भारतीय बैडमिंटन का भविष्य काफ़ी सुनहरा है – पुलेला गोपीचंद

ओलंपिक चैनल के साथ ख़ास बातचीत में पूर्व दिग्गज शटलर और मौजूदा कोच पुलेला गोपीचंद ने बताया भारतीय बैडमिंटन की सफलता का राज़

पिछले कुछ दशक से भारतीय बैडमिंटन ने भी करवट बदला है और अब लगातार बेहतरी की तरफ़ जाता दिख रहा है। इस दौरान भारत को ओलंपिक में भी दो पदक मिले हैं और साथ ही साथ वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल के साथ कई और भी पदक हासिल हुए हैं। भारत की इन क़ामयाबियों का श्रेय पूर्व भारतीय दिग्गज शटलर और मौजूदा कोच पुलेला गोपीचंद को सबसे ज़्यादा जाता है। जिनकी अकादमी से बैडमिंटन के गुर सीख कर ही साइना नेहवाल, पी वी सिंधु और श्रीकांत किदांबी जैसे भारतीय शटलर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

‘’मुझे लगता है कि जिस तरह से बैडमिंटन का खेल पिछले कुछ दशकों से विकसित हुआ है, उसी की देन है कि आज देश में एक से बढ़कर एक शटलर मौजूद हैं, और आने वाले समय में ये खेल और भी बेहतर ही होगा। मुझे भरोसा है कि भारतीय बैडमिंटन अभी और भी आगे जाएगा और आने वाले समय में भारत को और भी चैंपियन खिलाड़ी मिलेंगे।‘’ ओलंपिक चैनल के साथ ख़ास बातचीत में पुलेला गोपीचंद ने ये बातें कहीं।

गोपीचंद ने इस बात का भी भरोसा जताया कि पिछले दशक में जो प्रदर्शन भारत का रहा है, आने वाले समय में उससे भी बेहतर होगा।

‘’जब मैंने 1985 में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था और उसकी तुलना आज के प्रदर्शन से करता हूं, तो मुझे ऐसा लगता है कि अब भारत का बैडमिंटन कहीं आगे है और तब मैंने शायद सपने में भी नहीं सोचा था कि हम बैडमिंटन के इस स्तर तक पहुंच जाएंगे। ये एक बेहतरीन और यादगार सफ़र है, जिसका श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत को तो जाता ही है साथ ही साथ मैं सरकार और संघों का भी शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जिनके समर्थन के बिना ये संभव नहीं था। आज बैडमिंटन का खेल इस स्तर पर पहुंच चुका हैं, जहां हज़ारों बच्चे बैडमिंटन में रूचि रखते हैं और अब अभिभावक भी चाहते हैं कि उनके बच्चे इस खेल में अपना करियर बनाएं।“ : पुलेला गोपीचंद

सफलता की सीढ़ी

भारत के लिए बैडमिंटन में सबसे बड़ा ऐतिहासिक लम्हा 2012 लंदन ओलंपिक में आया था, जब साइना नेहवाल ने भारत को पहली बार बैडमिंटन में ओलंपिक पदक दिलाया। दो साल बाद भारतीय बैडमिंटन इतिहास में एक और सुनहरा पल तब आया जब 2014 में पारपपल्ली कश्यप ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। उसी चैंपियनशिप में पी वी सिंधु ने महिला एकल में भारत के लिए कांस्य पदक हासिल किया था।

उसके बाद से सिंधु के खेल में लगातार निरंतरता आई और फिर उन्होंने 2016 रियो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया था, सिंधु यहीं नहीं रुकीं और फिर इसी साल उन्होंने वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतते हुए भारत की ओर से पहली वर्ल्ड चैंपियन बनीं।

‘’मुझे लगता है कि हर खेल तभी आगे बढ़ता है जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिलता है, फिर चाहे वह ओलंपिक हो या वर्ल्ड चैंपियनशिप। भारत एक खेल प्रेमी देश है, जहां फ़ैन्स के दिल में उनके चहेते खिलाड़ियों के काफ़ी प्यार भरा है। 2012 में साइना नेहवाल ओलंपिक पदक और फिर 2016 में सिंधु का ओलंपिक पदक के साथ साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में इस बार गोल्ड जीतना भारतीय बैडमिंटन के विकास में काफ़ी अहमियत रखता है।‘’ : पुलेला गोपीचंद

