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उसैन बोल्ट अगर IPL खेलते तो एक बेहतरीन ऑलराउंडर होते !

उसैन बोल्ट और योहान ब्लेक ने स्कूल में क्रिकेट खेला था, वहीं जेमी ड्वायर एक कुशल बल्लेबाज थीं। ये ओलंपिक चैंपियन आईपीएल में भी खेलते हुए दिख सकते थे।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

ओलंपिक खेलों के इतिहास में क्रिकेट का सिर्फ एक बार जगह मिली है। पेरिस 1900 में पहली और आखिरी बार क्रिकेट को देखा गया था। जेंटलमैन का खेल माने जाने वाला क्रिकेट, कई एथलीटों का पहला प्यार था, जो बाद में ओलंपिक और विश्व सितारे बने।

शनिवार से संयुक्त अरब अमीरात में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2020 शुरू होने जा रहा है। ऐसे में यहां कुछ ओलंपिक के महान खिलाड़ियों पर एक नजर डाली गई है, जो आईपीएल की जर्मी में खेलते हुए नजर आ सकते थे, लेकिन उन्होंने करियर में एक अलग रास्ता अपना लिया।

राज्यवर्धन सिंह राठौर: राजस्थान रॉयल के लिए खेलते हुए नज़र आते

राजस्थान के जैसलमेर में एक शाही परिवार में जन्मे, युवा राज्यवर्धन सिंह राठौर (Rajyavardhan Singh Rathore) क्रिकेट, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और कई अन्य खेलों को खेलते थे। राठौर एक असाधारण एथलीट थे, उन्होंने ओलंपिक शूटिंग में पदक जीता, उन्होंने जिस खेल को भी खेला, अधिकांश में शानदार प्रदर्शन किया।

हालांकि राज्यवर्धन सिंह राठौर डिस्कस और क्रिकेट में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करते थे, और उन्होंने क्रिकेट में भी शानदार प्रदर्शन किया था।

राज्यवर्धन सिंह की मां मंजू राठौर ने द ट्रिब्यून को बताया, "जब वो नौवीं कक्षा में थे, तब हम जबलपुर में थे और वो एक क्रिकेट टूर्नामेंट में भाग लेने इंदौर गए थे।"

उन्होंने आगे कहा, “वो पहली बार था जब उनकी तस्वीर एक अखबार में छपी थी। मेरे पास अभी भी फोटोग्राफ की क्लिपिंग है।”

एक बेहतरीन क्रिकेटर के तौर पर राठौर भी राज्य के ट्रायल के लिए गए थे इससे पहले कि उन्होंने खेलना बंद कर दिया क्योंकि क्रिकेट उनकी पढ़ाई में बाधा बन रही थी।

ओलंपिक पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर 38 साल के थे जब 2008 में आईपीएल को पहली बार शुरू किया गया।

1998 में शूटिंग के प्रति राठौर का प्यार बढ़ गया। उन्होंने सेना में नौकरी करते हुए पेशेवर रूप से अभ्यास करना शुरू किया और आखिरकार 2004 के एथेंस खेलों में ओलंपिक रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए

राठौर 38 वर्ष के थे जब 2008 में आईपीएल का उदघाटन संस्करण खेला गया। ट्वेंटी 20 लीग को आश्चर्यचकित करने के लिए जाना जाता था और अगर वो क्रिकेट खेलते तो आईपीएल में भी एक शूटिंग स्टार खेल रहा होता। क्योंकि, शेन वार्न भी 38 साल के थे जब उन्होंने राजस्थान रॉयल्स को पहली बार आईपीएल खिताब दिलाया।

तेज गेंदबाज होते योहन ब्लेक

खेल के तीनों प्रारूपों में कुछ बेहतरीन क्रिकेटरों को जन्म देने वाली भूमि जमैका है। जमैका के धावक योहान ब्लेक के बचपन का पसंदीदा खेल जानकर आप हैरान नहीं होंगे। दिलचस्प बात ये है कि एक क्रिकेट मैच के दौरान ब्लेक की असली काबिलियत देखने को मिली थी।

