जानिए टोक्यो ओलंपिक के लिए टीम इंडिया के एथलीट कैसे एकजुट हो रहे हैं

ओलंपिक में जाने वाले भारतीय एथलीट अभिषेक वर्मा, अमित पंघल, सविता पुनिया और अन्य क्या उम्मीद कर रहे हैं।

टोक्यो ओलंपिक के लिए उलटी गिनती शुरू होते ही भारतीय एथलीट सबसे बड़े मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए गर्व के साथ तैयारी करने में जुट गए हैं।

विश्वव्यापी कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के बावजूद अगले साल के ओलंपिक खेल दुनिया भर के कई लोगों के लिए आशा की किरण का प्रतिनिधित्व करेंगे।

23 जुलाई, 2021 से जापान में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलो का प्रतीक है- मुश्किल घड़ी में भी एक साथ आगे बढ़ना।

निस्संदेह, पिछले कुछ महीनों ने सभी के लिए चुनौतियाँ पेश की हैं - लेकिन भारतीय एथलीट अभी भी अपने ओलंपिक गोल पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं।

भारतीय शूटर्स से सबसे ज्यादा हैं उम्मीदें

अगले साल के खेलों के लिए पहले से सुरक्षित 15 कोटा स्थानों के साथ, भारत अगले साल खेलों के लिए अपनी सबसे बड़ी शूटिंग टुकड़ी भेजने के लिए तैयार है। माना जा रहा है कि शूटर टोक्यो में भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीद हैं।

भारत के 10 मीटर एयर पिस्टल शूटर अभिषेक वर्मा (Abhishek Verma) ने ओलंपिक चैनल को बताया, "पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निशानेबाजों द्वारा कई शानदार प्रदर्शन किए गए हैं और आश्चर्य की बात नहीं कि देश टोक्यो ओलंपिक के लिए उन पर अपनी उम्मीदें लगा रहा है।"

“ये हमें प्रेरित करता है। महामारी के बीच भी हम अपने कौशल को बेहतर करने के लिए प्रशिक्षण और समय का उपयोग कर रहे हैं ताकि हम उस उम्मीद को पूरा कर सकें।

उन्होंने कहा, "सबको उम्मीद है कि हम पदक जीतेंगे और हम इसके लिए कड़ी मेहनत करेंगे।"

अभिषेक वर्मा ने 2019 बीजिंग और रियो शूटिंग वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीता है और एशियन गेम्स 2018 के स्वर्ण पदक विजेता सौरभ चौधरी (Saurabh Choudhary) टोक्यो में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारत के सबसे बड़े दल का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।

देखा जाए तो टोक्यो ओलंपिक भी 'आशा' की प्राप्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके लिए वर्मा पिछले कुछ समय से तैयारी कर रहे हैं।

“ओलंपिक मेरे लिए एक सपना रहा है। ये पहली बार है जब मैंने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है और मैं तैयार था। इसलिए ये थोड़ा निराशाजनक था कि इसे अगले साथ के लिए स्थगित कर दिया गया।

उन्होंने कहा, "लेकिन अब मुझे उम्मीद है कि हम इसे पीछे छोड़, आगे निकल जाएंगे और दोगुनी ऊर्जा और तैयारी के साथ टोक्यो जा सकते हैं।"

17 वर्षीय 10 मीटर एयर राइफल शूटर दिव्यांश सिंह पंवार (Divyansh Singh Panwar) भी वर्मा के विचारों से सहमत नज़र आते हैं।

"वर्तमान बैच में बहुत अधिक संभावनाएं हैं।" लगभग सभी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है, शीर्ष प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। ओलंपिक में मौजूदा दल पर बहुत अधिक उम्मीद हैं और वे पूरी तरह से सक्षम हैं।

दो बार के ISSF जूनियर विश्व कप के स्वर्ण पदक विजेता ने कहा, "हम कम से कम दो या तीन पदकों की उम्मीद कर रहे हैं।"

वर्मा और पंवार दोनों ही आगले साल ओलंपिक के लिए NRAI की 32 सदस्यीय कोर टीम का हिस्सा हैं।

मुक्केबाज़ सफलता का पंच लगाने के लिए तैयार

निशानेबाजी की तरह ही टोक्यो खेलों में भारतीय मुक्केबाजी अपने सबसे बड़े दल को मैदान में उतारेगा।

नौ मुक्केबाज़ों ने पहले ही जापान के लिए अपने टिकट बुक कर लिए हैं और पिछले कुछ वर्षों में भारतीय मुक्केबाजी की प्रगति को साबित किया है – ये वो समय है जिसने कई भारतीय मुक्केबाजों को वैश्विक मानकों पर पहुंचते देखा।

अमित पंघल (Amit Panghal), सतीश कुमार (Satish Kumar), सिमरनजीत कौर (Simranjit Kaur), लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) जैसे होनहार मुक्केबाजों की एक नई पीढ़ी के साथ एमसी मैरीकॉम (MC Mary Kom) और विकास कृष्ण (Vikas Krishan) जैसे दिग्गज़ सितारों के साथ भारतीय मुक्केबाजी पहले से कहीं अधिक मजबूत दिख रही है।