साइना और सिंधु के अलावा भारतीय बैडमिंटन में इस समय युवा शटलर लक्ष्य सेन और पुरुष युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी भी बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। सात्विक और चिराग की जोड़ी ने इसी साल थाईलैंड 2019 ओपन का ख़िताब भी अपने नाम किया है। भारतीय बैडमिंटन में इस तरह के खिलाड़ियों और प्रतिभाओं के रहते हुए गोपीचंद को पूरा भरोसा है कि टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत के पदक जीतने की संभावनाएं प्रबल हैं।

2016 रियो ओलंपिक में पी वी सिंधु के कोच थे पुलेला गोपीचंद
2016 रियो ओलंपिक में पी वी सिंधु के कोच थे पुलेला गोपीचंद2016 रियो ओलंपिक में पी वी सिंधु के कोच थे पुलेला गोपीचंद

‘’पिछले तीन ओलंपिक खेल हमारे लिए काफ़ी अच्छे रहे हैं, हमने ओलंपिक क्वार्टर फ़ाइनल में पहली बार 2008 (बीजींग) में स्थान हासिल किया और फिर 2012 (लंदन) में हमने कांस्य पदक जीता जिसे रियो ओलंपिक 2016 में सिंधु ने रजत में बदल दिया। हमें पूरी उम्मीद है कि हम इस बार पदक का चक्र पूरा करते हुए टोक्यो 2020 में स्वर्ण पदक हासिल करेंगे। मुझे पुरुष युगल टीम और पुरुष एकल खिलाड़ियों पर भी विश्वास है, क्या पता अगर उनका प्रदर्शन इस तरह का ही रहा तो अगले साल अगस्त में पहली बार बैडमिंटन में हमें ओलंपिक स्वर्ण पदक भी मिल जाए।‘’ : 46 वर्षीय गोपीचंद ने ये बातें कहीं।

चुनौतियां हैं सामने

आने वाले सालों में भारतीय बैडमिंटन में ऐसा बहुत कुछ है जिसपर सभी की नज़रें और उम्मीदें टिकी हैं। इसलिए आशावादी होने के साथ साथ गोपीचंद टीम को कुछ ख़तरों और चुनौतियों से सचेत भी करना चाहते हैं, ताकि उन क्षेत्रों में मेहनत करते हुए और ताक़तवर हुआ जाए।

“मुझे लगता है कि हमें एक अच्छा सिस्टम बनाने की ज़रूरत है, जहां से खिलाड़ियों को पहचाना जाए, फिर उन्हें तराशा जाए और फिर उन्हें उच्च स्तर पर ले जाया जाए। और जो खिलाड़ी वहां तक पहुंच पाने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए एक रास्ता बनाया जाए जहां से वह भी ख़ुद को बेहतर करते हुए उस मुक़ाम को छू सकें। एक तरह से पूरे सिस्टम को इस हिसाब से बनाने की ज़रूरत है।‘’ 

‘’आज हम अलग अलग स्तर की बहुत सारी प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं, और हमारी आधारिक संरचना भी बेहद शानदार हो गई है। बस हमें इस बात की ज़रूरत है कि एक ऐसा सिस्टम बनाया जाए जिससे हम खिलाड़ियों को परख सकें और उन्हें तराशते हुए और भी बेहतर बना सकें।‘’ : पुलेला गोपीचंद

सिस्टम और संघीय ढांचे में बेहतरी के साथ साथ गोपीचंद के मुताबिक़ अच्छे और बेहतरीन कोच को भी भारतीय बैडमिंटन को और भी संवारने के लिए शामिल करना होगा। ताकि वह अगले युग के शटलर को तराश सकें और उनके खेल को सर्वश्रेष्ठ कर पाएं।

‘’मुझे लगता है हमें और भी कोच की ज़रूरत है, युवा खिलाड़ियों को सिखाने और तराशने के लिए एक बेहतरीन सिस्टम बनाने की भी ज़रूरत है। इसके लिए बेहतरीन कोच का समूह तैयार करना होगा, जो युवा खिलाड़ियों को उच्च स्तर के खिलाड़ी बनाने में अहम भूमिका निभा सकेंगे।‘’

‘’पहले मैं साइना और सिंधु के साथ क़रीब क़रीब हर प्रतियोगिता में जाया करता था, जिससे उन्हें अगले स्तर तक पहुंचने में मदद मिलती थी। मुझे लगता है कि अभी के जूनियर शटलर के साथ यही नहीं हो रहा, इसी बात की कमी है। मैं चाहता हूं कि जूनियर खिलाड़ियों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताऊं और उन्हें सिखाऊं।‘’ : इसी के साथ पुलेला गोपीचंद ने अपनी बात ख़त्म की।

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