ब्लेक सेंट जागो हाई स्कूल में एक तेज गेंदबाज थे, और एक मैच के दौरान उनके प्रिंसिपल ने देखा कि वो विकेट लेने के लिए कितनी तेज गति से भाग रहे हैं। इसके बाद उन्होंने ब्लेक से अपनी किस्मत आजमाने का आग्रह किया।

और उन्होंने ऐसा किया भी। विश्व चैंपियन योहन ब्लेक धरती पर दूसरे सबसे तेज मानव और दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं।

ब्लेक ने कभी भी क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा, क्योंकि वह एथलेटिक्स के ऑफ-सीज़न के दौरान किंग्स्टन क्रिकेट क्लब में खेलते हैं, जहां के वो एक तेज़ गेंदबाज़ हैं। उन्होंने सिर्फ 10 रन देकर चार विकेट लेने का क्लब का गेंदबाजी रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

30 वर्षीय ब्लेक ने खेल में वापसी के अपने इरादों को छिपाया नहीं है - विशेष रूप से आईपीएल में – लेकिन संन्यास के बाद।

योहान ब्लेक ने पिछले साल मिड-डे से बात करते हुए कहा कि, “मुझे फ्रैंचाइज़ी क्रिकेट में खेलना करना अच्छा लगेगा; मैं भारत में एक फ्रैंचाइज़ी का मालिक बनना चाहूंगा और सबसे महत्वपूर्ण बात, मैं कोलकाता नाइट राइडर्स या रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेलना पसंद करूंगा।”

स्प्रिंटर ने आगे कहा, "मेरे पास ट्रैक और फील्ड में दो और साल बचे हैं और फिर मैं क्रिकेट ही खेलूंगा।"

जेमी ड्वायर को मिली क्रिकेट स्कोलरशिप 

एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ, डेविड बून, मर्व ह्यूजेस और कई अन्य ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों का विश्व क्रिकेट में दबदबा देखते हुए, फील्ड हॉकी स्टार जेमी ड्वायर भी इस खेल से प्यार कर बैठे।

डायर सिर्फ खेल के प्रति भावुक नहीं थे, बल्कि प्रतिभाशाली भी थे। युवावस्था में उन्होंने रॉकहैम्प्टन में दो ए-ग्रेड फाइनल में नाबाद 199 और 125 रन बनाए, जिसकी वजह से उन्हें ब्रिस्बेन के एक मेजर कंट्री कॉलेज में क्रिकेट स्कोलरशिप मिली।

जेमी ड्वायर ने हॉकी के लिए एक क्रिकेट स्कोलरशिप को ठुकरा दिया।

हालाँकि, उनके माता-पिता पूर्व हॉकी खिलाड़ी थे और क्रिकेट को ड्वायर को कभी भी ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने का मौका नहीं देता। इसलिए ऑस्ट्रेलियाई ने हॉकी स्टिक के लिए अपने क्रिकेट बैट को छोड़ दिया।

जेमी ड्वायर ऑस्ट्रेलियाई हॉकी टीम के लिए मिडफील्ड मेस्ट्रो बन गए, उन्होंने कूकाबुरास के लिए तीन बार ओलंपिक में कप्तानी की और 2004 के एथेंस खेलों में अपने गोल्ड के सूखे को खत्म किया।

जेम्स ड्वायर ने ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय हॉकी टीम से रियो में 2016 ओलंपिक के बाद संन्यास ले लिया। उन्होंने राष्ट्रीय टीम के लिए 326 मुक़ाबलों में 215 गोल किए।

बोल्ट का क्रिकेट से रिश्ता

उसैन बोल्ट का क्रिकेट से लगाव तब शुरू हुआ, जब वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग और कर्टनी पाल्श की उनके पिता प्रशंसा करने से नहीं थकते थे।

हालांकि, अपने स्कूल के दिनों में जब किसी एक खेल चुनने का समय आया, तब क्रिकेट खेलने के बाद, बोल्ट के पिता ने अपने बेटे को एथलेटिक्स में कदम रखने के लिए कहा।