प्रोग्रेस की अपनी कहानी को बताते हुए अमित पंघल ने कहा, “मुझे रियो 2016 का ओलंपिक टीवी पर देखना था। मैं तब एक शीर्ष मुक्केबाज नहीं था। मैंने अपनी श्रेणी में उज्बेकिस्तान के हसनबॉय दुस्मातोव को गोल्ड जीतते हुए देखा।

“मैं 2017 में दो बार उनसे हार गया लेकिन सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए कोशिश जारी थी। फिर मैंने उन्हें 2018 एशियाई खेलों में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।”

पंघल ने 2017 के बाद से तेजी से रैंकिंग में चढ़ाई की है और वर्तमान में 52 किग्रा फ्लाईवेट श्रेणी में विश्व रैंकिंग में नंबर 1 पर है।

टोक्यो में पदक की दौड़ में शामिल होने के कारण पंघल को भी लगता है कि खेलों के स्थगित होने से उनका या किसी अन्य भारतीय मुक्केबाज़ पर कोई प्रभाव पड़ा है।

“इसने हमें अपनी कमजोरियों पर ध्यान केंद्रित करने का समय दिया है। हम आगे बढ़ेंगे और अगले साल बेहतर तैयारी के साथ टोक्यो भी जाएंगे।”

पूजा रानी (Pooja Rani) भी बेहतर तरीके से तैयार होंगी। चार साल पहले वो रियो 2016 के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई थीं, लेकिन इस बार टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करने वाली वो पहली भारतीय महिला मुक्केबाज थीं।

वो इस बात का श्रेय देती हैं कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने का मौका मिला. जहां उन्हें जीत मिली जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। अब उनके हाथ में एक साल और है और वो पहले से अधिक अपने सपने के लिए दृढ़ है।

पूजा रानी ने ओलंपिक चैनल को बताया, "मैंने मन बना लिया था कि अगर मैं खेल छोड़ती हूं, तो लोगों को मेरे बारे में पता होना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "मैंने एक स्टेडियम में ट्रेनिंग ली है जिसमें देश के सभी अच्छे खिलाड़ियों की तस्वीरें थीं और मैं हमेशा यही चाहती थी कि मेरी तस्वीर भी उस दीवार पर हो।"

एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पदक समारोह में पूजा रानी
एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पदक समारोह में पूजा रानीएशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पदक समारोह में पूजा रानी

एकजुटता से ही मिलेगी सफलता

रियो 2016 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1980 के बाद से पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था। ऐतिहासिक आउटिंग के बाद भारतीय टीम ज्यादा असरदार साबित नहीं हुई। महिला टीम अपने पांच मैचों में केवल एक ड्रॉ करने में कामयाब रही थी और ग्रुप स्टेज में बाहर हो गई थी।

टोक्यो के लिए पहले से ही क्वालिफिकेशन हासिल करने के बाद, टीम के भीतर एक अलग तरह का विश्वास है कि इस बार कहानी बहुत अलग होगी, जिसका मुख्य कारण टीम की भावना और खिलाड़ियों के बीच एकजुटता है।

रियो ओलंपिक टीम की हिस्सा रही गोलकीपर सविता पुनिया (Savita Punia) ने कहा कि, "रियो में टीम की परिपक्वता का स्तर काफी ऊपर नहीं था। पिछले चार वर्षों में हमने कड़ी मेहनत की है, एक साथ बहुत समय बिताया है। एकजुटता, टीम एकता, खेल की समझ, खेल भावना में पिछले समय से बहुत सुधार हुआ है।”

“हम अपनी टीम, अपने लक्ष्यों और गेम प्लान को अच्छी तरह जानते हैं। हम जानते हैं कि अगर हम अपनी क्षमता से खेलते हैं, तो ये वास्तव में मायने नहीं रखता कि विपक्ष कौन है।”

वो बताना चाह रही हैं कि टीम में सीनियर्स की मौजूदगी होने के बावजूद, कैसे सभी के लिए एक खुला मंच है।

उन्होंने कहा कि, “टीम में नब्बे प्रतिशत युवा खिलाड़ी हैं और यहां तक ​​कि वो जानते हैं कि हम क्या हासिल करना चाहते हैं। यहां तक ​​कि वे सीनियर्स को इनपुट देने से डरते नहीं हैं यदि उन्हें लगता है कि इसकी आवश्यकता है।”

डिफेंडर गुरजीत कौर (Gurjit Kaur) ने कहा, “साथ खेलना बहुत महत्वपूर्ण है। ये एक टीम का खेल है और सभी को सफलता की दिशा में योगदान देना है। एक टीम के रूप में काम करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि, "इस टीम में हर कोई अच्छा दोस्त है, चाहे वो सीनियर हो या जूनियर।"

आने वाला साल भारतीय एथलीटों की प्रतीक्षा कर रहा है, जहां खेलों महाकुंभ आयोजित होने वाला है, जिसका पूरी दुनिया के एथलीट बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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