पांच भार वर्ग हैं।

पुरुषों के भार वर्ग

फ्लाईवेट (48-52 किग्रा)

फेदरवेट (52-57 किग्रा)

लाइटवेट (57-63 किग्रा)

वेल्टरवेट (63-69 किग्रा)

मिडिलवेट (69-75 किग्रा)

लाइट हेवीवेट (75-81 किग्रा)

हैवीवेट (81-91 किग्रा)

सुपर हेवीवेट (+91 किग्रा)

महिलाओं के भार वर्ग

फ्लाईवेट (48-51 किग्रा)

फेदरवेट (54-57 किग्रा)

लाइटवेट (57-60 किग्रा)

वेल्टरवेट (64-69 किग्रा)

मिडिलवेट (69-75 किग्रा)

ओलंपिक बॉक्सिंग टूर्नामेंट में एक सरल नॉकआउट प्रारूप का पालन किया जाता है, जिसमें प्रत्येक भार वर्ग के लिए औचक ड्रॉ सुनिश्चित किए जाते हैं। प्रत्येक बाउट का विजेता अगले दौर के लिए अपनी जगह पक्की करता है।

फाइनल का विजेता स्वर्ण पदक जीतता है, जबकि हारने वाले को रजत पदक मिलता है। सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों मुक्केबाजों को कांस्य पदक दिया जाता है। प्रत्येक भार वर्ग के लिए व्यक्तिगत पदक प्रदान किए जाते हैं।

टोक्यो ओलंपिक के लिए बॉक्सिंग क्वालिफिकेशन प्रक्रिया

टोक्यो 2020 में कुल 286 मुक्केबाज़ प्रतिस्पर्धा करेंगे। देखा जाए तो यह संख्या रियो 2016 के बराबर है। ओलंपिक खेलों में महिलाओं के भार वर्ग तीन से बढ़कर पांच हो गए हैं और ऐसे में इनमें 100 महिला मुक्केबाज़ हिस्सा लेंगी। रियो ओलंपिक में महज़ 36 महिला मुक्केबाज़ों ने हिस्सा लिया था।

IOC द्वारा AIBA को निलंबित किए जाने के बाद ओलंपिक बॉक्सिंग टास्क फोर्स (BTF) ने टोक्यो 2020 के लिए बॉक्सिंग के इवेंट के संचालन की जिम्मेदारी संभाली। आगामी ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए बॉक्सिंग क्वालिफिकेशन पांच इंडिविज़ुअल ओलंपिक बॉक्सिंग क्वालिफाइंग टूर्नामेंट के ज़रिए तय किए जाएंगे।

यहां बताया गया है कि कैसे मुक्केबाज़ टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करेंगे

ओलंपिक बॉक्सिंग क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट, भार वर्गों के साथ-साथ जापान में ओल...

अफ्रीका, एशिया/ओशिनिया, यूरोप और अमेरिका के अपने महाद्वीपीय ओलंपिक क्वालीफायर के साथ ही पेरिस में होने वाला एक वर्ल्ड इवेंट भी शामिल है। जिससे मुक्केबाजों को अपने संबंधित महाद्वीपीय क्वालीफाइंग स्पर्धाओं में एक जगह पक्की करने में नाकाम रहे मुक्केबाज़ों के लिए टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए दूसरा मौका रहेगा।

286 के दायरे में से छह स्थान (चार पुरुष और दो महिलाएं) मेज़बान राष्ट्र जापान के लिए आरक्षित थे। आठ और स्थानों (पांच पुरुषों और तीन महिलाओं) को त्रिपिटेट इनविटेशन कमीशन को आवंटित किया गया था।  इसका मतलब यह हुआ कि कुल 272 ओलंपिक टिकट (पुरुषों के लिए 177 और महिलाओं के लिए 95) हैं।

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक खेलों को स्थगित कर दिया गया था और सभी वैश्विक खेल कैलेंडर इससे प्रभावित हुए। डाकार और अम्मान में अफ्रीकी और एशिया/ओशिनिया के क्वालिफायर्स पहले ही संपन्न हो चुके थे।

लंदन में यूरोपियन क्वालीफायर को तीन दिन बाद रोकना पड़ा, क्योंकि COVID-19 के चलते लॉकडाउन लग गया। पेरिस में होने वाले अमेरिका का संस्करण और विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता को भी 2021 तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

अब जैसे ही चीजें सही होती हैं तो यूरोपियन क्वालीफायर फरवरी 2021 से फिर से शुरू होंगे। पैन अमेरिकन क्वालीफाइंग टूर्नामेंट भी फरवरी से मार्च तक आयोजित किया जाएगा। मई 2021 से पेरिस में वर्ल्ड इवेंट भी होंगे।