उसैन बोल्ट ने एएफपी के साथ एक इंटरव्यू के दौरान कहा, "मेरे पिता बहुत बड़े क्रिकेट प्रशंसक हैं, लेकिन जब मैं हाई स्कूल में था, तब मेरे पास दो विकल्प थे- क्रिकेट या एथलेटिक्स।" मेरे पिताजी ने कहा। एथलेटिक्स को लेना बेहतर बताया।

उन्होंने कहा,

“आपको सिर्फ एथलेटिक्स में तेजी से दौड़ना है, जबकि राष्ट्रीय (क्रिकेट) टीम में प्रवेश करना कठिन है।"

हालांकि इस निर्णय से भी उनको उतना फायदा नहीं हुआ, क्योंकि बोल्ट पृथ्वी पर सबसे तेज दौड़ने वाले मानव बन गए। उन्होंने आठ बार ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता है।

हालांकि, इस जमैकन ने 2014 में क्रिकेट खेलने के अपने सपने को पूरा करने की कोशिश की, जब उन्होंने भारत के 2011 विश्व कप विजेता सुपरस्टार और आईपीएल प्रशंसकों के चहेते युवराज सिंह के साथ बेंगलुरु में एक प्रदर्शनी मैच में भाग लिया।

उन्होंने एक यादगार पारी खेली, जहां उन्होंने 19 गेंदों में 45 रन बनाए थे, जिसमें पांच छक्के शामिल थे, जिसमें कैरेबियाई झलक देखने को मिली। जो कि आईपीएल में हर सीजन देखने को मिलती है।

उसैन बोल्ट गेंद के साथ भी अच्छे हैं। 2009 में एक चैरिटी मैच में, उन्होंने स्वैशिंग के बल्लेबाज और दोस्त क्रिस गेल के स्टंप उखाड़ दिए थे।

वेस्टइंडीज के दिग्गज तेज गेंदबाज कर्टली एम्ब्रोस ने कहा, "मुझे क्रिस गेल को डाली गई उनकी पहली गेंद अच्छी लगी। हैरानी की बात ये है कि वो एक एथलीट हैं और वो क्रिकेट और फुटबॉल अच्छा खेलते हैं, जाहिर सी बात है कि वो ये सब एक साथ नहीं खेल सकते, लेकिन फिर भी वो अच्छा खेलते हैं।”

"वो बल्लेबाज़ी में भी अच्छे हैं – उनका एक सिक्सर देखने के बाद मैंने उनसे पूछा, 'ये कहाँ से सीखा? उन्होंने बताया कि, 'ये सब पहले से जानता हूं' वो एक अच्छे क्रिकेटर हैं।”

इयान थोर्पे छक्के लगाना चाहते थे

ऑस्ट्रेलियाई महान तैराक इयान थोर्प अपने परिवार में एक अजीब इंसान थे।

इयान थोर्प के पिता केन सिडनी की जिला टीम में एक बल्लेबाज थे और यहां तक ​​कि सीजन की बल्लेबाजी औसत में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान बॉब सिम्पसन के बराबर थे।

पांच बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता तैराक इयान थोर्प तैराकी चुनने से पहले एक हाई स्कूल क्रिकेट खिलाड़ी थे।

केन थोर्प चाहते थे कि उनका बेटा अपने क्रिकेट के सपने को पूरा करे। इयान थोर्प को एक पारंपरिक बल्लेबाज बनना सिखाया गया था लेकिन उनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।

थोर्प ने एशियन एज को बताया, "जब आप छोटे होते हैं तो आपको सिर्फ छक्का मारना होता है। यह एक ऐसा गुण है जो आईपीएल में सही बैठता है।"

हालांकि, हाई स्कूल में क्रिकेट खेलने के बाद, इयान ने खेल से आगे बढ़ने और एक स्पलैश बनाने का फैसला किया।

"मैं इसमें ठीक-ठाक था ... लेकिन मैं इसको लेकर गंभीर नहीं था, जब मैं बच्चा था, तब मैं अपने पिता को खेलते देखता था और क्षेत्ररक्षण करते देखना अच्छा नहीं लगता था।"

हालाँकि, इयान थोर्प ने क्रिकेट से दूर जाने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने 2000 में तैराकी में सिडनी ओलंपिक में पांच स्वर्ण पदक जीते और एक लीजेंड बन गए।